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Thursday, March 17, 2016

कैंपस में रैगिंग की सियासत


इलाहाबाद यूनिवर्सिटी कैंपस में सियायत सरगर्म हो चली है। हर एक्टिविटी पर बखेड़ा खड़ा हो जाना फिर एमएचआरडी तक शिकायती पत्रों का दौर चलना यहां का शगल बता जा रहा है। ताजा मामला रैगिंग से जुड़ा है। मंगलवार को बीए के स्टूडेंट से रैगिंग किए जाने का मामला प्रकाश में आता है और ठीक दूसरे दिन पीडि़त छात्र ही खुद को फंसाए जाने का आरोप लगाते हुए रैगिंग की घटना से इंकार कर देता है। ऐसे में बड़ा सवाल उठ खड़ा हुआ है कि आखिर कौन है जो कैंपस का माहौल खराब कर देना चाहता है. 

बीए के छात्र से रैगिंग का आरोप

इलाहाबाद यूनिवर्सिटी से जुड़े ट्रस्ट के एक हास्टल में मंगलवार को बीए के छात्र से रैगिंग का मामला प्रकाश में आया। इससे यूनिवर्सिटी एडमिनिस्ट्रेशन में हड़कंप मच गया। बताया गया कि बीए के छात्र ने एक रिसर्च स्कालर पर रैगिंग करने का आरोप लगाया है। उसने इसकी शिकायत यूजीसी की नेशनल एंटी रैगिंग सेल से की है। 

शुरू हुई जांच

प्रकरण को गंभीरता से लेते हुए चीफ प्रॉक्टर प्रो। एनके शुक्ला एवं डीएसडब्ल्यू प्रो। हर्ष कुमार ने जांच शुरू की। इस दौरान पीडि़त बताए जा रहे छात्र ने स्वयं को फर्जी फंसाए जाने की बात कहकर उसके साथ किसी भी तरह की रैगिंग किए जाने से इंकार कर दिया। इसके लिए उसने लिखित जवाब भी भेजते हुए रैगिंग के आरोप में किसी पर कार्रवाई न करने का आग्रह किया। उधर छात्रावास के अधीक्षक ने भी ऐसी घटना से इनकार कर दिया है। इसके बाद जांच टीम ने एविडेंस के रूप में आरोपी और पीडि़त दोनों छात्रों का पत्र लगाकर एंटी रैगिंग सेल को जानकारी भेजी. Read more Allahabad News http://inextlive.jagran.com/allahabad/

Monday, January 12, 2015

Will travel to Gangotri to Ganga Sagar serene UMA

कास को जन आंदोलन बनाने के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आह्वान पर अमल करते हुए केंद्रीय जल संसाधन, नदी विकास एवं गंगा संरक्षण मंत्री उमा भारती निर्मल गंगा अभियान से जनता को जोडऩे जा रही हैं। इसके लिए वह गंगोत्री से गंगासागर तक यात्रा पर जाने की तैयारी कर रही हैं। उमा का कहना है कि गंगा को निर्मल बनाए रखने के लिए आम लोगों को इस अभियान से जोडऩा जरूरी है। 

उमा ने सोमवार को यहां एक संवाददाता सम्मेलन में अपने मंत्रालय की सात महीने की उपलब्धियों का ब्योरा देते हुए कहा, मैंने प्रधानमंत्री से तीन बातों की सीख ली है। पहली, विकास को जन आंदोलन का रूप दिया जाना चाहिए। इसलिए हम गंगा को निर्मल बनाने के कार्य से जनता को जोड़ रहे हैं। दूसरी, अपने कार्य में आनंद लेना चाहिए। तीसरी, नया प्रयोग करना चाहिए। उन्होंने बताया कि सरकार गंगा को निर्मल बनाने के कार्य से जनता को जोडऩे के साथ ही एक टास्क फोर्स भी गठित कर रही है जो इसे प्रदूषण मुक्त रखने में मदद करेगी। 

Sunday, January 11, 2015

Turned-'identical Civil Court: Swarupanand

गंगा भारतीय संस्कृति की प्राण हैं, जिनकी रक्षा के लिए हर व्यक्ति को सहयोग की भावना जागृत करनी होगी। जगद्गुुरु स्वामी वासुदेवानंद सरस्वती ने रविवार को 'गंगा यमुना जल प्रदूषण निवारण प्रदर्शनीÓ का शुभारंभ करते हुए उक्त विचार व्यक्त किए। उन्होंने राज्य सरकार द्वारा संगम क्षेत्र में प्रस्तावित फ्लाईओवर को प्रकृति के खिलाफ बताया। कहा कि इससे गंगा में प्रदूषण व दुर्घटनाएं बढ़ेंगी, इसका हर स्तर पर विरोध किया जाएगा। मुख्य अतिथि न्यायमूर्ति गिरिधर मालवीय ने कहा कि गंगा की निर्मलता के लिए उन्हें अविरल करना होगा।

महामना मदनमोहन मालवीय ने गंगा की अविरलता को संघर्ष करके अंग्रेजी हुकूमत को झुकने पर मजबूर कर दिया था। सांसद केशव प्रसाद मौर्य ने कहा कि गंगा में गंगोत्री के जल के बजाय नहर का पानी आना चिंताजनक है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गंगा की रक्षा के लिए जो प्रयास शुरू किया है, उसका परिणाम जल्द सबके सामने आएगा। इस दौरान आधा दर्जन पुस्तकों का लोकार्पण हुआ। प्रदर्शनी के संयोजक प्रो. दीनानाथ शुक्ल 'दीनÓ ने आयोजन के महत्व पर प्रकाश डाला।

Wednesday, January 7, 2015

Faith season shadow of terror

माघ मेला पर खराब मौसम के आतंक का साया दिख रहा है। इसी का नतीजा है कि इस वर्ष पिछले साल की अपेक्षा तकरीबन सवा लाख कल्पवासी कम पहुंचे हैं। पहले स्नान पौष पूर्णिमा पर भी कुछ ऐसी ही स्थिति दिखाई दी। 

