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Monday, February 10, 2014

Bank Employees To Go On Strike For Two Days

यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियन्स की कॉल पर यूपी बैंक इम्प्लॉइज यूनियन की ओर से बैंक कर्मियों ने इलाहाबाद बैंक से जुलूस निकाल अपनी मांगों को लेकर विरोध प्रदर्शन किया. यूनियन के मंत्री सुधीर सोनकर ने बताया कि मांगों को नहीं मानने के विरोध में 10 और 11 फरवरी को बैंक्स में राष्ट्रव्यापी हड़ताल की जा रही है. इलाहाबाद बैंक से जुलूस मॉल रोड, फूलबाग होता हुआ बिरहाना रोड पीएनबी ब्रांच पहुंचा. 

यूनियन के पदाधिकारियों ने महंगाई, वर्किग ऑवर्स व जोखिम भरे काम के मद्देनजर वेतन पुनरीक्षण की मांग की. एआईटीयूसी के प्रादेशिक मंत्री अरविंद राज स्वरूप ने केन्द्र सरकार व वित्त मंत्रालय के रवैये को गैरजिम्मेदाराना बताया. सभा में अशोक शुक्ला, बीके मिश्रा, अनिल सोनकर, अजय मेहरोत्रा, राकेश सक्सेना, आरके मिश्रा आदि मौजूद रहे.

Friday, February 7, 2014

LG Najeeb Jung Is A Congress Agent Says AAP Minister Ashutosh

उपराज्यपाल पर हमला
आम आदमी पार्टी को दिल्ली में लोकपाल लाने में रुकावटें बढ़ती ही जा रही हैं. ये सब दिल्ली सरकार और केंद्र सरकार में तकरार बढ़ने का नतीजा है. ये मामला तब बिगड़ा जब सॉलिसिटर जनरल मोहन पारासरन ने दिल्ली सरकार के द्वारा लाए गए जनलोकपाल बिल को ही असंवैधानिक बता दिया. इसी बात पर हाल ही में पत्रकारिता छोड़ कर आप से जुड़ने वाले पत्रकार आशुतोष ने दिल्ली के उपराज्यपाल नजीब जंग पर हमला बोला है. आशुतोष ने एलजी पर आरोप लगाया है कि वो कांग्रेस के एजेंट हैं.

क्यों साधा निशाना

आशुतोश और आप पार्टी ने शुक्रवार को उपराज्यपाल द्वारा दिल्ली लोकपाल बिल, 2014 पर सॉलिसिटर जनरल मोहन पारासरन से सलाह मांगे जाने और उनके द्वारा बिल को बगैर उपराज्यपाल व केंद्र सरकार की अनुमति के विधानसभा में पेश करने को असंवैधानिक करार दिए जाने के बाद एलजी पर निशाना साधा है.

कैसे लीक हुई बातें

आप नेता आशुतोष ने कहा कि उपराज्यपाल कांग्रेस के लिए नहीं बल्कि दिल्ली की जनता के लिए काम करें. उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर गोपनीय बातें लीक कैसे हुई. 'आप' के खिलाफ षड्यंत्र हो रहा है. जिसे किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा. गौरतलब है कि आम आदमी पार्टी सरकार को समर्थन दे रही कांग्रेस पहले ही इस बिल को पेश करने के तरीके को गलत बता चुकी है. शुक्रवार को पार्टी के नेता इस मुद्दे पर उपराज्यपाल से मिलने भी जा रहे हैं. इधर, सरकार से जुड़े उच्चपदस्थ सूत्रों ने बताया है कि मुख्यमंत्री केजरीवाल लोकपाल बिल और स्वराज बिल से किसी भी हाल में समझौता नहीं करेंगे, बेशक उनकी सरकार ही क्यों न चली जाए. बिल 16 फरवरी को एक स्टेडियम में जनता की उपस्थिति में पारित किया जाएगा.

Source: Hindi News

FIR Registered Against J&K Health Minister Alleged For Sexual Assault

जम्मू- कश्मीर के स्वास्थय मंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता ने काम के बहाने डॉक्टर को बुलाया था पास, जिसके बाद उसने क्या हरकत की पता लगाएं.
जल्द की जाएगी पूछताछजम्मू-कश्मीर के स्वास्थ्य राज्यमंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता शब्बीर अहमद खान के खिलाफ गुरुवार को मामला दर्ज हुआ है. उन पर महिला डॉक्टर के साथ छेड़छाड़ करने और यौन उत्पीड़न का मामला दर्ज किया गया है. स्वास्थ्य राज्यमंत्री से शुक्रवार को पूछताछ की जा सकती है. फिलहाल वो राजौरी जिले के दौरे पर हैं. इस बीच, डॉक्टर एसोसिएशन ऑफ कश्मीर ने मामले की कड़ी निंदा करते हुए स्वास्थ्य राज्यमंत्री को मंत्रिमंडल से बाहर निकालकर गिरफ्तार करने की मांग की है.

किस तरह निकली बाहर

महिला डॉक्टर का पति एक अलगाव वादी नेता है. महिला डॉक्टर की शिकायत पर ही श्रीनगर के शहीदगंज पुलिस स्टेशन में स्वास्थ्य राज्यमंत्री शब्बीर अहमद खान के खिलाफ धारा 354 व 509 के तहत मामला दर्ज कर लिया गया है. महिला डॉक्टर ने अपनी शिकायत में कहा है कि करीब दस दिन पहले शरदकालीन सचिवालय में स्वास्थ्य राज्यमंत्री ने किसी काम से उसे अपने कार्यालय में बुलाया. जहां उससे छेड़छाड़ का प्रयास किया गया. महिला डॉक्टर ने बताया किसी तरह वो सचिवालय से बाहर निकली.

मुख्यमंत्री पर भी आरोप

बता दें कि इससे पहले भी उमर मंत्रिमंडल में शामिल पर्यटन मंत्री गुलाम अहमद मीर तथा पूर्व मंत्री रमण मट्टू पर महिलाओं के यौन शोषण का आरोप लग चुका है. इतना ही नहीं, विपक्ष ने मुख्यमंत्री उमर पर भी ऐसे ही संगीन आरोप लगाए थे. जिसके बाद उमर ने आरोप साबित होने पर इस्तीफा देने का ऐलान कर दिया था. स्वास्थ्य राज्यमंत्री ने अपने खिलाफ लगे इस आरोप को बेबुनियाद बताया है और छवि खराब करने की साजिश करार दिया है. इस बीच बामपंथी नेता एम.वाई. तारीगामी ने उन्हें मंत्रिमंडल से निकालने की मांग की है.
'छेड़छाड़ के आरोप बेबुनियाद हैं. मेरे खिलाफ राजनीतिक साजिश रची गई है, ताकि मेरी छवि को नुकसान पहुंचाया जा सके.'
-शब्बीर अहमद खान, स्वास्थ्य राज्यमंत्री

Source: Hindi News

Allegation Are Unfactual And Self Inventories Says RSS


कट्टर हिंदूवादी संगठन राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने उन सभी आरोपों को झूठा, निराधार और मनगढ़ंत बताया है जिनके मुताबिक आरएसएस के दिग्गजों के सामने भारत में विभिन्न जगहों पर मुसलमानों को बम धमाकों से निशाना बनाने की योजना की चर्चा हुई थी.
'कारवां' पत्रिका ने फ़रवरी 2007 के समझौता एक्सप्रेस धमाकों के अभियुक्त स्वामी असीमानंद के इंटरव्यू के आधार पर ये आरोप लगाए हैं. पत्रिका के मुताबिक असीमानंद वर्ष 2005 में गुजरात में आरएसएस के शीर्ष नेतृत्व से मिले थे और वहां उन्होंने मुसलमानों को निशाना बनाने की अपनी योजना की जानकारी उनसे बाँटी थी.

मीडिया में इन आरोपों पर आधारित ख़बरें छपने के बाद राष्ट्रीय राजनीति में जैसे भूचाल आ गया है.

जहाँ कांग्रेस और बहुजन समाज पार्टी ने जाँच कर इस मामले की तह तक पहुँचने की बात की है वहीं भाजपा ने इस पूरे प्रकरण को आगामी चुनावों से पहले, राजनीति से प्रेरित बताया है.

समझौता एक्सप्रेस धमाका

"'कारवां' जिस बैठक की बात कर रहा है, उस पर स्वामी असीमानंद के वकील ने स्पष्ट कहा है कि ऐसी मुलाकात कभी हुई ही नहीं है. स्वामी असीमानंद जेल में हैं तो फिर उनसे मुलाकात कैसे हुई. ऐसे किसी भी मामले से आरएसएस के किसी भी नेता का संबंध नहीं रहा है."

असीमानंद को 2010 में गिरफ़्तार किया गया था. उन पर वर्ष 2006 से 2008 के बीच भारत में कई जगहों पर हुए बम धमाकों को अंजाम देने से संबंधित होने का आरोप लगा है. समझौता एक्सप्रेस धमाकों में लगभग 70 लोग मारे गए थे और इनमें से कई पाकिस्तानी नागरिक थे.

'कारवां' पत्रिका ने समझौता धमाकों के अभियुक्त स्वामी असीमानंद से चार इंटरव्यू करके ख़बर छापने का दावा किया है.

उधर संघ के प्रवक्ता राम माधव ने मीडिया से कहा, "'कारवां' जिस बैठक की बात कर रहा है, उस पर स्वामी असीमानंद के वकील ने स्पष्ट कहा है कि ऐसी मुलाकात कभी हुई ही नहीं है. स्वामी असीमानंद जेल में हैं तो फिर उनसे मुलाकात कैसे हुई. ऐसे किसी भी मामले से  आरएसएस के किसी भी नेता का संबंध नहीं रहा है."

