Saturday, December 6, 2014

After purification of the foam and the pollution of river water is black

शहर के सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांटों (एसटीपी) में गंदे पानी के शोधन का काम बिलकुल ठीक नहीं चल रहा। गंगा प्रदूषण नियंत्रण इकाई के अफसरों की लापरवाही की बानगी 'दैनिक जागरणÓ टीम ने देखी। नैनी में 20 एमएलडी की एक एसटीपी बंद मिली और जो एसटीपी चल रही थी, वह भी पूरी क्षमता से काम नहीं कर रही थी। वहीं बक्शी बांध स्थित एसटीपी में भी गंदा पानी गंगा में जाता मिला।

नैनी एसटीपी की क्षमता 80 एमएलडी की है। जागरण टीम दोपहर करीब ढाई बजे यहां पहुंची तो 20 एमएलडी वाला एसटीपी बंद मिला। 60 एमएलडी वाला एसटीपी चल रहा था लेकिन उसमें से एक एसटीपी खराबी के कारण बंद था। जिस टैंक (एफएसटी) में गंदा पानी शोधन के लिए एकत्र होता है, उस एकत्र पानी के शोधन के लिए नौ एरिएटर लगे हैं। इसमें से नियमत: चौबीस घंटे छह एरिएटर चलने चाहिए, लेकिन दैनिक जागरण की टीम को मौके पर पांच ही एरिएटर चलते मिले। इस एसटीपी पर पानी के शोधन के बाद खेतों की सिंचाई के लिए दस पंपों से पानी पंप होना चाहिए, मगर तीन पंप ही चालू हालत में मिले। उधर, जब इस लापरवाही के बारे में महाप्रबंधक आरके त्रिपाठी को जानकारी दी गई, उन्होंने दावा किया कि सुबह छह से 11 और शाम पांच से सात बजे तक 'पीक आवर्सÓ में सभी मशीनें चलती हैं।

उधर, दैनिक जागरण की टीम बक्शी बांध एसटीपी पर दिन में करीब 12 बजे पहुंची। यहां तीन में से दो मशीनें (ब्लोअर) चलती मिलीं। एक स्टैंड बाई में था। उस समय मौजूद सहायक अभियंता रोहित चौरसिया ने बताया कि 29 एमएलडी क्षमता वाले इस एसटीपी में लगभग 35 एमएलडी पानी का दबाव रहता है, जिससे पानी का शोधन मानक के अनुरूप नहीं हो पा रहा है। यही वजह है कि शोधन के बाद भी पानी में जबर्दस्त झाग निकलता मिला। श्री चौरसिया ने बताया कि यहां से निकल रहा पानी सीधे गंगा में जाकर पानी को कॉस्टिक युक्त और काला बना रहा है। वहां मौजूद अन्य अधिकारियों ने सफाई दी कि सलोरी की ओर से पानी का बहाव ज्यादा हो रहा है। पीक आवर्स में दो मशीनें चलती हैं। पानी कम होने पर एक मशीन चलती है।

साइबेरियन पक्षी की हादसे में हुई थी मौत-

संगम में बुधवार को हुई साइबेरियन पक्षी की मौत के कारण का खुलासा शुक्रवार को हो गया। गंगा जल के प्रदूषित होने की वजह से मचा हंगामा अभी ठंडा नहीं हुआ कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट ने नया मोड़ दे दिया।

वन विभाग ने पोस्टमार्टम रिपोर्ट के हवाले से साइबेरियन पक्षी की मौत की

वजह हादसा बताया है। उसके लीवर में खून के थक्के भी जमे हुए थे। करीब

एक महीने से संगम में मछलियों और साइबेरियन पक्षियों के मरने का

सिलसिला चल रहा है। दो बार साइबेरियन पक्षियों की मौत हो चुकी है,

जबकि मछलियां तो कई बार मर चुकी हैं। चूंकि, मछलियों का पोस्टमार्टम नहीं हो सकता है इसलिए उनकी मौत का राज नहीं खुल सका। पहली दफे चार

साइबेरियन पक्षियों के कुत्तों द्वारा निगल लिए जाने के कारण उनकी भी मौत का राजफाश नहीं हो सका था। लेकिन बुधवार को जब फिर एक साइबेरियन पक्षी की मौत हुई तो कमिश्नर और डीएम के निर्देश पर वन विभाग ने उसका पोस्टमार्टम

कराया। शुक्रवार को पोस्टमार्टम रिपोर्ट आ गई।

पानी के साथ बालू भी लाल-

दारागंज से लेकर संगम की तरफ गंगा के पानी के साथ बालू का भी रंग लाल हो गया है। बालू का रंग लाल देख शुक्रवार को श्रद्धालु, नाविक और तीर्थ पुरोहित आश्चर्यचकित हो गए। बालू का रंग वहीं लाल मिला जहां से पानी उतर गया था।

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