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Wednesday, September 10, 2014

Equipments missing

कभी बाढ़ तो कभी आग, हर साल गोरखपुर में कहर बन कर टूटती है. लाखों-करोड़ों का नुकसान होता है तो कभी-कभी जान भी चली जाती है. ऐसी आपदा से निपटने के लिए शासन के आदेश पर लाखों रुपए के इक्विपमेंट्स आपदा विभाग में आए थे. जिन्हें सभी तहसील और पुलिस को देने थे. जिससे जरूरत पड़ने पर वे इसका इस्तेमाल कर लोगों की सेफ्टी कर सकें. इन इक्विपमेंट्स को आए करीब एक साल से अधिक का समय बीत चुका है, मगर ये अब तक न तो पुलिस के पास पहुंचे और न ही तहसील में. ये इक्विपमेंट्स अब कहां हैं इसके बारे में किसी को नहीं मालूम. बल्कि इन इक्विपमेंट्स के बारे में अधिकांश अधिकारी तक को जानकारी नहीं है.

कहां है इक्वूपमेंट

गोरखपुर में बाढ़ आना आम प्रॉब्लम है. बाढ़ से निपटने के लिए शासन से करीब क्0 लाख रुपए का बजट आया था. जिससे आपदा विभाग ने लाइफ जैकेट, समेत आपदा से जुड़े इक्वूपमेंट की खरीदारी की. शासन के आदेश के मुताबिक इन इक्विपमेंट्स को जिले की सभी तहसील में भेजना था. मगर अब तक इक्विपमेंट्स नहीं भेजे गए. एसडीएम सहजनवां ने बताया कि तहसील में करीब पांच साल पुराने इक्विपमेंट्स रखे है. पिछले डेढ़ साल में कोई इक्विपमेंट्स नहीं मिले हैं. कुछ ऐसा ही हाल पुलिस का भी है. फिर आखिर ये लाखों रुपए के इक्विपमेंट्स कहां गए. इस बारे में जब आपदा विभाग से जानकारी लेने की कोशिश की गई तो कोई कुछ नहीं बता पाया. वहीं संबंधित अधिकारी भी इससे अनजान दिखे.

वर्जन-

यह मामला संज्ञान में नहीं है. फिर भी मामले की जानकारी लेकर जांच कराई जाएगी. अगर कोई दोषी मिलता है तो उसके खिलाफ सक्त कार्रवाई की जाएगी.

दिनेश चंद्र सिंह, एडीएम एफआर

इन इक्वूपमेंट की हुई थी खरीदारी

-लाइफ जैकेट

-तारपोली शीट

-रस्सा

-लाइफ ब्वॉय रिंग

-टार्च

-सर्च लाइट

-रेनकोट

-वालंटियर जैकेट
 

Wednesday, September 3, 2014

16 will mdeedia action against illegal mobile towers

एमडीडीए द्वारा जल्द ही अवैध टावर के खिलाफ ध्वस्तीकरण की कार्रवाई की जाएगी. एमडीडीए द्वारा क्म् अवैध टावर की सूची तैयार की गई है. एमडीडीए सचिव बंशीधर तिवारी ने बताया कि सभी सभी को क्भ् दिन का नोटिस दे दिया गया है. सचिव ने बताया कि क्भ् दिनों के भीतर खुद ही अवैध टावर्स मालिकों को इन्हें ध्वस्त करने के आदेश दिए गए हैं. यदि इसके बाद अवैध टावर ध्वस्त नहीं किए जाते हैं तो फिर एमडीडीए द्वारा इनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी.

कॉम्पलैक्स व शॉपिंग मॉल होंगे सील

अवैध टावर्स के अलावा एमडीडीए के द्वारा उन शॉपिंग मॉल्स व कॉम्पलैक्स के खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी, जिनके बेसमेंट में पार्किंग स्वीकृत है, लेकिन वहां पर पार्किंग के रूप में इसका प्रयोग नहीं हो रहा है. बंशीधर तिवारी ने बताया कि ऐसे पूरे कॉम्पलैक्स को सील किया जाएगा. उन्होंने बताया कि पार्किंग का स्थल, रैंप का ठीक प्रकार से न होना, उचित प्रकार की व्यवस्था न होना बिंदु देखे जाएंगे.

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जारी अवैध टावर्स की सूची

मैनेजर रिलायंस टावर, क्यूपो टेलीकॉम, प्रबंधक वोडाफोन कंपनी, प्रबंधक एयरटेल कंपनी, शिवनाथ पंडित, टिंक्कल व बक्शी, मैनेजर रिलायंस मोबाइल, कपिल, मैनेजर रिलायंस टावर, केडी कुलश्रेष्ठ, आरएस पयाल, जितेंद्र ग्रोवर, नरेश, मैनेजर एयरटेल लिमिटेड, प्रबंधक एयरटेल कंपनी, कर्नल आरपी नौटियाल यूनिवर्सिटी.

Source: Gorakhpur Hindi News and Online Hindi Newspaper
 
 

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Enunch looted and beaten

पीपीगंज एरिया के कल्याणपुर में बधाई गीत गाने जा रहे किन्नरों को युवकों ने घेरकर पीटा. घटना से गुस्साए किन्नरों ने पीपीगंज थाना पर जमकर बवाल काटा. सीओ कैंपियरगंज और एसओ कैंपियरगंज ने किन्नरों को समझा बुझाकर शांत कराया. मारपीट करने वाले आरोपियों को अरेस्ट करने के लिए किन्नरों ने पुलिस को वेंस्डे 11 बजे तक की मोहलत दी है.

नाच- गा रहे थे तभी बोल दिया हमला

कल्याणपुर निवासी रामललित के घर बेटा पैदा हुआ है. ट्यूज्डे को बधाई गाने के लिए किन्नर उनके घर जा रहे थे. रास्ते में जंगल औराही, सहिजना निवासी मारुत ने उनका पीछा शुरू कर दिया. कल्याणपुर में पहुंचकर किन्नर गाना गा रहे थे. आरोप है कि क्0 से अधिक लोगों के साथ पहुंचे मारुत ने उनसे मारपीट शुरू कर दिया. मारपीट से गुस्साए किन्नरों ने पुलिस को सूचना दी. पुलिस आरोपी मारुत को पकड़कर थाने पहुंची. अन्य आरोपियों को पकड़ने की बात किन्नरों ने हंगामा शुरू कर दिया. सुबह से लेकर दोपहर तक थाने पर बैठे रहे.

सब्जी मार्केट में वसूली को लेकर हुआ था विवाद

पुलिस का कहना है कि मारुत का भाई कपिश भगवानपुर सब्जी मंडी में कारोबार करता है. दो दिन पहले वह सब्जी बेचने गया तो किन्नर वसूल करने गए. जबरन दुकान वालों से रुपए और सामान की वसूली करने लगे. मारुत का कहना है कि उसके भाई ने रुपए और सब्जी देने से मना किया तो किन्नरों ने उसको पीट दिया. तभी से वह किन्नरों की तलाश कर रहा था. आरोपी मारुत का पुलिस ने शांति भंग की आशंका में चालान कर दिया. लेकिन मारपीट में शामिल उसके अन्य साथियों को पकड़ने की मांग को लेकर किन्नर थाने पर डटे रहे.