संघ के नेता एमजी वैद्य ने भी  इन आरोपों को मनगढ़ंत बताया है. उन्होंने कहा है, “ये सरासर झूठ है क्योंकि आरएसएस ऐसा काम नहीं कर सकता और न ही संघ ने कभी ऐसा किया है. संघ किसी को बम फोड़ने के लिए नहीं कहता. उसका काम चरित्र निर्माण है. उसका आतंक से कोई संबंध नहीं है.”

समझौता धमाकों के अभियुक्त स्वामी असीमानंद के वकील जेएस राणा का कहना है, "कारवां पत्रिका की कहानी झूठी और निराधार है और गढ़ी हुई है. स्वामी असीमानंद ने इस आरोप को सिरे से खारिज किया है कि साल 2005 में या इसके बाद आरएसएस के शीर्ष नेतृत्व से कोई मुलाकात हुई थी.

मनगढ़ंत मामला

"ये पूरा मामला मनगढ़ंत है. यह सब कांग्रेस के डर्टी ट्रिक्स डिपार्टमेंट (शरारत करने वाला विभाग) की साज़िश है. हम इसे उसी रूप में देख रहे हैं."
-रविशंकर प्रसादः भाजपा के वरिष्ठ नेता और प्रवक्ता

भारत के विदेश मंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता सलमान खुर्शीद ने मीडिया से कहा, “ये बहुत ही गंभीर आरोप हैं और इस पूरे मामले का जो भी सच है वह राष्ट्रहित में पूरे देश के सामने आना चाहिए.”

उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री और बहुजन समाज पार्टी अध्यक्ष मायावती ने कहा, “यह गंभीर मामला है और इसकी केंद्रीय जाँच ब्यूरो के ज़रिए जाँच होनी चाहिए. केंद्र सरकार को इसे हल्के में नहीं लेना चाहिए. सबूत सामने आने पर सख़्त कार्रवाई की जानी चाहिए."

शिवसेना के प्रवक्ता संजय राउत ने कहा, "चुनावी माहौल गरमा गया है. कांग्रेस और उसकी जाँच एजेंसियों किसी भी हद तक जाकर दबाव डालती हैं. ये बयान उसी दबाव का नतीज़ा है."

दूसरी ओर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के वरिष्ठ नेता और प्रवक्ता रविशंकर प्रसाद ने कांग्रेस की सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा, “ये पूरा मामला मनगढ़ंत है और ये कांग्रेस के डर्टी ट्रिक्स डिपार्टमेंट (शरारत करने का विभाग) की साज़िश है और हम इसे उसी रूप में देख रहे हैं."

'कारवां' पत्रिका ने अपनी रिपोर्ट को सही ठहराया है और कहा है कि उसके पास पूरी इंटरव्यू की रिकॉर्डिंग मौजूद है.

कारवां की रिपोर्ट के बाद अंबाला जेल प्रशासन ने भी पूरे मामले की जाँच का आदेश दिया है ताकि पता चल पाए कि अंबाला जेल में बंद असीमानंद से बातचीत कैसे हुई.

Source: Hindi News


Thursday, February 6, 2014

Liz Hurley Denies Affair With Clinton

अभिनेत्री लिज़ हर्ले और पूर्व अमरीकी राष्ट्रपति बिल क्लिंटन की एक फैंसी ड्रेस पार्टी में ली गईं तस्वीरें ब्रितानी अख़बारों की सुर्खियां बनी हुई हैं.
इससे पहले लिज़ हर्ले के ब्वॉयफ्रैंड रहे हॉलीवुड अभिनेता टॉम साइज़मोर ने एक साक्षात्कार के दौरान लिज़ हर्ले और क्लिंटन के बीच कथित अफेयर की बात कही थी.

लिज़ हर्ले ने इस ख़बर का खंडन किया है कि राष्ट्रपति के रूप में क्लिंटन के कार्यकाल के दौरान उनके बीच ऐसा कोई संबंध था.

इसके बाद पत्रकारों ने उनकी नौ वर्ष पुरानी तस्वीरें निकालीं.

"पूरी तरह से झूठ"

यह ख़बर ऐसे समय आई है जब बिल क्लिंटन की पत्नी हिलेरी क्लिंटन 2016 के राष्ट्रपति चुनाव में खड़े होने की तैयारी कर रही हैं.

अख़बार 'डेली स्टार' के मुताबिक लिज़ हर्ले ने अपने पूर्व ब्यॉवफ्रेंड टॉम साइज़मोर के आरोपों को 'हास्यास्पद मूर्खता' और 'पूरी तरह से झूठ' बताया है.

हर्ले ने एक अमरीकी वेबसाइट के ख़िलाफ़ क़ानूनी कार्रवाई की बात भी कही है.

इस वेबसाइट ने ही फ़िल्म 'सेविंग प्राइवेट रेयान' के अभिनेता टॉम साइज़मोर के  साक्षात्कार का टेप सार्वजनिक किया था.

Source: Hindi News

CBI Files Supplementary Chargesheet In Ishrat Jahan Case

गुजरात के चर्चित इशरत जहाँ फ़र्ज़ी मुठभेड़ मामले में सीबीआई ने गुरुवार को पूरक चार्जशीट दाखिल की.
स्थानीय पत्रकार अंकुर जैन ने सीबीआई के सूत्रों के हवाले से बताया है कि इस चार्जशीट में इंटेलिजेंस ब्यूरो (आईबी) के पूर्व अधिकारी राजिंदर कुमार और तीन मौजूदा अधिकारियों के भी नाम हैं.

चार्जशीट में गुजरात के पूर्व गृह मंत्री अमित शाह का नाम नहीं है.

आईबी के जिन तीन अधिकारियों के नाम चार्जशीट में हैं, वे हैं एमके सिन्हा, पी मित्तल और राजीव वानखेड़े.

मुठभेड़

19 साल की इशरत जहां की मौत 15 जून 2004 में अहमदाबाद के बाहरी इलाके में पुलिस के साथ एक कथित मुठभेड़ में हुई थी.

इस मुठभेड़ में इशरत के अलावा जावेद शेख़ उर्फ प्रणेश पिल्लई, अमजद अली राणा और जीशान जौहर भी मारे गए थे.

गुजरात उच्च न्यायालय ने इशरत जहाँ मुठभेड़ की जाँच की जिम्मेदारी सीबीआई को सौंपी थी.

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Wednesday, February 5, 2014

148 Maruti Employees In Prison From Last One And A Half Year


दो क़तारों में चलते कुछ 20-25 लोग, मारुति सुज़ूकी वर्कर्स यूनियन का एक बड़ा बैनर, आस-पास से गुज़रती कारों से कौतूहल से देखते ड्राइवर और मीडिया की गुम सुर्खियां.
कुछ यही देखने को मिला जब मैं गुड़गांव पहुंची मारुति के बर्ख़ास्त कर्मचारियों और उनके परिवारों की पदयात्रा में. अक्तूबर 2011 में इन्हीं कर्मचारियों ने जब मारुति के मानेसर प्लांट में हड़ताल की थी तो हर जगह इनकी चर्चा थी. हौसला ऐसा था कि प्लांट के अंदर ही मज़दूर एक महीने तक हड़ताल पर बैठे थे.

पर फिर जुलाई 2012 में प्लांट के परिसर में हिंसक झड़पें हुईं, जिनमें एक मैनेजर की मौत हो गई. इन आरोपों में 148 कर्मचारी गिरफ़्तार हो गए और 2,300 बर्ख़ास्त कर दिए गए.

मुक़दमा चल रहा है. गिरफ़्तार हुए कर्मचारियों की पिछले डेढ़ साल में ज़मानत नहीं हुई और बर्ख़ास्त हुए लोगों का कहना है कि अब गुड़गांव-मानेसर इलाके में गाड़ियां और उसके कल-पुर्ज़े बनाने वाली कंपनियां उन्हें नौकरी नहीं देतीं.

सुनील भी बेरोज़गार हुए, अब पिछले डेढ़ साल से गिरफ़्तार कर्मचारियों के केस लड़ रहे हैं और कंपनी और सरकार के साथ बातचीत की कोशिश में प्रदर्शन करते रहे हैं. वह कहते हैं, "कोई ये नहीं समझता कि मज़दूर कोई ऐसा काम नहीं करेगा जिससे वो सड़कों पर आ जाए और उसके परिवार की बुरी हालत हो जाए, सब समझते हैं कि प्लांट में जो हुआ वो हमारी वजह से हुआ, इसलिए यहां हमें कोई काम नहीं देना चाहता."

कुछ भी नहीं बदला?


पिछले डेढ़ साल में धीमे हुए मारुति के मज़दूर आंदोलन ने उससे पहले इलाके में बहुत असर डाला था. उनके समर्थन में पहली बार इलाके की दस से ज़्यादा कंपनियों के मज़दूर संघ एक साथ एक दिन की हड़ताल पर गए थे.

मारुति के अलग-अलग प्लांट्स के मज़दूर भी समर्थन में साथ आ गए थे. साल 2009 में स्पेयर पार्ट बनाने वाली रिको कंपनी में मज़दूर संघ की नाकाम हड़ताल के बाद मारुति के कर्मचारियों ने अचानक इलाके की फ़िज़ा बदल दी थी.

