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Saturday, May 3, 2014

Poonam pandey detained for indecent acts

इंडीसेंट एक्ट में अरेस्ट हुईं पूनम पाण्डे
मॉडल टर्न एक्ट्रेस पूनम पाण्डे को फ्राइडे नाइट मुंबई मीरा रोड एरिया में इंडीसेंट बिहेवियर करने के चार्ज में पुलिस ने उन्‍हें अरेस्ट कर लिया. वैसे तो पूनम अपन बोल्ड इमेजस सोशल नेटवर्किंग साइट पर अपलोड करने के लिए फेमस हैं लेकिन पब्लिक प्लेस पर ऐसा बिहेवियर करते हुए पकड़ा जाना सचमुच अजीब है. वैसे खुद को बेहद शाई गर्ल कहने वाली पूनम की शाईनेस का पहला इंट्रोक्शन तब मिला जब उन्होंने दावा किया था कि अगर इंडियन क्रिकेट टीम ने वर्ल्ड कप जीत लिया तो वो उसके लिए स्ट्रिप करेंगी. बहरहाल कप जीतने के बाद टीम इंडिया ने तो अपना दामन बचा लिया.

पर पूनम बाज नहीं आयीं और अलग मौकों पर अलग अलग बहाने से एक के के बाद एक अपनी बोल्ड  पिक्चर्स अपलोड करती रहीं. लेकिन इस बार जो उन्होंने किया सचमुच चौकाने वाला है और इससे उन्हें क्या मिलेगा वो समझ में नहीं आ रहा. क्योंकि ऐसा सब कुछ करके भी वो अपनी फिल्म हिट नहीं करा पायीं. बहरहाल ये पहला मामला नहीं है जब पूनम पांडे को पब्लिक प्ले‍स पर इस तरह की हरकत करते हुए पुलिस ने अरेस्ट किया हो. पहले भी उन्हें इस तरह की हरकत करने के लिए वार्निंग मिल चुकी है. फ्राइडे को भी पुलिस ने पूनम को लेट नाइट तक पुलिस स्टेशन में बिठाए रखा और उन पर मुबई पुलिस एक्ट के सेक्शन 110 और 117 के अंडर एक्शन लिया और वार्निंग देकर छोड़ दिया.

Wednesday, April 23, 2014

Arvind kejriwal to file his nomination today

वकीलों ने लगाएं मोदी के नारे
आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने कचहरी पहुंचकर अपना नामांकन दाखिल कर दिया. नामांकन के दौरान कचहरी मुख्यालय के गेट पर वकीलों ने 'हर-हर मोदी, घर-घर मोदी' के नारे लगाए. हल्की-फुल्की नोकझोक के बीच प्रस्तावकों के साथ केजरीवाल ने कमरे में पहुंच कर अपना नामांकन दाखिल किया. केजरीवाल नामांकन भरने के बाद ठीक तीन बजे बाहर निकल गए. मनीष सिसोदिया और आशुतोष भी उनके साथ हैं.

जमकर लग रहे नारे
नामांरन भरने से पहले केजरीवाल ने रोड शो किया जिसमें वाराणसी के हर चौराहे पर बीजेपी के कार्यकर्ताओं के द्वारा उन्हें विरोध झेलना पड़ा. लगातार चली आ रही बाधाओं के बावजूद केजरीवाल ने अपना रोड शो जारी रखा. वहीं बीजेपी सपोटर्स रोडो़ पर खड़े लगातार केजरीवाल के खिलाफ नारेबाजी कर रहे हैं. बीजेपी के समर्थक लगातार "हर-हर मोदी, घर-घर मोदी" के नारे लगा रहे हैं.

किया आजाद
इससे पहले केजरीवाल ने फ्रीडम फाइटर चंद्र शेखर आजाद की प्रतिमा को माला पहनाई. साथ ही उन्होंने चार कबूतरों को भी आजाद कर उड़ाया. केजरीवाल ने कबूतरों को उड़ाते समय अपने समर्थकों को संबोधित करते हुए कहा कि जैसे आज यह पक्षी आजाद हुए हैं, वैसे ही बहुत जल्द हमारा देश भी इन भ्रष्टाचारियों से आजाद हो जाएगा. इसके बाद वो लहुराबीर चौराहे से पदयात्रा करते हुए नामांकन स्थल तक पहुंचेंगे. इस रोड शो में गाडिय़ों का काफिला नहीं होगा लेकिन एक खुली जीप रहेगी जिस पर वो बीच-बीच में सवार होंगे. केजरीवाल के नामांकन की जानकारी आप के राष्ट्रीय प्रवक्ता संजय सिंह, वरिष्ठ नेता गोपाल राय व आशुतोष ने दी थी.

केजरी सपोरटर्स
केजरीवाल के नामांकन को लेकर लोगों में काफी उत्साह देखा जा रहा है. केजरीवाल के नामांकन भरने से पहले ही लोग यहां उनके समर्थन में गिटार बजाकर और गाने गाकर उनका सपोर्ट करते नजर आ रहे हैं. वहीं कुछ देर पहले ही बीजेपी और आप के समर्थकों के बीच झड़प भी हुई.

Wednesday, March 26, 2014

Lost plane 122 pieces of debris seen

परिवहन मंत्री हिशामुद्दीन हुसैन ने कहा कि 23 मार्च को ली गई तस्वीरों में 23 मीटर की लंबाई तक के टुकड़े दिख रहे हैं.

इऩ तस्वीरों को फ्रांस की एयरबस सैटेलाइट ने लिया है. तस्वीरों में दिखने वाले कुछ टुकड़े चमकदार हैं जिससे अंदाजा लगाया जा रहा है कि ये टुकड़े किसी ठोस धातु के हैं.

मलेशिया एयरलाइंस का विमान एमएच370 आठ मार्च को कुआलालंपुर से बीजिंग के लिए उड़ा था. उड़ान भरने के कुछ ही घंटे बाद यह ग़ायब हो गया था. इस विमान में कुल 239 यात्री थे.

घोषणा हो चुकी है कि विमान दुर्घटनाग्रस्त हो गया था और कोई भी यात्री जीवित नहीं बचा है.

खोज का दायरा

हुसैन ने बताया कि ये टुकड़े पश्चिमी आस्ट्रेलिया के पर्थ से करीब 2,557 किलोमीटर दूर 400 वर्ग किलोमीटर क्षेत्रफल में फैले हुए हैं.

उन्होंने बताया कि ये जानकारी पर्थ में आस्ट्रेलियाई बचाव और समन्वय केंद्र को 25 मार्च को सौंप दी गई थी.

परिवहन मंत्री ने बताया कि हिंद महासागर के दक्षिण में जारी खोज अभियान को अब पूर्वी हिस्से और पश्चिम हिस्से में बांट दिया गया है.

हुसैन के मुताबिक, "इस क़दम से खोज अभियान में मदद मिलेगी." सैटेलाइट की तस्वीरों में दिख इन टुकड़ों तक अभी पहुंचा नहीं जा सका है.

खोज अभियान के बीच समन्वय का काम देख रहे आस्ट्रेलिया समुद्री सुरक्षा प्राधिकरण (एएमएसए) ने बुधवार को कहा कि बीते दिन भारी बारिश के बाद अब मौसम में सुधार हुआ है और खोजी विमानों ने एक बार फिर उड़ान भरी है.

उन्होंने बताया कि खोज अभियान में सात सैन्य और पांच नागरिक विमान शामिल हैं. इस अभियान में आस्ट्रेलिया, अमरीका, चीन और जापान सहित कुल छह देश शामिल हैं.

SC condition on sahara chief bail

सुप्रीम कोर्ट ने सहारा समूह को गुरुवार को उन बैंक खातों की जानकारी देने के लिए कहा है कि जिनके लेनदेने पर लगी हुई रोक को हटाया जा सके.

हालांकि इससे पहले सुब्रत रॉय ने दो जजों वाले पीठ के आदेश को ग़ैरक़ानूनी और असंवैधानिक बताते हुए अपनी रिहाई का अनुरोध किया था.

उनकी दलील थी कि चार मार्च, 2014 के आदेश को क़ानून की नज़र में अमान्य घोषित किया जाए.

इस याचिका पर विचार करते हुए न्यायमूर्ति केएस राधाकृष्णन और न्यायमूर्ति जेएस खेहड़ की दो सदस्यीय पीठ ने उनकी रिहाई का आदेश देने से इनकार कर दिया.

समाचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक़ अदालत ने कहा कि सुब्रत रॉय की कंपनी को अभी निवेशकों का बक़ाया लौटाना है, इसलिए उन्हें रिहा नहीं किया जा सकता.