मारपीट के आरोपी युवकों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी. एक व्यक्ति को चालान किया गया है. अन्य की तलाश की जा रही है.

अमरजीत सिंह यादव, एसओ पीपीगंज

Source: Gorakhpur Hindi News and Online Hindi Newspaper
 
 

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Saturday, August 30, 2014

ETM not working

एक तरफ यूपी रोडवेज यात्रियों के बेहतर सुविधा के लिए स्मार्ट कार्ड फैसिलिटी शुरू की है. वहीं स्मार्ट कार्ड यात्रियों के साथ आए दिन कंडक्टर बदसलूकी कर रहे हैं. यह मामला तब प्रकाश में आया जब सेंट जोसेफ वूमेन डिग्री कॉलेज में पढ़ने वाली एक छात्रा को रोडवेज बस कंडक्टर ने बीच रास्ते में इसलिए उतार दिया क्योंकि उसके पास स्मार्ट कार्ड था और कंडक्टर के पास ईटीएम नहीं था. छात्रा जब इस मामले की शिकायत के लिए गोरखपुर डिपो के जेएसआई और एसएस के पास पहुंची तो दोनों ही अधिकारी जेएसआई और एसएस अपने ऑफिस से गायब मिले.

बीच रास्ते में उतार दिया

चौरीचौरा की कंचन सिंह सेंट जोसेफ वूमेन डिग्री कॉलेज में ग्रेजुएशन कर रही है. वह वेंस्डे की दोपहर रोडवेज बस नंबर यूपी-भ्फ् एटी फ्9क्9 में गोरखपुर से चौरीचौरा के लिए बैठी थी. कूड़ाघाट के पास पहुंचते ही कंचन ने जब बस कंडक्टर को एमएसटी (जीकेपीजीके क्ब्000म्99ब्) दिखाया तो कंडक्टर ने ईटीएम न होने की बात कहते हुए उससे उतरने को कहने लगा, लेकिन छात्रा ने इंकार कर दिया. इसके बाद बस कंडक्टर ने लड़की से अभद्र भाषा में बात की और उसे बीच रास्ते में उतार दिया. जबकि नियमानुसार कोई भी स्मार्ट कार्ड लेकर चलने वाले यात्री को कोई भी कंडक्टर ईटीएम के अभाव में उतार नहीं सकता है. वह अपने मार्ग पत्र पर यात्री का रिसीविंग देखकर उसे यात्रा करा सकता है. लेकिन उतार नहीं सकता है.

कई चक्कर लगाए, लेकिन नहीं मिले अधिकारी

छात्रा ने कंडक्टर के खिलाफ कार्रवाई की शिकायत के लिए थर्सडे को गोरखपुर डिपो पर अपनी फ्रेंड्स के साथ आई. लेकिन जब वह स्टेशन सुप्रीटेंडेट के पास शिकायत के लिए पहुंची मौके पर न तो कोई जेएसआई मिला और ना ही स्टेशन सुप्रिटेंडेंट. घंटों बस स्टेशन पर अधिकारियों की खोजबीन करने के बाद किसी के न मिलने पर वह मायूस होकर चली गई. छात्रा का यह भी कहना था कि उसने हेल्प लाइन नंबर क्800क्80ख्877 पर भी कंप्लेंट करने की कोशिश की थी, लेकिन उस पर भी कंप्लेंट नहीं दर्ज हुई.

क्98 में से म्ख् ईटीएम खराब

गोरखपुर डिपो कंडक्टरों की माने तो करीब भ्भ्0 से ज्यादा कंडक्टर हैं, लेकिन वर्तमान में मात्र में क्98 ईटीएम है. जिसमें म्ख् खराब है और जो है भी वह ठीक से चलते नहीं हैं. जब भी ड्यूटी पर ईटीएम लेकर जाओ तो बीच रास्ते में स्मार्ट कार्ड को स्वैप करने पर रूट नॉट फाउंड लिखकर आता है. जिसके चलते काफी प्रॉब्लम आती हैं. समय से कभी भी हमें ईटीएम नहीं दिए जाते हैं. जबकि ईटीएम को तुरंत दिया जाना चाहिए. यहीं नहीं कई बार तो बीच रास्ते में ईटीएम आपरेट करते समय यात्रियों की संख्या भी नहीं शो करती है. जिसके चलते बीच रास्ते में प्रॉब्लम आती है. चार्जर तक नहीं है. जिससे की ईटीएम चार्ज किए जा सकें. उधर बीच रास्ते में अगर अधिकारियों ने चेक किया तो जबरदस्ती डब्लू टी बना दिया जाता है.

वर्जन..

कंडक्टर द्वारा छात्रा के साथ बदसलूकी का मामला गंभीर है. इसके लिए कंडक्टर के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी. रहा सवाल खराब ईटीएम प्राब्लम का तो वह रिपेयरिंग के लिए गए हुए हैं. जैसे ही आ जाएंगे. यह समस्या दूर कर ली जाएगी.

सुग्रीव कुमार राय,

आरएम, यूपी रोडवेज गोरखपुर रीजन 

Friday, August 22, 2014

Lecture series in dvnpg

संघर्ष और चुनौतियों से जीवन में निखार आता है, इसलिए इनसे घबराना नहीं चाहिए. इनको स्वीकार करते हुए इनसे निपटने और राष्ट्र सेवा के लिए तत्पर होने की जरूरत है. शिक्षा के माध्यम से संस्कृतिनिष्ठ राष्ट्रभक्त नागरिक तैयार करना ब्रह्मालीन महाराज के प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी. यह बातें डीडीयू गोरखपुर यूनिवर्सिटी के वीसी प्रो. अशोक कुमार ने डीवीएनपीजी कॉलेज में ऑर्गेनाइज लेक्चर सीरीज के इनॉगरेशन के दौरान कहीं. वह राष्ट्र संत दिग्विजयनाथ स्मृति लेक्चर सीरीज के इनॉगेरशन के मौके पर बतौर चीफ गेस्ट मौजूद थे.

लोक हित के कार्य में समर्पित थे महंत दिग्विजय

प्रोग्राम की अध्यक्षता पूर्वाचल यूनिवर्सिटी जौनपुर के पूर्व वीसी प्रो. उदय प्रताप सिंह ने की. उन्होंने कहा कि गोरखपुर यूनिवर्सिटी भी महंत दिग्विजयनाथ के शैक्षिक प्रयासों के एक स्मारक के तौर पर हमारे सामने है. वह लोक हित के कार्य में हमेशा समर्पित रहते थे. सिर्फ इतना ही नहीं उनकी पर्सनालिटी और क्वालिटी किसी को भी अपना बना लेने की अद्भुत क्षमता रखती थी. यही वजह थी कि तत्कालीन समाज ने राष्ट्रीय और सामाजिक कल्याण के काम में उनका हमेशा ही बढ़-चढ़कर सपोर्ट रहता था.