अब हवा ने फिर अपना रुख़ मोड़ा है. अमित ने 'बदलते प्रोडक्शन प्रोसेसेज़ के मज़दूरों पर असर' विषय पर जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय में शोध किया है.

अमित कहते हैं, "मारुति का मज़दूर संघ पहली बार इलाके में स्थाई और कॉन्ट्रैक्ट यानि ठेके पर काम कर रहे मज़दूरों को साथ लाया. काम की बेहतर परिस्थितियों की मांग की और यूनियन बनाने के हक़ की बात उठाई पर जुलाई की हिंसा के बाद उनकी ताकत टूट गई है क्योंकि इस घटना ने मज़दूरों को सीधा कंपनी के सामने खड़ा कर दिया. मुकाबले के इस स्तर पर बाकी कंपनियों के मज़दूर संघ समर्थन से पीछे हट गए."

ठेका मज़दूर


अमित के मुताबिक पिछले डेढ़ साल में मारुति और होंडा जैसी बड़ी कंपनियों ने परमानेन्ट मज़दूरों के वेतन तो बढ़ाए हैं लेकिन इसने मज़दूरों को और बांटा है. एक तरफ 40,000 रुपए प्रति माह तक की तनख़्वाह वाले थोड़े से स्थाई मज़दूर और दूसरी ओर 15,000 रुपए प्रति माह की तनख़्वाह वाले अस्थाई मज़दूर.

यूनियन बनाने का अधिकार सिर्फ़ स्थाई मज़दूरों को ही होता है. साथ ही काम की परिस्थितियां भी नहीं बदली हैं. बस फ़र्क इतना कि ठेका मज़दूर अब ठेकेदार नहीं कंपनी नियुक्त करती है. अमित के मुताबिक जब तक स्थाई और ठेका मज़दूर साथ नहीं आते, कोई आंदोलन बदलाव नहीं ला पाएगा.

मारुति में सुनील की नौकरी स्थाई थी. ठेका मज़दूरों के लिए आवाज़ उठाने में वह भी शामिल थे. जिन 2300 लोगों की नौकरी गई उनमें से 1800 ठेके पर थे, अब उनका कोई अता-पता नहीं. अस्थाई नौकरी वाले गुमनाम नाम.

शहर की लड़ाई


ओमपति का बेटा जिया लाल भी मारुति के साथ स्थाई नौकरी कर रहा था. अब वह जुलाई की हिंसा के आरोप में जेल में है. हरियाणा के ढक्कल की रहने वाली ओमपति अपने जैसे और परिवारों के साथ कैथल से दिल्ली की पदयात्रा कर रही हैं. पदयात्रा अब दिल्ली पहुंच रही है.

कैथल, वो शहर है जहां हरियाणा के उद्योग मंत्री का घर है और दिल्ली वो शहर जहां देश की सरकार काम करती है. पदयात्रा की उम्मीद है चुनाव से ठीक पहले सरकार तक अपनी आवाज़ पहुंचाने की और ओमपति की उम्मीद... वो कहती हैं, "बस मेरा बेटा जेल से बाहर आ जाए, हम मज़दूरी करवा लेंगे, वापस शहर नहीं भेजेंगे और कुछ नहीं चाहिए."

ओमपति के पति और छोटा बेटा दिहाड़ी मज़दूर हैं. हरियाणा के ढक्कल गांव की रहने वाली ओम पति के घर में जिया लाल की पत्नी और उसका दो साल का बच्चा भी है. बेटे को जेल में आकर मिलने का ख़र्च उठाने के पैसे अब नहीं हैं. वह कहती हैं, "गांव से शहर पहुंचने की लड़ाई जीत ली पर शहर की अपनी लड़ाई हार गया. अब तो उसे लौटना ही होगा."

Source: Hindi News

Third Attempt For 2G Spectrum Auction

टू जी स्पेक्ट्रम की नीलामी का तीसरा चरण सोमवार से शुरू हो गया है जिसमें आठ कंपनियां देशभर में 22 सर्किल में लाइसेंस हासिल करने के लिए हिस्सा ले रही हैं.
इस नीलामी में भारती एयरटेल, वोडाफ़ोन, रिलायंस जिओ इंफोकॉम और पाँच अन्य दूरसंचार कंपनियां होड़ में है. सरकार ने इसका आधार मूल्य 11, 300 करोड़ रुपए रखा है.

उच्चतम न्यायालय ने फ़रवरी 2012 में 122 लाइसेंसों को रद्द कर दिया था. इसके बाद 2012 और 2103 में लाइसेंस बेचने की दो कोशिशों नाकाम हो गई थीं क्योंकि टेलीकॉम कंपनियों ने क़ीमतों को काफ़ी ज़्यादा बताते हुए इसका बहिष्कार किया था.

ये लाइसेंस पूर्व मंत्री ए राजा के कार्यकाल में जारी किए गए थे. लेकिन इस मामले पर सीएजी (महालेखा परीक्षक) की रिपोर्ट में सरकारी खज़ाने को एक लाख 76 हज़ार करोड़ के कथित नुकसान का आरोप लगा था.

भ्रष्टाचार के आरोपों के कारण राजा को अपने पद से इस्तीफ़ा देना पड़ा था. हालाँकि राजा ने इन आरोपों से इनकार किया है पर इस पूरे मामले में राजा के खिलाफ़ मुकदमा चल रहा है.

टू जी स्पेक्ट्रम की नीलामी
-इस नीलामी के लिए आठ कंपनियां देशभर में 22 सर्किल में लाइसेंस हासिल करने के लिए हिस्सा ले रही हैं
-नीलामी का आधार मूल्य 11800 करोड़ रुपए रखा गया है
-2012 और 2103 में लाइसेंस बेचने की दो कोशिशों नाकाम हो गई थीं
-सीएजी के मुताबिक़ टू जी स्पेक्ट्रम घोटाले से सरकारी खजाने को एक लाख 76 हज़ार करोड़ रुपए का चूना लगा था
-फरवरी 2012 में उच्चतम न्यायालय ने 122 लाइसेंसों को रद्द कर दिया था
-इंडियन सेल्यूलर ऑपरेटर्स एसोसिएशन के मुताबिक़ भारत में 90 करोड़ से ज्यादा मोबाइल फ़ोन कनेक्शन हैं

नीलामी

दूरसंचार विभाग ने 1800 मेगाहर्टज़ बैंड में 385 मेगाहर्टज़ स्पेक्ट्रम और 900 मेगाहर्टज़ बैंड में 46 मेगाहर्टज़ स्पेक्ट्रम नीलामी के लिए रखे हैं.

समाचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक़ तीन कंपनियों को कुछ ख़ास सर्किल में बोली लगाने के लिए अयोग्य घोषित कर दिया गया है. वोडाफ़ोन इंडिया सात और आरकॉम आठ सर्किल में बोली नहीं लगा सकती हैं जबकि टाटा टेलीसर्विसेज को दिल्ली में बोली लगाने की अनुमति नहीं होगी.

वोडाफ़ोन के लिए दिल्ली, मुंबई और कोलकाता में स्पेक्ट्रम खरीदना ज़रूरी है. इसी तरह एयरटेल को दिल्ली और मुंबई में तथा लूप मोबाइल को मुंबई में अपना ऑपरेशन जारी रखने के लिए स्पेक्ट्रम खरीदना अनिवार्य है क्योंकि उनके लाइसेंस की अवधि नवंबर में समाप्त हो रही है.

आधार मूल्य में कमी

सरकार ने 1800 मेगाहर्टज़ बैंड में प्रति मेगाहर्टज़ 1765 करोड़ रुपए का आधार मूल्य तय कर रखा है जो कि मार्च की नीलामी से 26 प्रतिशत कम है.

900 मेगाहर्टज़ के लिए पिछली नीलामी की तुलना में प्रति मेगाहर्टज़ आधार मूल्य 53 प्रतिशत कम रखा गया है. दिल्ली में यह 360 करोड़ रुपए प्रति मेगाहर्टज़, मुंबई में 328 करोड़ रुपए प्रति मेगाहर्टज़ और कोलकाता में 125 करोड़ रुपए रखी गई है.

इस बीच सेल्यूलर ऑपरेटर्स एसोसिएशन ऑफ़ इंडिया के रंजन मैथ्यू ने बीबीसी से कहा, "टेलीकॉम ऑपरेटरों के लिए यह नीलामी काफ़ी अहम है क्योंकि कुछ लाइसेंस इस साल नवंबर में समाप्त हो रहे हैं."

यह नीलामी भी विवादों के घेरे में है. कई कंपनियों ने शिकायत की है कि न केवल स्पेक्ट्रम की क़ीमत बहुत ज्यादा है बल्कि बैंडविड्थ की संख्या भी सीमित है.

2जी स्पेक्ट्रम की नीलामी को लेकर कंपनियों ने ज़्यादा उत्साह नहीं दिखाया है जबकि साल 2010 में 3 जी स्पेक्ट्रम की नीलामी से सरकार को क़रीब 15 अरब डॉलर मिले थे.

इंडियन सेल्यूलर ऑपरेटर्स एसोसिएशन के मुताबिक़ भारत में 90 करोड़ से ज़्यादा मोबाइल फ़ोन कनेक्शन हैं.

Source: Hindi News

The Man Who Worked Hard For Satyam To Regain Its Name And Money


जनवरी 2009 में एक कॉरपोरेट स्कैंडल उभरा था जिसे भारत का एनरॉन कहा गया था.
भारतीय आईटी फ़र्म सत्यम कम्प्यूटर सर्विसेज़ ने स्वीकार किया कि उसने अपने खातों में जालसाज़ी की है. कुछ इसी तरह के मामले में अमरीका की एनर्ज़ी कंपनी एनरॉन बिखर गई थी.