पिछली सुनवाई

इससे पहले निवेशकों का पैसा लौटाने के सहारा समूह के प्रस्ताव को अदालत ने 'अपमानजनक' बताया था. सहारा ने अदालत को भरोसा दिलाया था कि वो तीन दिनों के भीतर निवेशकों का 2500 करोड़ रुपये लौटा देगी, जबकि शेष राशि हर तीन महीने पर क़िस्तों में जमा करने का भरोसा दिया था.

इस पर सुप्रीम कोर्ट का कहना था कि सहारा समूह का ये प्रस्ताव ''काफ़ी अपमानजनक है. आप हमारे पास तब तक न आएं जब तक आपके पास इससे बेहतर कोई प्रस्ताव नहीं हो. ये एक बेईमानी वाला प्रस्ताव है.''

अदालत ने अपने आदेश में 65 वर्षीय सहारा प्रमुख को अगली सुनवाई तक जेल में रहने का आदेश दिया था.

निजी क्षेत्र में सहारा समूह देश का एक बड़ा नियोजक है और उसे 17,500 करोड़ रुपए का भुगतान करना है.

सहारा ने अदालत को जानकारी दी है कि वे इस राशि का भुगतान अपनी परिसंपत्तियों को बेचकर करेगा जिसके दस्तावेज़ सेबी के पास हैं.

Monday, March 24, 2014

Jaswant singh files his nomination as independent contest


 'बाग़ी' जसवंत सिंह ने दाख़िल किया पर्चा

स्थानीय संवाददाता नारायण बारेठ के मुताबिक़ नामांकन पत्र दाख़िल करने से पहले जसवंत पुत्र और भाजपा विधायक मानवेंद्र सिंह से मिले और उनसे विचार विमर्श किया.

पर्चा दाख़िल करने के बाद जसवंत सिंह ने कहा, "मुझसे पार्टी के किसी भी नेता ने संपर्क नहीं किया है और मैं पार्टी के रवैये से नाराज़ हूं. मैं जनता के आदेश पर चुनाव लड़ रहा हूँ."

जसवंत सिंह का बाड़मेर स्टेडियम में एक जनसभा को संबोधित करने का कार्यक्रम है जिसमें वह अपनी आगे की रणनीति का ऐलान करेंगे.

इससे पहले राजस्थान की मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने बाड़मेर और जैसलमेर के भाजपा विधायकों को जयपुर तलब किया था और बाड़मेर से भाजपा के प्रत्याशी सोनाराम का समर्थन करने को कहा.

सोनाराम कांग्रेस छोड़कर भाजपा में शामिल हुए हैं.

Source: Hindi News

Asia largest forest conservaiton area buliding in india

भारत में बन रहा है एशिया का सबसे बड़ा संरक्षित वन क्षेत्र
2012 में जब कर्नाटक ने क़रीब 2,600 वर्ग किलोमीटर में फैले वन क्षेत्र को संरक्षित घोषित किया तभी से नेशनल पार्कों, बाघ संरक्षित क्षेत्रों और अभ्यारण्यों को जोड़ा जा रहा है.

यह संरक्षित क्षेत्र भारत के कुल भू-क्षेत्र का पांच प्रतिशत है और ऐसे कड़े क़ानूनों के अंतर्गत आता है जो भूमि के इस्तेमाल को बदलने की प्रक्रिया को मुश्किल बनाते हैं.

नेशनल पार्कों और टाइग़र रिज़र्व्स में मानव बस्तियों की इजाज़त नहीं है.

कर्नाटक ने पहले ही तीन संरक्षित वन क्षेत्र बनाए हैं, जो 10 लाख हेक्टेयर में वेस्टर्न घाट के समानांतर फैले हैं.

भारत के पश्चिमी समुद्र तट की ओर स्थित पर्वत शृंखला के पास के क्षेत्र को वेस्टर्न घाट कहा जाता है.

यूनेस्को ने इसे वैश्विक विरासत घोषित कर रखा है और यह दुनिया के आठ सबसे महत्वपूर्ण जैव विविधता वाले क्षेत्रों में से एक है.

दक्षिणी कर्नाटक में बनरघाटा-नागरहोल क्षेत्र को संरक्षित बनाए जाने के साथ ही 7,050 वर्ग किलोमीटर का विशाल भूभाग एकमुश्त संरक्षित वन क्षेत्र बन जाएगा.

मानव बस्तियां

इस भूभाग में केरल और तमिलनाडु से सटे हुए संरक्षित वन क्षेत्र भी आते हैं.

क़रीब 1,716 वर्ग किलोमीटर में फैला मध्य कर्नाटक का कुद्रेमुख-आघानाशिनी भूभाग इसमें मिलाया जा चुका है.

उत्तर में आंशी-भीमघाद का भूभाग कर्नाटक और गोवा में स्थित 2,242 वर्ग किलोमीटर के वन क्षेत्र से जोड़ा जा चुका है.

विशेषज्ञ कहते हैं कि वन संरक्षरण के लिए विरल मानव बसाहट एक बड़ा ख़तरा है.

सतत् वन क्षेत्र स्थानीय स्तर पर जीवों के लुप्त प्राय होने की संभावना को कम करता है.

एक दूसरे से जुड़े हुए वन क्षेत्र, जलवायु परिवर्तन के कारण स्थान बदलने वाले वन्य जीवों को अनुकूलन और उत्तरजीविता का बेहतर मौका देते हैं...

Source: Hindi News

Russian troops overrun feodosia naval base of crimea


यूक्रेन के नौसैनिक अड्डे पर रूस का क़ब्ज़ा

यूक्रेन के रक्षा प्रवक्ता व्लादिस्लाव सेलेज़्नीओव ने कहा कि रूसी सैनिकों ने नौसैनिक अड्डे पर दो तरफ से बख्तरबंद गाड़ियों और ग्रेनेड से हमला किया.

उन्होंने बताया कि रूसी सैनिकों ने यूक्रेन के सैनिकों के एक जगह इकट्ठा किया और उनके अधिकारियों के हाथ बांध दिए.

रूस ने क्राईमिया के अधिकांश  सैनिक ठिकानों को अपने नियंत्रण में ले लिया है और इस तरह इस प्रायद्वीप पर उसकी पकड़ मजबूत हो गई है.

फ़ियोडोसिया नौसैनिक ठिकाने पर मौजूद एक सैनिक ने रॉयटर्स को बताया कि वहां गोलीबारी की गई. साथ ही सैनिक ने इस बात की भी पुष्टि की कि इस नौसैनिक ठिकाने पर रूस का क़ब्ज़ा हो गया है.

क्राईमिया की राजधानी सिम्फ़ेरोपोल में मौजूद बीबीसी संवाददाता मार्क लोवेन ने बताया कि फ़ियोडोसिया यूक्रेन के नियंत्रण वाला आख़िरी नौसैनिक ठिकाना था, जो पिछले कुछ समय से रूसी सैनिकों से घिरा हुआ था.

इससे पहले शुक्रवार को रूसी सैनिकों ने रातोंरात दो अन्य सैन्य ठिकानों पर हमला करके उन्हें अपने क़ब़्जे में ले लिया था.

इससे पहले इंटरफ़ैक्स न्यूज़ एजेंसी ने जानकारी दी थी कि यूक्रेन की 189 सैन्य इकाइयों और क्राईमिया के अन्य ठिकानों पर रूसी झंडे फहरा रहे थे.

यूरोप में  नैटो के सैन्य कमांडर ने रविवार को चेतावनी दी थी कि यूक्रेन की पूर्वी सीमा पर मौजूद रूसी सेनाएं मोलदोवा तक कार्रवाई करने में सक्षम हैं.

क्राईमिया में ताज़ा हालात यह हैं कि इसके कुछ हिस्सों में रविवार शाम से बिजली आपूर्ति बाधित है लेकिन अधिकारियों ने इसके लिए तकनीकी दिक़्क़तों को ज़िम्मेदार ठहराया है.

AFP reporter among 9 dead in kabul


अफ़ग़ानिस्तान: पत्रकार का परिवार समेत क़त्ल

पत्रकार की हत्या के विरोध में अफ़ग़ानिस्तान के पत्रकारों ने तालिबान की ख़बरों का बहिष्कार करते हुए 15 दिन तक तालिबान की कोई ख़बर प्रसारित न करने का फ़ैसला किया है.

पत्रकार सरदार अहमद, उनकी पत्नी और दो बच्चे उन नौ लोगों में शामिल थे, जिनकी चरमपंथी हमले में मौत हुई है.

सरदार अहमद का तीसरा बच्चा घायल है और उसकी हालत गंभीर है.

इस हमले में मारे गए लोगों में चार महिलाएं, तीन पुरुष और दो बच्चे थे.