माघ मेला में प्रतिवर्ष लाखों की संख्या में श्रद्धालु कल्पवास करने संगम पहुंचते हैं। कल्पवासी तीर्थ पुरोहितों और धार्मिक संस्थाओं के शिविरों में प्रवास करते हैं। अधिकांश कल्पवासी तीर्थ पुरोहित के शिविरों में निवास करते हैं। मेला अधिकारियों के अनुसार पिछले वर्ष करीब तीन लाख श्रद्धालु मेला में कल्पवास करने पहुंचे थे। इस बार यह आकड़ा घटकर पौने दो लाख के करीब पहुंच गया। संगम क्षेत्र में कल्पवासियों के पहुंचने का सिलसिला पौष पूर्णिमा से दो-तीन दिन पहले शुरु हो जाता है। इस बार पौष पूर्णिमा पांच जनवरी को थी। इससे पूर्व के 15 दिन मौसम काफी खराब रहा। नए साल की शुरुआत बारिश के साथ हुई। यह कई दिन चली। पौष पूर्णिमा के दिन तो धूप निकल आई थी पर इससे पूर्व के तीन चार दिन बारिश से भरे रहे। बारिश ने ठंड बढ़ा दी और मेले को अस्तव्यस्त कर दिया। 1पहले स्नान पर्व पौष पूर्णिमा पर मेले में पहुंचने वाले श्रद्धालुओं की संख्या भी कम रही। वहीं तीर्थ पुरोहित विधानचंद मिश्र का कहना है कि कम कल्पवासियों के आने से तीर्थ पुरोहित समाज चिंतित हैं।

Tuesday, January 6, 2015

Sursri put 12 million devotees' dip of virtue Ó

सुरसरि में पौष पूर्णिमा स्नान के साथ ही तीर्थराज प्रयाग में माह भर तक चलने वाले माघ मेले का सोम वार को आस्थाभाव से आगाज हुआ। जैसे-जैसे भोर की किरणों फूटीं, प्रवासी साइबेरियन पक्षियों के कलरव के साथ सुरसरि और संगम कि नारे के तट 'गंगा मइयाÓ की जयकार से गुंजायमान होते रहे।

दोपहर बाद तक स्नान-दान का क्रम चला। प्रशासन का दावा है कि पहले स्नान पर्व पर करीब 12 लाख लोगों ने पुण्य की डुबकी लगाई। संगम किनारे आबाद तंबुओं की नगरी सोमवार की अल सुबह से ही एक और 'संगमÓ को बेकरार दिखी। कल्पवास के दौरान नर और नारायण का 'संगमÓ हो, यह सपना संजोए आस्थावानों की रात आंखों-आंखों में ही कट गइ। सोमवार की भोर में ही कल्पवासियों के कदम 'संगमÓ की ओर बढ़ चले। वैसे तो मेला

क्षेत्र में स्नान के लिए करीब नौ घाट बनाए गए थे, लेकिन अधिकांश श्रद्धालुओं ने संगम में ही

डुबकी लगाई। गंगा के अन्य

तटों पर भी यह क्रम चला।

Tuesday, December 23, 2014

Religious institutions will attract pilgrims

सनातन धर्म की धार्मिक व सांस्कृतिक विरासत को संजोने वाले माघ मेला में हर जगह श्रद्धालुओं को कुछ खास नजर आएगा। चार सेक्टर व 15 सौ बीघा में बस रहे मेला में दूर-दूर से आने वाले श्रद्धालुओं को योग, ध्यान के साथ गाय, गंगा की रक्षा, स्वदेशी अपनाने की सीख भी मिलेगी। परेड ग्राउंड में जहां खादी ग्रामोद्योग और गंगा प्रदूषण मुक्ति सहित दो दर्जन से अधिक शिविर लगेंगे। वहीं सेक्टर दो और तीन आकर्षण का केंद्र रहेंगे।

मेला क्षेत्र के सेक्टर दो में साढ़े तीन सौ और सेक्टर तीन में पांच सौ बीघा में मेला बस रहा है। मेला प्रशासन के मुताबिक त्रिवेणी मार्ग के एक ओर सेक्टर दो में जगद्गुरु वासुदेवानंद सरस्वती, जगद्गुरु स्वामी नरेंद्रानंद सरस्वती, वाहे गुरु, रमेश तांत्रिक, क्रियायोग अनुसंधान संस्थान, धर्म संघ, शंकर चैतन्य समेत विभिन्न धार्मिक संस्थाओं के शिविर लग रहे हैं। वहीं सेक्टर दो में गंगा प्रदूषण नियंत्रण प्रदर्शनी का आयोजन करेगी। इसी सेक्टर में बजरंग दल और विश्व हिंदू परिषद के शिविर भी होंगे।

सेक्टर तीन में शंकराचार्य स्वामी निश्चलानंद सरस्वती, प्रबलजी महाराज, शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती, स्वामी अधोक्षजानंद और खाक चौक के संतों के शिविर लग रहे हैं। इन शिविरों में सुबह से लेकर रात तक कथा, प्रवचन, रासलीला व योग की कक्षाएं चलेंगी।

Monday, December 22, 2014

Magh Mela terror threat remains, when will know who's bath

आस्ट्रेलिया में बंधक बनाए जाने और पाकिस्तान के पेशावर में बच्चों की सामूहिक हत्या से सतर्क राज्य की सुरक्षा एजेंसियों ने इलाहाबाद के माघ मेले को लेकर चौकसी बढ़ा दी है। मेले की सुरक्षा के पहले ही पुख्ता इंतजाम किए गए थे लेकिन अब नई परिस्थितियों के सापेक्ष सुरक्षा की तैयारी चल रही है।

