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Wednesday, September 10, 2014

Second counselling for admission

 महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ के गे्रजुएशन व पीजी की बची हुई सीटों की सेकेंड काउंसलिंग मंगलवार से स्टार्ट हुई. इस दौरान वेटिंग लिस्ट के कैंडीडेट्स का एडमिशन किया गया. जबकि फ‌र्स्ट लिस्ट में शामिल उन दर्जनों कैंडीडेट्स को लौटा दिया गया जो किन्हीं कारणवश फ‌र्स्ट फेज की काउंसलिंग में एडमिशन नहीं ले पाए थे. एचओडी की मानें तो जो कैंडीडेट्स एडमिशन से चूक गए, अब उनका एडमिशन मुश्किल है.

देर से स्टार्ट हुई काउंसलिंग

एंट्रेस लिस्ट में गड़बड़ी के चलते बीकॉम में चार घंटे की देरी से काउंसलिंग स्टार्ट हुई. हुआ यूं कि फीस काउंटर से कॉमर्स फैकल्टी को मिली लिस्ट में कई ऐसे स्टूडेंट्स का नाम गायब था जो एंट्रेस फीस जमा कर एडमिशन ले चुके थे. इस चूक के कारण विभाग को लिस्ट मिलाने में काफी टाइम लग गया. ऐसे में जब यह मामला कुलसचिव तक पहुंचा तब लिस्ट में गड़बड़ी सामने आई और उसे करेक्ट कर लिस्ट जारी की गई. इसके बाद बीकॉम में काउंसलिंग स्टार्ट हो सकी. 

 

Wednesday, September 3, 2014

Broker active in rto

आरटीओ में अधिकारी इन दिनों दलालों के आतंक से परेशान हैं. दलाल इस विभाग में इस कदर हावी हैं कि इनके कारण अब यहां काम प्रभावित होने लगा है. बायोमैट्रिक डीएल बनने की शुरुआत के बाद दलालों पर अंकुश लगने के कयास लगाए जा रहे थे लेकिन ऐसा हुआ नहीं और इनका वर्चस्व कम होने की बजाय और बढ़ गया है. इस वजह से अब अधिकारी इनको यहां से खदेड़ने की तैयारी में हैं. इसके लिए एआरटीओ ने एसएसपी को लेटर लिखकर फोर्स की मांग की है.

हद हो गई है यहां

दरअसल आरटीओ में लंबे वक्त से दलाल एक्टिव हैं. डीएल बनवाने से लेकर आरसी कटवाने व अन्य काम के लिए लोग स्टाफ से ज्यादा दलालों पर ही भरोसा करते हैं. यही वजह है कि आरटीओ के गोपनीय विभाग से लेकर बायोमैट्रिक डीएल बनने वाले रूम में जहां सिर्फ डीएल बनवाने आये लोगों को ही एंट्री की इजाजत है. वहां भी दलाल पहुंच जा रहे हैं. इनके सिर पर सवार रहने से स्मार्ट डीएल बनाने में लगे कर्मचारियों से कार्ड बनाने में गलतियां हो जा रही हैं. इस बारे में एआरटीओ प्रवर्तन आरएस यादव का कहना है कि दलालों पर लगाम लगाना आरटीओ के बस के बाहर हो गया है. ऐसे में एसएसपी से यहां फोर्स देने की रिस्वेस्ट की गई है. फोर्स में दो सिपाही तो परमानेंट मौजूद रखने को कहा गया है. अगर ये हो जाता है तो आरटीओ में दलाल कम हो जाएंगे और काम आसानी से हो सकेगा.

 
 

Saturday, August 30, 2014

Varanasi News

 प्राच्य विद्या के फ्0 हजार दुर्लभ ग्रंथ धूल फांक रहे हैं. उनका अस्तित्व खतरे में है. कई दुर्लभ किताबें नष्ट होने के कगार पर पहुंच गई हैं. सिचुएशन यह है कि संपूर्णानंद संस्कृत यूनिवर्सिटी की लाइब्रेरी के डिजिटलाइजेशन के लिए चार साल पहले मंगाए गया स्कैनर और अन्य मशीनें अब भी कार्टून से बाहर निकल नहीं पाए हैं. वे डिब्बे में जस के तस रखे हुए हैं. ऐसे में लाइब्रेरी को ऑनलाइन कर लोगों तक इनकी पहुंच सुलभ बनाने की परिकल्पना साकार होती नहीं दिख रही है. कुल मिलाकर संरक्षण की कवायद भी दूर की कौड़ी साबित हो रही है. इसके चलते इन दुर्लभ ग्रंथों की बड़ी पूंजी के हाथ से निकलने का खतरा बढ़ गया है. इसे समय रहते हुए बचाना होगा.

बुक्स को चाट रहे दीमक

यूनिवर्सिटी स्थित सरस्वती भवन लाइब्रेरी में एक लाख से अधिक मैनुस्क्रिप्ट के अलावा फ्0 हजार दुर्लभ किताबें भी रखी हुई हैं. इनके रखरखाव के अभाव में कई दुर्लभ ग्रंथ नष्ट हो चुके हैं. यहां तक कि कुछ बुक्स को तो दीमक चाट गया है. यूनिवर्सिटी एडमिनिस्ट्रेशन ने दुर्लभ ग्रंथों को संरक्षित करने के लिए उनका डिजिटलाइजेशन करने का डिसीजन लिया था. इसके तहत एक बड़े स्कैनर के साथ ही कई और मशीनें मंगाई गई थीं. आलम यह है कि इनको अभी तक इंस्टॉल नहीं किया गया. इसके चलते दुर्लभ ग्रंथों के ऑटोमेशन का अभी तक श्री गणेश नहीं हो सका है.