भारत सरकार ने मामले में हस्तक्षेप करते हुए एक नए बोर्ड का गठन किया जो कंपनी को बेचने की कोशिश कर सके.

इसे भारतीय कंपनी महिन्द्रा समूह ने ख़रीदा लिया और इसका नाम बदलकर महिन्द्रा सत्यम हो गया. चंदर प्रकाश गुरनानी इसके मुखिया बने.

गुरनानी कहते हैं, "हम में से कुछ को यक़ीन था कि कंपनी के बहीखातों में भले ही गड़बड़ी हो लेकिन यहाँ के लोगों में कोई गड़बड़ी नहीं है."

नई चुनौती का सामना
"उस वर्ष मैं साल के 250 दिन सड़कों पर रहा. मैं हर क्लाइंट से मिला और उन्हें समझाया. पूरे साल मैंने केवल बात, बात और बात ही की, लोगों से, ग्राहकों से, सुबह से लेकर शाम तक."
-चंदर प्रकाश गुरनानी, एमडी और सीईओ, टेक महिन्द्रा

कंपनी को फिर से खड़ा करने की चुनौती से जूझ रहे गुरनानी ने इसकी शुरुआत हर किसी को यह विश्वास दिलाने से की थी कि यह कंपनी अभी भी चल सकती है.

वे कहते हैं, "उस वर्ष मैं साल के 250 दिन सड़कों पर रहा. मैं हर क्लाइंट से मिला और उन्हें समझाया. पूरे साल मैंने केवल बात, बात और बात ही की, लोगों से, ग्राहकों से, सुबह से लेकर शाम तक."

इसके साथ ही उन्हें रेगुलेटरों और वकीलों से भी निपटना होता था.

गुरनानी बताते हैं, "धोखाधड़ी की जाँच के लिए एक कमेटी बनी थी जो अपना काम कर रही थी. हमें हर किसी को जवाब देना था और साथ ही उच्च क्वालिटी भी बनाए रखनी थी और कंपनी के भविष्य के लिए निवेश भी करना था."

गुरनानी ने जब महिन्द्रा सत्यम चलानी शुरू की तो उनके सामने सबसे बड़ी चुनौती थी कंपनी के कर्मचारियों की छंटनी की. उन्हें कुल 53,000 कर्मचारियों में से केवल 35,000 को ही रखना था ताकि कंपनी फिर से मुनाफ़े में आ सके.

छंटनी की समस्या

सत्यम महिन्द्रा में कर्मचारियों की छंटनी भी एक बड़ी समस्या थी.

गुरनानी और कंपनी के वाइस-चेयरमैन विनीत नैय्यर इस बात को लेकर परेशान थे कि पहले से हौसला हारी हुई कंपनी में कर्मचारियों की छंटनी किस तरह की जाए.

अकादमिक संस्थान और पेशेवर लोग उन्हें सलाह दे रहे थे कि कंपनी को इन कर्मचारियों को एकमुश्त राशि देकर जितना जल्दी हो सके, जल्दी निकाल देना चाहिए. गुरनानी ने ऐसे लोगों की सलाह नहीं मानी.

वे कहते हैं, "हमने सोचा, ये कर्मचारियों की ग़लती नहीं है."

कर्मचारियों को निकालने की बजाय गुरनानी ने तय किया कि जो लोग छंटनी से प्रभावित हैं उन्हें अगले छह महीने तक कम तनख्वाह दी जाएगी और उन्हें नई नौकरी खोजने में मदद की जाएगी.

वे कहते हैं, "उन छह महीनों में हमने मनोवैज्ञानिक की सेवा ली और प्रशिक्षण विभाग खोला. रोज़गार मेला लगाया, हमने हर वो कोशिश की जिससे उन लोगों को ठिकाना मिल जाए."

अगला क़दम
"मुझे एक समीकरण में यक़ीन है जिसके अनुसार एक आदमी 10 लोगों को यक़ीन दिला सकता है."
-चंदर प्रकाश गुरनानी, एमडी और सीईओ, टेक महिन्द्रा

गुरनानी का अगला क़दम था कंपनी की सभी समस्याओं से एक साथ निपटने की बजाय उन्हें 11 भागों में बांट कर उनसे निपटना.

अपने बाक़ी बचे कर्मचारियों के बारे में वे कहते हैं, "इस तरह की विपत्ति मनुष्य को अपना सर्वश्रेष्ठ करने को प्रेरित करती है."

वे कहते हैं, "अगर मुझे किसी एक चीज़ को सलाम करना हो तो मैं अपने साथियों और सहकर्मियों को सलाम करूँगा, जो हर हाल में सफल होना चाहते थे, जो अपने आलोचकों को ग़लत साबित करना चाहते थे."

गुरनानी बताते हैं कि उनके पास अपने बाक़ी बचे साथियों तक अपना संदेश पहुँचाने का एक सरल तरीक़ा था.

सरल समीकरण
जून, 2013 में सत्यम महिन्द्रा का टेक महिन्द्रा में विलय हो गया.

वे कहते हैं, "मुझे एक समीकरण में यक़ीन है जिसके अनुसार एक आदमी 10 लोगों को यक़ीन दिला सकता है, 10 आदमी 100 लोगों को यक़ीन दिला सकते हैं, 100 लोग 1000 लोगों को, और 1000 लोग, 10000 लोगों को यक़ीन दिला सकते हैं. और मैंने इस समीकरण का पूरा उपयोग किया."

गुरनानी 20 वर्षों से उनके साथी रहे विनीत नैय्यर के साथ को भी बहुत महत्व देते हैं. उनका मानना है कि उनकी जोड़ी से कंपनी को फ़ायदा मिला.

पिछले साल जून में महिन्द्रा सत्यम फिर से पटरी पर आ गई. इसका अपनी सहयोगी कंपनी टेक महिन्द्रा में विलय हो गया.

 पढ़ें- 'मैं ग़रीबी हूँ, मैं तुम्हें प्यार करती हूँ'

इस संयुक्त कंपनी के प्रमुख गुरनानी को ही बनाया गया. इस नई कंपनी को टेक महिन्द्रा नाम दिया गया.

साल 2015 के अंत तक गुरनानी कंपनी के लाभ को दोगुना करना चाहते हैं. इस लक्ष्य को पाने के लिए वो कंपनी के विकास के साथ-साथ अधिग्रहण भी करेंगे.

उस विवाद के पाँच साल हो गए हैं जिससे कंपनी बर्बाद भी हो सकती थी लेकिन आज गुरनानी सफलता की स्वर्णिम राह पर चल रहे हैं.

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Delhi CM Had Requested For The Bungalows On Bhagwan Das Road

देश से वीवीआईपा कल्चर खत्म करने की मुहीम छेड़ने वाले दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल अब खुद ही इस कल्चर में फसते नजर आ रहें हैं.

10 कमरों वाला बंगला
दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल विवादों से निकलने की बजाए और फसते ही नजर आ रहे हैं. एक तरफ पार्टी से बिन्नी का समर्थन वापस लेना तो अब दूसरी तरफ सरकार से 10 रूम वाले बंगलों की बात. देश से वीवीआईपा कल्चर को खत्म करने की बात कहने वाले केजरीवाल अब खुद ही इस वीवीआईपा कल्चर में फसते से नजर आ रहे हैं.

दो को मिला के एक की मांग
देश के अखबारों ने एक सनसनी खेज खुलासा किया है. अखबारों की रिपोर्ट के मुताबिक, केजरीवाल के मुख्यमंत्री बनने के बाद ही उनके सचिव राजेंद्र कुमार ने 30 दिसंबर को उपराज्यपाल के ऑफिस में लेटर भेजा था. लेटर में केजरीवाल के सचिव ने लिखा था कि, मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल अपने लिए भगवान दास रोड़ पर बंगला चाहते हैं. केजरीवाल भगवान दास रोड पर स्थित हाउस नंबर 6/7 और 7/7 को मिलाकर एक 10 कमरों वाला बंगला अपने लिए चाहते हैं. 
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Tuesday, February 4, 2014

Truth Behind Mulayams 24 Seven Electricity Claim In UP

समाजवादी पार्टी के प्रमुख मुलायम सिंह यादव को नरेंद्र मोदी का यह कहना कि 'गुजरात बनाने का मतलब नेताजी 24 घंटे बिजली' शायद ज़्यादा चोट कर गया.
इसलिए अपने गणतंत्र दिवस के भाषण में उन्होंने वादा कर दिया कि एक साल में उत्तर प्रदेश के निवासियों को 24 घंटे बिजली मिलेगी.

लेकिन राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री शायद जोश में भूल गए कि सूबे में बिजली की स्थिति काफ़ी बुरी है. हालात ऐसे हैं कि प्रदेश की राजधानी लखनऊ के एक गाँव चिबोखेरा में बिजली मई 2013 में पहुंची, यानी आज़ादी के 64 साल बाद.

यह तो कहानी है लखनऊ के निकट के एक गाँव की, जबकि केंद्रीय विद्युत् प्राधिकरण के आंकड़ों के अनुसार उत्तर प्रदेश में अभी 10,856 ऐसे गांव हैं जहां बिजली पहुंची ही नहीं है.