इलाहाबाद के माघ मेले में भी आतंकी खतरे का संकेत मिला है। आतंकियों की घुसपैठ की आशंका को देखते हुए अभिसूचना इकाइयों का अलर्ट किया गया है। साधु-संन्यासी के वेश में आने वालों की गोपनीय ढंग से शिनाख्त करने और उन पर नजर रखने की हिदायत दी गयी है। मेला पांच जनवरी से शुरू हो रहा है। उसके पहले ही इलाहाबाद में श्रद्धालुओं का जमावड़ा होगा। पहले मेला क्षेत्र को 35 सीसीटीवी कैमरे से आच्छादित करने की योजना थी। अब सीसीटीवी कैमरे बढ़ाये जायेंगे। 17 फरवरी को समापन के समय तक मेले में सतर्कता रहेगी। संदिग्धों की तलाशी के लिए मेटल डिटेक्टर और हैंड मेटल डिटेक्टर की भी संख्या बढ़ाई जायेगी। इसके लिए शीघ्र ही इलाहाबाद प्रशासन और शासन की उच्च स्तरीय बैठक होगी।

इलाहाबाद में जल पुलिस, पीएसी समेत भारी फोर्स दी गई है। अनुभवी अफसरों को सकुशल मेला सम्पन्न कराने को तैनात किया गया है। अब एटीएस के कमांडो और एसटीएफ की विशेषज्ञ टीम भी भेजने की तैयारी है। मुख्य स्नान पर्व पर विशेष सुरक्षा के इंतजाम हैं। इलाहाबाद जीआरपी के पुलिस अधीक्षक दिलीप कुमार श्रीवास्तव को रेल यात्रियों के प्रबंधन और सुरक्षा की दृष्टि से विशेष जिम्मेदारी सौंपी गई है।

Saturday, December 20, 2014

These bodies in the river is flowing, how Magh Mela bathing

पतितपावनी गंगा की धारा में 48 घंटे से दो लाशें फंसी हुई हैं, पर उन्हें वहां से हटाने की जहमत कोई नहीं उठा रहा है। अधिकारी अंजान बने हुए हैं तो कर्मचारी संवेदनहीन। जल पुलिस सबकुछ देखते हुए भी अनदेखी की कोशिश कर रही है। सरकारी अधिकारियों व कर्मचारियों की इस कर्तव्यहीनता का खामियाजा श्रद्धालुओं को भुगतना पड़ रहा है।

एक तो गंगा का जल बेहद प्रदूषित, दूजे बहती लाशें। माघ मेले के लिए गंगा के जल के शुद्धिकरण की बात तो लंबे-चौड़े दावे के साथ की जा रही है। किंतु नतीजा..? आखिर प्रशासन के अलंबरदार कब चेतेंगे? यह बेहद संवेदनशील मामला गंगा के प्रदूषण से जुड़ा हुआ है। संगम घाट पर ही विगत दस वर्ष से नाव चलाने वाले रामनिहोर निषाद ने बताया कि हम लोगों ने संबंधित कर्मचारियों तक अपनी बात पहुंचा दी, किंतु 48 घंटे बीतने के बाद भी दोनों लाशें जस की तस फंसी हुई हैं।

आंध्रप्रदेश के विजयवाड़ा निवासी बीके रेड्डी संगम में अपने पिता की अस्थियां विसर्जित करने आए थे। नाव पर सवार उनके परिवार ने जब लाशों को देखा तो कह पड़े कि पतित पावनी की ऐसी दशा। प्रदूषण के बारे में उन्होंने सुन रखा था, पर आज खुद अपनी आंखों से ऐसा नजारा देख रहे हैं। मेला प्रभारी आरके शुक्ला से जब इस बारे में बात की गई तो उनका कहना था कि इसकी जानकारी उन्हें नहीं है। हालांकि उनका कहना था कि लापरवाही करने वाले व्यक्तियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। अधिकारी बोले, समय से पूरे होंगे काम।

झूंसी की ओर खिसका संगम-

एक तो गंगा में जल कम, दूसरे इसका रंग लाल। इनके दूर चले जाने से एक नई समस्या खड़ी हो गई है। पिछले वर्ष तक किले के समीप से बहने वाली यह पवित्र नदी इस वर्ष बिल्कुल झूंसी गांव के समीप से बह रही हैं। जाहिर है कि माघ मेले में आने वाले श्रद्धालुओं को गंगा में डुबकी लगाने के लिए काफी लंबी पदयात्रा करनी पड़ेगी। मेले की असली रौनक भी झूंसी क्षेत्र में ही देखने को मिलेगी। रही बात संगम की तो वह दिन पर दिन पीछे खिसकता जा रहा है। 

Monday, December 8, 2014

Contaminated river stretched saints eyebrows

प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड संगम के पानी में बीओडी और डिजाल्व ऑक्सीजन की मात्र सामान्य होने का दावा भले कर रहा है। लेकिन संगम के पानी में कुछ न कुछ गड़बड़ जरूर है। अन्यथा पक्षियों, मछलियों के मरने का सिलसिला न चल पड़ता। शनिवार सुबह संगम में एक कबूतर फिर मृत मिला जिससे वहां हड़कंप मच गया।

मौके पर पहुंचे वन दारोगा अजय पटेल ने औपचारिकताएं पूरी कर मृत कबूतर को पोस्टमार्टम के लिए भेजा। संगम क्षेत्र में पहली बार 26 अक्टूबर को बड़ी संख्या में मछलियां मृत मिली थीं जो किला घाट के समीप पाई गई थीं। इसके बाद मछलियों और संगम जल में विचरण करने वाली साइबेरियन पक्षियों के मरने का सिलसिला ही चल निकला।

संतों की भृकुटि-

माघ मेला क्षेत्र में शनिवार को भूमि आवंटन के दौरान अव्यवस्था देख संन्यासी भड़क उठे। दंडी संन्यासियों ने भूमि लेने से इंकार कर दिया। साथ ही मेला प्रशासन को जमकर खरी खोटी सुनाई। बाद में मेला अधिकारियों के आश्वासन के बाद दंडी वाड़ा के संन्यासी भूमि लेने को राजी हुए। गंगा पूजन के बाद भूमि आवंटन का काम शुरू हुआ।

