Saturday, December 6, 2014

Buried in the walls full of Baba Vishwanath

बाबा दरबार में ही देवाधिदेव महादेव का बखान करते चित्र और ब्योरे छोटी-छोटी दीवारों के पीछे दफन हो गए। बाबा के गर्भगृह व रानी भवानी मंदिर के बीच श्रद्धालुओं को जप के लिए दो बरामदे बनाए गए थे। इनकी दीवारों पर लाखों रुपये खर्च कर तीन बाई छह के मार्बल पर भित्ति चित्र लगाए गए थे। शिव पार्वती और गंगा तो थीं ही महादेव का काशी आगमन व मर्णिकर्णिका का महात्म्य बताते चित्र और श्लोक लिखे गए थे। इन्हें कलात्मक तरीके से सजाया गया था और हिंदी में अर्थ भी बताया गया था। अब विभिन्न प्रयोजनों के लिए छोटे छोटे काउंटर बना दिए गए और इसके पीछे बड़ा उद्देश्य धरा रह गया। 

दिसंबर 2008 में तत्कालीन जिलाधिकारी नितिन रमेश गोकर्ण ने 9.50 लाख रुपये की लागत से इसका निर्माण कराया था। इसका उद्देश्य था कि श्रद्धालुओं की जिज्ञासा का समाधान हो और ज्ञान भी बढ़े। यही नहीं रानी भवानी परिसर को इसी आशय से खरीदा भी गया था कि मंदिर और इसके बीच की दीवार तोड़ कर श्रद्धालुओं को पूजा पाठ व जाप के लिए स्थान उपलब्ध कराया जा सके। इसके लिए रानी भवानी के बीच दो मंदिर और उत्तर व दक्षिण में दो बरामदे बनाए गए। अब उत्तर के बरामदे में सिर्फ केबिन और काउंटर भरे हैं। मंदिर के दक्षिणी निकास द्वार व रानी भवानी निकास द्वार के पास एक एक काउंटर तो तारकेश्वर मंदिर के पास कैंप कार्यालय बना दिया गया। वह भी तब जबकि मंदिर का एक बड़ा दफ्तर सरस्वती फाटक पर है। पहले यहां ही दान या चढ़ावे में मिला कैश वगैरह गिना जाता रहा। अब यह सब भी इसी बरामदे में किया जा रहा है। आफिस, कैश काउंटर, कैश गिनती केबिन, प्रसाद केबिन के अलावा कई केबिन ऐसे भी जो निष्प्रयोज्य हैं। यही नहीं इसी हिस्से में बनाया गया लंगर हाल भी सीसीटीवी रूम के रूप में उपयोग किया जा रहा है। 
 
ध्यान में बाधा - रानी भवानी परिसर को मंदिर में मिलाने के लिए दीवार तोड़े जाने का धर्म गुरुओं ने विरोध किया था। उनका मानना था कि मंदिर का मूलरूप प्रभावित होगा लेकिन श्रद्धालु हित को ध्यान में रखते हुए यह किया गया। व्यवस्था कुछ सालों तक चली अब मंदिर प्रशासन ने किए धरे पर पानी फेर दिया। ऐसे में श्रद्धालु बाबा दरबार में जप कर पाना तो दूर हाथ जोड़े दो मिनट खड़े तक नहीं हो सकते।

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