डीवीडी में पहुंची पांडुलिपियां

एक तरफ जहां सरस्वती भवन लाइब्रेरी में रखी दुर्लभ किताबों को डिजिटाइज्ड नहीं किया जा सका है तो वहीं दूसरी ओर लाल पोटली में सहेज कर रखी गई दुर्लभ पांडुलिपियां अब डीवीडी में पहुंच पाई हैं. ख्8भ् डीवीडी कैसेट्स में एक लाख क्क् हजार क्फ्ख् पांडुलिपियां समाई हैं. अब इन्हें कंप्यूटर की हार्डडिस्क में कॉपी करने का डिसीजन लिया गया है ताकि ये नष्ट न हो सकें. लाइब्रेरियन सूर्यकांत का कहना है कि समय-समय पर लाइब्रेरी में रखी दुर्लभ किताबों व पांडुलिपियों के संरक्षण के लिए प्रस्ताव बनाए गए लेकिन ये इन्होंने अंजाम तक पहुंचने से पहले ही हर बार दम तोड़ दिया. चार वर्ष पहले जो स्कैनर मंगाया गया वह किताबें स्कैन करने में सक्षम नहीं है. जबकि इस नये स्कैनर को अब तक इंस्टॉल तक नहीं किया गया है. बिना यूज में लाए ही इसकी वारंटी तक खत्म हो चुकी है. 

Friday, August 22, 2014

E Rickshaw

 बनारस की ट्रैफिक व्यवस्था को सुधारने और ग्रीन बनारस का कॉन्सेप्ट लेकर पिछले दिनों शहर में ई रिक्शों का संचालन शुरू किया गया था. सीएम के निर्देश पर शुरू हुए इस इको फ्रेंडली रिक्शे को महज पांच से छह घंटे की चार्जिग के बाद सड़क पर दौड़ाया जा रहा था लेकिन इन दिनों ई रिक्शा चलाने वाले परेशान हैं और उसी सरकार को कोस रहे हैं जिसने उन्हे रोजी कमाने के लिए ये रिक्शे मुहैया कराये. दरअसल पिछले दो तीन दिनों से अपने शहर में बिजली की हालत कुछ ज्यादा ही बिगड़ गई है. दो घंटे के नाम पर होने वाली कटौती 12 से 14 घंटे में तब्दील हो चुकी है और बिजली कंटीन्यू मिल ही नहीं रही है. इस वजह से ई रिक्शे की बैटरी चार्ज नहीं हो रहे हैं और इसे चलाने वाले परेशान हैं.

कम से कम छह घंटे

ई रिक्शा चलाने वाले विनोद ने बताया कि पिछले दिनों जब सीएम अखिलेश ने चौबीस घंटे बिजली देने का वादा बनारस के साथ किया तो हम लोग बहुत खुश थे. चकाचक बिजली मिलने के कारण रिक्शे की बैटरी कभी भी चार्ज कर लेते थे लेकिन बिजली कटौती ने एक बार फिर से हमारे सामने रोजी का संकट खड़ा कर दिया है. क्योंकि ई रिक्शे की बैटरी को चार्ज करने के लिए कम से कम छह से सात घंटे कंटीन्यू बिजली होनी जरुरी है लेकिन ऐसा हो नहीं रहा है और हर दस पन्द्रह मिनट पर बिजली कट जा रही है. जलालीपुरा के मुस्लिम हाशमी का कहना है कि कंटीन्यू बिजली न रहने से रिक्शे की बैटरी दो-दो दिनों तक चार्ज नहीं हो पा रहा है. इस वजह से घर में चूल्हा जलाने का संकट पैदा होने लगा है.

हाई लाइट्स

- ई रिक्शे चार्जेबल बैटरी से चलते हैं

- इसमें 12-12 बोल्ट की चार बैटरियां लगी हैं

- इन चार बैटरियों को चार्ज करने के लिए एक चार्जर भी रिक्शे में है मौजूद

-फुल चार्ज करने के बाद 70 से 80 किमी की दूरी तय करते हैं ई रिक्शे

- लेकिन बिजली कटौती के कारण रिक्शे की बैटरी नहीं हो पा रहे हैं चार्ज

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ई रिक्शे की बैटरी को चार्ज करने के लिए पर्याप्त बिजली नहीं मिल रही है. इस वजह से काफी परेशानी हो रही है.

मुस्लिम हाशमी, ई रिक्शाचालक

बिजली कटौती के कारण रोजी का संकट पैदा होने लगा है. ये बड़ी दिक्कत की बात है कि रिक्शा की बैटरी चार्ज ही नहीं हो पा रहा है.

मोहम्मद सलीम, ई रिक्शा चालक

Thursday, August 21, 2014

Broker active in RTO

आरटीओ में अधिकारी इन दिनों दलालों के आतंक से परेशान हैं. दलाल इस विभाग में इस कदर हावी हैं कि इनके कारण अब यहां काम प्रभावित होने लगा है. बायोमैट्रिक डीएल बनने की शुरुआत के बाद दलालों पर अंकुश लगने के कयास लगाए जा रहे थे लेकिन ऐसा हुआ नहीं और इनका वर्चस्व कम होने की बजाय और बढ़ गया है. इस वजह से अब अधिकारी इनको यहां से खदेड़ने की तैयारी में हैं. इसके लिए एआरटीओ ने एसएसपी को लेटर लिखकर फोर्स की मांग की है.