प्रसारण बंद
सेरेना होटल राष्ट्रपति भवन से महज़ एक किलोमीटर की दूरी पर स्थित है.

मारे गए लोगों में भारत और पाकिस्तान के एक-एक नागरिक भी शामिल हैं. हमले में मारे गए बाक़ी लोग अफ़ग़ानिस्तान के थे.

शुक्रवार को बैठक में पत्रकारों ने फ़ैसला लिया कि तालिबान की किसी भी हिंसक गतिविधि की ख़बर नहीं दी जाएगी.

बैठक में कहा गया, "हम तालिबान से यह भी पूछते हैं कि वो मासूम बच्चों की हत्या को कैसे सही ठहरा सकते हैं."

एक बयान में पत्रकारों ने कहा, "हमारी बिरादरी ने एक बार फिर अपने एक सक्रिय सदस्य की दुखद मौत पर शोक जताया है. इस सच्चाई के बावजूद कि अफ़ग़ान पत्रकारों ने कठिन परिस्थितियों में काम करते हुए अपनी कवरेज में तटस्थ रहने की कोशिश की है."

काबुल में सेरेना होटल राष्ट्रपति भवन और महत्वपूर्ण मंत्रालयों से महज़ एक किलोमीटर की दूरी पर मौजूद है, जहां यह हमला हुआ.

Source: Latest News in Hindi

Thursday, March 20, 2014

Reasons Why Advani Wants To Fight From The Bhopal Seat


भाजपा के शीर्ष नेता लालकृष्ण आडवाणी की लोकसभा सीट को लेकर पिछले एक सप्ताह से जारी सस्पेंस अभी भी खत्म नहीं हो पाया है.
भाजपा की केन्द्रीय चुनाव समिति बुधवार रात फैसला ले चुकी है कि उन्हें गांधीनगर से ही चुनाव लड़ना है, लेकिन आडवाणी की सुर्इ अभी भी भोपाल पर ही अटकी हुर्इ है.

मातृ संगठन आरएसएस के परोक्ष निर्देश और पार्टी के तमाम नेताओं की मान मनौव्वल के बावजूद आडवाणी यदि भोपाल से ही चुनाव लड़ने की रट लगाए हुए हैं तो इसकी एक नहीं, कर्इ वजहें हैं.

सबसे मुख्य वजह मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान खुद हैं, जिन्हें आडवाणी का बेहद करीबी माना जाता है.

आडवाणी भी कर्इ मौकों पर शिवराज सिंह चौहान के प्रति अपने अनुराग को उजागर कर चुके हैं.

पिछले साल गोवा राष्ट्रीय कार्यकारिणी से ठीक पहले उन्होंने पार्टी के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार नरेन्द्र मोदी से शिवराज सिंह चौहान की तुलना कर भारी बखेड़ा खड़ा किया था.

नजदीकी

मोदी के नाम घोषित होने के पहले आडवाणी एक नहीं कर्इ मर्तबा कह चुके हैं कि पार्टी में प्रधानमंत्री पद के योग्य उम्मीदवारों की कोर्इ कमी नहीं है.

नाम लेते समय वे हर बार शिवराज सिंह का नाम लेना नहीं भूले.

स्थानीय पत्रकार राघवेन्द्र सिंह कहते हैं, ''आडवाणी को भाजपा का पितृ पुरुष माना जाता है. लंबे समय तक वे ही तय करते रहे हैं कि कौन कहां से चुनाव लडेगा, लेकिन मौजूदा घटनाक्रमों को देखकर लगता है कि वे पार्टी में अपनी उपेक्षा से दुखी हैं.''

''पार्टी के तमाम बड़े नेताओें की लोकसभा सीटों का ऐलान हो चुका है लेकिन चार सूचियों के बावजूद आडवाणी के नाम को लेकर संशय बना हुआ है. शायद इसी वजह से वे भोपाल आकर निर्णय लेने वालों तक अपनी नाराजगी पहुंचाना चाह रहे हैं.''

एक अन्य स्थानीय पत्रकार प्रकाश भटनागर कहते हैं कि आडवाणी के लिए गांधीनगर सीट भी उतनी ही सुरक्षित है जितनी भोपाल, लेकिन भोपाल आने का फैसला नरेन्द्र मोदी की प्रतिष्ठा के प्रतिकूल होता तब यह मानने का आधार होता कि आडवाणी मोदी के कारण गुजरात छोड़ मध्यप्रदेश आ रहे हैं.

चौहान का निशाना

शिवराज सिंह चौहान ने लालकृष्ण आडवाणी को भोपाल से चुनाव लड़ने का न्यौता देकर एक तीर से दो निशाने साधे है.

पहला तो आडवाणी की हमदर्दी हासिल करना और दूसरा पार्टी में मौजूद अन्य वरिष्ठ और बुजुर्ग नेताओं तक यह संदेश भिजवाना कि कोर्इ और पूछे न पूछे वो हमेशा उनका सम्मान करते रहेंगे.

गौरतलब है कि पिछली बार पार्टी की एक अन्य दिग्गज नेता सुषमा स्वराज को भी मध्यप्रदेश ने एक सुरक्षित सीट मुहैया कराई थी.

यह वही सीट थी, जिस पर खुद चौहान चार बार सांसद रह चुके थे और जिसके एक एक गांव से वो वाकिफ थे.

चुनाव में विजयी होने के बाद सुषमा तो दिल्ली रवाना हो गईं, लेकिन यहां उनकी सीट का पूरा ख्याल रखा गया.

यही वजह है कि इस बार वे फिर उसी विदिशा सीट से चुनाव लड़ रही हैं.

विदिशा की तरह भोपाल लोकसभा सीट भी भाजपा के लिहाज़ से बेहद महफ़ूज़ है.

भाजपा का गढ़


यहां से पिछले सात लोकसभा चुनावों में भाजपा का कमल खिलता आया है. 1984 की इंदिरा लहर के बाद से कांग्रेस तमाम कोशिशों के बावजूद यहां से अपने किसी सांसद को दिल्ली नहीं पहुंचा पाई.

सीट पर कायस्थ, ब्राम्हण और मुस्लिम मतदाता निर्णायक स्थिति में हैं.

चूंकि भोपाल नवाबी रियासत रही है इसलिए मुस्लिमों की तादाद ठीक ठाक है. कांग्रेस ने सारे जतन किए. ब्राम्हण उम्मीदवार खड़े किए, कायस्थों को मौका दिया और मुस्लिमों को भी आजमाया, लेकिन कामयाबी नहीं मिली.

भोपाल नवाब खानदान के मशहूर क्रिकेटर नावाब मंसूर अली खान पटौदी को भी कांग्रेस एक बार यहां से आजमा चुकी है.

जबकि भाजपा ने जिसे चाहा उसे जिताया. पूर्व नौकरशाह सुशीलचंद्र वर्मा से लेकर फायरब्रांड लीडर उमा भारती और संजीदा नेता कैलाश जोशी सभी को भोपाल से कामयाबी मिली.

भोपाल लोकसभा की मौजूदा आठ में से छह विधानसभा सीटों पर भाजपा का कब्जा है. कांग्रेस के पास महज एक सीट है.

एक वजह यह भी

आडवाणी यदि यहां से चुनाव लड़ते हैं तब न तो उन्हें ज्यादा मेहनत करना पड़ेगी और न ही चुनाव के बाद क्षेत्र की चिंता.

आडवाणी गांधीनगर से लड़ते हैं या भोपाल से यह जल्द तय हो जाएगा, लेकिन भोपाल में उनकी उम्मीदवारी को लेकर सरगर्मी जरूर है.

बुधवार को जब उनके नाम की घोषणा भी नहीं हुई थी तभी भोपाल की सड़कों पर आडवाणी वेलकम लिखे होर्डिंग्स नजर आने लग गए थे.

रात में जब यह खबर आई कि उन्हें गांधीनगर से ही चुनाव लड़ाया जा रहा है तब जाकर होर्डिंग्स उतारे गए.

राज्य भाजपा में इस बात पर भी मंथन शुरू हो गया है कि भोपाल से अब कौन लड़ेगा.

मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान और प्रदेश भाजपा अध्यक्ष नरेन्द्रसिंह तोमर इस बारे में चर्चा कर चुके हैं. आडवाणी के लिए भोपाल सीट छोड़ने की पेशकश करने वाले मौजूदा सांसद कैलाश जोशी भी पार्टी नेताओं से चर्चा में मशगूल हैं.