माल्यार्पण के साथ हुआ इनॉगरेशन

प्रोग्राम की शुरुआत मां सरस्वती और महाराणा प्रताप दिग्विजयनाथ के चित्र पर पुष्पांजलि के साथ हुआ. गेस्ट का वेलकम प्रिंसिपल डॉ. शेर बहादुर सिंह ने बुके और मोमेंटो देकर किया. प्रोग्राम का संचालन डॉ. श्रीभगवान सिंह और आभार ज्ञापन ऑर्गेनाइजिंग सेक्रेटरी डॉ. शैलेंद्र प्रताप सिंह ने किया. इस दौरान डॉ. प्रदीप राव, मारकंडे सिंह, प्रो. आरएन सिंह, प्रो. हरिशरण, डॉ. हर्ष कुमार सिन्हा और डॉ. विनोद कुमार सिंह मौजूद रहे.

Thursday, August 21, 2014

Running room inaugrated

रेलवे इंप्लाई के लिए बनाए गए रनिंग रूम का वेंस्डे को एनई रेलवे जीएम केके अटल ने इनॉगरेशन किया. इसी क्रम में उन्होंने नवनिर्मित डॉयनिंग हॉल और किचन (अन्नपूर्णा) का भी उद्घाटन किया. नवनिर्मित पार्क में भी प्लांटेशन भी किया गया. इस मौके पर एनई रेलवे जीएम केके अटल ने कहा कि यात्रियों की सुरक्षा व संरक्षा के लिए यातायात संचलन की महत्वपूर्ण धुरी ड्राइवर और गार्ड होते हैं. इसलिए इन्हें आराम के लिए रनिंग रूम की जरूरत है. उन्होंने बताया कि भारतीय रेल में सर्वोत्तम रनिंग रूम के लिए प्रतिवर्ष शील्ड तथा पुरस्कार देने का प्रस्ताव भेजा गया था. रेलवे बोर्ड ने इस व्यवस्था को लागू कर दिया है. उन्होंने बताया कि गोरखपुर के रनिंग रूम में सेंट्रलाइज एयरकूलिंग सिस्टम लगाने की प्रक्रिया चल रही है. इस मौके पर लखनऊ डिवीजन के डीआरएम अनूप कुमार, मुख्य यांत्रिक इंजीनियर अनिल शर्मा, प्रमुख मुख्य इंजीनियर ओ.पी अग्रवाल, मुख्य परिचालन प्रबंधक जीडी पाण्डेय और सीसीएम अरविंद कुमार समेत मंडल के सीनियर्स ऑफिसर्स मौजूद रहे.

Wednesday, August 20, 2014

A dead body found in city

तिवारीपुर एरिया के सूरजकुंड पोखरे में ट्यूज्डे दोपहर अज्ञात युवती की डेडबॉडी मिली. मोहल्ले के लोगों की सूचना पर पहुंची पुलिस ने डेडबॉडी को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया. पुलिस का कहना है कि मानसिक रोगी युवती मोहल्ले में इधर- उधर घूमती रहती थी. अब सवाल उठता है कि आखिर बिना किसी पूछताछ या जांच के पुलिस को कैसे पता चल गया कि मरने वाली मानसिक रोगी थी?

मंडे नाइट जागरण देखने गई थी युवती

पुलिस का कहना है कि युवती के माता- पिता का कुछ पता नहीं है, लेकिन वह मोहल्ले में भटकती रहती थी. मोहल्ले वालों ने उसका नाम रानी बताया है. रात में वह अक्सर सूरजकुंड पोखरे पर नजर आती थी. मंडे नाइट वह मोहल्ले में पुलिस चौकी के पास आयोजित जागरण प्रोग्राम देखने गई. रात में लौटी तो पोखरे के किनारे सो गई. पुलिस वालों ने बताया कि सीढि़यों पर सुलेशन और स्मैक की पुडि़या मिली. इससे अनुमान लगाया जा रहा है कि नशे की हालत में वह पानी में डूब गई.

मानसिक रोगी या भिखारी होते हैं मरने वाले लावारिस

जिले में कहीं भी लावारिस डेडबॉडी मिलने पर पुलिस पिंड छुड़ाने की कोशिश करती है. झाडि़यों, सड़कों के किनारे, ताल- पोखरों में मिलने वाली डेडबॉडी को लेकर पुलिस को परेशान होना पड़ता है. ऐसे में पुलिस कोशिश करती है कि उनको भिखारी या मानसिक रोगी बताकर काम खत्म कर लिया जाए. मैले कुचैले कपड़े, बढ़ी हुई दाढ़ी और बाल यह साबित करने के लिए काफी होते हैं. गवर्नमेंट के निर्देश पर अब लावारिस डेडबॉडी मिलने पर उसको 7ख् घंटे सेफ रखा जाएगा. फिर पोस्टमार्टम कराकर उनका अंतिम संस्कार कराया जाएगा. संडे को रेल दावा अभिकरण के पास झाड़ी में मिली महिला की डेडबॉडी को पुलिस ने मानसिक रोगी बता दिया था. इसके पहले रेलवे ऑफिसर के बंगले में एक युवती की डेडबॉडी मिली थी जिसे पुलिस ने भिखारी बताया था.

सूर्यकुंड पोखरे में मिली डेडबॉडी को पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया है. मोहल्ले के लोगों ने बताया कि वह अक्सर घूमती रहती थी. नशे की आदत की वजह से पानी में डूब गई.

नेहरू,

एसएचओ, थाना तिवारीपुर 

Tuesday, August 19, 2014

Jewellery bag robbed off in gorakhpur

हड़हवा फाटक रोड स्थित ज्वेलरी शॉप से गहनों से भरा बैग लूटकर बदमाश भाग गए. घटना मंडे मार्निग सुबह करीब सवा क्0 बजे हुई. शॉपकीपर की सूचना पर गोरखनाथ पुलिस बदमाशों की तलाश कर रही है. दो माह पहले भी इसी ज्वेलरी शॉप में बदमाशों ने लूटपाट की कोशिश की थी. सीओ गोरखनाथ अतुल सोनकर ने कहा कि जल्द ही बदमाशों को पकड़ लिया जाएगा.

बैग रखा भीतर, तभी बदमाशों ने मारा झपट्टा

कोतवाली एरिया के अलीनगर उत्तरी निवासी जितेंद्र मेहता और धर्मेद्र मेहता की नरेंद्र ज्वेलर्स के नाम से ज्वेलरी शॉप उत्तरी हुमायूपुर, हड़हवा फाटक रोड पर है. शॉप पर दोनों भाई बैठते हैं. चोरी के डर से रोजाना कीमती गहनों को बैग में भर बिजनेसमैन घर उठा ले जाते हैं. मंडे मार्निग करीब सवा क्0 बजे धर्मेद्र अपनी बाइक से शॉप पर पहुंचा. शटर उठाने के बाद उसने काउंटर पर बैग रख दिया. पूजा करने के लिए पड़ोस में पानी लेने गया, तभी एक परिचित मिले जिनसे वो बात करने लगा. इस बीच अचानक एक युवक शॉप में घुसा. गहनों से भरा बैग लेकर बाहर खड़ी बाइक पर बैठ गया. बगल में साइकिल की दुकान पर काम कर रहे भोला ने शोर मचाया, लेकिन तब तक बाइक सवार तरंग पुल की तरफ बढ़ चुके थे. लोगों ने बाइक से उनका पीछा करने की कोशिश की.