हद हो गई है यहां

दरअसल आरटीओ में लंबे वक्त से दलाल एक्टिव हैं. डीएल बनवाने से लेकर आरसी कटवाने व अन्य काम के लिए लोग स्टाफ से ज्यादा दलालों पर ही भरोसा करते हैं. यही वजह है कि आरटीओ के गोपनीय विभाग से लेकर बायोमैट्रिक डीएल बनने वाले रूम में जहां सिर्फ डीएल बनवाने आये लोगों को ही एंट्री की इजाजत है. वहां भी दलाल पहुंच जा रहे हैं. इनके सिर पर सवार रहने से स्मार्ट डीएल बनाने में लगे कर्मचारियों से कार्ड बनाने में गलतियां हो जा रही हैं. इस बारे में एआरटीओ प्रवर्तन आरएस यादव का कहना है कि दलालों पर लगाम लगाना आरटीओ के बस के बाहर हो गया है. ऐसे में एसएसपी से यहां फोर्स देने की रिस्वेस्ट की गई है. फोर्स में दो सिपाही तो परमानेंट मौजूद रखने को कहा गया है. अगर ये हो जाता है तो आरटीओ में दलाल कम हो जाएंगे और काम आसानी से हो सकेगा.

Wednesday, August 20, 2014

Poonam and swati singh will be awarded

कॉमनवेल्थ गेम्स में मेडल हासिल करने वाले खिलाडि़यों के लिए यूपी सरकार ने नई प्राइजमनी पर अपनी सहमति दे दी है. मंगलवार को नई प्राइजमनी को अप्रूवल मिलने से यूपी खेल जगत में खुशी का माहौल है. खेल विभाग के अधिकारियों के अनुसार अब कॉमनवेल्थ में इंडीविजुअल इवेंट में गोल्ड लाने वाले खिलाड़ी को भ्0 लाख, सिल्वर लाने वाले खिलाड़ी को फ्0 लाख और ब्रांज मेडल पाने वाले खिलाड़ी को क्भ् लाख रुपए दिए जाएंगे. इसके तहत अब ग्लासगो में कांस्य पदक जीतने वाली बनारस की वेटलिफ्टर पूनम यादव और स्वाति सिंह को क्भ्-क्भ् लाख रुपए का इनाम मिलेगा.

सात खिलाडि़यों की लिस्ट भेजी

प्राइजमनी की यह धनराशि ग्लासगो में आयोजित हुए कॉमनवेल्थ गेम्स से लागू होगी. वहीं, मेडल पाने वाले खिलाडि़यों को नई स्कीम के तहत ही पुरस्कार दिया जाएगा. टीम इवेंट में भी पुरस्कार की राशि बढ़ा दी गई है. इसमें गोल्ड हासिल करने वाली टीम के प्रदेश के प्रत्येक खिलाड़ी को फ्0 लाख, सिल्वर हासिल करने वाली टीम के प्रदेश के प्रत्येक खिलाड़ी को क्भ् लाख और ब्रांज मेडल जीतने वाली टीम के प्रदेश के प्रत्येक खिलाड़ी को क्0 लाख रुपए की धनराशि दी जाएगी. इतना ही प्रदेश सरकार ने कॉमनवेल्थ गेम्स में हिस्सा लेने वाले उन खिलाडि़यों का भी ख्याल रखा है जिन्होंने पार्टीसिपेट तो किया लेकिन मेडल लाने से चूक गए. प्रदेश के ऐसे खिलाडि़यों को पांच-पांच लाख रुपए दिए जाएंगे. कॉमनवेल्थ गेम्स से मेडल लाने वाले सात खिलाडि़यों की लिस्ट अब तक शासन को दी जा चुकी है.

तोहफों की 'बरसात'

इससे पहले कॉमनवेल्थ गेम्स में इंडीविजुअल गेम्स में गोल्ड लाने पर क्भ् लाख, सिल्वर लाने पर क्0 लाख और ब्रांज लाने पर 8 लाख रुपए दिये जाने का नियम था. वहीं टीम गेम्स में गोल्ड जीतने वाली टीम के प्रदेश के प्रत्येक खिलाड़ी को दस लाख, सिल्वर मेडल जीतने वाली टीम के प्रदेश के प्रत्येक खिलाड़ी को आठ लाख और ब्रांज मेडल जीतने वाली टीम के प्रदेश के प्रत्येक खिलाड़ी को म् लाख रुपए दिए जाते थे.

कोट

कॉमनवेल्थ के लिए प्राइजमनी बढ़ाने को लेकर अंतिम मुहर लग चुकी है. इसके साथ ही उन खिलाडि़यों को भी कैश प्राइज दिया जाएगा जो मेडल नहीं ला सके हैं.

भुवनेश कुमार

खेल सचिव 


Tuesday, August 19, 2014

Strike in vidhyapith

 महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ व संपूर्णानंद संस्कृत यूनिवर्सिटी में पिछले क्फ् दिनों से कर्मचारी स्ट्राइक पर हैं. दोनों कैंपस में लगातार हड़ताल से कैंपस में पठन पाठन का कार्य ठप होने के अलावा एग्जाम और एडमिशन से जुडे़ कामों पर भी बे्रक लग गया है. यदि यह स्ट्राइक इसी तरह से कुछ दिन और चली तो कैंपस कैलेंडर को बेपटरी होने से कोई रोक नहीं पाएगा. आश्चर्यजनक बात यह है कि कर्मचारियों की हड़ताल के इतने दिनों के बाद भी इसकी सुध न तो गवर्नमेंट ने ली और न ही यूनिवर्सिटी एडमिनिस्ट्रेशन इस बाबत गंभीर दिखा. एक्सपटर््स के मुताबिक यदि इस मुद्दे पर सीरियसली पहल हुई होती तो यह हड़ताल पहले ही खत्म हो गई होती.