दंडी वाड़ा के अध्यक्ष स्वामी विमल देव पचास से अधिक संन्यासियों के साथ सुबह नौ बजे मेला क्षेत्र में पहुंचे। भूमि आवंटन वाले स्थान पर बिजली, पेयजल, सड़क और पानी की निकासी की व्यवस्था नदारद देख अध्यक्ष भड़क गए। उन्होंने मेला अधिकारियों पर लापरवाही बरतने का आरोप लगाया। कहा कि मेला प्रशासन अब तक एक भी पीपा पुल का निर्माण कार्य पूरा नहीं करा पाया है। अध्यक्ष ने कहा कि 15 दिसंबर के बाद से साधु-संतों का आना शुरू हो जाएगा। ऐसी अव्यवस्था के बीच वे लोग कैसे रहेंगे। मेला अधिकारियों ने 15 दिसंबर तक सभी व्यवस्था दुरुस्त कर लेने का आश्वासन दिया। अधिकारियों के आश्वासन पर अध्यक्ष भूमि लेने को राजी हो गए। दंडी वाड़ा को 67 बीघा जमीन आवंटित होगी।

75 बीघा जमीन मांगी- दंडी वाड़ा के अध्यक्ष स्वामी विमल देव ने 75 बीघा जमीन के आवंटन की मांग मेला प्रशासन से की। उन्होंने कहा कि हर बार मेला में जमीन कम पड़ जाती है। अध्यक्ष ने कहा कि आवंटित जमीन में 126 शिविर लगते हैं। उन्होंने कहा कि माघ मेला में ऐसी बहुत सी धार्मिक संस्थाएं हैं जो हर साल मेला प्रशासन से भूमि आवंटन की मांग करती हैं लेकिन उन्हें आज तक मेला प्रशासन ने भूमि आवंटित नहीं की। ऐसे में वे संस्थाएं दंडी वाड़ा से जमीन की मांग करती हैं। दंडी वाड़ा सालों से राजराजेश्वर नंद सरस्वती आश्रम, शिवानंद सरस्वती आश्रम और जगदेवानंद आश्रम समेत 15 संस्थाओं को भूमि देता आ रहा है।

माघ मेले में जमीन आवंटन को लेकर धरने पर बैठे दण्डी स्वामी-शनिवार को भूमि आवंटन के पहले दिन जमीन न मिलने से नाराज कुछ साधु-संन्यासियो ने धरना दिया। अयोध्या के नारायण आश्रम के स्वामी विश्वस्वरूप ब्रहमचारी भी अन्य संतों के साथ पहुंचे। उन्होंने मेला अधिकारियों से भूमि आवंटित किए जाने की मांग की। मेला अधिकारियों ने भूमि देने से मना कर दिया। इस पर संतों ने अधिकारियों को बताया कि वर्ष 2005 से प्रत्येक वर्ष उन्हें शिविर लगाने के लिए डेढ़ सौ फुट जगह मेला क्षेत्र में मिलती है। लेकिन अधिकारियों ने भूमि उपलब्ध न होने की बात कहते हुए जमीन आवंटित करने से मना कर दिया। इस पर नाराज संत मेला क्षेत्र में धरना पर बैठ गए। मेला अधिकारियों पर भूमि आवंटन में मनमानी करने का आरोप लगाया। स्वामी विश्वस्वरूप ब्रहमचारी ने कहा कि इस संबध में वह उच्च प्रशासनिक अधिकारियों से मिलेंगे।गंगा जल पर बढ़े प्रदूषण से नाराज दंडी संन्यासी शनिवार को संगम क्षेत्र पर धरने पर बैठ गए। स्वामी शंकर आश्रम के नेतृत्व में भूमि आवंटन कराने गए संन्यासी गंगा की स्थिति देख नाराज हो गए। वह भूमि आवंटित कराने के बजाय प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी करते हुए धरने पर बैठ गए। इससे मेला प्रशासन के अधिकारियों के हाथ-पांव फूलने लगे। उन्होंने संतों से याचना करते हुए भूमि लेने की गुजारिश की, साथ ही गंगा की स्थिति में जल्द सुधार कराने का वादा किया, जिसके बाद संतों ने धरना समाप्त किया।

प्रदूषण से कराह रही मोक्षदायिनी गंगा की धारा देख संत आक्रोशित हैं। हाईकोर्ट के निर्देश के बावजूद गंगा में सीवर का पानी गिरने से संत समाज नाराज है। माघ मेला से ठीक पहले गंगा का पानी कहीं लाल तो कहीं काला होने, मछलियों एवं साइबेरियन पक्षियों की मौत से शासन-प्रशासन पर उनकी भृकुटि तन गई है। संतों ने शनिवार को गंगाजल का स्वयं निरीक्षण किया, उनका कहना है गंगा का पानी इतना प्रदूषित है कि उससे आचमन तक नहीं किया जा सकता। संतों ने प्रशासन को स्थिति में सुधार के लिए चेतावनी दी है। त्रिवेणी बांध पर बेमियादी धरना देने की तैयारी है। 1टीकरमाफी आश्रम के महंत एवं गंगा प्रदूषण मुक्ति अभियान के संयोजक स्वामी हरिचैतन्य ब्रह्मचारी कहते हैं कि संगम से चंद कदम दूरी पर रामघाट पर काला और लाल पानी साफ दिखाई देता है, यहां मशीन लगाने की भी जरूरत नहीं है। कहा कि अभी तक जो लोग राष्ट्रीय नदी गंगा को साफ करने की बात कहते थे, वही आज सत्ता में हैं परंतु सिर्फ कागजी घोड़े दौड़ाए जा रहे हैं। अगर गंगा नहीं रहेंगी तो हम मेला क्षेत्र में जाकर क्या करेंगे। काशी सुमेरुपीठाधीश्वर एवं गंगा संरक्षण मुहिम से जुड़े जगद्गुरु स्वामी नरेंद्रानंद सरस्वती जी महाराज का कहना है कि शासन सिर्फ कागजी खानापूर्ति कर रहा है, इससे स्थिति सुधरने के बजाय बिगड़ रही है। गंगा सेना के संयोजक स्वामी आनंद गिरि कहते हैं गंगा पर भाषणबाजी के अलावा कोई काम नहीं हुआ। 1गंगा सेना शहर में आने वाले मंत्रियों को गंगाजल पिलाकर विरोध प्रकट करेगी। महामंडलेश्वर संवीदानंद ने प्रशासन को चेतावनी देते हुए कहा कि एक सप्ताह में गंगा जल की स्थिति न सुधरी तो वह धरना पर बैठ जाएंगे।