Source: Hindi News

Kushwant Singh Passes Away

भारत के दूसरे पदम विभूषण से सम्मानित जाने-माने पत्रकार, लेखक और स्तंभकार ख़ुशवंत सिंह का गुरुवार सुबह उनके दिल्ली स्थित निवास पर निधन हो गया. वो 99 साल के थे.
भारत के दूसरे सर्वोच्च नागरिक पदम विभूषण से सम्मानित जाने-माने पत्रकार, लेखक और स्तंभकार  ख़ुशवंत सिंह का गुरुवार सुबह उनके दिल्ली स्थित निवास पर निधन हो गया. वो 99 साल के थे.

खुशवंत सिंह 'योजना', नेशनल हेराल्ड, हिन्दुस्तान टाइम्स और 'दि इलेस्ट्रेटेड विकली ऑफ़ इंडिया' के संपादक रहे थे.

ख़ुशवंत को सबसे पहली ख़्याति भारत-पाकिस्तान के बंटवारे पर आधारित उपन्यास ''ट्रेन टू पाकिस्तान' से मिली.

उन्होंने 'हिस्ट्री ऑफ़ सिख' नाम से सिख धर्म का इतिहास भी लिखा जिसे काफ़ी सराहा गया.

उम्र के अंतिम पड़ाव तक वो लेखन में सक्रिय रहे. पिछले साल उनकी किताब 'खुशवंतनामा: दि लेसन्स ऑफ़ माई लाइफ़' प्रकाशित हुई थी.

वे विभिन्न अख़बारों में नियमित स्तम्भ भी लिखते रहे थे.

वे 1980 से 1986 तक राज्य सभा के सांसद थे. भारत सरकार ने उन्हें 2007 में पदम विभूषण और 1974 में पदम भूषण पुरस्कार दिया गया था. लेकिन उन्होंने 1984 में स्वर्ण मंदिर में हुए सेना के ऑपरेशन ब्ल्यू स्टार के विरोध में पदम भूषण पदक वापस कर दिया था.

Source: Latest News in Hindi

Wednesday, March 19, 2014

International Webcam Molestation Ring Busted Who Abuse Child

अमरीकी अधिकारियों ने ऑनलाइन चाइल्ड पोर्न परोसने वाले एक बड़े अंतरराष्ट्रीय गिरोह का भंडाफोड़ करने का दावा किया है.
अधिकारियों ने कहा कि इस गुप्त सदस्यता वाली वेबसाइट को चलाने वाले 14 लोगों को गिरफ़्तार किया गया है.

वेबसाइट पर मौजूद वीडियो में मौजूद क़रीब 250 बच्चों में से अधिकतर  अमरीका से हैं.

इस वेबसाइट पर 27,000 ग्राहक मौजूद थे. इनमें से कईयों पर व्यक्तिगत मामला दर्ज किया गया है.

आव्रजन और सीमा शुल्क प्रवर्तन (आइस) के उप निदेशक डैनियल रैगस्डैल ने समाचार एजेंसी रायटर को बताया, "इस एजेंसी के इतिहास में हमने इससे पहले कभी भी बाल उत्पीड़न के किसी एक मामले की जांच के दौरान इतने बड़े पैमाने पर नाबालिग पीड़ितों को नहीं पाया है."

एजेंसी ने होमलैंड सुरक्षा और अन्य एजेंसियों की सहायता से इस गिरोह का पर्दाफ़ाश किया है.

अधिकारियों ने कहा कि वीडियो में मौजूद बच्चों की उम्र तीन से 17 साल के बीच है और वे अमरीका के 39 राज्यों से हैं. कुल 251 पीड़ितों में से 23 ब्रिटेन, कनाडा, न्यूज़ीलैंड,  ऑस्ट्रेलिया और बेल्जियम के हैं.

उत्तेजना वाले वीडियोयह वेबसाइट सोशल नेटवर्क पर वीडियो साझा कर कामोत्तेजक सामग्री उपलब्ध कराती थी.

यह वेबसाइट लड़कों के  अश्लील वीडियो साझा करती थी. इन लड़कों को सोशल नेटवर्किंग के माध्यम से अपने कामोत्तेजक वीडियो देने के लिए फंसाया जाता था. कभी-कभी तो पुरुष महिला बनकर लड़कों को फंसाते थे.

गिरफ्तार संदिग्धों में शामिल 27 साल के जोनाथन जॉनसन दक्षिणी अमरीकी राज्य लूसियाना से संचालित इस अश्लील वेबसाइट के कथित प्रशासक थे.

अधिकारियों ने कहा कि जॉनसन अगर दोषी पाए जाते है तो उन्हें 20 साल की सज़ा हो सकती है.

पुलिस का कहना है कि यह अवैध वेबसाइट जून 2012 से जून 2013 तक एक गुप्त सेवा बोर्ड के टौर नेटवर्क पर संचालित होती रही. जॉनसन को जून 2013 में गिरफ़्तार किया गया था.

टौर नेटवर्क ऑनलाइन पहचान को और एक उपयोगकर्ता के स्थान को गुप्त रखता है.

साजिश का आरोपआइस साइबर अपराध केंद्र के कार्यक्रम प्रबंधक जेम्स कीलपैट्रिक ने रायटर को बताया कि इस रैकेट का भंडाफोड़ तब हुआ जब एक आइटम एक बच्चे को अमेरिकी डाक सेवा के माध्यम से भेजा गया था. इसके बाद ही जॉनसन पकड़ में आया था.

गिरफ़्तार 14 लोगों पर बाल शोषण उद्यम संचालित करने की साजिश का आरोप लगाया गया है.

अधिकारियों का कहना है, जब इस वेबसाइट को निष्क्रिय किया गया तो उस वक़्त अवैध वेबसाइट पर वेब कैमरों से बनाए गए 2,000 से अधिक वीडियो मौजूद थे जिसमें से ज़्यादातर किशोर लड़कों के थे.

आइस अधिकारियों ने आगाह किया है कि बच्चों को ऑनलाइन कामोत्तेजक सामग्री देने के लिए लालच दिया जा रहा है.

Source: Latest News in Hindi

Thursday, March 13, 2014

Delhi Gangrape Convicts Punishment Remains The Same

दिल्ली गैंगरेप मामले में हाईकोर्ट ने निचली अदालत के उस आदेश को बरक़रार रखा है जिसमें सभी दोषियों को मौत की सज़ा सुनाई गई थी. इस मामले के एक अभियुक्त की मौत हो चुकी है और एक अन्य नाबालिग़ दोषी को तीन साल की सज़ा सुनाई जा चुकी है.
दिल्ली गैंगरेप मामले में हाईकोर्ट ने निचली अदालत के उस आदेश को बरक़रार रखा है जिसमें सभी दोषियों को मौत की सज़ा सुनाई गई थी. इस मामले के एक अभियुक्त की मौत हो चुकी है और एक अन्य नाबालिग़ दोषी को तीन साल की सज़ा सुनाई जा चुकी है.

निचली अदालत ने दिल्ली गैंगरेप मामले में चार दोषियों विनय शर्मा, पवन गुप्ता, मुकेश सिंह और अक्षय ठाकुर को मौत की सज़ा सुनाई थी. इसके बाद दोषियों के वकीलों ने दिल्ली हाई कोर्ट में राहत के लिए गुहार लगाई, हालांकि हाई कोर्ट से उन्हें किसी तरह की राहत नहीं मिल सकी है.

इस मामले के एक अभियुक्त राम सिंह की तिहाड़ जेल में मौत हो चुकी है और एक अन्य नाबालिग़ दोषी को तीन साल की सज़ा पहले ही सुनाई जा चुकी है.

दिल्ली में 16 दिसंबर 2012 को चलती बस में एक मेडिकल छात्रा के साथ सामूहिक बलात्कार के इस मामले ने पूरे देश को हिला कर रख दिया था.

इन चारों पर सामूहिक बलात्कार, हत्या, हत्या के प्रयास, अप्राकृतिक कृत्य, सुबूत मिटाने और डकैती के आरोप थे.

सुप्रीम कोर्ट में अपील

निचली अदालत ने 13 सितंबर को चारों आरोपियों को दोषी पाया था और उन्हें मौत की सजा सुनाई थी.

इसके बाद दिल्ली हाई कोर्ट में न्यायमूर्ति रीवा खेत्रपाल और न्यायमूर्ति प्रतिभा रानी की पीठ ने इस मामले की रोजाना सुनवाई की. इस दौरान सरकारी वकील ने दलील दी कि इन दोषियों को अधिकतम सजा देने से समाज में यह संदेश जाएगा कि इस तरह के विकृत व्यवहार को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा.

हाई कोर्ट के आदेश के बाद बचाव पक्ष के वकील ने कहा कि वो इस मामले में आगे सुप्रीम कोर्ट में अपील करेंगे.