पटरी से उतरी पढ़ाई की रेल

जिस समय यूनिवर्सिटीज में एडमिशन, एग्जाम और रिजल्ट का दौर चरम पर हो, उस समय कर्मचारियों का काम ठप कर देना बड़ी बात है. इससे न केवल ये सारे काम इफेक्टेड हो गए हैं, बल्कि पूरा शैक्षणिक कैलेंडर भी डिरेल्ड हो गया है. इसके बावजूद गवर्नमेंट और यूनिवर्सिटीज का एडमिनिस्ट्रेशन कान में तेल डाले हुए है. मजेदार बात यह कि क्फ् दिन बीतने के बाद भी हड़ताल खत्म कराने के लिए इनकी ओर से कोई पहल नहीं की गई है.

स्टूडेंट्स ने खोला मोर्चा

कर्मचारियों की लंबे समय से चल रही हड़ताल के चलते हो रहे नुकसान को देखते हुए स्टूडेंट्स चांसलर व गवर्नमेंट से पहले ही स्ट्राइक खत्म कराने की गुहार लगा चुके हैं. यहां तक कि कई बार यूनिवर्सिटी एडमिनिस्ट्रेशन से भी क्लासेज चलाये जाने की मांग कर चुके हैं. इसके बाद भी क्लासेज में लटकते ताले अभी तक नहीं खुले हैं. परेशान स्टूडेंट्स डेली कैंपस आते हैं और कैंपस का चक्कर मारकर वापस घर लौट जाते हैं.

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स्ट्राइक ने लगाया ब्रेक

-एडमिशन प्रोसेस हुआ ठप

-क्लासेज के नहीं खुल रहे ताले

-स्टूडेंट्स का सबमिट नहीं हो पा रही फीस

-सेकेंड राउंड की काउंसलिंग पर लगा ब्रेक

-रिजल्ट्स नहीं हो पा रहे डिक्लेयर

-मार्कशीट्स व सर्टिफिकेट्स का वेरीफिकेशन भी अटका 

Tuesday, August 12, 2014

AC buses will run in roadwage in varanasi

 बसेज का खस्ताहाल होना व उनमें एसी न होने की वजह से कई पैसेंजर्स इनमें ट्रेवल करना पसंद नहीं करते हैं. ऐसे में वे ट्रेन्स की एसी कोचेज को प्रिफरेंस देते हुए उन्हें अपनी जर्नी का साथी बना लेते हैं. इसके अलावा कई पैसेंजर्स प्राइवेट एसी कार रेंट पर लेकर सफर करते हैं. लेकिन अगर आपको बनारस के नजदीकी डिस्ट्रिक्ट्स की जर्नी करनी है तो आप बहुत ही जल्द एसी बसेज में ट्रेवल कर सकते हैं. कुछ ही दिनों में एसी बसेज बनारस से अदर डिस्ट्रिक्ट्स के लिए फर्राटा भरने लगेंगी. ट्रांसपोर्ट मिनिस्टर दुर्गा प्रसाद यादव ने इसके लिए हरी झंडी भी दिखा दी है.

पूर्वाचल में चलेंगी एसी बसेज

समूचे पूर्वाचल में एसी रोडवेज बसेज चलाने को लेकर ट्रांसपोर्ट मिनिस्टर ने रोडवेज ऑफिसर्स संग मीटिंग की. ऑफिसर्स की मानें तो एसी बसेज चलाने की प्लानिंग काफी दिनों पहले से ही हो रही थी. ट्रांसपोर्ट मिनिस्टर के हरी झंडी दिखाने के बाद अब रोडवेज का काम और भी आसान हो गया. एसी बसेज जौनपुर, आजमगढ़, चंदौली, गाजीपुर, मिर्जापुर, सोनभद्र रूट्स पर चलने के साथ ही काशी डिपो के अंतर्गत चलेंगी.

मिलेगी लगभग क्भ्0 बसेज

कैंट रोडवेज को सौ से डेढ़ सौ बसेज एक्स्ट्रा मिल सकती हैं. पैसेंजर्स की प्रॉब्लम्स को देखते हुए पुरानी व डैमेज हो चुकी बसेज को हटाया जाएगा. हालांकि, यह अभी तक कंफर्म नहीं हो पाया है कि खटारा बसेज को कब तक हटाया जाएगा.

लखनऊ का सफर भी होगा सस्ता

बनारस से लखनऊ के बीच में चलने वाली वॉल्वो बसेज में ट्रेवल करना अब पहले से सस्ता हो जाएगा. वॉल्वो बसेज का किराया घटोन पर भी ट्रांसपोर्ट मिनिस्टर ने हामी भरी है. एसी बसेज की कैटेगरी में सिर्फ वॉल्वो ही बनारस से चलती हैं. इसके अलावा अभी तक नॉन एसी बसेज ही चलती है.

वॉल्वो बसेज का किराया कम हो जाने से पब्लिक को काफी राहत मिलेगी.

परिवहन मंत्री ने मीटिंग में एसी बसेज रूरल एरिया में चलाने की बात कही है. लेकिन इस बाबत अभी तक कोई लेटर नहीं आया है. हालांकि, कागजी कार्रवाई पूरी होने पर व एसी बसेज मिलते ही विभिन्न रूट्स पर चलना स्टार्ट हो जाएगा.

पीके तिवारी,

आरएम, कैंट रोडवेज 

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Friday, August 8, 2014

Medical news in varanasi

सालों से एक ही स्थान पर जमे बाबुओं पर शासन का चाबुक चलने के बाद भी वो अपनी जगह से हटने को तैयार नहीं हैं. बनारस में तो तू डाल-डाल तो मैं पात-पात वाली कहावत चरितार्थ हो रही है. शासन ने सात बाबुओं का ट्रांसफर किया है लेकिन क्लर्क हैं कि मेडिकल लीव लेकर ट्रांसफर रुकवाने के लिए सेटिंग गेटिंग में जुटे हुए हैं. एक सप्ताह बीतने के बाद भी बाबुओं को रिलीव नहीं किया गया. खास बात यह कि मेडिकल से जुड़े आला अफसर यह सब जानते हुए भी चुप्पी साधे हुए हैं.