वहीं गंगा महासभा के संरक्षक न्यायमूर्ति गिरिधर मालवीय ने गंगा जल की वर्तमान स्थिति पर चिंता प्रकट की है। कहा कि वह जल संसाधन, नदी विकास एवं गंगा सफाई मंत्री उमा भारती से बात करके माघ मेला से पहले स्थिति में सुधार करने को कहेंगे। खराब स्थिति के लिए राज्य सरकार को जिम्मेदार ठहराते हुए कहा कि पिछले दिनों केंद्र व राज्य सरकार के बीच वार्ता हुई, जिसमें हाईकोर्ट के निर्देश का पालन करते हुए बांध से गंगा का पानी छोडऩे व टेनरियों को हटाने पर सहमति बनी परंतु राज्य सरकार ने उस दिशा में कोई काम नहीं किया।

Saturday, December 6, 2014

Confluence is not the first series of the death of aquatic fauna

संगम के पानी को लगता है किसी की नजर लग गई है। जलीय जीवों के मरने का सिलसिला थम नहीं रहा है। बुधवार की सुबह भी एक साइबेरियन पक्षी के संगम में मृत मिलने पर श्रद्धालुओं व तीर्थ पुरोहितों में हड़कंप की स्थिति उत्पन्न हो गई। यह जानकारी तत्काल मंडलायुक्त बीके सिंह, डीएम भवनाथ सिंह और जिला वनाधिकारी (डीएफओ) को दी गई। वन दारोगा ने औपचारिकताएं पूरी कर पक्षी को पोस्टमार्टम के लिए भेजा।

नालों, सीवरों, टेनरियों के गंदे पानी और चीनी मिलों के कचरे से संगम का पानी दिनों दिन जहरीला होता जा रहा है। भले ही इसका प्रभाव बड़े जलीय जीव-जतुंओं पर अभी न दिख रहा हो, मगर भविष्य में पडऩे वाले दुष्प्रभाव को लेकर लोगो की चिंताएं बढ़ गई हैं। जानकारों का मानना है कि संगम के पानी की गुणवत्ता खराब होने से छोटे-छोटे जलीय जीवों पर इसका असर पड़ रहा है। साइबेरियन पक्षियों की मौत के पीछे कारण गंगा के पानी में डिजाल्व ऑक्सीजन की मात्र का कम होना बताया जा रहा। समाजसेवी कमलेश सिंह बुधवार तीन दिसंबर की सुबह कुछ लोगों के साथ संगम तट पर सफाई कर रहे थे, तभी पानी में एक साइबेरियन पक्षी मृत मिला। इसके पूर्व 16 नवंबर को भी वहीं पर चार साइबेरियन पक्षी मरे पाए गए थे। उस बार तो उनका पोस्टमार्टम भी नहीं हो सका था। 26 अक्टूबर को किला घाट पर तकरीबन सौ, 30 नवंबर और दो दिसंबर को संगम में दर्जनों मछलियां मरी हुई मिली थीं। अफसरों ने वहां से पानी का नमूना लेकर जांच कराया व फर्ज की इतिश्री कर ली। बुधवार तीन दिसंबर को पहली दफा मृत पाए गए साइबेरियन पक्षी को पोस्टमार्टम कराने के लिए भेजा गया। इससे संगम के पानी और अफसरों की हकीकत सामने आने की उम्मीद है। क्योंकि प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा जांच रिपोर्ट में पानी में बीओडी और डिजाल्व ऑक्सीजन की मात्र सामान्य बताई गई है। वन दारोगा अजय पटेल ने बताया कि तीन डाक्टरों के पैनल ने पोस्टमार्टम किया है। रिपोर्ट शुक्रवार को मिलेगी तभी मौत के कारणों का पता चल पाएगा।संगम पर मृत साइबेरियन पक्षी को देखते स्थानीय लोग।

जिलाधिकारी भवनाथ सिंह ने संगम पर पक्षियों और मछलियों को सेव से लेकर लाई तक खिलाने पर प्रतिबंध लगा दिया है। यदि किसी ने लाई या कोई खाद्य सामग्री गंगा में पक्षियों के सामने डाली, तो उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई होगी। पिछले पंद्रह दिन से लगातार संगम पर साइबेरियन पक्षियों और मछलियों के मरने की घटनाएं हो रही हैं। गंगा का रंग भी परिवर्तित हुआ है। साइबेरियन पक्षियों के मरने की घटना जब दोबारा बुधवार को भी घट गई, तो प्रशासन सक्रिय हो उठा। साइबेरियन पक्षी के शरीर को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया। इसकी रिपोर्ट शुक्रवार तक आ पाएगी। वहीं कुछ लोगों ने संगम मे साइबेरियन पक्षियों को सेव खिलाने में आपत्ति जतायी और इस पर रोक लगाने की मांग की। उनका कहना है कि खराब तेल से सेव बनाकर उसे संगम तट पर श्रद्धालुओं को बेचा जाता है। श्रद्धालु उसी सेव को पक्षियों और मछलियों को खिलाते हैं। इस तरह की घटनाओं की यह भी वजह हो सकती है। जिलाधिकारी भवनाथ सिंह ने इसे गंभीरता से लेते हुए कहा कि संगम पर अब कोई भी व्यक्ति सेव बिक्री और पक्षियों को सेव खिलाने पर प्रतिबंध लगा दिया है।

