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Monday, September 29, 2014

Gujarat become first indian state to assemble marine commandos to guard coastline

सैनिक साजो-सामान से लैस हैं कमांडो
गुजरात सरकार ने अपने राज्‍य में आतंकवादी गतिविधियों पर लगाम लगाने और नशीले पदार्थों की तस्‍करी के लिए 1000 कमांडोज का दल तैनात किया है. इन कमांडोज की तैनाती के साथ गुजरात देश का पहला ऐसा राज्‍य बन गया है जिसने अपने मरीन कमांडोज तैनात किए हैं. इस बारे में गुजरात के एडीशनल प्रिंसिपल सेक्रेटरी (गृह) एस के नंदा ने बताया कि यह कमांडोज जमीन और पानी दोनों पर ही नजर रखेंगे. यह फोर्स राज्‍य को नशीले पदार्थों की तस्‍करी एवं आतंकियों की घुसपैठ से बचाएगी. नंदा ने कमांडोज की नियुक्तियों के बारे में बताते हुए कहा कि कमांडोज की 50 परसेंट हाईरिंग स्‍टेट रिजर्व पुलिस बल में से की जाएगी. इसके अलावा बाकि 50 परसेंट कमांडोज को लिए डिफरेंट नियुक्ति प्रक्रिया को शुरू किया जाएगा.

मरीन पुलिस चौकियों तैनात होंगे कमांडो

गुजरात पुलिस महानिदेशक पीसी ठाकुर ने बताया कि गुजरात प्रशासन ने यह कमांडोज राज्‍य के तटों पर तैनात मरीन पुलिस से अलग होगा. इसके साथ ही पुलिस महानिदेशक ने बताया कि कमांडोज को समुद्र और जमीन पर निगाह रखने के लिए नौकाएं, जीपें एवं बाइकें उपलब्‍ध कराने की योजना हैं.

Saturday, August 30, 2014

Police negligence exposed again

घाटमपुर के भीतरगांव का बवाल अभी ठंडा भी नहीं हो पाया है कि मंगलवार को पुलिस की सुस्ती से एक और बड़ा बवाल होते-होते बच गया. इस बार फिर पुलिस ने अपनी कलाकारी दिखाई और हादसे में मरे युवक का पंचनामा लावारिश में कर दिया. इससे गुस्साए लोग रोड पर उतर आए और शव को रोड पर रखकर जमकर हंगामा किया. कुछ उपद्रवियों ने मौका देखकर मामले को बिगाड़ने के लिए पत्थर भी फेंके, लेकिन ऊपर वाले का शुक्र था कि मामला निपट गया. इससे पूर्व मामला बढ़ने की सूचना जब पुलिस और प्रशासन के अधिकारियों के पास पहुंची तो उनके होश उड़ गए. आनन-फानन में आला अधिकारियों ने मौके पर जाकर गुस्साए लोगों को समझाकर शांत कराया. साथ ही उन्होंने पीडि़त परिवार को ख्भ् हजार का मुआवजा दिया और अन्य सहायता दिलाने का आश्वासन दिया. तब जाकर मामला शांत हुआ.

क्या था मामला?

बकरमण्डी के मिश्री बाजार में रहने वाले जियाउल हक का बेटा फैसल चप्पल कारखाने में काम करता था. वो सोमवार को पैदल परेड चौराहे की ओर जा रहा था कि रास्ते में एकता चौकी के पास डीसीएम ने उसको टक्कर मार दी थी. जिसमें उसकी मौके पर मौत हो गई थी. पुलिस ने आनन-फानन में लावारिश में शव का पंचनामा कर उसको पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया था. आरोप है कि पुलिस ने ड्राइवर को हिरासत में लेने के बाद उसे डीसीएम समेत छोड़ दिया था. युवक केदेर तक घर नहीं लौटने पर परिजनों को चिंता हुई, तो उन लोगों ने उसकी आस-पास खोजबीन की, लेकिन उसका कहीं पता नहीं चला. इधर, मंगलवार की सुबह लोगों को परेड पर हादसे की जानकारी मिली, तो वो लोग पोस्टमार्टम पहुंच गए. वहां पर उन्होंने शव की शिनाख्त कर सारी जानकारी की, तो पुलिस की पोल खुल गई. जिससे वे भड़क गए. परिजन घर पहुंचे फिर उनके साथ सैकड़ों लोग रोड पर उतर आए. उन लोगों ने चौकी के बाहर शव रखकर हंगामा कर दिया. गुस्साए लोग तोड़फोड़ करने लगे. पुलिस मूकदर्शक बनी रही.

लगा लंबा जाम, पब्लिक परेशान

एकता चौकी, परेड पर लोगों ने धावा बोल दिया. उग्र भीड़ ने पुलिस-प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की. फिर क्या था देखते ही देखते लोगों की संख्या बढ़ गई. लोगों ने रोड जाम कर दी. देखते ही देखते रोड के दोनों ओर लंबा जाम लग गया. एक तरफ पीपीएन कॉलेज तक और दूसरी तरफ लैंडमार्क होटल तक जाम लग गया. बवाल बढ़ता देख लोग इधर-उधर गलियों में घुसने लगे. खैर, देर से पहुंची पुलिस ने दोनों ओर का ट्रैफिक रोक-कर लोगों को वापस किया. करीब आधे घंटे तक परेड पर जमकर बवाल हुआ. लेकिन फिर अधिकारियों की मुस्तैदी से बड़ा बवाल होते-होते बच गया.