सिर्फ दो क्लर्क दिए चार्ज

बता दें कि मंडलीय हॉस्पिटल, कबीरचौरा से एक क्लर्क, एडी हेल्थ ऑफिस से दो क्लर्क, सीएमओ ऑफिस में जमे तीन क्लर्क और आरएफपीटीसी से एक महिला क्लर्क का ट्रांसफर हुआ है. इनमें से अब तक सिर्फ दो बाबुओं ने ही अपना चार्ज दिया है. बाकी मंडलीय हॉस्पिटल व अन्य ऑफिसेज के ट्रांसफर किए गए बाबू मेडिकल लीव लेकर तबादला रुकवाने के लिए भाग दौड़ कर रहे हैं. मेडिकल लीव में किसी ने टायफायड तो किसी ने जांन्डिस होना बताया बताया है.

नियम का हो रहा उल्लंघन

नियम है कि एक डिपार्टमेंट में तीन साल से अधिक समय तक किसी स्टाफ की तैनाती नहीं होनी चाहिए. लेकिन यहां बीस साल से एक ही पद पर स्टाफ जमे हुए हैं. जब ट्रांसफर की बेला आई तो उसमें भी जैक लगाने से नहीं चूक रहे हैं. स्टेट गवर्नमेंट की ओर से जारी ऑर्डर में ऑफिसर्स को साफ निर्देश दिया गया है कि इन्हें तत्काल कार्यमुक्त कर महानिदेशालय को इंफॉर्म किया जाए. लेकिन इस आदेश को फॉलो नहीं किया जा रहा है.

कुछ क्लर्क हैं जो मेडिकल लीव लेकर ट्रांसफर रुकवाने के लिए भाग दौड़ कर रहे हैं. लेकिन बहुत जल्द सभी को रिलीव किया जाएगा.

डॉ. बी राय

एडी हेल्थ, वाराणसी

 
 

Friday, August 1, 2014

AC buses will run in roadwage in varanasi

 बसेज का खस्ताहाल होना व उनमें एसी न होने की वजह से कई पैसेंजर्स इनमें ट्रेवल करना पसंद नहीं करते हैं. ऐसे में वे ट्रेन्स की एसी कोचेज को प्रिफरेंस देते हुए उन्हें अपनी जर्नी का साथी बना लेते हैं. इसके अलावा कई पैसेंजर्स प्राइवेट एसी कार रेंट पर लेकर सफर करते हैं. लेकिन अगर आपको बनारस के नजदीकी डिस्ट्रिक्ट्स की जर्नी करनी है तो आप बहुत ही जल्द एसी बसेज में ट्रेवल कर सकते हैं. कुछ ही दिनों में एसी बसेज बनारस से अदर डिस्ट्रिक्ट्स के लिए फर्राटा भरने लगेंगी. ट्रांसपोर्ट मिनिस्टर दुर्गा प्रसाद यादव ने इसके लिए हरी झंडी भी दिखा दी है.

पूर्वाचल में चलेंगी एसी बसेज

समूचे पूर्वाचल में एसी रोडवेज बसेज चलाने को लेकर ट्रांसपोर्ट मिनिस्टर ने रोडवेज ऑफिसर्स संग मीटिंग की. ऑफिसर्स की मानें तो एसी बसेज चलाने की प्लानिंग काफी दिनों पहले से ही हो रही थी. ट्रांसपोर्ट मिनिस्टर के हरी झंडी दिखाने के बाद अब रोडवेज का काम और भी आसान हो गया. एसी बसेज जौनपुर, आजमगढ़, चंदौली, गाजीपुर, मिर्जापुर, सोनभद्र रूट्स पर चलने के साथ ही काशी डिपो के अंतर्गत चलेंगी.

मिलेगी लगभग क्भ्0 बसेज

कैंट रोडवेज को सौ से डेढ़ सौ बसेज एक्स्ट्रा मिल सकती हैं. पैसेंजर्स की प्रॉब्लम्स को देखते हुए पुरानी व डैमेज हो चुकी बसेज को हटाया जाएगा. हालांकि, यह अभी तक कंफर्म नहीं हो पाया है कि खटारा बसेज को कब तक हटाया जाएगा.

लखनऊ का सफर भी होगा सस्ता

बनारस से लखनऊ के बीच में चलने वाली वॉल्वो बसेज में ट्रेवल करना अब पहले से सस्ता हो जाएगा. वॉल्वो बसेज का किराया घटोन पर भी ट्रांसपोर्ट मिनिस्टर ने हामी भरी है. एसी बसेज की कैटेगरी में सिर्फ वॉल्वो ही बनारस से चलती हैं. इसके अलावा अभी तक नॉन एसी बसेज ही चलती है.

वॉल्वो बसेज का किराया कम हो जाने से पब्लिक को काफी राहत मिलेगी.

परिवहन मंत्री ने मीटिंग में एसी बसेज रूरल एरिया में चलाने की बात कही है. लेकिन इस बाबत अभी तक कोई लेटर नहीं आया है. हालांकि, कागजी कार्रवाई पूरी होने पर व एसी बसेज मिलते ही विभिन्न रूट्स पर चलना स्टार्ट हो जाएगा.