एक साल के भीतर इन सभी गांवों में  बिजली पहुंच पाएगी, यह नामुमकिन सा लगता है. लेकिन जिन उपभोक्ताओं को फ़िलहाल बिजली मिल रही है, क्या उन्हें भी 24 घंटे बिजली मुहैया कराने की कोशिश सफल हो पाएगी?

बिजली की बदहाली
-केंद्रीय विद्युत् प्राधिकरण के आंकड़ों के अनुसार उत्तर प्रदेश में अभी 10,856 ऐसे गांव हैं जहां बिजली पहुंची ही नहीं है.
राज्य में अगस्त 2013 में 9660 लाख यूनिट बिजली की कमी रही.
प्रदेश के ऊर्जा उत्पादन संयंत्र अपनी क्षमता से लगभग 40 प्रतिशत कम बिजली पैदा करते हैं.
सभी संयंत्रों की एक-दो इकाइयां तकनीकी कारणों से या कोयला अथवा गैस न मिल पाने के चलते हफ़्तों बंद रहती हैं.

बिजली की भूख

प्राधिकरण ने 2013 की अपनी एक रिपोर्ट में उत्तर प्रदेश को बिजली का सबसे भूखा प्रदेश क़रार दिया था. उस रिपोर्ट के मुताबिक़ अगस्त 2013 में उत्तर प्रदेश को कुल 82450 लाख यूनिट बिजली की आवश्यकता थी और उत्तर प्रदेश पॉवर कारपोरेशन लिमिटेड केवल 72790 लाख यूनिट बिजली सप्लाई कर पाया. यानी 9660 लाख यूनिट बिजली की कमी रही.

दूसरे राज्यों की तुलना में  उत्तर प्रदेश में बिजली की कमी सबसे अधिक है. प्राधिकरण के अनुसार जिस दौरान उत्तर प्रदेश में 9660 लाख यूनिट बिजली की कमी थी, उसी दौरान दिल्ली में 40 लाख यूनिट बिजली की कमी रही जबकि उत्तराखंड में 290 लाख यूनिट और हरियाणा में 540 लाख यूनिट की कमी थी.

उत्तर प्रदेश में गर्मी और उमस भरे मौसम में बिजली की मांग 12,000 मेगावाट या उससे ऊपर पहुँच जाती है. इस मांग को प्रदेश के सभी ऊर्जा उत्पादन केंद्र पूरा नहीं कर पाते हैं. बाहर से ख़रीदने के बाद भी उतनी बिजली नहीं मिल पाती है कि मांग पूरी की जा सके.

उत्तर प्रदेश विद्युत उत्पादन निगम के प्रबंध निदेशक कामरान रिज़वी को पूरी उम्मीद है कि 2014 के अंत तक 1000 मेगावाट की क्षमता वाले आनपारा-डी प्लांट के शुरू हो जाने के बाद यह कमी पूरी की जा सकेगी.

लेकिन शायद इस इकाई के शुरू होने के बावजूद राज्य में बिजली की आपूर्ति 'पीक सीज़न' में होने वाली मांग से कम पड़ सकती है.

कम उत्पादन


इसका मुख्य कारण क्षमता से कम उत्पादन है. उत्तर प्रदेश एनर्जी रेगुलेटरी कमीशन के सूत्रों के अनुसार प्रदेश के ऊर्जा उत्पादन संयंत्र अपनी क्षमता से लगभग 40 प्रतिशत कम बिजली पैदा करते हैं.

इसके अलावा लगभग सभी संयंत्रों की एक-दो इकाइयां तकनीकी कारणों से या कोयले अथवा गैस न मिल पाने के चलते हफ़्तों बंद रहती हैं.

ऐसी स्थिति में  मुलायम सिंह यादव को अपना वादा पूरा कर पाने में मुश्किलें आ सकती हैं. हाँ यह ज़रूर है कि तब तक लोकसभा चुनाव समाप्त हो चुके होंगे.

मौजूदा स्थिति

चूंकि मुलायम और नरेंद्र मोदी पूर्वी उत्तर प्रदेश के लिहाज़ से बात कर रहे थे इसलिए ज़रूरी है कि उस क्षेत्र में बिजली सप्लाई की मौजूदा स्थिति पर एक नज़र डाली जाए.

पूर्वांचल विद्युत् वितरण निगम की एक रिपोर्ट के अनुसार इस क्षेत्र में सर्दियों के दौरान भी बिजली की कटौती जारी है, जबकि इन दिनों मांग कम रहती है.

26 जनवरी से 26 फ़रवरी तक बिजली सप्लाई/कटौती का ब्यौरा:

(1) ग्रामीण एवं तहसील:

बिजली की आपूर्ति     14 घंटे
कटौती का समय     दोपहर तीन बजे से रात्रि नौ बजे और रात्रि 11 बजे से सुबह 7 बजे तक
जिले     गोरखपुर, बलिया, ग़ाज़ीपुर, महाराजगंज, बस्ती, देवरिया, जौनपुर, मिर्ज़ापुर, वाराणसी, सोनभद्र, कुशीनगर, मऊ,
सिद्धार्थनगर, चंदौली, संत कबीरनगर, भदोही, आज़मगढ़.

(2) शहरी इलाक़े:

21 घंटे सप्लाई     इलाहाबाद
20 घंटे सप्लाई     वाराणसी
17 घंटे सप्लाई     आज़मगढ़, बस्ती, गोरखपुर और मिर्ज़ापुर
15 घंटे सप्लाई     देवरिया, सिद्धार्थनगर, कुशीनगर, ख़लीलाबाद, रामनगर, गोपीगंज, चंदौली, भदोही, मऊ, जौनपुर, बलिया, ग़ाज़ीपुर, विंध्याचल, मुबारकपुर, फ़तेहपुर और प्रतापगढ़

लेकिन उत्तर प्रदेश पॉवर कारपोरेशन के प्रबंध निदेशक ए पी मिश्रा को पूरा भरोसा है कि दिसंबर 2014 से राज्य में 24 घंटे बिजली की आपूर्ति शुरू हो जाएगी. उन्होंने बीबीसी को बताया, "हम कटिबद्ध हैं. हमारा रोड मैप तैयार है. आनपारा-डी के अलावा भी कुछ संयंत्र हैं जहां उत्पादन शुरू हो जाएगा."

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Central Opposes Mercy For Rajiv Assassins

राजीव गाँधी की हत्या के दोषियों ने इस आधार पर सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दायर कर रखी है कि राष्ट्रपति के पास लंबित उनकी दया याचिका पर 11 साल से कोई फ़ैसला नहीं हो पाया है, इसलिए उनकी मौत की सज़ा को उम्रकैद में बदल दिया जाए.

केंद्र सरकार ने इस याचिका का ये कहते हुए विरोध किया है कि दया याचिका लंबित रहने के दौरान इन दोषियों को किसी तरह की प्रताड़ना या अमानवीय बर्ताव का सामना नहीं करना पड़ा

सुप्रीम कोर्ट में यह याचिका मुरुगन, सांथन और पेरारिवलन ने दायर की है. इन लोगों ने अपनी दया याचिकाओं पर फ़ैसला न होने को संविधान की धारा-21 के तहत मिले जीने के अधिकार का उल्लंघन बताया है.

स्पष्टीकरण
अटॉर्नी जनरल जी वाहनवती ने कहा कि 11 साल की देरी के दौरान एनडीए की सरकार ने चार साल तक इस मसले में कोई फ़ैसला नहीं किया और फ़ाइल राष्ट्रपति को नहीं भेजी.

केंद्र ने कहा कि यूपीए सरकार ने दया याचिका राष्ट्रपति को 2005 में भेजी थी मगर नए गृह मंत्री ने 2011 में फ़ाइल वापस ले ली. कुछ ही समय में गृह मंत्री ने नई सिफ़ारिशें राष्ट्रपति को भेज दीं.

राजीव गांधी की हत्या के आरोप में फांसी की सज़ा पाने वालों ने यह याचिका सुप्रीम कोर्ट के 21 जनवरी के उस फैसले के बाद दायर की जिसमें सर्वोच्च अदालत ने दया याचिकाओं पर फैसला लेने में देरी के आधार पर 15 दोषियों की मौत की सज़ा को उम्र क़ैद में बदलने का आदेश दिया था.

सुप्रीम कोर्ट के इस आदेश से चंदन तस्कर वीरप्पन के चार साथियों को राहत मिली थी. अदालत का कहना था कि याचिकाओं के निपटारे में हुई लंबी देरी उन्हें राहत दिए जाने का पर्याप्त आधार है.

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Central Sanctions Seventh Central Pay Commission

अशोक कुमार माथुर चुने गए सातवें वेतन आयोग के अध्यक्ष, केंद्र के कर्मचारियों के लिए खुशियों भरा हो सकता है ये साल.
50लाख कर्मचारियों का फायदा

साल 2014 केंद्र के कर्मचारियों के लिए खुशियों से भरा हो सकता है. प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने सातवें वेतन आयोग को मंजूरी दे दी है. इसकी मदद से केंद्र सरकार के तकरीबन 50 लाख कर्मचारियों को फायदा होगा. वित्त मंत्रालय ने आज इस बात की सूचना की पुष्टि कर दी. सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज अशोक कुमार माथुर आयोग के अध्यक्ष होंगे. पेट्रोलियम सचिव विवेक राय को आयोग के पूर्ण समय के सदस्य रूप में चुना गया है. वहीं आयोग को दो वर्षो के अंदर रिपोर्ट देने के लिए निर्देश दिए गए हैं.