मछलियों के मरने की वजह नालों का पानी-संगम के पानी की गुणवत्ता सामान्य है। जो मछलियां मर रही हैं, वह तिलातिया प्रजाति की हैं, जो अफ्रीकी देशों में होती हैं। इन मछलियों के मरने की वजह जहां वह रहती हैं, वहीं नाले के पानी का गिरना है। नाले के पानी के साथ आने वाले तत्वों को खाने से उनकी मौतें हो रही हैं। लेकिन साइबेरियन पक्षी के मरने की वजह पोस्टमार्टम रिपोर्ट से ही साफ होगी।

केडी जोशी, वैज्ञानिक केंद्रीय मात्स्यकी संस्थान।

Reduction in the river, affecting the work of the Magh Mela

मेला प्रशासन की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। पहले ठेका नहीं होने के कारण मेले की तैयारियों प्रभावित चल रही थीं। अब गंगा तट पर हो रहे कटान ने अधिकारियों को परेशानी में डाल दिया है। काली मार्ग के पास गंगा में तेजी से कटान हो रहा है जिसके चलते मेला की तैयारियां प्रभावित हो रही हैं।
 
गंगा पर पीपे के पुलों और सड़क निर्माण समेत अन्य काम चल रहे हैं। बुधवार को गंगा के बहाव में तेजी आने से काली मार्ग के उत्तरी क्षेत्र में कटान शुरु हो गई है। एक लंबे हिस्से में कटान हुआ है।

कटान के कारण मेला प्रशासन ने काम रुकवा दिया। अधिकारियों के मुताबिक एक दो दिन में कटान बंद नहीं हुआ तो पानी मेला क्षेत्र में घुस जाएगा। मेला अधिकारी डा. आरके शुक्ला ने बताया कि कटान को रोकने के लिए सिंचाई विभाग को पत्र लिखा गया है।माघ मेला में गंगा की तेज धारा के कारण हो रहे कटान से काम में अवरोध हो रहा है।

Source: Horoscope 2015 

Confluence with the DM and the Water Pollution Control Board directed the needful

इलाहाबाद स्थित संगम व उसके आसपास गंगाजल लाल होने व साइबेरियन पक्षियों के मरने के मामले को इलाहाबाद हाईकोर्ट ने गंभीरता से लिया है। न्यायालय ने जिलाधिकारी व प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को निर्देशित किया कि मौका मुआयना कर तत्काल आवश्यक कार्रवाई करें तथा कृत कार्यवाही से अदालत को अवगत कराएं।

यह आदेश मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड व न्यायमूर्ति दिलीप गुप्ता की खण्डपीठ ने गंगा प्रदूषण मामले में दिया है। अगली सुनवाई की तिथि 11 दिसम्बर नियत की है। कोर्ट ने आशंका व्यक्त की कि ऐसा तो नहीं शहर के सीवर लाइन फट गए हों तथा गंगा व यमुना नदी में गंदा पानी जा रहा हो। कोर्ट ने कहा कि केवल साइबेरियन पक्षी ही नहीं मछलियां भी मर रही हैं। अधिवक्ता विजय चंद्र श्रीवास्तव ने अदालत को अवगत कराया है कि गंगा का पानी इस स्तर पर प्रदूषित है कि गंगाजल आचमन ही नहीं, स्नान करने योग्य भी नहीं है। न्यायालय ने डीएम से अगली सुनवाई पर जांच कर रिपोर्ट प्रस्तुत करने को कहा है।

रिपोर्ट में हरेक घटना का जिक्र- गंगा प्रदूषण मामले में नियुक्त एमिकस क्यूरी अरुण गुप्ता गंगा में मर रहे पक्षियों और मछलियों के बाबत रिपोर्ट तैयार कर रहे हैं। उनका कहना है कि इन घटनाओं पर उनकी नजर है। इसी आधार पर वह रिपोर्ट भी तैयार कर रहे हैं। जिस दिन गंगा प्रदूषण मामले में हाईकोर्ट में सुनवाई होगी, उसी दिन वह अपनी रिपोर्ट कोर्ट में पेश करेंगे।

इलाहाबाद स्थित कंपनी बाग के सौंदर्यीकरण मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को गठित कमेटी के निर्णय पर यथाशीघ्र निर्णय लेने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने कहा कि विशेषज्ञों की राय से गठित कमेटी ने कंपनी बाग की सौंदर्यता बढ़ाने के लिए धन की मांग की है, जिस पर शासन प्रमुखता से धन अवमुक्त करे। यह आदेश मुख्य न्यायमूर्ति डीवाई चंद्रचूड व न्यायमूर्ति दिलीप गुप्ता की खण्डपीठ ने मधु सिंह की याचिका पर दिया है। कोर्ट ने अगली सुनवाई की तिथि 8 दिसम्बर तय की है। कोर्ट ने नगर आयुक्त व एडीए के उपाध्यक्ष से कहा कि वे कंपनी बाग में प्रकाश, हाईमास्क व वाहन पार्किंग की समुचित व्यवस्था संयुक्त रूप से तत्काल करें। कमेटी के अध्यक्ष व अपर महाधिवक्ता सीबी यादव ने हलफनामा दाखिल कर कहा कि वाहन पार्किंग के लिए स्थान तय कर लिया गया है व इंटरलाकिंग के निविदा की प्रक्रिया पूरी हो गई है। पटरी बनाने का कार्य 19 दिसम्बर तक पूरा हो जाएगा।