जून मंथ में एक बदमाश ने की थी लूटपाट की कोशिश

धर्मेद्र की सूचना पर उसके भाई जितेंद्र भी पहुंच गए. धर्मेद्र ने पुलिस को बताया कि बैग में भ्0 हजार नकदी, दो लाख रुपए से अधिक के गहने, चाबी और जरूरी पेपर्स थे. बाइक चलाने वाला बदमाश हेलमेट पहने था. धर्मेद्र के भाई जितेंद्र ने बताया कि उनकी शॉप करीब ख्0 साल पुरानी है. जून मंथ में भी उनकी शॉप में लूटपाट की कोशिश हुई थी.

आखिर हम लोग कैसे रहेंगे सेफ

शॉप को निशाना बनाने को लेकर दोनों भाई काफी परेशान नजर आए. दोनों भाई ज्वेलरी का काम करते हैं जबकि उनके तीसरे भाई सत्येंद्र बिजनेस करते हैं. जितेंद्र ने कहा कि आखिरकार उनकी दुकान कैसे चलेगी. लूटपाट होने पर पुलिस मामूली कार्रवाई करके कोरम पूरा कर लेती है. पहले तो पुलिस मानती है कि घटना फर्जी है. बाद में किसी तरह से मुकदमा दर्ज किया जाता है. ऐसे में बिजनेस करना मुश्किल होता जा रहा है. दोबारा हुई घटना से दोनों भाई काफी दहशत में नजर आए.

बदमाश गहनों से भरा बैग लेकर भागे हैं. यह चोरी का मामला है. ज्वेलर्स ने जो तहरीर दी है, उसके आधार पर मुकदमा दर्ज करके कार्रवाई की जाएगी.

अतुल सोनकर, सीओ, गोरखनाथ 

Tuesday, August 12, 2014

Ner draining

पूर्वोत्तर रेलवे द्वारा रामगढ़ताल में कूड़ा गिराने को लेकर आरकेबीके, मोहद्दीपुर के पास फ्राइडे को स्थानीय पब्लिक ने खूब हंगामा किया. हंगामे की सूचना पर रेलवे और जीएमसी के अफसर मौके पर पहुंच गए. इसके बाद रेलवे अधिकारियों ने तीन दिनों में गिराए गए कूड़े को उठाने का आश्वासन दिया तब जाकर पब्लिक शांत हुई. स्थानीय पब्लिक के विरोध को देखते हुए रेलवे ने फ्राइडे से रामगढ़ताल में कूड़ा गिराना बंद कर दिया.

चोरी से गिरा रहा था कूड़ा

पहले मोहद्दीपुर में आरकेबीके पास जीएमसी कूड़ा गिराने का काम करता था. छह माह पहले भारत नेपाल मैत्री संघ ने इसके विरोध में आंदोलन किया. आंदोलन के बाद जीएमसी ने यहां कूड़ा गिराना बंद कर दिया. संघ के मोहन लाल गुप्त ने बताया कि जीएमसी ने कूड़ा गिराना बंद कर दिया था, लेकिन पिछले तीन दिनों से रेलवे लगातार यहां कूड़ा गिराने का काम कर रहा था. रेलवे की ट्रक चोरी से आती और कूड़ा गिरा कर चली जा रही थी. फ्राइडे को जैसे ही गाड़ी आई हम लोग मौके पर पहुंचे और गाड़ी को खड़ा करा दिया. इसकी सूचना हमने जीएमसी अफसर को दी. मौके पर पहुंचे मुख्य नगर स्वास्थ्य अधिकारी ने रेलवे अफसरों से बात की. उसके बाद रेलवे यहां से कूड़ा हटाने के लिए तैयार हुआ.

पब्लिक ने मोहद्दीपुर में रेलवे का कूड़ा गिराने की कंप्लेन की थी. मौके पर पहुंच कर जायाजा लिया गया और रेलवे अफसरों से रामगढ़ताल के किनारे कूड़ा गिराने की कंप्लेन की गई है.

अरूण कुमार, मुख्य नगर स्वास्थ्य अधिकारी, जीएमसी

नया ड्राइवर था उसे पता नहीं था कि कहां रेलवे का कूड़ा गिराया जाता है. गलती से वह उस स्थान पर कूड़ा गिरा रहा था. रेलवे उस कूड़े का उठा लेगी.

डीएन त्रिपाठी, सीनियर सेक्शन इंजीनियर, एनई रेलवे 


 
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Friday, August 8, 2014

Bazar ho gulzar mahewa fruit market

मैं सिटी को फलों का स्वाद दिलाने वाले फल की सबसे बड़ी मंडी महेवा हूं. यहां पर सिटी ही नहीं बल्कि आस-पास के शहरों से भी लोग अपनी फलों की जरूरत को पूरा करने के लिए पहुंचते हैं. कहने को तो मैं फलों की सबसे बड़ी मंडी हूं, लेकिन यहां की सुविधाओं की बात करें तो यह किसी छोटे से एरिया की दुकानों से भी बदतर है. मंडी में एंट्री ही सड़े-गले फलों की बदबू के साथ होती है. अंदर पहुंचने पर कई जगह सड़े-गले फल दिखाई देते हैं. सड़क पर कई जगह बड़े-बड़े गड्ढे देखने को मिल जाएंगे, जिसमें हल्की सी बरसात में पानी भर जाता है. यहां पर आने वाले ट्रक ड्राइवर भी अपनी गाडि़यों को जहां पर जगह मिली वहीं बेतरतीब लगा देते हैं, जिसकी वजह से लोकल एरिया से आने वाले रिटेलर्स और कस्टमर्स को अपनी गाड़ी खड़ी करने के लिए जद्दोजहद करनी पड़ती है. बरसात के दिनों में तो यहां की हालत काफी खराब रहती है और हर तरफ कीचड़ के अंबार देखने को मिल जाते हैं.

फैक्ट फाइल -

नाम - महेवा फल मंडी

मार्केट ऑफ - फ्रूट्स

शॉप की तादाद - लगभग क्भ्0 (थोक)

टोटल टर्नअप पीपुल - क्0000 से क्ख्000

टर्नओवर - लगभग क् करोड़ डेली

यह मिल रहे हैं फल - आम, सेब, मोसमी, नाशपाती, केला, अनन्नास, अनार

प्रॉब्लम्स -

- हर मार्केट की तरह यहां पर भी पार्किंग की कोई फैसिलिटी नहीं है.