दूसरी ओर पीड़िता की मां ने कहा कि वो इस फैसले से खुश हैं और उन्हें आगे भी न्याय मिलने की उम्मीद है.

इससे पहले निचली अदालत ने अपने फ़ैसले में कहा था, "अदालत ऐसे अपराधों की तरफ आंख नहीं मूंद सकता. इस हमले ने समाज की अंतरआत्मा की आवाज़ को स्तब्ध कर दिया था. ये मामला सचमुच अपवाद का है और इसमें मृत्यु दंड ही दिया जाना चाहिए."

Source: Online Hindi Newspaper

Between Modi And Mayawati I Will Choose Narendra Modi Says Kejriwal

जब पीएम पद के उम्मीदवार की बात हुई तो आम पार्टी के प्रमुख अरविंद केजरीवाल को भी नरेंद्र मोदी का नाम लेना पड़ा.
मायावती की जगह मोदी
लोक सभा चुनाव से पहले राजनीतिक पार्टियों को कारोबारी समुदाय की अहमियत का अंदाजा होने लगा है. यही वजह रही कि आम आदमी पार्टी (आप) के प्रमुख अरविंद केजरीवाल को भी प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार के लिए मायावती की जगह नरेंद्र मोदी का नाम लेना पड़ा. मुंबई में फाइनेंशियल मार्केट के दिग्गजों के साथ हुई बैठक में उन्होंने इस बात को स्वीकारा. एक अंग्रेजी अखबार में प्रकाशित खबर के मुताबिक, अरविंद केजरीवाल ऐसा तभी करेंगे जब उनके सिर पर कोई बंदूक रख देगा.

मजबूरी में लूंगा मोदी का नाम
यह बात उन्होंने तब कही जब गुजरात अंबुजा के पूर्व प्रबंध निदेशक और निवेशी सलाहकार कंपनी आईकैन एडवाइज के सीईओ अनिल सिंघवी ने उनसे मोदी पर सवाल पूछा. निवेशकों के साथ हुई अपनी पहली बैठक के दौरान केजरीवाल ने कहा कि 2014 के चुनाव से केंद्र में कोई निर्णायक जनादेश नहीं आने वाला. इस पर सिंघवी ने उनसे पूछा कि वह मोदी और मायावती में से किसे चुनेंगे. सिंघवी ने ईटी को बताया कि पहले तो केजरीवाल ने किसी को भी नहीं चुना. लेकिन जब उनसे कहा गया कि देश को प्रधानमंत्री की जरूरत तो है ही, तब उन्होंने कहा कि अगर मजबूरी में चुनना पड़ेगा तो वो मोदी का नाम लेंगे. हालांकि, केजरीवाल ने अपनी पसंद का कोई औचित्य नहीं बताया. केजरीवाल के टिप्पणी से सिंघवी काफी प्रभावित हुए क्योंकि वह सोचते हैं कि दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री जिन्होंने कारोबारी समुदाय के बारे में ज्यादा नहीं सोचा है वह ईमानदार तो हैं. स्टॉक ब्रोकर रामदेव अग्रवाल भी उस बैठक में मौजूद थे, उन्होंने भी केजरीवाल के भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलन की तारीफ की.

अपनी ईमेज खराब नहीं कर सकते
एक अन्य अंग्रेजी वेबसाइट में कहा गया है कि केजरीवाल अब बिजनेस समुदाय में अपनी ईमेज खराब नहीं कर सकते. याद रहे कि आप की आर्थिक नीतियों की वजह से शेयर बाजार गंभीर चिंतन में चला गया था जोकि भारतीय अर्थव्यवस्था पर नकारात्मक प्रभाव डाल सकता है. एक बात यह भी कही गई कि केजरीवाल अब बिजनेस समुदाय में मोदी के असर को कम करना चाहते हैं. कई उद्योगपति केजरीवाल की भ्रष्टाचार विरोधी कदमों की सराहना पहले ही कर चुके हैं, तो अब उनकी यह टिप्पणी बिजनेस समुदाय के बीच कारगर साबित हो सकती है. इस टिप्पणी से यह भी साबित हो जाता है कि आप एक राजनीतिक पार्टी है. कोई राजनीतिक पार्टी भारत में बिजनेस समुदाय के सहयोग के बिना आगे नहीं बढ़ सकती. यह सच्चाई आम आदमी पार्टी को भी समझ आ गई है. यही वजह रही कि केजरीवाल ने बैठक में मौजूद निवेशकों से पार्टी के चुनाव अभियान में भागीदारी लेने की इच्छा जताई.

Source: Hindi News

Wednesday, March 12, 2014

Tabu And Shahid Will Be Romancing Each Other

विकास बहल की नयी फिल्म में तब्बू और शाहिद कपूर की जोड़ी रोमांस करती नजर आ सकती है.

फिल्म 'चिल्लर पार्टी' से अपना डायरेक्शन डेब्यु करने वाले विकास बहल इन दिनों काफी खुश हैं. हों भी क्यों  ना उनकी लेटेस्ट रिलीज फिल्म 'क्वीन' को काफी एप्रिशिएट किया जा रहा है. अपनी फर्स्ट फिल्‍म के बाद लंबा गैप लेकर फिल्म बनाने के बावजूद विकास ने अपने व्यूअर्स को डिसएप्वाइंट नहीं किया. खैर अब अगर बॉलिवुड से आ रही खबरों की मानें तो इस बार विकास इतना लंबा इंतजार कराने के मूड में नहीं हैं और अपना अगला प्रोजेक्ट जल्दी शुरू करने के लिए एकदम रेडी हैं.

सुनने में आया है कि विकास की थर्ड फिल्म की ना सिर्फ स्क्रिप्ट बिलकुल रेडी है बल्कि उन्होंने स्टार कास्ट भी फाइनल कर ली है. 'रिर्टन गिफ्ट' टाइटल से बनने वाली इस फिल्म में तब्बू और शाहिद कपूर लीड रोल में नजर आयेंगे और जल्दी  ही फिल्म की शूटिंग स्टार्ट हो जाएगी. शाहिद और तब्बू स्‍क्रीन बिना शक एक डिफरेंट और यूनीक कपल होंगे और ये देखना इंट्रस्टिंग होगा कि इस बार विकास क्या कमाल दिखाने वाले हैं. फिल्हाल विकास ने अपने नए प्रोजेक्ट के बारे में कुछ भी बताने से इंकार कर दिया है. 

We Will Take The Revenge Of Maoist Attack Says Shinde

केंद्रीय गृहमंत्री सुशील कुमार शिंदे ने कहा है कि माओवादियों से जवानों की हत्या का बदला लिया जाएगा.
उन्होंने मंगलवार को हुए माओवादी हमले की एनआईए से भी जांच कराने की घोषणा की.

बस्तर में माओवादी हमले के बाद छत्तीसगढ़ प्रवास पर पहुंचे गृहमंत्री ने माओवादियों के ख़िलाफ़ हवाई हमले की बात से इनकार नहीं किया और कहा कि रणनीतियां उजागर नहीं की जा सकतीं.

ग़ौरतलब है कि मंगलवार को माओवादियों ने बस्तर के झीरमघाटी इलाक़े में हमला करके सुरक्षा बल के 15 जवानों समेत 16 लोगों की हत्या कर दी थी.

पुलिस के 40 जवान सड़क निर्माण में लगे लोगों की सुरक्षा के लिए निकले थे, तभी माओवादियों ने उन पर हमला किया था.

हमले में घायल तीन जवानों को राजधानी रायपुर के निजी अस्पतालों में भर्ती कराया गया है.

पुलिस की मदद कर जान गंवानेवाला 'नक्सली' था

'हताश हैं माओवादी'बुधवार सुबह रायपुर से जगदलपुर पहुंचे सुशील कुमार शिंदे ने सबसे पहले मारे गए जवानों को श्रद्धांजलि दी.

उसके बाद उन्होंने राज्य के राज्यपाल शेखर दत्त, मुख्यमंत्री रमन सिंह, राज्य के गृहमंत्री रामसेवक पैंकरा समेत आला अफ़सरों के साथ बैठक की.

सुशील कुमार शिंदे ने पत्रकारों से बातचीत में कहा कि माओवादी हताश हैं, इस कारण इस तरह की कार्रवाई कर रहे हैं.

उन्होंने कहा, “हम अपने जवानों की शहादत का बदला लेंगे.”

शिंदे ने बस्तर में बैठक के बाद कहा कि  नक्सल हिंसा का मुक़ाबला करने के लिए राज्य पुलिस और केंद्रीय सुरक्षा बल आपसी समन्वय से बहादुरी के साथ काम कर रहे हैं. इस वजह से नक्सली बौखला गए हैं और बौखलाहट में इस प्रकार की घिनौनी और कायरतापूर्ण हिंसा कर रहे हैं.