गंगा में साइबेरियन पक्षियों और मछलियों के मरने की खबर पर जिला प्रशासन व गंगा प्रदूषण नियंत्रण इकाई के अधिकारी जागे जरूर हैं, पर कई दिनों की कसरत के बाद भी कारण पता लगाने में उन्हें कामयाबी नहीं मिल सकी है। पिछले दिनों जब गंगा जल में मछलियां मरी मिलीं तो प्रशासन ने इसे गंभीरता से नहीं लिया। इसके बाद तो यह सिलसिला ही चल पड़ा। संगम के आसपास गंगाजल में रोज मरी मछलियों के मिलने का सिलसिला जारी हो गया। स्थिति तब और बिगड़ गई जब परदेश से आए साइबेरियन पक्षी भी मरने लगे। मामले में गंगा प्रदूषण नियंत्रण इकाई के अधिकारी लगातार अपने को क्लीन चिट देते रहे। पानी में प्रदूषण नहीं है तो फिर मछलियों और पक्षियों का मरना जारी क्यों है। यह बड़ा सवाल है। मामले को गंभीरता से लेते हुए जिलाधिकारी भवनाथ सिंह ने खुद इस अभियान को अपने हाथ में लिया। अधिकारियों के साथ खुद गंगा तट तक गए और पानी की गुणवत्ता परखी। कारण अभी भी साफ नहीं हो पा रहा है। यही कारण है कि मामले को संज्ञान में लेते हुए हाईकोर्ट ने शासन से पूरी रिपोर्ट मांगी है।

Source: Horoscope 2015

After purification of the foam and the pollution of river water is black

शहर के सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांटों (एसटीपी) में गंदे पानी के शोधन का काम बिलकुल ठीक नहीं चल रहा। गंगा प्रदूषण नियंत्रण इकाई के अफसरों की लापरवाही की बानगी 'दैनिक जागरणÓ टीम ने देखी। नैनी में 20 एमएलडी की एक एसटीपी बंद मिली और जो एसटीपी चल रही थी, वह भी पूरी क्षमता से काम नहीं कर रही थी। वहीं बक्शी बांध स्थित एसटीपी में भी गंदा पानी गंगा में जाता मिला।

नैनी एसटीपी की क्षमता 80 एमएलडी की है। जागरण टीम दोपहर करीब ढाई बजे यहां पहुंची तो 20 एमएलडी वाला एसटीपी बंद मिला। 60 एमएलडी वाला एसटीपी चल रहा था लेकिन उसमें से एक एसटीपी खराबी के कारण बंद था। जिस टैंक (एफएसटी) में गंदा पानी शोधन के लिए एकत्र होता है, उस एकत्र पानी के शोधन के लिए नौ एरिएटर लगे हैं। इसमें से नियमत: चौबीस घंटे छह एरिएटर चलने चाहिए, लेकिन दैनिक जागरण की टीम को मौके पर पांच ही एरिएटर चलते मिले। इस एसटीपी पर पानी के शोधन के बाद खेतों की सिंचाई के लिए दस पंपों से पानी पंप होना चाहिए, मगर तीन पंप ही चालू हालत में मिले। उधर, जब इस लापरवाही के बारे में महाप्रबंधक आरके त्रिपाठी को जानकारी दी गई, उन्होंने दावा किया कि सुबह छह से 11 और शाम पांच से सात बजे तक 'पीक आवर्सÓ में सभी मशीनें चलती हैं।

उधर, दैनिक जागरण की टीम बक्शी बांध एसटीपी पर दिन में करीब 12 बजे पहुंची। यहां तीन में से दो मशीनें (ब्लोअर) चलती मिलीं। एक स्टैंड बाई में था। उस समय मौजूद सहायक अभियंता रोहित चौरसिया ने बताया कि 29 एमएलडी क्षमता वाले इस एसटीपी में लगभग 35 एमएलडी पानी का दबाव रहता है, जिससे पानी का शोधन मानक के अनुरूप नहीं हो पा रहा है। यही वजह है कि शोधन के बाद भी पानी में जबर्दस्त झाग निकलता मिला। श्री चौरसिया ने बताया कि यहां से निकल रहा पानी सीधे गंगा में जाकर पानी को कॉस्टिक युक्त और काला बना रहा है। वहां मौजूद अन्य अधिकारियों ने सफाई दी कि सलोरी की ओर से पानी का बहाव ज्यादा हो रहा है। पीक आवर्स में दो मशीनें चलती हैं। पानी कम होने पर एक मशीन चलती है।

साइबेरियन पक्षी की हादसे में हुई थी मौत-

संगम में बुधवार को हुई साइबेरियन पक्षी की मौत के कारण का खुलासा शुक्रवार को हो गया। गंगा जल के प्रदूषित होने की वजह से मचा हंगामा अभी ठंडा नहीं हुआ कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट ने नया मोड़ दे दिया।

वन विभाग ने पोस्टमार्टम रिपोर्ट के हवाले से साइबेरियन पक्षी की मौत की

वजह हादसा बताया है। उसके लीवर में खून के थक्के भी जमे हुए थे। करीब

एक महीने से संगम में मछलियों और साइबेरियन पक्षियों के मरने का

सिलसिला चल रहा है। दो बार साइबेरियन पक्षियों की मौत हो चुकी है,

जबकि मछलियां तो कई बार मर चुकी हैं। चूंकि, मछलियों का पोस्टमार्टम नहीं हो सकता है इसलिए उनकी मौत का राज नहीं खुल सका। पहली दफे चार

साइबेरियन पक्षियों के कुत्तों द्वारा निगल लिए जाने के कारण उनकी भी मौत का राजफाश नहीं हो सका था। लेकिन बुधवार को जब फिर एक साइबेरियन पक्षी की मौत हुई तो कमिश्नर और डीएम के निर्देश पर वन विभाग ने उसका पोस्टमार्टम

कराया। शुक्रवार को पोस्टमार्टम रिपोर्ट आ गई।

पानी के साथ बालू भी लाल-

दारागंज से लेकर संगम की तरफ गंगा के पानी के साथ बालू का भी रंग लाल हो गया है। बालू का रंग लाल देख शुक्रवार को श्रद्धालु, नाविक और तीर्थ पुरोहित आश्चर्यचकित हो गए। बालू का रंग वहीं लाल मिला जहां से पानी उतर गया था।