- ड्रेनेज सिस्टम न होने की वजह से यहां हमेशा ही वॉटर लॉगिंग की प्रॉब्लम फेस करनी पड़ती है.

- मार्केट में कई जगह मेनहोल के चैंबर टूट चुके हैं, जहां कई बार लोग गिर चुके हैं.

- यहां आने वाले बड़ी गाडि़यां बेतरतीब खड़ी हो जाती हैं, जिससे अक्सर जाम लग जाता है.

- आवारा जानवर यहां दिन भर घूमते रहते हैं और लोगों के लिए बड़ा खतरा पैदा कर देते हैं.

- फ्-ब् दिनों में एक बार सफाई होती है. जिससे यहां पर काफी बदबू रहती है, जिससे यहां पर आने वाले व्यापारियों का चलना दूभर हो जाता है.

- सड़क की हालत भी काफी खराब है, जिससे लोगों को काफी परेशानी फेस करनी पड़ती है.

दुकान के सामने ही पानी लग जाता है, जिसकी वजह से आने वालों को काफी परेशानी उठानी पड़ती है.

राकेश, थोक व्यापारी

टाइमली सफाई नहीं होती है, जिसकी वजह से जगह-जगह गंदगी के अंबार देखने को मिल जाते हैं.

मनोज कुमार, रिटेल व्यापारी

गाडि़यां प्रॉपर पार्क नहीं हो पाती है, जाम जैसी कंडीशन हो जाती है. पार्किंग की व्यवस्था की जानी चाहिए.

विजय कुमार सोनकर, थोक व्यापारी

इस मार्केट में कई मेनहोल के ढक्कन गायब हो चुके हैं, कई बार मोटरसाइकिल और साइकिल सवार लोगों को चोट लग चुकी है, इस ओर किसी का ध्यान नहीं जा रहा है.

रमेश जायसवाल, थोक व्यापारी

कई जगह सड़क पर गड्ढे हो गए हैं, जिसकी वजह से आने जाने में प्रॉब्लम होती है, गड्ढों में अक्सर पानी भर जाता है.

मोहम्मद इमरान, रिटेल व्यापारी

सॉल्युशन -

- रेग्युलर सफाई की जरूरत है. मार्निग में जब दुकानें खुलती हैं तो उससे पहले सफाई हो जाए और रात में दुकान बंद करने के बाद एक बार सफाई की जरूरत है.

- जो मेनहोल खुले हुए हैं, उनको प्रॉपर वे में ढंकना चाहिए. साथ ही जहां जल जमाव होता है वहां पर पानी निकासी की व्यवस्था करनी चाहिए.

- पार्किंग की फैसिलिटी प्रोवाइड की जानी चाहिए, ऐसा न होने की कंडीशन में कम से कम प्रॉपर वे में गाडि़यों को खड़ी करने का बंदोबस्त करना चाहिए.

 
 

Friday, August 1, 2014

One opd for ayurvedivc unani and homeopathy

डिस्ट्रिक्ट हॉस्पिटल की ओपीडी. रूम नं. ब्. मरीजों की भीड़. किसी के पैर में दर्द है तो किसी के पेट में प्रॉब्लम. किसी के शरीर पर गांठ है. मतलब सभी बीमारियों का इलाज एक ही रूम में. ऐसा कौन डॉक्टर है, जो इन सभी बीमारी का इलाज कर रहा है. चौंकिए मत. क्योंकि इन सभी बीमारियों का इलाज एक डॉक्टर नहीं बल्कि तीन डॉक्टर कर रहे हैं, वह भी अलग-अलग पद्धति से. ओपीडी के बाकी रूम में जहां एलोपैथी के डॉक्टर अलग-अलग बीमारी का इलाज कर रहे हैं, वहीं होम्योपैथी, यूनानी और आयुर्वेद के लिए सिर्फ एक रूम मिला है. स्पेशलिस्ट बैठने के साथ मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है. वहीं अक्सर दवा खत्म होने से मरीजों को परेशानी का सामना करना पड़ता है.

किसी से कम नहीं है ओपीडी

डिस्ट्रिक्ट हॉस्पिटल में आर्थो, ईएनटी, चेस्ट, आई, डेंटल, फिजीशियन, हार्ट, चाइल्ड, मानसिक समेत लगभग सभी बीमारियों का इलाज होता है. हर बीमारी के स्पेशलिस्ट डॉक्टर हैं. दवा भी फ्री दी जाती है. ओपीडी के डिफरेंट रूम में बैठने वाले स्पेशलिस्ट डॉक्टर की ओपीडी क्00 से कम नहीं है. इस एलोपैथी हॉस्पिटल में लास्ट इयर यूपी सरकार ने आयुष डॉक्टर की तैनाती की. हॉस्पिटल एडमिनिस्ट्रेशन ने खानापूर्ति करते हुए खाली पड़े रूम नं. ब् आयुष डॉक्टर के नाम पर एलॉट कर दिया. अब टेंशन थी कि डॉक्टर तीन और रूम एक. किसी तरह होम्योपैथी के डॉ. डीपी सिंह, यूनानी के डॉ. मो. समी अख्तर और आयुर्वेद के डॉ. आशीष त्रिपाठी ने एक रूम में ही बैठ कर ओपीडी स्टार्ट की. करंट में इन डॉक्टर्स की ओपीडी भ्0 से अधिक और रूम में मरीजों की संख्या क्70 से अधिक रहती है.

साहब, कहां मिलेगी दवा

समय बीतने के साथ आयुष डॉक्टर की ओपीडी बढ़ती जा रही है, मगर एडमिनिस्ट्रेशन की अनदेखी और शासन के ढुलमुल रवैये के चलते अक्सर दवा खत्म हो जाती है. इससे दूरदराज से आने वाले मरीज दवा के चक्कर में परेशान रहते हैं. हॉस्पिटल के स्टोर से दवा न मिलने के साथ परिसर के बाहर मेडिकल स्टोर पर भी नहीं मिलती, क्योंकि हॉस्पिटल के बाहर आयुष डॉक्टर की दवा के एक भी मेडिकल स्टोर नहीं है. इसलिए अक्सर डॉक्टर के चेकअप कराने के बाद दवा कहां मिलेगी, अक्सर पूछने दोबारा आते हैं.

एलोपैथी से परेशान आते हैं मरीज

आयुष डॉक्टर ने बताया कि ओपीडी में आने वाले अधिकांश मरीज पुरानी बीमारी से परेशान रहते हैं. वे एलोपैथी में कई डॉक्टर से इलाज कराने के बाद जब परेशान हो जाते हैं, तब एडवाइस लेने आते हैं. अगर ये मरीज स्टार्टिग में आए तो उनका इलाज जल्दी संभव है. एक्सपर्ट के मुताबिक इन तीनों पद्धति में सस्ता, घरेलू और सुलभ इलाज है.

इन पद्धति में सबसे अधिक आते हैं ऐसे मरीज

आयुर्वेद - ल्यूकोरिया, आईबीएस, कोलाइटिस, लीवर, पेट, जोड़, सर्दी-खांसी.