खुफ़िया जानकारी थी?नक्सल समस्या ख़त्म करने के लिए केंद्र की ओर से उन्होंने मुख्यमंत्री को हरसंभव सहयोग जारी रखने का आश्वासन दिया.

रायपुर में भी पत्रकारों से बातचीत में शिंदे ने दुहराया कि नक्सलियों की सक्रियता की ख़बर खुफ़िया विभाग को थी. लेकिन सही-सही स्थान की जानकारी न होने से यह दुखद घटना घटी है.

उन्होंने कहा, “जिस तरह से यह हमला हुआ है, उसका बदला ज़रूर लिया जाएगा. हमारे सभी जवान, चाहे स्टेट के हों या सेंटर के, वे ज़रूर इसका बदला लेंगे.”

पत्रकारों द्वारा यह कहे जाने पर कि गृहमंत्री बार-बार ऐसी बातें कहते हैं, शिंदे ने कहा- “हम पहली बार यह बात कह रहे हैं.”

उन्होंने केंद्र और राज्य के बीच तालमेल के अभाव को लेकर कहा कि इस बारे में बात हुई है और हमारी कोशिश है कि और बेहतर तालमेल स्थापित हो.

Source: Hindi News

Amazing Facts About Animals Of Our World

एक आम मनुष्य दिन में छह से आठ घंटे सोता है लेकिन क्या आप जानना चाहेंगे अलग अलग जानवर दिन में कितना समय सोने में बिताते हैं.
न केवल सोना बल्कि कुछ जानवर सपने भी देखते हैं. मनुष्यों ने जानवरों के दिमाग पर और सोने की प्रवृत्ति पर अब तक कम ही जानकारी जुटाई है.

पिछले दिनों कुछ विशेषज्ञों और फिल्ममेकरों ने मिलकर बीबीसी फोर के लिए एक डॉक्यूमेंट्री बनाई जिसका विषय ही जानवरों के सोने से जुड़ा हुआ था और इसमें जो जानकारियां निकल कर आईं वो अचंभित करने वाली थीं.

जंगलों में पाए जाने वाले जानवर स्लॉथ के बारे में आम धारणा है कि वो हमेशा सोता रहता है और इसी से शायद अंग्रेज़ी में स्लाथ का अर्थ आलसी से है.

लेकिन अब पता चला है कि स्लॉथ दिन में केवल नौ से दस घंटे ही सोते हैं.

ऑस्ट्रेलिया में पाए जाने वाले जानवर कोआला दिन में 14.5 घंटे आंखें बंद रखते हैं जबकि सबसे अधिक सोते हैं चमगादड़. जी हां. चमगादड़ दिन में 20 घंटे सोते हैं.

सबसे कम नींद लेने वाले जानवरों में वो जानवर हैं जो चरते हैं. इसमें भी सबसे कम सोने वाले हैं ज़िराफ और हाथी जो केवल तीन या चार घंटे सोते हैं एक दिन में.

शेर जैसे बड़े जानवर यूं तो दिखने में आलसी से लगते हैं और आम धारणा के अनुसार वो 20-22 घंटे सोते हैं जबकि ये सही नहीं है.

बिल्लियों की तर्ज पर शेर भी छोटी छोटी नींदे लेते हैं.

दक्षिण अफ्रीका में हुए शोध में पता चला है कि शेर दिन में केवल 14 घंटे ही सोते हैं.

व्हेल के सपने

जानवर सोते हैं और कई सोते में सपने भी देखते हैं. व्हेल मछली इन्हीं में से एक है.

जानवर जिसमें मनुष्य भी शामिल है उसकी नींद और सपने का पता आंखों की पुतलियों की गति से पता लगाया जा सकता है लेकिन व्हेल या किसी भी पानी में रहने वाले जीव की पुतलियां हमेशा गतिमान रहती हैं क्योंकि उन्हें पानी में रहना होता है.

सेंट एंड्रयूज़ यूनिवर्सिटी के डॉ पैट्रिक मिलर के नेतृत्व में एक दल ने व्हेल मछलियों के सोने पर शोध किया जिससे पता चला कि कुछ व्हेल अपना सर पानी से ऊपर रख कर आराम करते हैं और इस दौरान सोते हैं और सपने भी देखते हैं.

समुद्री पक्षियों की नींद

एक और अवधारणा है कि समुद्री पक्षी अल्बटरॉस अपनी लंबी दूरी की उड़ानों में सो जाते हैं.

ये पक्षी समुद्री के ऊपर घंटों उड़ते रह सकते हैं.

हाल में किए गए शोध के मुताबिक ये पक्षी अपने पंखों की खास बनावट की वजह से घंटों हवा में रह सकते हैं लेकिन ऐसे में सोना संभव नहीं है.

पक्षी विज्ञान के क्षेत्र में काम कर रहे मैक्स प्लैंक इंस्टीट्यूट के डॉ नील्स रैटनबर्ग कहते हैं, ‘’ आसमान में लंबे समय तक उड़ते रहने में नींद की संभावना कम होती है बनिस्पत पानी के नज़दीक उड़ने में. शायद तभी रात के समय ये पक्षी पानी के नज़दीक घंटो उड़ते रहते हैं.’’

कुछ और शोधों के अनुसार ये पक्षी अपनी उड़ान के दौरान बिल्कुल नहीं सोते हैं

Source: Online Hindi Newspaper

Chhattisgarh Naxalies Attack

छत्तीसगढ़ के लगभग सभी अख़बारों में माओवादी हमले की ख़बर छाई हुई है.
सभी अख़बारों ने इस ख़बर को प्रमुखता से तस्वीरों के साथ प्रकाशित किया है. अधिकांश अख़बारों में विशेष संपादकीय लिखे गए हैं.

राजधानी रायपुर के लगभग सभी अख़बारों ने अपने शीर्षक में पिछले साल कांग्रेस की परिवर्तन यात्रा पर हुए हमले से ताज़ा घटनाक्रम को जोड़ा है, क्योंकि दोनों हमले एक ही इलाक़े झीरम घाटी में हुए हैं.

दैनिक नवभारत के बैनर का शीर्षक है- झीरमघाटी फिर हुई लाल. वहीं दैनिक भास्कर ने भी अपने बैनर में पुरानी घटना का उल्लेख करते हुए मारे गए एक जवान की तस्वीर लगाई है.

अख़बार ने शीर्षक लगाया है-'मौत की घाटी झीरम, 16 शहीद.'

कुछ अख़बारों के स्वर में तल्ख़ी भी है. राजस्थान पत्रिका समूह के अख़बार पत्रिका ने शीर्षक लगाया है- 'झीरम-2 माओवादी हमले में 16 शहीद. पुलिस का दावा, हमें सूचना थी, बड़ा सवाल कुछ किया क्यों नहीं ?'

सवाल दर सवाल

अख़बार ने लिखा है, "वारदात के बाद पुलिस ने दावा किया कि माओवादी घटना के संबंध में पिछले एक सप्ताह में चार बार अलर्ट जारी किया गया था, लेकिन सवाल यह है कि यदि पुलिस को सूचना थी तो माओवादियों को मार गिराने या हमले को रोकने के लिये महकमे ने क्या किया?"

दैनिक भास्कर ने अपने अंदर के पन्ने पर 'पीएचक्यू के सारे तोपची भिड़े ख़ुद को बचाने में' शीर्षक से गंभीर सवाल खड़े करते हुए लिखा है कि इस घटना के बाद पुलिस मुख्यालय में उथल-पुथल मच गई.

अख़बार लिखता है-"लेकिन उथल-पुथल सिर्फ़ ये साबित करने के लिए थी कि मुख्यालय ने अपना काम किया था और सुकमा-जगदलपुर के एसपी को चिट्ठियां भेज दी थीं कि झीरम घाटी और आसपास हमले को लेकर अलर्ट रहें."

चुनावी माहौल में दैनिक हरिभूमि ने अपने पहले पन्ने पर राजनेताओं के बयान प्रमुखता से प्रकाशित किए हैं.

नई दुनिया ने भी पूर्व मुख्यमंत्री अजीत जोगी और नेता प्रतिपक्ष भूपेश बघेल के बयानों को जगह दी है. अग्रेज़ी अख़बार द हितवाद ने पहले पन्ने पर दो ख़बरें लगाई हैं.

पहली ख़बर घटना की सूचना की है और दूसरी ख़बर मुख्यमंत्री के दिल्ली दौरे को रद्द कर आपात बैठक करने से संबंधित है.