Thursday, February 13, 2014

Success Funda Of Life

हम घंटों फोन पर बात करते हैं और भूल जाते हैं कि हमारे आसपास की दुनिया में भी बहुत कुछ है. पूरा जीवन जीने के बाद भी हमें यह पता नहीं चलता कि मैं कौन हूं. अगर खुद की क्षमताओं को परखना है तो पहले खुद को पहचानना जरूरी है. हम यह भी भूल जाते हैं कि बॉडी का सबसे अजूबा एलीमेंट दिमाग है. ये सीधे ब्रम्हांड से जुड़ा है और इसकी अपार क्षमताएं हैं. इसलिए अगर लाइफ में सक्सेज पानी है तो खुद को पहचानना सीखिए. ज्यादा कुछ नहीं, दिल से अपने दिमाग को एक एसएमएस भेजिए और फिर देखिए कि सफलता कैसे नहीं मिलती. पब्लिक स्पीकर अत्रिशेखर ने यह बात विज्ञान परिषद में ऑर्गनाइज प्रोग्राम यस आई कैन के दौरान कहीं.

अंजाम तक पहुंचने के लिए डिटर्मिनेशन की जरूरत

लाइफ में सफलता पाने के लिए डिटर्मिनेशन की बहुत ज्यादा जरूरत है. केवल ऊंचे सपने देखने से ही सफलता नहीं मिलती है. इन सपनों को पूरा करने के लिए एफर्ट भी करना पड़ता है. सपनों को हकीकत में बदलने के लिए डेडलाइन फिक्स करिए. चिरांगन की ओर से प्रस्तुत इस प्रोग्राम में अत्रिशेखर ने कहा कि दुनिया में केवल 30 फीसदी लोग ऐसे हैं जो किसी काम को शुरू करने के बाद उसे अंजाम तक पहुंचाते हैं, जबकि 70 फीसदी ऐसे हैं जो जीवनभर एक ही काम को करते रहते हैं. उन्होंने यंगस्टर्स को इन 30 फीसदी में शामिल होने की अपील की. कहा कि डिटर्मिनेशन, फोकस और कंसंट्रेशन के साथ शुरू किया गया काम जल्द पूरा होता है.

आस्था हो तो पानी पर भी चल सकते हैं


यंगस्टर्स को सक्सेज मंत्र देने के लिए अत्रिशेखर ने कई एग्जाम्पल भी दिए. धीरू भाई अंबानी, सुनील भारती मित्तल, बिल गेट्स के बारे में बताया कि इनको लाइफ में गिने-चुने मौके ही मिले जिसका इन्होंने जमकर फायदा उठाया. क्योंकि, इन्हें अपने लक्ष्य के बारे में पता था. स्पीच के दौरान उन्होंने कई स्टोरीज भी सुनाई. उन्होंने बताया कि एक शिष्य ने अपनी गुरु आस्था के बल पर पानी पर चलकर दिखाया तो घमंड में चूर गुरु खुद ऐसा करते समय नदी में डूब गया. सफलता कभी भी परमानेंट नहीं होती है. वक्त के साथ इंसान की जरूरतें बदलती हैं और ऐसे में हमें बिना रुके एफर्ट करते रहना चाहिए. जिसके लिए लाइफ में पाजिटिव एटीट्यूड बहुत ज्यादा जरूरी है.

खचाखच भरा रहा हाल

पब्लिक स्पीकर अत्रिशेखर की पॉपुलैरिटी का इसी से अंदाजा लगाया जा सकता है कि विज्ञान परिषद का हाल प्रोग्राम के दौरान पूरी तरह फुल था. सभी सीटें भरी हुई थीं और स्पीच के दौरान बार-बार क्लैपिंग करके लिस्नर्स ने उनका वेलकम भी किया. इस बीच बार-बार लिस्नर्स की ओर से क्वेरीज भी होती रहीं. यंगस्टर्स को  लाइफ सक्सेज से जुड़े सवालों के जवाब भी मिले. एक सवाल के जवाब में स्पीकर ने कहा कि लाइफ में फेलियर से कभी नहीं घबराना चाहिए, बल्कि उससे सबक लेना चाहिए. उन्होंने कहा कि मैं खुद लाइफ में कई बार फेल हुआ लेकिन हिम्मत नहीं हारी. इन्हीं फेल्योर्स ने मुझे सक्सेज मंत्र दिया और आज मैं ऐसे प्रोग्राम्स के जरिए युवाओं की सोच में सफल साबित हो रहा हूं. आई नेक्स्ट इस प्रोग्राम का मीडिया पार्टनर रहा.

ये रहे सक्सेज मंत्र

- अपने आप से प्यार करना सफलता की पहली सीढ़ी है.
- लाइफ में कठिनाइयों से भरे कामों का चुनाव करना चाहिए. स्टूडेंट लाइफ के लिए यह बेहद जरूरी है.
- लाइफ के तीन लक्ष्य होते हैं. सुनिश्चित लक्ष्य, इच्छित लक्ष्य और जीवन लक्ष्य. सुनिश्चित लक्ष्य को सभी एचीव करते हैं लेकिन इच्छित लक्ष्य का चुनाव सोच-समझकर करना चाहिए.
- जब सुनिश्चित लक्ष्य और इच्छित लक्ष्य के बीच सामंजस्य हो जाता है तो जीवन लक्ष्य आसानी से एचीव किया जाता है. मतलब हम डिसाइड कर सकते हैं हमारी मौत संतुष्टि से परिपूर्ण होगी.
- स्टूडेंट्स को सुबह जल्दी उठने और पढ़ाई में कड़ी मेहनत से पीछे नहीं हटना चाहिए.
- हमेशा अपने पास मौजूद संसाधनों का पूरा उपयोग करके लक्ष्य पूर्ति की ओर बढऩा चाहिए.

Source: Online Hindi Newspaper