यूनानी - पेट, लीवर, जांडिस और सेक्सुअल.

होम्योपैथी - स्किन डिजीज, शरीर में गांठ और किडनी में पथरी.

डिस्ट्रिक्ट हॉस्पिटल में पहले सिर्फ एलोपैथी से इलाज होता था, मगर कुछ समय पहले शासन के आदेश पर आयुष डॉक्टर की भी तैनाती की गई. फिलहाल वे एक रूम में बैठ रहे हैं, क्योंकि उनकी ओपीडी के लिए अलग बिल्डिंग बन रही है. जल्द उन्हें अलग-अलग रूम मिल जाएगा. फिर मरीजों को कोई प्रॉब्लम नहीं होगी.

डॉ. सुधाकर मिश्रा, एसआईसी डिस्ट्रिक्ट हॉस्पिटल

Thursday, July 31, 2014

One opd for ayurvedivc unani and homeopathy

डिस्ट्रिक्ट हॉस्पिटल की ओपीडी. रूम नं. ब्. मरीजों की भीड़. किसी के पैर में दर्द है तो किसी के पेट में प्रॉब्लम. किसी के शरीर पर गांठ है. मतलब सभी बीमारियों का इलाज एक ही रूम में. ऐसा कौन डॉक्टर है, जो इन सभी बीमारी का इलाज कर रहा है. चौंकिए मत. क्योंकि इन सभी बीमारियों का इलाज एक डॉक्टर नहीं बल्कि तीन डॉक्टर कर रहे हैं, वह भी अलग-अलग पद्धति से. ओपीडी के बाकी रूम में जहां एलोपैथी के डॉक्टर अलग-अलग बीमारी का इलाज कर रहे हैं, वहीं होम्योपैथी, यूनानी और आयुर्वेद के लिए सिर्फ एक रूम मिला है. स्पेशलिस्ट बैठने के साथ मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है. वहीं अक्सर दवा खत्म होने से मरीजों को परेशानी का सामना करना पड़ता है.

किसी से कम नहीं है ओपीडी

डिस्ट्रिक्ट हॉस्पिटल में आर्थो, ईएनटी, चेस्ट, आई, डेंटल, फिजीशियन, हार्ट, चाइल्ड, मानसिक समेत लगभग सभी बीमारियों का इलाज होता है. हर बीमारी के स्पेशलिस्ट डॉक्टर हैं. दवा भी फ्री दी जाती है. ओपीडी के डिफरेंट रूम में बैठने वाले स्पेशलिस्ट डॉक्टर की ओपीडी क्00 से कम नहीं है. इस एलोपैथी हॉस्पिटल में लास्ट इयर यूपी सरकार ने आयुष डॉक्टर की तैनाती की. हॉस्पिटल एडमिनिस्ट्रेशन ने खानापूर्ति करते हुए खाली पड़े रूम नं. ब् आयुष डॉक्टर के नाम पर एलॉट कर दिया. अब टेंशन थी कि डॉक्टर तीन और रूम एक. किसी तरह होम्योपैथी के डॉ. डीपी सिंह, यूनानी के डॉ. मो. समी अख्तर और आयुर्वेद के डॉ. आशीष त्रिपाठी ने एक रूम में ही बैठ कर ओपीडी स्टार्ट की. करंट में इन डॉक्टर्स की ओपीडी भ्0 से अधिक और रूम में मरीजों की संख्या क्70 से अधिक रहती है.

साहब, कहां मिलेगी दवा

समय बीतने के साथ आयुष डॉक्टर की ओपीडी बढ़ती जा रही है, मगर एडमिनिस्ट्रेशन की अनदेखी और शासन के ढुलमुल रवैये के चलते अक्सर दवा खत्म हो जाती है. इससे दूरदराज से आने वाले मरीज दवा के चक्कर में परेशान रहते हैं. हॉस्पिटल के स्टोर से दवा न मिलने के साथ परिसर के बाहर मेडिकल स्टोर पर भी नहीं मिलती, क्योंकि हॉस्पिटल के बाहर आयुष डॉक्टर की दवा के एक भी मेडिकल स्टोर नहीं है. इसलिए अक्सर डॉक्टर के चेकअप कराने के बाद दवा कहां मिलेगी, अक्सर पूछने दोबारा आते हैं.

एलोपैथी से परेशान आते हैं मरीज

आयुष डॉक्टर ने बताया कि ओपीडी में आने वाले अधिकांश मरीज पुरानी बीमारी से परेशान रहते हैं. वे एलोपैथी में कई डॉक्टर से इलाज कराने के बाद जब परेशान हो जाते हैं, तब एडवाइस लेने आते हैं. अगर ये मरीज स्टार्टिग में आए तो उनका इलाज जल्दी संभव है. एक्सपर्ट के मुताबिक इन तीनों पद्धति में सस्ता, घरेलू और सुलभ इलाज है.

इन पद्धति में सबसे अधिक आते हैं ऐसे मरीज

आयुर्वेद - ल्यूकोरिया, आईबीएस, कोलाइटिस, लीवर, पेट, जोड़, सर्दी-खांसी.

यूनानी - पेट, लीवर, जांडिस और सेक्सुअल.

होम्योपैथी - स्किन डिजीज, शरीर में गांठ और किडनी में पथरी.

डिस्ट्रिक्ट हॉस्पिटल में पहले सिर्फ एलोपैथी से इलाज होता था, मगर कुछ समय पहले शासन के आदेश पर आयुष डॉक्टर की भी तैनाती की गई. फिलहाल वे एक रूम में बैठ रहे हैं, क्योंकि उनकी ओपीडी के लिए अलग बिल्डिंग बन रही है. जल्द उन्हें अलग-अलग रूम मिल जाएगा. फिर मरीजों को कोई प्रॉब्लम नहीं होगी.