राज्य के अधिकांश अख़बारों ने विशेष संपादकीय लिखे हैं और अपनी चिंता व्यक्त की है.

हालांकि टिप्पणियों के लिए प्रसिद्ध देशबन्धु में पहले पन्ने पर एक बड़ी ख़बर के अलावा न तो कोई विशेष टिप्पणी है और ना ही कोई संपादकीय या अग्रलेख.

'एजेंडा लहूलुहान बस्तर'


नई दुनिया ने पहले पन्ने पर 'एजेंडा लहूलुहान बस्तर' शीर्षक से अख़बार के संपादक रुचिर गर्ग की त्वरित टिप्पणी प्रकाशित की है.

नक्सल मामले पर सरकार की नीति पर पुनर्विचार की बात करते हुए रुचिर गर्ग ने इस टिप्पणी में लिखा है, "नक्सल हमलों को कायराना कहने के औपचारिक बयानों के बजाए नक्सल इलाक़ों की उस जनता के सामने एक ठोस नक्सल नीति रखी जाए, जिससे उसकी उम्मीदें इसी लोकतंत्र पर कायम रहें."

रुचिर गर्ग ने लिखा है कि अगर जनता की उम्मीदें टूटीं तो इन सरकारों को अपनी नीतियों का बोरिया-बिस्तर सहेजने के लिए रायपुर से लेकर दिल्ली तक सुरक्षित स्थान तलाशना होगा.

इसी तरह पत्रिका ने सुलगते सवाल से छह पुरानी घटनाओं का उल्लेख किया है और साथ ही 'ख़ून की होली आख़िर कब तक' शीर्षक से गोविन्द चतुर्वेदी की विशेष टिप्पणी प्रकाशित की है.

नवभारत अख़बार ने भी संपादक श्याम वेताल की तल्ख टिप्पणी 'ख़ुफ़िया तंत्र के कारण एक और कलंक' शीर्षक से प्रकाशित की है.

दैनिक भास्कर के संपादक आनंद पांडेय ने 'न ख़ौफ़ जा रहा, न भरोसा आ रहा' शीर्षक से पहले पन्ने पर प्रकाशित विश्लेषण में लिखा है, "सरकारें चाहे जो दावा करें, लेकिन असलियत यही है कि नक्सलियों की जानकारी जुटाने में हमारे ख़ुफ़िया विभाग पूरी तरह नाकाम रहे हैं.''

Source: Online Hindi Newspaper

Kumar Vishwas And Shazia Ilmi Now Turned As Rebellion For AAP

आम आदमी पार्टी में बगावत की लहर यूं तो कोई नई बात नहीं रह गई है. गौर करने वाली बात ये है कि पार्टी को लीड करने वाले कुमार विश्वास और शाजिया इल्मी जैसे नेताओं से बगावत की बू आखिर पार्टी की सारी टिकटों का फैसला होने से पहले ही क्यों आ रही है.
बगावत को मोदी से जोड़ा
त्याग की राजनीति करने का दावा करने वाली नई-नवेली आम आदमी (आप) का तिलिस्म पूरी तरह टूट गया है. लोकसभा चुनाव के लिए अभी पार्टी की सारी टिकटों का फैसला हुआ भी नहीं और इसके शीर्ष नेताओं ने बगावती तेवर अपना लिए हैं. पार्टी संयोजक अरविंद केजरीवाल ने जिसे कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी के खिलाफ मोर्चा लेने के लिए चुना था, वो कुमार विश्वास अब खुद पार्टी पर ही सवाल खड़ा कर रहे हैं. इसी तरह टीम केजरीवाल की सबसे खास सदस्य शाजिया इल्मी भी लोकसभा टिकट नहीं मिलने के बाद बगावती हो चली हैं. उधर केजरीवाल ने भी सख्त तेवर दिखाते हुए इन बगावतों को नरेंद्र मोदी पर किए उनके ताजा हमलों से जोड़ दिया.

केजरीवाल के पास कोई सफाई नहीं

मंगलवार का दिन केजरीवाल के बचे-खुचे दावों की भी पोल खोल देने वाला था. पार्टी में टिकट के बंटवारे को लेकर कुमार विश्वास ने अपनी नाराजगी जनता के सामने जता दी. उन्होंने बकायदा ट्वीट करके कहा कि 'उफनती नदी में अगर गंदे नाले आकर मिलेंगे तो आस्थावान स्नान करने से भी डरेगा.' उनके नजदीकी सूत्रों के मुताबिक पार्टी में टिकट बंटवारे को लेकर उन्होंने कई बार केजरीवाल और संजय सिंह से बात करने की कोशिश की. लेकिन उनकी बातों को कोई तवज्जो नहीं दी गई. कई ऐसे लोगों के नाम चुन लिए गए, जिन पर पार्टी में सीधे सवाल खड़े होंगे. इसके बारे में केजरीवाल के पास भी कोई सफाई नहीं थी.

नहीं झुकने वाले
केजरी
इसी तरह दिल्ली से लोकसभा चुनाव लड़ना चाह रहीं शाजिया इल्मी भी टिकट नहीं दिए जाने से बेहद नाराज हैं. इसी नाराजगी में उन्होंने कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के खिलाफ रायबरेली से चुनाव लड़ने से इन्कार कर दिया है. हालांकि उन्होंने ट्वीट कर कहा है कि वे खुद ही दिल्ली से चुनाव नहीं लड़ना चाहती थीं. दूसरी तरफ केजरीवाल ने भी तेवर कड़े कर लिए हैं. उन्होंने तय कर लिया है कि इल्मी हो या विश्वास वो झुकेंगे नहीं. इनके विद्रोह की बात सामने आते ही उन्होंने रात को ट्वीट किया कि 'जबसे मैंने सीधे नरेंद्र मोदी पर हमला किया है बहुत रोचक तरीके से चीजें सामने आ रही हैं. बहुत से रिश्ते नए अर्थ ले रहे हैं लेकिन सच्चाई की जीत होगी. उनके करीबी सूत्रों का कहना है कि इस बात पर कोई समझौता नहीं होगा.

Mamata National Campaign To Start From Delhi

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री और तृणमूल कांग्रेस की सुप्रीमो ममता बनर्जी को आम बोलचाल में ‘दीदी’ कहा जाता है जबकि तमिल में ‘अन्ना’ बड़े भाई को.
राष्ट्रीय राजनीति में तृणमूल कांग्रेस का असर बढ़ाकर लोकसभा चुनावों के बाद किंगमेकर बनने की मंशा से ममता बनर्जी और जाने-माने सामाजिक कार्यकर्ता अन्ना हज़ारे की औपचारिक जुगलबंदी बुधवार को दिल्ली की रामलीला मैदान में होने वाली रैली से शुरू होगी.

कम से कम तृणमूल कांग्रेस के नेता तो इस जुगलबंदी की यही व्याख्या कर रहे हैं.

यह ज़रूर है कि जामा मस्जिद के शाही इमाम सैयद अहमद बुख़ारी के रैली में शामिल होने से इंकार ने ममता के इस मक़सद को कुछ झटका लगा है.

बुख़ारी और  अन्ना के साथ मंच साझा कर ममता ने एक तीर से कई शिकार करना चाहती थीं. लेकिन इमाम ने इस पर पानी फेर दिया.

मुसलमानों पर नज़र
बंगाल की आबादी में 27 प्रतिशत मुसलमान हैं. लोकसभा की कम से कम दस सीटों पर वे निर्णायक स्थिति में हैं. इनके भारी समर्थन ने ही ममता को पिछले विधानसभा चुनावों में गद्दी दिलाई थी.

इस बार केंद्र सरकार के गठन में निर्णायक भूमिका निभाने का सपना देख रहीं  दीदी पूरे देश में अपने सांसदों की तादाद बढ़ाना चाहती हैं. इसलिए पहले उन्होंने अन्ना को अपने पाले में किया और फिर शाही इमाम को मनाया.

लेकिन अब राज्य के मुसलमान ही ममता की मंशा पर सवाल खड़ा करने लगे हैं.

हुगली ज़िले के फुरफुराशरीफ़ में इस सप्ताह एक धार्मिक आयोजन के दौरान राज्य के अलावा देश के दूसरे राज्यों से कोई 40 लाख अल्पसंख्यक जुटे थे.

फुरफुराशरीफ़ के पीर तोहा सिद्दिक़ी ने उनके सामने ही तृणमूल सरकार पर अपने वायदों से मुकरने का आरोप लगाया.

अल्पसंख्यकों को लुभाने की क़वायद के तहत लगभग सभी प्रमुख दलों के नेता बारी-बारी वहां गए थे. लेकिन वहां तोहा ने तृणमूल सांसदों और मंत्रियों के सामने ही सरकार की मंशा पर सवाल खड़ा कर दिया.