हर 10 सालों में संशोधन
गौरतलब है कि एक जनवरी 2016 से कर्मचारियों को सातवें वेतन मान का फायदा मिलेगा. डिफेंस और रेलवे के कर्मचारियों के साथ-साथ 30 लाख पेंशन धारक भी इसका लाभ उठा सकेंगे. संविधान में हर दस सालों में कर्मचारियों के वेतन मान में संशोधन करने का प्रावधान है. छठा वेतन आयोग एक जनवरी 2006, पाचवां एक जनवरी 1996 और चौथा एक जनवरी 1986 से इमप्लीमेंट हुआ था.

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Boyfriend Murdered In UP Another Case Of Honour Killing


पूर्वी उत्तर प्रदेश के बस्ती ज़िले की पुलिस ने 20 वर्षीय एक युवक की लाश के टुकड़े बरामद करने के बाद युवक की 'प्रेमिका' की माँ, भाई और एक रिश्तेदार के ख़िलाफ़ हत्या का मामला दर्ज किया है.
पुलिस ने इस मामले में लड़की की माँ और भाई को गिरफ़्तार कर लिया है जबकि रिश्तेदार फ़रार है.

पुलिस का कहना है कि ज़िले के छावनी थाना क्षेत्र में हुई यह  घटना रविवार देर रात को घटी.

छावनी थाना क्षेत्र के छतौना गाँव में रहने वाले 20 साल के सुभाष अपने ही गांव की 'प्रेमिका' से मिलने उसके घर पहुंचे. दोनों पिछड़ी जाति के हैं.

पुलिस का दावा
पुलिस का दावा है कि इसकी जानकारी लड़की की माँ को हो गई. उन्होंने सुभाष को एक  कमरे में बंद कर अपने बेटे कन्हैया और एक रिश्तेदार रामचंदर को बुला लिया.

"सुभाष इस पूरे मामले में लड़की के घर वालों से बात करना चाहता था. लेकिन उसे मौक़ा नहीं दिया गया"
-राजकिशोर, सुभाष के चाचा

इसके बाद तीनों ने कथित तौर पर सुभाष की हत्या कर शव को पास के जंगल में फेंक दिया.

इस घटना की जानकारी सुभाष की 'प्रेमिका' ने उनके चाचा राजकिशोर को टेलीफ़ोन पर दी. राजकिशोर से ही पुलिस को जानकारी मिली.

घटना की ख़बर पाकर पुलिस गाँव पहुँची और गाँव के कुछ ज़िम्मेदार लोगों को साथ लेकर लड़की के घर पहुंची. लड़की की माँ और भाई से थोड़ी सी पूछताछ के बाद सच्चाई सबके सामने आ गई.

पारिवारिक स्थिति

सुभाष के चाचा राजकिशोर के मुताबिक़ सुभाष इस पूरे मामले में लड़की के घर वालों से बात करना चाहता था लेकिन उसे मौक़ा नहीं दिया गया.

राजकिशोर की शिकायत पर पुलिस ने लड़की की माँ, भाई कन्हैया और रिश्तेदार रामचंदर के ख़िलाफ़ हत्या का मामला दर्ज कर माँ और भाई को  गिरफ़्तार कर लिया है. रामचंदर फरार है.

कन्हैया की निशानदेही पर पुलिस ने जंगल से सुभाष के शव के कुछ टुकड़ों बरामद कर लिया है. उनका मंगलवार को बस्ती ज़िला अस्पताल के चार डॉक्टरों की एक टीम पोस्टमार्टम करेगी. शव से डीएनए के नमूने लेकर उन्हें जाँच के लिए भेजा गया है.

थानाध्यक्ष जेपी वर्मा का मानना है, ''सुभाष उस लड़की से प्रेम करते थे. वे उससे शादी भी करना चाहते थे. लेकिन लड़की के घरवालों को यह मंज़ूर नहीं था.''

Source:  Hindi News

Monday, February 3, 2014

CNG Price Reduced By Rs 15 And LNG By Rs 5 Per Kg In Delhi

लोकसभा चुनावों को करीब आता देख सरकार ने लोगों को खुश करने के लिए सीएनजी और पीएनजी के दामों में अच्छी- खासी कटौती का किया है एलान.
जनता खुश
हाल ही में डीजल के दाम बढ़ने पर लोगों में सरकार के प्रति हताशा दिख रही थी. तो वहीं अब सरकार ने आम जनता को खुश करने के लिए सीएनजी के दामों को कम करने की घोषणा की है. तेल मंत्री वीरप्पा मोइली ने आज सीएनजी की कीमत में 15 रुपये प्रति किलो की कटौती कर दी है. इसके अलावा, पीएनजी (पाइप्ड नेच्युरल गैस) की कीमत में 5 रुपये प्रति क्यूबिक मीटर की कमी करने का ऐलान किया है.

कंपनियों को फायदा
इस ऐलान के साथ ही आईजीएल और अन्य शहरी गैस वितरण कंपनियों को फायदा पहुंचेगा. इन कंपनियों को पहले से सस्ती घरेलू गैस मिलेगी. मोइली ने कंपनियों को राहत देते हुए कहा कि अब आईजीएल और अन्य शहरी गैस वितरण कंपनियों को 100 फीसद घरेलू फील्ड का इस्तेमाल करने की मंजूरी मिलेगी. इससे पहले कंपनियां 80 फीसद तक का इस्तेमाल कर सकती थीं.

Source: Hindi News

Saturday, February 1, 2014

Pakistans Court Sentences Six Guilty For Honour Killing

पाकिस्तान की एक अदालत ने 'इज्जत के नाम' यानी 'ऑनर किलिंग' के नाम पर की गई तीन भाइयों की हत्या के अभियुक्त को मौत की सज़ा सुनाई है. साथ ही, इस मामले के पांच अन्य अभियुक्तों को उम्र कैद की सज़ा मिली है.
हत्या का यह मामला उत्तर-पूर्वी पाकिस्तान में शादी समारोह में बनाए गए मोबाइल फ़ोन वीडियो से जुड़ा हुआ है. इस वीडियो में कुछ पुरुष और महिलाएं स्थानीय परंपराओं का उल्लंघन करते हुए नाचते और गाते दिखाए गए हैं.

घटना के बारे में लोगों को तब पता चला जब वीडियो में नाच रही  महिला की हत्या की खबर आई. हालांकि महिला के परिवार वाले और स्थानीय अधिकारियों ने इससे हमेशा इंकार किया.

वीडियो में नाचते दिख रहे एक व्यक्ति के तीन भाइयों की हत्या कर दी गई थी.

इज्जत के नाम पर यह हत्या पिछले साल तब हुई जब मोबाइल फ़ोन का एक वीडियो सामने आया. इस वीडियो में मारे गए व्यक्तियों के दो भाई कुछ औरतों के साथ नाच-गा रहे थे. ये औरतें हत्या करने वालों के परिवार की सदस्य थीं.

पाबंदी की जंजीरें

ऑनर किलिंग के ख़िलाफ़ आवाज़ उठाने वाली पाकिस्तान की रुख़साना बीवी.

पाकिस्तान के  उत्तर पूर्वी इलाकों में समुदाय के अलग-अलग परिवारों के पुरुष और स्त्रियों के आपस में दोस्ती करने या नाचने गाने पर सख्त पाबंदी है.

अप्रैल 2012 में उत्तर-पूर्वी कोहिस्तान के इलाके में शादी का एक वीडियो काफी प्रचारित-प्रसारित हो रहा था.

इस वीडियो में ऐसा कुछ था जो समाज के खास तबके को नागवार गुजरा. उस वीडियो में कथित तौर पर जुटे पुरुष और महिलाएं एक-दूसरे के साथ नाच-गा रहे थे.

वीडियो में कमरे के फर्श पर चार महिलाएं बैठी बातें करती दिखाई गईं. वे शादी के गीत गा रही थीं जबकि दो पुरुष नाच रहे थे.

पाकिस्तान के उच्चतम न्यायालय ने इस मामले पर उस वक्त ध्यान दिया जब वीडियो में दिख रही चार महिलाओं और उनका साथ देने वाली पांचवीं लड़की की हत्या की रिपोर्ट सामने आई.

हालांकि स्थानीय अधिकारियों और महिलाओं के परिवार के सदस्यों ने हत्या से इंकार किया, लेकिन परिवार वालों ने इन पांचों में से किसी एक महिला को भी न्यायालय में अब तक हाजिर नहीं किया.

परिवार की 'इज़्ज़त'

पाकिस्तान के उत्तरी इलाके में ऑनर किलिंग की घटनाएं अक्सर सुनने में आती हैं

जनवरी 2013 में वीडियो में दिख रहे व्यक्ति के तीन भाइयों को उन्हीं के गांव में वीडियो में दिखने वाली महिला के कथित तीन रिश्तेदारों ने गोली मार कर हत्या कर दी थी.

फ़िलहाल मामले में सज़ा पाए छह पुरुषों के पास अपील का अधिकार है.

पाकिस्तान में फिलहाल कुछ समय के लिए मौत की सज़ा पर रोक लगाई गई है.

कोहिस्तान के समाज में इज्जत से जुड़े कुछ ऐसे  नियम प्रचलित हैं जिनके अनुसार परंपरागत शादियों के अलावा किसी महिला-पुरुष के बीच किसी भी तरह का संपर्क, उस महिला के परिवार की इज़्ज़त के ख़िलाफ़ है. यह उन्हें इसका ख़ूनी बदला लेने की इजाज़त देता है.