डॉ. सुधाकर मिश्रा, एसआईसी डिस्ट्रिक्ट हॉस्पिटल

Wednesday, July 30, 2014

No one care about market

मैं हूं यूपी की दूसरी सबसे बड़ी गल्ले की मंडी साहबगंज. मेरे पास डेली भ् हजार ट्रेडर्स अपने एरिया की जरूरतों के सामान को लेने के लिए पहुंचते हैं, वहीं इतने ही लोकल बाशिंदे भी यहां पर अपनी जरूरत के साजो-सामान लेने के लिए पहुंचते हैं. ख्00 साल से लोगों का पेट भर रही हूं, मगर आज मेरे हालात ही तंग हैं. मेरे पास आने वालों की तादाद तो काफी ज्यादा है, लेकिन मेरी हालत पर किसी का ध्यान नहीं है. यहां के प्रशासन की अनदेखी की वजह से यहां पर कोई भी पार्किंग की जगह नहीं है. इसकी वजह से यहां आने वालों को न सिर्फ जाम के झाम से जूझना पड़ता है, बल्कि अपनी गाड़ी या कनवेंस के गायब होने का डर उन्हें हर पल सताता रहता है. गीता प्रेस से लेकर चौरहिया गोला तक फैली इस मंडी में जरूरत के हर सामान मिल जाते हैं. यहां के दुकानदारों को भी मेरा ख्याल नहीं है. अपनी सेल बढ़ाने के लिए वह सड़क तक दुकान के सामान सजा देते हैं, जिसकी वजह से रास्ते सकरे हो जाते हैं और पार्किंग न होने की वजह से सड़क पर गाडि़यां भी खड़ी रहती है. जिसकी वजह से घंटो सताने वाला जाम लग ही जाता है. सिर्फ इतना ही नहीं यहां के कुछ व्यापारी अब दिन और रात नहीं देखते, पहले जहां रात में माल की लोडिंग और अनलोडिंग आसानी से हो जाती थी और लोगों को जाम से जूझना नहीं पड़ता था, अब उसकी कोई टाइम लिमिट नहीं है. हर वक्त मार्केट में लोडिंग और अनलोडिंग हुआ करती है, जिसकी वजह से जाम की कंडीशन और भी खतरनाक हो जाती है. बुनियादी सुविधाओं की बात करें तो न तो पब्लिक टॉयलेट है और न ही पीने के लिए साफ पानी की व्यवस्था, अब थोक व्यापारियों का करम हो जाए तो प्यास बुझ जाती है. सफाई व्यवस्था बेहद खराब है, जिसकी वजह से हल्की सी बरसात में यहां लबालब पानी भर जाता है. जिसकी वजह से बिजनेस पर भी काफी इफेक्ट पड़ता है.

फैक्ट फाइल -

नाम - साहबगंज मार्केट

मार्केट - गल्लामंडी

रजिस्टर्ड शॉप की तादाद - मोर देन क्000 रिटेल एंड होलसेल

डेली बिजनेस - क्0 से क्भ् करोड़

टोटल टर्नअप पीपुल - भ्000 व्यापारी

यहां से आते हैं लोग - बिहार, नेपाल, महराजगंज, बस्ती, देवरिया और आसपास

कहां तक है सीमा - गीता प्रेस से लेकर चौरहिया गोला तक

प्रॉब्लम्स -

- जाम स्टार्टिग से ही इस मार्केट की सबसे बड़ी प्रॉब्लम रही है.

- सिक्योरिटी की कोई फैसिलिटी नहीं, यहां पर कभी सिक्योरिटी के लिहाज से पुलिस भी गश्त नहीं करती.

- चौरहिया गोला से लेकर लालडिग्गी तक पार्किंग के लिए कोई फैसिलिटी नहीं

- पीने का पानी भी एक बड़ी प्रॉब्लम हैं, एक दो सरकारी नल हैं लेकिन पीने लायक पानी नहीं आता है.

- कहीं पर भी पब्लिक टॉयलेट की व्यवस्था नहीं है.

- सड़क पर दुकानदारों ने ही एनक्रोचमेंट कर रखा है, सड़क पर चलना दूभर हो जाता है.

- बरसात के दिनों में यहां कीचड़ हो जाता है, हल्की सी ही बरसात में वॉटर लॉगिंग हो जाती है.

- सफाई होती नहीं जिसकी वजह से नालियां अक्सर जाम ही रहती हैं.

साहबगंज मंडी कानपुर के बाद प्रदेश की दूसरी सबसे बड़ी मंडी है, जोकि ख्00 साल पुरानी है. पहले यहां पर दलहन, तिलहन, मुंगफली का बड़े पैमाने पर कारोबार होता था. क्880 से यहां केरोसीन का व्यापार शुरु हुआ. यहां पर तेल बर्मा से आयात होता था. किराना मंडी क्970 से स्टेब्लिश हुई है.

- सीताराम जायसवाल, अध्यक्ष, किराना मंडी एसोसिएशन

साहबगंज में अगर सफाई दुरुस्त हो जाए, तो काफी प्रॉब्लम दूर हो जाए. इसकी वजह से ही सबसे बड़ी वॉटर लॉगिंग की प्रॉब्लम फेस करनी पड़ती है.

- मदन लाल, थोक व्यापारी

यहां पर सबसे बड़ी प्रॉब्लम जाम की है. पहले रात के वक्त सामान की लोडिंग और अनलोडिंग होती थी, जिसकी वजह से जाम नहीं लगता था, मगर अब दिन में हर वक्त लोडिंग और अनलोडिंग हुआ करती है, जिसकी वजह से जाम हो जाता है.

- आनंद अग्रवाल, थोक व्यापारी

यहां पर आने का मतलब कई घंटे लेकर आना है. जाम की वजह से यहां पर थोड़ी दूरी तय करने में काफी वक्त लग जाता है. सड़क पर लगी दुकानें जाम की अहम वजह है.

- रामचंदर, सोनबरसा बाजार, रिटेलर

यहां पर गाड़ी खड़ी करने के लिए कोई परमनेंट व्यवस्था नहीं है. जो भी आता है सड़क पर ही गाड़ी खड़ी कर देता है, जिसकी वजह से यहां जाम की प्रॉब्लम है. इसके दूर करने के लिए नगर निगम को कोई परमनेंट व्यवस्था कर देनी चाहिए.

- संतोष कुमार गुप्ता, बेलवार, रिटेलर

यहां पर वॉटर लॉगिंग की प्रॉब्लम काफी पुरानी है. हल्की सी बारिश में ही वॉटर लॉगिंग हो जाती है. इसके लिए नगर निगम की सफाई व्यवस्था जिम्मेदार है, नगर निगम को इसके लिए सोचना होगा.

राजकुमार, हरनही, रिटेलर

काफी अरसे से यहां बरसात के बाद प्रॉब्लम क्रिएट हो जाती है. बरसात के ठीक बाद घंटो वॉटर लॉगिंग रहती है. वहीं वॉटर लॉगिंग जब खत्म होती है तो वहां पूरी सड़क पर कीचड़ फैला रहता है. नगर निगम को इसके लिए कोई परमनेंट व्यवस्था करनी चाहिए.

- दिलशाद अहमद, रिटेलर

साहबगंज में एक दो नहीं बल्कि प्रॉब्लम का अंबार है. वॉटर लॉगिंग, पार्किंग, एनक्रोचमेंट के साथ ही यहां पर कई बड़ी प्रॉब्लम हैं, जिसपर ध्यान देना बहुत जरूरी है.

- सुशील जालान, कस्टमर

सॉल्युशन -

- यहां पार्किंग की फैसिलिटी प्रोवाइड कर दी जाए तो जाम की प्रॉब्लम से छुटकारा मिल सकता है.

- बड़े व्हीकल का प्रवेश दिन में बंद कर दें तो भी प्रॉब्लम नहीं होगी.

- शॉपकीपर्स को चाहिए कि वह सामान की लोडिंग और अनलोडिंग रात में कराएं.

- नगर निगम रेग्युलर साफ-सफाई की व्यवस्था करे.