ममता की देशव्यापी मुहिम

साथ ही उन्होंने यह सवाल भी दाग़ दिया कि कहीं सत्ता के लिए तृणमूल कांग्रेस बाद में भाजपा के साथ हाथ तो नहीं मिला लेगी?

तोहा का कहना है कि तृणमूल कांग्रेस ने अल्पसंख्यकों के नाम पर जिन सात मुसलमान नेताओं को टिकट दिए हैं उनमें से चार-पांच के जीतने की भी संभावना नहीं है. ऐसे में यह तुष्टिकरण के अलावा कुछ नहीं है.

चुनावों के बाद एक निर्णायक ताक़त के तौर पर उभरने की अपनी मुहिम के तहत ही ममता ने देश के विभिन्न हिस्सों में तृणमूल कांग्रेस उम्मीदवारों को मैदान में उतारा है या उतारने की तैयारी में हैं.

उनकी यह देशव्यापी मुहिम दिल्ली की रैली से ही शुरू होगी. हालांकि शाही इमाम के इसमें शामिल होने से इंकार करने की वजह से तृणमूल को कुछ झटका लगा है. लेकिन पार्टी के नेता लगातार इमाम के संपर्क में हैं. एक नेता कहते हैं, "अभी उनके आने की संभावना बनी हुई है."

दिल्ली की सीटों पर उम्मीदवारों के चयन के मामले में भी अभी असमंजस क़ायम है.

अन्ना से कितना फ़ायदा?

तृणमूल कांग्रेस के एक नेता नाम नहीं छापने की शर्त पर कहते हैं, अन्ना की हरी झंडी मिलने के बाद नामों का एलान किया जाएगा. पहले रैली के दौरान ही इसका एलान होना था. लेकिन अब यह मामला कुछ दिनों के लिए टल सकता है.

दिल्ली की रैली के बाद ममता सीधे उत्तर प्रदेश चली जाएंगी. प्रधानमंत्री पद पर  नरेंद्र मोदी की दावेदारी का विरोध कर चुकी ममता उनके घर अहमदाबाद में भी अन्ना के साथ एक चुनावी रैली को संबोधित करेंगी.

तृणमूल के एक वरिष्ठ नेता कहते हैं, "हम रामलीला मैदान में एक लाख से ज़्यादा लोगों को जुटाने का प्रयास कर रहे हैं. अन्ना का साथ हमारे लिए बेहद अहम है."

इस बीच, अन्ना ने साफ़ कर दिया है कि उन्होंने एक मुख्यमंत्री के तौर पर ममता बनर्जी के आदर्शों का समर्थन किया है, उनकी पार्टी तृणमूल कांग्रेस का नहीं. उन्होंने किसी ख़ास उम्मीदवार के पक्ष में चुनाव प्रचार करने के लिए भी मना कर दिया है.

अपील का असर

हां, वह बंगाल में पार्टी की ओर से आयोजित कम से कम दो चुनावी रैलियों में शिरकत ज़रूर करेंगे. तृणमूल कांग्रेस के नेताओं की दलील है कि अन्ना उन रैलियों के ज़रिए ही पार्टी को जिताने की अपील करेंगे. उनकी अपील का ख़ासा असर होगा.

दूसरी ओर, विपक्षी राजनीतिक दलों का दावा है कि अन्ना के समर्थन से ममता के मंसूबे पूरे नहीं होंगे. कांग्रेस के वरिष्ठ नेता मानस भुंइया कहते हैं, "अन्ना के समर्थन से तृणमूल के पक्ष में कोई लहर नहीं पैदा होने वाली."

उल्टे ममता की अन्ना से नज़दीकी ने जामा मस्जिद के शाही इमाम को नाराज़ कर दिया है.

सीपीएम के पूर्व मंत्री अशोक भट्टाचार्य कहते हैं, "संघ से अन्ना की नज़दीकी के आरोपों की वजह से ही अल्पसंख्यक इस बार तृणमूल कांग्रेस को सवालिया निगाहों से देख रहें हैं. ऐसे में दीदी-अन्ना की जुगलबंदी कोई ख़ास कमाल नहीं दिखा पाएगी. यह महज़ एक चुनावी स्टंट है."

विपक्ष चाहे कुछ भी कहे और अन्ना भले सिर्फ़ ममता का समर्थन करने की बात कहें, इस जुगलबंदी से तृणमूल कांग्रेस के नेताओं और समर्थकों के हौसले तो बुलंद हैं ही.

Source: Online Hindi Newspaper

Tuesday, March 11, 2014

We Dont Have Any Grudges With BJP Says Shivsena

शिवसेना ने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के साथ मतभेद की ख़बरों का खंडन किया है.
पार्टी के मुख पत्र 'सामना' में कहा गया है कि भाजपा के साथ शिवसेना का गठबंधन पहले की ही तरह मज़बूत है.

पार्टी ने भाजपा के प्रधानमंत्री पद के दावेदार और गुजरात के मुख्यमंत्री  नरेंद्र मोदी की तारीफ़ करते हुए कहा है कि आज उन्हें पूरे देश में समर्थन मिल रहा है.

मुखपत्र में कहा गया है, "यहां तक कि कल तक जो लोग उनकी आलोचना करते थे, वे भी आज मोदी-मोदी का मंत्र जप रहे हैं. समय बदलने का इससे बड़ा कोई सबूत नहीं है."

चुनाव पर नज़र
"भाजपा के साथ शिवसेना का गठबंधन पहले की ही तरह मज़बूत बना हुआ है"
-शिव सेना के मुखपत्र सामना का संपादकीय

शिवसेना अध्यक्ष उद्धव ठाकरे के चचेरे भाई राज ठाकरे को निशाना बनाते हुए पार्टी ने कहा है कि 'कुछ लोगों की गठबंधन तोड़ने और हिंदू वोटों को बांटने की कोशिशें बेकार हो गई हैं. कुछ समय के लिए मतभेद तो रहता है. लेकिन गठबंधन बचा हुआ है'.

भाजपा से मतभेद की ख़बरों पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए शिवसेना नेता राहुल नावरेकर ने कहा, ''हम चुनाव पर ध्यान लगा रहे हैं और इसके पहले क्या हुआ यह अतीत की बात है.''

इस बीच ऐसी ख़बरें हैं कि उद्धव ठाकरे मंगलवार दोपहर पार्टी पदाधिकारियों और मुंबई से शिवसेना के उम्मीदवारों की एक बैठक लें. इसमें वह गठबंधन में दरार संबंधी ख़बरों पर चर्चा कर सकते हैं.

भाजपा के महाराष्ट्र प्रभारी राजीव प्रताप रूड़ी के भी मंगलवार को उद्धव ठाकरे से मिलने की संभावना है.

भाजपा नेता नितिन गडकरी और महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना ( एमएनएस) के प्रमुख राज  ठाकरे के बीच पिछले हफ़्ते हुई बैठक के बाद भाजपा-शिवसेना गठबंधन में तनाव की ख़बरें मीडिया में आई थीं.

गठबंधन पर असर

भाजपा नेता नितिन गडकरी ने एमएनएस प्रमुख राज ठाकरे से मुलाक़ात की थी

इस पर प्रतिक्रिया देते हुए शिवसेना ने कहा था कि एमएनएस के साथ भाजपा की किसी भी तरह की बातचीत से भाजपा-शिवसेना का गठबंधन प्रभावित हो सकता है.

शिवसेना नेता संजय राउत ने कहा था, ''अगर हमारे सहयोगी राकांपा या कांग्रेस की तारीफ़ करेंगे तो इससे हमारे हित प्रभावित होंगे. अगर भाजपा नेता राज या राकांपा से बात करते हैं तो यह हमारे गठबंधन को प्रभावित करेगा.''

गडकरी से मिलने के बाद राज ठाकरे ने अपने उम्मीदवारों की सूची जारी कर दी थी और कहा था कि उनकी पार्टी प्रधानमंत्री पद के लिए नरेंद्र मोदी का समर्थन करेगी.

भाजपा ने उनका आभार जताते हुए कहा था कि महाराष्ट्र में उनका शिवसेना के साथ मज़बूत गठबंधन है. गडकरी ने उनसे एनडीए के अन्य उम्मीदवारों की मदद करने की अपील की थी.

उत्तर प्रदेश की 80 लोकसभा सीटों के बाद महाराष्ट्र में सबसे अधिक 48 सीटें हैं. वहां पर सत्तारूढ़ कांग्रेस का राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) के साथ और भाजपा का शिवसेना के साथ गठबंधन है.

Source: Hindi News Headlines