महिला का परिवार पहले उसे मारता है, फिर पुरुष को. महिला के परिवार की ओर से केवल संदेह जताना ही इसके लिए पर्याप्त सबूत है. समाज को इससे अधिक सबूत नहीं चाहिए.

पाकिस्तान के उत्तरी पूर्वी इलाके में  ऑनर किलिंग की घटनाएं अक्सर सुनने में आती हैं.

अलग-अलग परिवारों के पुरुषों और महिलाओं के मिलने मात्र से महिला का अपमान माना जाता है. यदि ऐसा हुआ तो महिला के परिवार को अपने सम्मान की रक्षा के लिए बदला लेने का अधिकार मिल जाता है.

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Harish Rawat Going To Be The New CM Of Uttrakhand


कांग्रेस के महासचिव जनार्धन द्विवेदी ने देहरादून में कांग्रेस विधायक दल की बैठक के बाद घोषणा की कि उत्तराखंड के नए मुख्यमंत्री हरीश रावत होंगे.

विजय बहुगुणा पहले ही मुख्यमंत्री के पद से इस्तीफ़ा दे चुके हैं.

हरीश रावत इस समय केंद्र में मंत्री हैं और जब पार्टी ने 2012 में विधानसभा चुनाव जीता था, तब भी वो मुख्यमंत्री पद की दौड़ में सबसे आगे थे.

लेकिन तब कांग्रेस ने विजय बहुगुणा को राज्य सरकार की कमान सौंपी थीं.

दिलचस्प है कि 2012 और आज यानी शनिवार को दोनों बार विधायक दल ने जिस व्यक्ति को अपना नेता चुना, वो राज्य विधानसभा का सदस्य न होकर सांसद है.

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Friday, January 31, 2014

Reasons For The Failure Vijay Bahuguna In Uttrakhand


भारत के उत्तराखंड राज्य के इतिहास में विजय बहुगुणा का नाम हमेशा दर्ज रहेगा.
इसलिए नहीं कि उनके दो वर्ष से भी कम के मुख्यमंत्री पद के कार्यकाल में राज्य ने कुछ ख़ास कर दिखाया हो, बल्कि इसलिए क्योंकि उनकी इस पारी के दौरान ही राज्य को अब तक की सबसे भीषण प्राकृतिक आपदा का सामना करना पड़ा.

पहले बात विजय बहुगुणा की, जिन्हे कांग्रेस आलाकमान ने मुख्यमंत्री पद से इस्तीफ़ा देने को कहा और अब नए  मुख्यमंत्री के लिए प्रदेश के कुछ दिग्गज नेताओं का नाम ज़ोर पकड़ रहा है.

विजय बहुगुणा के पिता हेमवती नंदन बहुगुणा, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री रहे थे और उनकी बहन रीता बहुगुणा उसी प्रदेश की कांग्रेस प्रमुख रह चुकी हैं.

खुद विजय बहुगुणा का राजनीतिक इतिहास बहुत लंबा नहीं है. पेशे से वकील और बाद में जज रहे बहुगुणा का राजनीतिक सफ़र एकाएक शुरू हुआ और अब उसी रफ़्तार से ढलान पर जाता नज़र आ रहा है.

जानकारों का तो यहाँ तक कहना है कि उनका मुख्यमंत्री बनना भी कांग्रेस आलाकमान ने तय किया था और उस पद से हटाना भी.

जब साल 2012 के चुनावों में कांग्रेस ने प्रदेश में बेहतर प्रदर्शन किया था तब इस पद की दौड़ में मौजूदा केंद्रीय मंत्री हरीश रावत का नाम सबसे आगे बताया जा रहा था. जबकि विजय बहुगुणा मुख्यमंत्री बनने से पहले सिर्फ एक बार लोक सभा सदस्य ही रहे थे.

आपदा

लेकिन मुख्यमंत्री बनते ही जैसे विजय बहुगुणा पर प्रशासनिक पहाड़ टूट पड़ा था. उन्हें कार्यभार सँभाले अभी चंद महीने ही हुए थे कि उत्तराखंड में आई भीषण बाढ़ और बादल फटने से केदारनाथ घाटी में कोहराम मच गया.

भारत ही नहीं दुनिया भर की निगाहें इस खूबसूरत प्रदेश पर आकर टिक गईं.

हज़ारों तीर्थयात्री मारे गए, सैंकड़ों लापता रहे और प्रदेश की अर्थव्यवस्था चरमरा गई. लेकिन इस सब के बीच बार-बार सवाल उठते रहे  उत्तराखंड सरकार पर भी जिसके मुखिया विजय बहुगुणा थे.

सवाल उठते रहे केदारनाथ तीर्थ स्थल और घाटी में मौजूद राहत और बचाव व्यवस्था पर.

16 जून को हुए इस हादसे के दो दिन के भीतर मैं खुद प्रदेश में पहुँच चुका था लेकिन किसी भी सरकारी महकमे से कोई ठोस जानकारी जुटाना शायद बिखर चुकी केदार घाटी में पहुँचने से भी ज्यादा मुश्किल था.

विरोधाभास

दो बार तो ऐसा भी हुआ कि प्रदेश के आपदा प्रबंधन विभाग ने लापता लोगों पर जो आंकड़े जारी किए, मुख्यमंत्री ने उससे ज़यादा आंकड़े एक मीडिया वार्ता में दे डाले.

खुद कांग्रेस पार्टी के भीतर लोग मुख्यमंत्री की तुलना में ज़्यादा चिंतित नज़र आने लगे और ये चिंता सार्वजनिक होने लगी, तब कहीं जाकर प्रदेश सरकार ने अपनी कमर कसी.

लेकिन इस पूरे घटनाक्रम के बीच अभूतपूर्व नुकसान हुआ विजय बहुगुणा की प्रशासनिक छवि का.

उनके अपने विधायक कई दफ़े कथित रूप से उनके बारे में विपरीत राय कांग्रेस आलाकमान तक पहले ही पहुंचा चुके थे.

शायद आगामी लोक सभा चुनावों के पहले प्रदेश में बेहतर प्रदर्शन की आस में ही कांग्रेस आलाकमान ने विजय बहुगुणा का छोटा कार्यकाल और छोटा कर दिया.

Source: Hindi News

Thursday, January 30, 2014

30th January Mahatma Gandhis Death Anniversary

शुक्रवार 30 जनवरी 1948 की शुरुआत एक आम दिन की तरह हुई.
हमेशा की तरह महात्मा गांधी सुबह तड़के साढ़े तीन बजे उठे. प्रार्थना की, दो घंटे अपनी डेस्क पर कांग्रेस की नई ज़िम्मेदारियों के मसौदे पर काम किया और इससे पहले कि दूसरे लोग उठ पाते, छह बजे फिर सोने चले गए.

काम करने के दौरान वह आभा और मनु का तैयार किया हुआ नीबू और शहद का गरम पेय और मौसम्मी जूस पीते रहे.

वो दोबारा सो कर आठ बजे उठे.

दिन के अख़बारों पर नज़र दौड़ाई और फिर ब्रजकृष्ण ने तेल से उनकी मालिश की. नहाने के बाद उन्होंने बकरी का दूध, उबली सब्ज़ियाँ, टमाटर, मूली खाई और संतरे का रस पिया. (दुर्गा दास फ़्रॉम कर्ज़न टू नेहरू एंड ऑफ़्टर)

शहर के दूसरे कोने में पुरानी दिल्ली रेलवे स्टेशन पर नाथूराम गोडसे, नारायण आप्टे और विष्णु करकरे अभी भी गहरी नींद में थे.

डरबन के उनके पुराने साथी रुस्तम सोराबजी सपरिवार गांधीजी से मिलने आए. इसके बाद रोज की तरह वो दिल्ली के मुस्लिम नेताओं से मिले.

उनसे बोले, "मैं आप लोगों की सहमति के बगैर वर्धा नहीं जा सकता."

सुधीर घोष और गांधी जी के सचिव प्यारेलाल ने नेहरू और पटेल के बीच मतभेदों पर लंदन टाइम्स में छपी एक टिप्पणी पर उनकी राय माँगी.

इस पर गांधी ने कहा कि वह यह मामला पटेल के सामने उठाएंगे जो चार बजे उनसे मिलने आ रहे हैं और फिर वह नेहरू से भी बात करेंगे जिनसे शाम सात बजे उनकी मुलाकात तय थी.

मूंगफलियों की तलब

चार बजे वल्लभभाई पटेल अपनी पुत्री मनीबेन के साथ गांधी से मिलने पहुँचे और प्रार्थना के समय यानी शाम पाँच बजे के बाद तक उनसे मंत्रणा करते रहे.

लापिएरे और कोलिंस अपनी किताब फ़्रीडम एट मिडनाइट में लिखते हैं कि बिरला हाउस के लिए निकलने से पहले नाथू राम गोडसे ने कहा कि उनका मूंगफली खाने का जी चाह रहा है.

आप्टे उनके लिए मूंगफली ढ़ूढ़ने निकले लेकिन थोड़ी देर बाद आ कर बोले पूरी दिल्ली में कहीं भी मूंगफली नहीं मिल रही.

लेकिन गोडसे को सिर्फ़ मूंगफली ही चाहिए थी. आप्टे फिर बाहर निकले और इस बार वो मूंगफली का बड़ा लिफ़ाफ़ा ले कर वापस लौटे.

गोडसे मूंगफलियों पर टूट पड़े. तभी आप्टे ने कहा कि अब चलने का समय हो गया है. मनोहर मुलगांवकर ने अपनी किताब मेन हू किल्ड गांधी में लिखा है कि

सवा चार बजे उन चारों ने कनॉट प्लेस के लिए एक ताँगा किया. वहाँ से फिर उन्होंने दूसरा ताँगा किया और बिरला हाउस से दो सौ गज़ पहले उतर गए.