Tuesday, July 29, 2014

Policeman was making money

रेप के आरोप में पकड़ा गया युवक कुसम्ही जंगल में पुलिस वाला बनकर वसूली करता था. वह अपने दोस्तों के साथ मिलकर प्रेमी जोड़ों को निशाना बनाता रहा. खुद को दरोगा बताकर वह जंगल में दिन दहाड़े छिनैती करता रहा. उसके हरकत की शिकायत पर असली पुलिस वाले भी हैरान परेशान होते रहे.

पीडि़ता के बयान पर पकड़ा गया था रविंद्र

20 जुलाई की रात खोराबार एरिया के गोबरहिया में विवाहिता के साथ कुछ लोगों ने रेप किया. मामले की जानकारी होने पर पुलिस हरकत में आई. पीडि़ता के बयान पर पुलिस ने आरोपी बदलू और रविंद्र को अरेस्ट किया. दो अन्य युवकों की तलाश पुलिस ने शुरू कर दी. रविंद्र ने बताया कि वह पुलिस वाला बनकर जंगल में वसूली करता था. जंगल में बाइक सवार जोड़े के पास पहुंचकर वह खुद को दरोगा बताता था. घर वालों को जानकारी देने की धमकी देकर वह रुपए छीन लेता था. अपना जेब खर्च चलाने के लिए ऐसी हरकतें करता था. क्षेत्र में चर्चा हो रही है कि ऐसी घटनाओं से उसका मन बढ़ता गया. यदि वह रेप के मामले में नहीं पकड़ा जाता तो उसकी पोल कभी नहीं खुलती.

ऐसे कुछ मामलों में आरोपी के शामिल रहने की बात पब्लिक कर रही है. इसकी जांच करके कार्रवाई की जाएगी.

जेपी सिंह, एसओ, खोराबार 

Wednesday, July 23, 2014

Students will work smartly

अभी तक डीडीयू एडमिनिस्ट्रेशन की तरफ से सिर्फ रिसर्च स्कालर्स को वाई-फाई से लैस करने की कवायद चल रही थी, लेकिन डीडीयू के बाकी स्टूडेंट्स भी अब पूरी तरह से हाईटेक किए जाएंगे. इसके लिए डीडीयू एडमिनिस्ट्रेशन ने कैंपस में ई-सेंटर बनाने का डिसीजन लिया है. ई-सेंटर में लगाए जाने वाले कंप्यूटर सिस्टम से स्टूडेंट्स वीडियो कांफ्रेंसिंग के साथ-साथ इंटरनेट का भी इस्तेमाल कर सकेंगे. ई-सेंटर बनाए जाने के लिए डीडीयू एडमिनिस्ट्रेशन ने सितंबर माह की फ‌र्स्ट वीक भी डिसाइड कर दी है.

फ्री ऑफ कास्ट मिलेगी ई-सेंटर में एंट्री

डीडीयू एडमिनिस्ट्रेशन से मिली जानकारी के मुताबिक ई-सेंटर को संचार भवन में बनाया जाएगा, जिसमें 50 कंप्यूटर सिस्टम लगाए जाएंगे. इससे स्टूडेंट्स जहां अपने ऑन लाइन फार्म भर सकेंगे, वहीं डॉयरेक्ट विदेशी कंपनियों से बात कर सकेंगे. टेक्निकल प्वाइंट को सिखाने के लिए बकायदा ट्रेनर रखा जाएगा जो इन्हें ट्रेनिंग देंगे. इसके लिए स्टूडेंट्स को कोई फीस पे नहीं करना होगा.

स्टूडेंट्स को इश्यू किया जाएगा आईडी कार्ड

स्टूडेंट्स का ई-सेंटर में एंट्री के लिए रजिस्ट्रेशन किया जाएगा और आईडी कार्ड इश्यू किए जाएंगे, जिसे दिखाने पर ही वे ई-सेंटर में एंट्री पा सकेंगे. वहीं डीडीयू एडमिनिस्ट्रेशन की मानें तो डीडीयू के सभी डिपार्टमेंट को कंप्यूटराइज्ड कर दिया जाएगा, ताकि डीडीयू के सभी कार्य ऑनलाइन हो सकें. इसके अलावा डीडीयू से एफिलिएटेड जितने भी कालेजेज हैं उन सभी के वर्किग को ऑनलाइन कर दिए जाएंगे.
क्या होगी खासियत
- इंटरनेट सुविधा
- वीडियो कांफ्रेंसिंग
- ऑनलाइन फार्म भर सकेंगे
- फ्री ऑफ कास्ट रजिस्ट्रेशन
स्टूडेंट्स के लिए ई-सेंटर खोले जा रहे हैं, जिसमें 50 कंप्यूटर लगाए जाएंगे. इसके यूज के लिए स्टूडेंट्स का रजिस्ट्रेशन किया जाएगा, जोकि फ्री ऑफ कास्ट होंगे.
प्रो. अशोक कुमार, वीसी, डीडीयू गोरखपुर


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Cut off list of ddu ug courses released

डीडीयू के यूजी कोर्सेज में एडमिशन की आस लगाए कैंडिडेट्स के लिए खुशी की खबर है. डीडीयू एडमिनिस्ट्रेशन ने मंडे को कट ऑफ लिस्ट जारी कर दी है. कट ऑफ लिस्ट के लिए बीए, बीएससी, बीकॉम, बीबीए, बीसीए के कैंडिडेट्स काफी परेशान थे. डीडीयू एडिमिस्ट्रेशन ने सभी डीन ऑफ फैकल्टी को कट ऑफ लिस्ट नोटिस बोर्ड पर चस्पा करने का निर्देश दिया है.

क्0 जुलाई को हुए थे एंट्रेंस एग्जाम

डीडीयू एडमिनिस्ट्रेशन ने क्0 जुलाई को यूजी की बीए, बीएससी, बीकॉम, बीबीए, बीसीए फ‌र्स्ट इयर में एडमिशन के लिए एंट्रेंस एग्जाम लिया था. वहीं क्म् जुलाई से न्यू सेशन की भी शुरूआत कर दी गई थी, लेकिन सेशन के शुरू होने के बाद भी यूजी की कट ऑफ लिस्ट नहीं जारी की गई थी. डीडीयू वीसी प्रो. अशोक कुमार ने बताया कि मंडे को सभी फैकल्टी के डीन को कट ऑफ लिस्ट भेज दी गई है जिसे नोटिस बोर्ड पर लगा दिया जाएगा.

डीडीयू के सामने थी चुनौती

कट ऑफ लिस्ट में देरी डीडीयू एडमिनिस्ट्रेशन के सामने बड़ी चुनौती थी क्योंकि डीडीयू से एफिलिएट जितने भी डिग्री कॉलेजेज थे, उन सभी में एडमिशन प्रोसेस लगभग कंप्लीट हो चुका था. कई जगह तो क्लासेज की भी डेट आ गई हैं. सेशन को नियमित करने का दावा करने वाले डीडीयू एडिमिनिस्ट्रेशन के दावे पर सवाल खड़ा हो रहा था, लेकिन क्क् वें दिन डीडीयू एडमिनिस्ट्रेशन ने अपने दावे को पूरा किया.