पीके तिवारी,

आरएम, कैंट रोडवेज 

Thursday, July 31, 2014

Third monday of saawan

 भगवान भोलेनाथ को प्रिय सावन के तीसरे सोमवार को बाबा दरबार में कांवरियों का रेला उमड़ा. नतीजतन काशी का कोना-कोना हर हर महादेव, बोल बम, बोल बम के उद्घोष से गूंजता रहा. कांवरियों के अलावा बड़ी संख्या में शिवभक्तों ने बाबा दरबार में हाजिरी लगाई. बम-भोले का उद्घोष करते हुए शिवभक्त आगे बढ़ते जा रहे थे. शहर के दूसरे शिवालय महामृत्युंजय महादेव, केदारेश्वर महादेव, तिलभांडेश्वर महादेव, रामेश्वरम महादेव में भी श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी. कैथी स्थित मारकण्डेय महादेव में भी बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने मत्था टेका.

पिछली रात से ही लगी थी कतार

श्री काशी विश्वनाथ मंदिर में बाबा के दर्शन के लिए रविवार की रात से ही लाइन लग गई थी. झूमते, गाते कांवरियों का रेला रात में ही बनारस पहुंचने लगा था. हर बार की तरह इस बार भी छत्ताद्वार से ही मंदिर में एंट्री दी जा रही थी. श्रद्धालुओं की कतार गोदौलिया से आगे लक्सा तक लगी दिखी. बाबा को बिना रुके अपनी श्रद्धा समर्पित करने का संकल्प लेने वाले डाकबमों ने भी बड़ी संख्या में काशी विश्वनाथ मंदिर पहुंच कर बाबा का जलाभिषेक किया. 

Wednesday, July 30, 2014

Third monday of saawan

 भगवान भोलेनाथ को प्रिय सावन के तीसरे सोमवार को बाबा दरबार में कांवरियों का रेला उमड़ा. नतीजतन काशी का कोना-कोना हर हर महादेव, बोल बम, बोल बम के उद्घोष से गूंजता रहा. कांवरियों के अलावा बड़ी संख्या में शिवभक्तों ने बाबा दरबार में हाजिरी लगाई. बम-भोले का उद्घोष करते हुए शिवभक्त आगे बढ़ते जा रहे थे. शहर के दूसरे शिवालय महामृत्युंजय महादेव, केदारेश्वर महादेव, तिलभांडेश्वर महादेव, रामेश्वरम महादेव में भी श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी. कैथी स्थित मारकण्डेय महादेव में भी बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने मत्था टेका.

पिछली रात से ही लगी थी कतार

श्री काशी विश्वनाथ मंदिर में बाबा के दर्शन के लिए रविवार की रात से ही लाइन लग गई थी. झूमते, गाते कांवरियों का रेला रात में ही बनारस पहुंचने लगा था. हर बार की तरह इस बार भी छत्ताद्वार से ही मंदिर में एंट्री दी जा रही थी. श्रद्धालुओं की कतार गोदौलिया से आगे लक्सा तक लगी दिखी. बाबा को बिना रुके अपनी श्रद्धा समर्पित करने का संकल्प लेने वाले डाकबमों ने भी बड़ी संख्या में काशी विश्वनाथ मंदिर पहुंच कर बाबा का जलाभिषेक किया. 

Tuesday, July 29, 2014

AC buses will run in roadwage in varanasi

 बसेज का खस्ताहाल होना व उनमें एसी न होने की वजह से कई पैसेंजर्स इनमें ट्रेवल करना पसंद नहीं करते हैं. ऐसे में वे ट्रेन्स की एसी कोचेज को प्रिफरेंस देते हुए उन्हें अपनी जर्नी का साथी बना लेते हैं. इसके अलावा कई पैसेंजर्स प्राइवेट एसी कार रेंट पर लेकर सफर करते हैं. लेकिन अगर आपको बनारस के नजदीकी डिस्ट्रिक्ट्स की जर्नी करनी है तो आप बहुत ही जल्द एसी बसेज में ट्रेवल कर सकते हैं. कुछ ही दिनों में एसी बसेज बनारस से अदर डिस्ट्रिक्ट्स के लिए फर्राटा भरने लगेंगी. ट्रांसपोर्ट मिनिस्टर दुर्गा प्रसाद यादव ने इसके लिए हरी झंडी भी दिखा दी है.

पूर्वाचल में चलेंगी एसी बसेज

समूचे पूर्वाचल में एसी रोडवेज बसेज चलाने को लेकर ट्रांसपोर्ट मिनिस्टर ने रोडवेज ऑफिसर्स संग मीटिंग की. ऑफिसर्स की मानें तो एसी बसेज चलाने की प्लानिंग काफी दिनों पहले से ही हो रही थी. ट्रांसपोर्ट मिनिस्टर के हरी झंडी दिखाने के बाद अब रोडवेज का काम और भी आसान हो गया. एसी बसेज जौनपुर, आजमगढ़, चंदौली, गाजीपुर, मिर्जापुर, सोनभद्र रूट्स पर चलने के साथ ही काशी डिपो के अंतर्गत चलेंगी.

मिलेगी लगभग क्भ्0 बसेज

कैंट रोडवेज को सौ से डेढ़ सौ बसेज एक्स्ट्रा मिल सकती हैं. पैसेंजर्स की प्रॉब्लम्स को देखते हुए पुरानी व डैमेज हो चुकी बसेज को हटाया जाएगा. हालांकि, यह अभी तक कंफर्म नहीं हो पाया है कि खटारा बसेज को कब तक हटाया जाएगा.

