Saturday, December 6, 2014

Margashirsha vow to cut the full moon all the way tribulation

सुखों की प्राप्ति व विघ्नों के नाश के लिए किए जाने वाला मार्गशीर्ष पूर्णिमा व त्रिपुर वैभव जयंती का व्रत 6 दिसंबर को किया जाएगा। पूर्णिमा तिथि शुक्रवार शाम 6 बजकर 19 से आरंभ होकर 5 बजकर 57 मिनट तक रहेगी। इसी कारण जो लोग पूर्णिमा के दिन चंद्र भगवान की पूजा करते हैं वह व्रत को पांच दिसंबर को भी कर सकते हैं। क्योंकि पूर्णिमा काल में चंद्र दर्शन पांच दिसंबर को ही होगा।

चंद्र पूजन का समय 6 बजकर 19 मिनट के बाद शुक्रवार को होगा, लेकिन त्रिपुर वैभव जयंती पर्व 6 दिससंबर को मनाया जाएगा। ब्रह्म, विष्णु व महेश के अंशावतार महर्षि दत्तात्रेय के बाल रूप का पूजन भी 6 दिसंबर को किया गया। जबकि मार्गशीर्ष पूर्णिमा के अवसर पर विष्णु भगवान का पूजन भी 6 दिसंबर को ही किया जाएगा। मार्गशीर्ष पूर्णिमा के दिन भगवान विष्णु की पूजा का विधान शास्त्रों में बताया गया है।

मान्यता है कि इस दिन दान पुण्य करने से वह 32 गुणा फल की प्राप्ति होती है। इसी कारण मार्गशीर्ष पूर्णिमा को बत्तीसी पूनम भी कहा जाता है। इसके अलवा मार्गशीर्ष पूर्णिमा के पावन पर्व पर गंगा समेत अनेक पवित्र नदियों में स्नान का भी विशेष महत्व है। इस अवसर पर किए गए दान व पूजा पाठ का अनंत फल प्राप्त होता है। मार्गशीर्ष पूर्णिमा को पवित्र अवसर माना जाता है जो सभी संकटों को दूर करके मनोकामनाओं की पूर्ति करता है।

पूर्णिमा मार्गशीर्ष माह के संदर्भ में कहा गया है कि इस महीने में स्नान एवं दान का विशेष महत्व होता है। इस माह में नदी स्नान का विशेष महत्व माना गया है। जिस प्रकार कार्तिक, माघ, वैशाख आदि महीने गंगा स्नान के लिए अति शुभ एवं उत्तम माने गए हैं। उसी प्रकार मार्गशीर्ष माह में भी गंगा स्नान का विशेष फल प्राप्त होता है। मार्गशीर्ष माह की पूर्णिमा का आध्यात्मिक महत्व है। जिस दिन मार्गशिर्ष माह में पूर्णिमा तिथि हो, उस दिन मार्गशिर्ष पूर्णिमा का व्रत करते हुए श्रीसत्यनारायण भगवान की पूजा और कथा की जाती है जिसका अनन्त फल प्राप्त होता है।

-आचार्य चरंजीलाल शर्मा।

किसकी करें पूजा-मार्गशीर्ष पूर्णिमा के दिन भगवान विष्णु नारायण चंद्रमा की पूजा करने से शुभ फल की प्राप्ति होती है। इसी दिन चंद्रमा को अमृत से सिंचित किया गया था चंद्रमा की पूजा से चंद्र की महादशा से मुक्ति मिलती है और ग्रह शांति होती है। इसके अलावा इस दिन कन्या और परिवार की अन्य स्त्रियों को वस्त्र प्रदान करने चाहिए।

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