उधर पटेल के साथ बातचीत के दौरान गांधी चर्खा चलाते रहे और आभा का परोसा शाम का खाना बकरी का दूध, कच्ची गाजर, उबली सब्ज़ियाँ और तीन संतरे खाते रहे.

दस मिनट की देरी


आभा को मालूम था कि गांधी को प्रार्थना सभा में देरी से पहुँचना बिल्कुल पसंद नहीं. वह परेशान हुईं, पटेल हालांकि भारत के लौह पुरुष थे, उनकी हिम्मत नहीं हुई कि वह गांधी को याद दिला सकें कि उन्हें देर हो रही है.

बहरहाल उन्होंने गांधी की जेब घड़ी उठाई और धीरे से हिला कर गांधी को याद दिलाने की कोशिश की कि उन्हें देर हो रही है.

अंतत: मणिबेन ने हस्तक्षेप किया और गांधी जब प्रार्थना सभा में जाने के लिए उठे तो पाँच बज कर दस मिनट होने को आए थे.

गांधी ने तुरंत अपनी चप्पल पहनी और अपना बाँया हाथ मनु और दायाँ हाथ आभा के कंधे पर डाल कर सभा की ओर बढ़ निकले.

रास्ते में उन्होंने आभा से मज़ाक किया.

गाजरों का ज़िक्र करते हुए उन्होंने कहा, "आज तुमने मुझे मवेशियों का खाना दिया."

आभा ने जवाब दिया,"लेकिन बा इसको घोड़े का खाना कहा करती थीं."

गांधी बोले, "मेरी दरियादिली देखिए कि मैं उसका आनंद उठा रहा हूँ जिसकी कोई परवाह नहीं करता."

तीन गोलियां और राम...राम


आभा हँसी लेकिन उलाहना देने से भी नहीं चूकीं,"आज आपकी घड़ी सोच रही होगी कि उसको नज़रअंदाज़ किया जा रहा है."

गांधी बोले, "मैं अपनी घड़ी की तरफ क्यों देखूँ."

फिर गांधी गंभीर हो गए, "तुम्हारी वजह से मुझे दस मिनटों की देरी हो गई है. नर्स का यह कर्तव्य होता है कि वह अपना काम करे चाहे वहाँ ईश्वर भी क्यों न मौजूद हो. प्रार्थना सभा में एक मिनट की देरी से भी मुझे चिढ़ है."

यह बात करते-करते गांधी प्रार्थना स्थल तक पहुँच चुके थे. दोनो बालिकाओं के कंधों से हाथ हटा कर गांधी ने लोगों के अभिवादन के जवाब में उन्हें जोड़ लिया.

बाँएं तरफ से नाथूराम गोडसे उनकी तरफ झुका और मनु को लगा कि वह गांधी के पैर छूने की कोशिश कर रहा है.

आभा ने चिढ़ कर कहा कि उन्हें पहले ही देर हो चुकी है. उनके रास्ते में व्यवधान न उत्पन्न किया जाए. लेकिन गोडसे ने मनु को धक्का दिया और उनके हाथ से माला और पुस्तक नीचे गिर गई.

वह उन्हें उठाने के लिए नीचे झुकीं तभी गोडसे ने पिस्टल निकाल ली और एक के बाद एक तीन गोलियाँ गांधी जी के सीने और पेट में उतार दीं.

उनके मुँह से निकला, "राम.....रा.....म." और उनका जीवनविहीन शरीर नीचे की तरफ गिरने लगा.

सन्नाटे में स्तब्ध भीड़

महात्मा गांधी को प्रार्थना सभा में देरी नहीं पसंद थी.

आभा ने गिरते हुए गांधी के सिर को अपने हाथों का सहारा दिया.

गोपाल गोडसे ने अपनी किताब गांधीज़ असैसिनेशन एंड मी में लिखा है कि बाद में नाथूराम गोडसे ने उनको बताया कि दो लड़कियों को गांधी के सामने पा कर वह थोड़ा परेशान हुए थे.

उन्होंने बताया था, "फ़ायर करने के बाद मैंने कस कर पिस्टल को पकड़े हुए अपने हाथ को ऊपर उठाए रखा और पुलिस.... पुलिस चिल्लाने लगा. मैं चाहता था कि कोई यह देखे कि यह योजना बना कर और जान बूझ कर किया गया काम था. मैंने आवेश में आकर ऐसा नहीं किया था. मैं यह भी नहीं चाहता था कि कोई कहे कि मैंने घटना स्थल से भागने या पिस्टल फेंकने की कोशिश की थी. लेकिन यकायक सब चीजे जैसे रुक सी गईं, और कम से कम एक मिनट तक कोई इंसान मेरे पास तक नहीं फटका."

गांधी की हत्या के कुछ मिनटों के भीतर लॉर्ड माउंटबेटन वहाँ पहुँच गए.

तनाव इतना था कि एक भी ग़ैर-ज़रूरी शब्द निकला नहीं कि अफ़वाह जंगल में आग की तरह फैल जाती.

माउंटबेटन को देखते ही एक व्यक्ति चिल्लाया, "गांधी को एक मुसलमान ने मारा है." उस समय तक माउंटबेटन को हत्यारे का नाम और धर्म के बारे में पता नहीं चल पाया था. लेकिन इसके बावजूद उन्होंने तमक कर जवाब दिया, "यू फ़ूल, डोन्ट यू नो इट वाज़ ए हिंदू."

जीवन की रोशनी


महात्मा गांधी की शव यात्रा में उमड़ा जन सैलाब

माउंटबेटन के साथ चल रहे उनके प्रेस अटैची कैंपबेल जॉनसन ने उनसे पूछा, ‘आपको कैसे मालूम कि ये काम हिंदू ने किया है.’ माउंटबेटन का उत्तर था, ’मुझे वास्तव में नहीं मालूम’. राजमोहन गांधी अपनी किताब मोहन दास में लिखते हैं कि बिरला हाउस के उस कमरे में जहाँ गांधी का शव रखा हुआ था नेहरू ज़मीन पर बैठे हुए थे. उनकी आँखों से ज़ारोंकतार आँसू निकल रहे थे. उनसे कुछ फ़िट की दूरी पर सरदार पटेल भी बैठे हुए थे बिल्कुल पत्थर के बुद्ध की मुद्रा में.

उनकी आँखे उस शख़्स पर गड़ी हुई थीं जिससे एक घंटे पहले वो बातें कर रहे थे. अचानक नेहरू उठे. उनके साथ सरदार पटेल भी उठे. दोनों ने एक दूसरे को अपनी बाहों में भर लिया.

उसी शाम नेहरू ने रेडियो पर देश को संबोधित किया, ’द लाइट हैज़ गॉन आउट ऑफ़ अवर लाइव्स..’

अगले दिन 31 जनवरी को महात्मा गांधी को अंतिम विदाई देने के लिए लाखों लोगों का सैलाब राजघाट पर उमड़ पड़ा था. जैसे ही गांधी की चिता को आग दी जा रही थी मनु ने अपने चेहरे को सरदार पटेल की गोद में रख कर फूट-फूट कर रोना शुरू कर दिया. कुछ क्षणों बाद जब उन्होंने अपनी निगाहे ऊपर उठाई तो उन्हें महसूस हुआ जैसे पटेल अचानक दस साल और बूढ़े दिखने लगे हों.

Source:  Hindi News

Wednesday, January 29, 2014

Nirbhaya Is Responsible For Her Gangrape Says NCW Member Asha Mirje

दिल्ली में हुए निर्भया कांड और मुंबई के शक्ति मिल गैंग रेप के लिए महिला आयोग की सदस्या ने पीड़िताओं को ही ठहरा दिया जिम्मेदार.
पहनावा है जिम्मेदार
एक ओर देश में महिलाओं के साथ हो रहे दुष्कर्म और बलात्कार की घटनाओं को लेकर चर्चाएं जोरों पर हैं. वहीं, दूसरी ओर महाराष्ट्र महिला आयोग की सदस्या आशा मिर्जे ने महिलाओं के साथ लगातार हो रहे यौनशोषण के लिए उन्हें ही दोषी बता दिया है. आशा ने महिलाओं के पहनावे ही जिम्मेदार ठहराया दिया. आशा मिर्जे महाराष्ट्र में सत्तारूढ़ कांग्रेस की सहयोगी पार्टी राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) की नेता भी हैं. मिर्जे ने नागपुर में हुई पार्टी की महिला कार्यकर्ताओं की बैठक में कहा कि महिलाओं का रहन-सहन और पहनावा बलात्कार की घटनाओं को बढ़ावा देता है.

सुनसान जगह जाने की जरुरत ही क्या थी

दिल्ली के चर्चित निर्भया गैंग रेप मामले में भी मिर्जे ने पीड़ित युवती को ही दोषी ठहराया. आशा ने निर्भया कांड के लिए निर्भया को ही दोषी ठहराते हुए कहा कि इतनी रात में वो अपने दोस्त के साथ फिल्म देखने गई क्यों थी? यही नहीं मिर्जे ने मुंबई के शक्ति मिल्स में महिला फोटो पत्रकार के साथ हुए गैंगरेप पर भी कमेंट करते हुए कहा कि पीड़ित महिला को इतनी सुनसान जगह जाने की क्या आवश्यकता थी.

Source: Hindi News