लखनऊ का सफर भी होगा सस्ता

बनारस से लखनऊ के बीच में चलने वाली वॉल्वो बसेज में ट्रेवल करना अब पहले से सस्ता हो जाएगा. वॉल्वो बसेज का किराया घटोन पर भी ट्रांसपोर्ट मिनिस्टर ने हामी भरी है. एसी बसेज की कैटेगरी में सिर्फ वॉल्वो ही बनारस से चलती हैं. इसके अलावा अभी तक नॉन एसी बसेज ही चलती है.

वॉल्वो बसेज का किराया कम हो जाने से पब्लिक को काफी राहत मिलेगी.

परिवहन मंत्री ने मीटिंग में एसी बसेज रूरल एरिया में चलाने की बात कही है. लेकिन इस बाबत अभी तक कोई लेटर नहीं आया है. हालांकि, कागजी कार्रवाई पूरी होने पर व एसी बसेज मिलते ही विभिन्न रूट्स पर चलना स्टार्ट हो जाएगा.

पीके तिवारी,

आरएम, कैंट रोडवेज 

Wednesday, July 23, 2014

LPG tanker accident

बड़ागांव थाना एरिया के बाबतपुर-कपसेठी रोड पर ट्यूजडे की शाम को दर्जनों बस्तियों के हजारों लोगों की जान खतरे में पड़ गई. इन लोगों की जिंदगी और मौत के बीच महज एक चिंगारी का फासला था. कोई अनहोनी अपना कहर बरपा सकती थी. हालांकि, ऐसा कुछ भी नहीं हुआ. कोलकाता के हल्दिया से एलपीजी लेकर आ रहा एक टैंकर आ रहा था. बसनी तिराहे के पास उसका बैलेंस बिगड़ जाने से वह पलट गया. इसमें से एक्सिप्लोजिव गैस का रिसाव स्टार्ट होने लगा. आनन-फानन में एक किलोमीटर के दायरे में प्रेजेंट लोगों को दूर हटाया गया. बाबतपुर स्थित प्लांट से पहुंची एक्सप‌र्ट्स की टीम ने अपनी सूझबूझ भरी स्किल्स से लीकेज बंद करके खतरा को टाल दिया. इसके बाद पुलिस ने कीचड़ में धंस चुके टैंकर को क्रेन के जरिए बाहर निकलवाया.

पास देने में हुआ हादसा
हरियाणा का रहने वाला ड्राइवर रामप्यारे हल्दिया (बंगाल) टैंकर में क्7,800 किलोग्राम एलपीजी लोड करके बाबतपुर स्थित प्लांट के लिए आ रहा था. उसे यहां गैस को अनलोड करना था. शाम पांच बजे बाबतपुर-कपसेठी रोड के बसनी तिराहे पर सामने से आ रहे ट्रक को पास देने के चक्कर में रामप्यारे गैस टैंकर को रोड किनारे करने की कोशिश करने लगा. रोड खराब होने की वजह से वह स्टेयरिंग पर कंट्रोल नहीं रख सका. इसके बाद गैस टैंकर कीचड़ में धंस गया. रामप्यारे ने उसे निकालने का काफी ट्राई किया लेकिन टैंकर धीरे-धीरे पलटने लगे.
अगर कीचड़ न होता तो ..

इसी दौरान टैंकर का रोटर गेज टूट गया और गैस लीक करने लगी. इसकी इंफॉर्मेशन मिलते ही आसपास की बस्तियों में दहशत का माहौल हो गया. पुलिस ने एहतियातन एक किलोमीटर के दायरे में आने वाली बस्तियों से लोगों को बाहर करते हुए सेफ प्लेस की ओर भेज दिया. टैंकर के कीचड़ में पलट जाने से गैस लिकेज की स्पीड स्लो हो गई. घटना की इंफॉर्मेशन होने पर बाबतपुर प्लांट से एक्सप‌र्ट्स की टीम मौके पर पहुंची. बड़ी मशक्कत के बाद टैंकर के लिकेज को बंद किया जा सका. इसके बाद खतरा टला और लोगों ने राहत की सांस ली. पुलिस ने क्रेन मंगाकर टैंकर को कीचड़ से बाहर निकलवाया.


लाइफ का है डैंजर जोन
बाबतपुर एलपीजी प्लांट के आसपास मौजूद बस्तियों में रहने वालों की जान हर वक्त सांसत में रहती है. हर वक्त उन्हें हादसे का डर सताता रहता है. हल्दिया से डेल लगभग भ्0 से 7भ् टैंकर गैस लोड करके यहां आते हैं. इस ओर आने वाले रास्ते बेहद खराब हैं. जगह-जगह से रोड्स टूट चुकी हैं. रोड्स की साइड्स कीचड़ से सनी रहती हैं. इसके चलते हादसे की आशंका बनी रहती है. इस एरिया में इसके पहले भी कई बार इस तरह की घटनाएं हो चुकी हैं.


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Traffic rules are not being followed by auto drivers

सिटी के ऑटो चालकों पर नकेल कसने के लिए ट्रैफिक पुलिस डिपार्टमेंट भले ही लंबी चौड़ी प्लैनिंग कर रहा हो लेकिन ऑटो वाले हैं कि सुधरने का नाम ही नहीं ले रहे हैं. अब इनके लिए वर्दी की अनिवार्यता के आदेश को ही देख लीजिए. एसपी ट्रैफिक ने पहले इस आदेश को क्0 जुलाई तक इम्प्लीमेंट कराने को कहा था लेकिन बाद में दस दिन और आगे बढ़ाते हुए वर्दी व बिल्ला एक साथ पहनकर सड़क पर उतरने का आदेश दिया लेकिन ऑटो चालक हैं कि इस आदेश को पूरी तरह से फॉलो ही नहीं कर रहे हैं. वर्दी को लेकर मंडे से ट्रैफिक पुलिस को सिटी में अभियान शुरू करना था. इस दौरान बगैर वर्दी में मिलने वाले ऑटो चालकों के खिलाफ कार्रवाई होनी थी. हालांकि इस आदेश के बाद अधिकतर ऑटो चालक वर्दी में तो नजर आने लगे हैं लेकिन सिर्फ वर्दी की शर्ट में जबकि इसका पैंट और बिल्ला गायब है.

थोड़ा वक्त तो लगेगा

शहर में आने वाले टूरिस्ट्स को सिटी का अच्छा लुक दिखाने के लिए ट्रैफिक पुलिस ने पिछले दिनों ऑटो चालकों के लिए वर्दी पहनने के रूल को सख्ती से लागू कराने का आदेश दिया था. जिसके बाद सोमवार से आधे से ज्यादा ऑटो चालक वर्दी में नजर आने लगे हैं लेकिन ये वर्दी भी आधी अधूरी है. ऑटो ड्राइवर्स सिर्फ वर्दी की शर्ट में नजर आ रहे हैं जबकि इसका पैंट और बिल्ला नदारद है. जबकि इस बारे में पूछे जाने पर ऑटो रिक्शा चालक यूनियन के उपाध्यक्ष भगवान सिंह का कहना है इस आदेश को फॉलो कराने में यूनियन प्रशासन का पूरा सहयोग कर रहा है. इसके लिए यूनियन खुद वर्दी सिलवाकर ऑटो वालों को मुहैया करा रहा है. आधी वर्दी के सवाल पर उनका कहना था कि वर्दी पूरी है. पैंट जरूरी नहीं है. मुम्बई और लखनऊ में भी ऑटो चालक वर्दी के नाम पर सिर्फ शर्ट पहनते हैं. इसलिए यहां भी यही नियम लागू किया गया है. लेकिन अगर प्रशासन को ये मंजूर नहीं होगा तो पैंट भी ऑटो चालकों को दे दी जायेगी. वहीं बिल्ले के बारे में उपाध्यक्ष ने कहा कि चूंकि बिल्ला टीपी लाइन से मिलना है. इसलिए थोड़ा वक्त लगेगा.

आदेश तो है लेकिन

- सिटी में रजिस्टर्ड ऑटोज की संख्या है लगभग भ्,ब्00.

-सभी ऑटो के चालकों को पहननी है वर्दी.

- वर्दी में स्लेटी रंग की शर्ट और इसी कलर का पैंट पहनना है.

- सभी ऑटो ड्राइवर्स को बिल्ला भी लगाना है अनिवार्य.

-ट्रैफिक पुलिस और आरटीओ के सहयोग से दिया जायेगा बिल्ला नंबर.

- ऑटो चालकों को वर्दी व बिल्ला बनवाकर देने के लिए ऑटो यूनियन को दी गई है जिम्मेदारी.

- ऑटो यूनियन सभी ऑटो ड्राइवर्स को उचित रेट पर वर्दी करा रहा है मुहैया.

-बिल्ले को कम रेट पर मुहैया करा रही है ट्रैफिक पुलिस.

क्यों करना पड़ा ऐसा

- ऑटो चालकों को वर्दी और बिल्ले में करने का मकसद है अवैध ऑटोज पर लगाम लगाना.

- भ्ब्00 वैध ऑटोज के अगेंस्ट रोड पर दौड़ रहे हैं लगभग पांच हजार अवैध ऑटोज.

- अवैध ऑटोज में अक्सर पैसेंजर्स संग होता है क्राइम और फंसते हैं वैध ऑटो वाले.

- इसी किचकिच को खत्म करने के लिए दो साल पहले ऑटो चालकों के लिए आरटीओ की ओर से वर्दी की अनिवार्यता की गई थी.

- लेकिन उस वक्त ऑटो यूनियन के विरोध के कारण ये नियम लागू नहीं हो सका था.

- बीच में ऑटो चालकों संग हुई सख्ती के बाद फिर से वर्दी के मसले ने पकड़ा तूल और फिर मान गया ऑटो यूनियन.

- जुलाई के फ‌र्स्ट वीक में ही ट्रैफिक एसपी त्रिभुवन सिंह ने ऑटो यूनियन संग बैठक कर इस नियम को हर हाल में लागू करने का दिया आदेश.

- नियम न मानने वाले ऑटो चालकों का परमिट रद्द करने या चालान का है आदेश.

- अब तक लगभग दो दर्जन से ज्यादा ऑटो चालकों के खिलाफ हुई है कार्रवाई.

नियम को रखते हैं ये ताख पर

-ऑटो चालक वैध हो या अवैध कोई नियम को नहीं मानता.

- गैंग वे के बाहर खड़े ऑटोज से कैंट इलाके में लगता है जाम.

- नये नियम के तहत सिटी में चलने वाले ऑटोज ब्लैक एंड येलो में होने चाहिए लेकिन अब तक अधिकतर ऑटोज हरे हैं.

- नियम के मुताबिक किसी भी ऑटो में म्यूजिक सिस्टम या पर्दे या फिर किसी तरह का पोस्टर नहीं होने चाहिए.

- इसके बाद भी इस आदेश को नहीं मानता कोई ऑटो चालक.

- ऑटोज में महिलाओं संग छेड़खानी को रोकने के लिए पिछले दिनों शासन से आया था ऑटोज के अंदर सीसीआर या फिर किसी पुलिस अधिकारी का नंबर लिखने का आदेश.

- लेकिन इस आदेश का भी नहीं होता पालन.

- हर रूट पर किराया है निर्धारित लेकिन रोज किराये को लेकर होती है ऑटो चालकों की पैसेंजर्स संग किचकिच