Friday, August 22, 2014

most wanted criminal monu pahaadi appeard in court hearing

मोनू पहाड़ी का गैंग बेहद खतरनाक है. बहुत ही कम पढ़े लिखे उसके गुर्गे निहायत प्रोफेशनल ढंग से काम करते हैं. सबका काम तक बंटा हुआ है और जिसका जो काम है वो सिर्फ वही करता है. मोनू गैंग का सरगना यानि डॉन है. उसके इशारे पर ही गुर्गे काम करते है. अब आपको बताते है कि मोनू पहाड़ी अपने गैंग को कैसे ऑपरेट करता है.

ये हैं मोनू पहाड़ी के हाथ-पैर

1-नाम- शरीफ ढपाली

पिता का नाम- शफीक ढपाली

स्थाई पता- 91क्/ख्क् हीरामन का पुरवा

वर्तमान पता- जेल

काम- लूट और हत्या करना

ख्- पप्पू खटिक उर्फ संजय सोनकर

स्थाई पता- साहब नगर पनकी रोड, कल्याणपुर

काम- भाड़े पर हत्या, रंगदारी वसूलना, लूट और अपहरण

फ्- शानू चिकना उर्फ शानू वाईकर

पता- हीरामन का पुरवा, अनवरगंज

खासियत- मोस्ट वांटेड मोनू का विश्वासपात्र

काम- गैंग के सदस्यों के लिए गाड़ी का इंतजाम करना, रंगदारी वसूलना और गुर्गो को रुपए देना

ब्-मियां मुनक्कू

पता- हीरामन का पुरवा

खासियत- मोनू का भरोसेमंद

काम- वारदात के बाद छुपने का इंतजाम करना

भ्-रेहान उर्फ गुड्डू

पता- छोटे मियां का हाता, कर्नलगंज

खासियत- मोनू का खास गुर्गा, जेब कतरा गैंग का लीडर, मादक पदार्थ की बिक्री

काम- जेल में बन्द सदस्यों की जमानत का इंतजाम करना

म्- आफाक सुनहरा और अखलाख सुनहरा

पता- हीरामन का पुरवा

काम- गैंग के सदस्य के छुपने का इंतजाम करना

7- कालू उर्फ कार्लोस

पता- चमनगंज

8- नौशाद

पता- नाला रोड, चमनगंज

9- शेरू

पता- नाला रोड, चमनगंज

क्0 रईस बनारसी

खासियत- मोनू का जिगरी दोस्त

काम- भाड़े पर हत्या, लूट, अपहरण, रंगदारी वसूलना

क्क्- शानू मोटा

पता- रावतपुर

क्ख्- बबुआ झाड़ूवाला

पता-बाबूपुरवा

क्फ्- शाह आलम

पता- बाबूपुरवा

मोनू पहाड़ी के चाचा और भाई भी सजायाफ्ता.

मोस्ट वांटेड मोनू पहाड़ी ने बचपन में चाचा महबूब हीरो से क्राइम की एबीसीडी सीखी थी. महबूब हीरो इलाके का दबंग था. उसने दबंगई के चक्कर में ही मर्डर कर दिया था. जिसमें उसे उम्रकैद की सजा सुनाई गई थी. सजा पूरी होने से पहले ही जेल में उसकी मौत हुई थी. मोनू का भाई नाजिम भी एनडीएस में जेल जा चुका है. उसी दौरान मोनू को भी पुलिस ने गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था जिसके चलते नाजिम की जमानत नहीं हो पा रही थी. नाजिम कई महीनों जेल में रहा. उसने रिहाई का कोई रास्ता नहीं मिलने पर लोक अदालत में जुर्म कबूल लिया.उसको सजा भी सुनाई गई थी जिसे काटकर जेल से बाहर आने के बाद वो मुंबई भाग गया. नाजिम अब वहीं पर रह रहा है.

मोनू के भाई ने ही की थी बनारसी के भाई की हत्या

शहर के मोस्ट वांटेड मोनू पहाड़ी की हिस्ट्रीशीटर रईस बनारसी से बचपन की दोस्ती है. रईस भी पहले दलेलपुरवा में रहता था. मोनू ने उसके साथ मिलकर मर्डर समेत कई वारदात को अन्जाम दिया है. रईस का भाई नौशाद कालिया भी हिस्ट्रीशीटर था. वो स्मैक का धंधा करता था. मोनू के भाई नाजिम की दोस्ती हिस्ट्रीशीटर शानू ओलंगा और राजा से थी. बनारस में रईस के गिरफ्तार होने पर शानू ओलंगा उसके भाई नौशाद कालिया से स्मैक के गोरखधंधे में कट मांगने लगा. मना करने पर शानू ओलंगा ने नाजिम और राजा के साथ मिलकर रईस बनारसी के भाई का कत्ल कर दिया था. रईस को इसका पता चला तो उसने शानू को ठिकाने लगाने की प्लानिंग कर ली. वो जेल से छूटने के बाद सीधे मोनू से मिला, तो मोनू ने अपने भाई को बचाने के लिए उससे कहा कि नाजिम को नहीं पता था कि शानू किसका कत्ल करने जा रहा था. वो तो दोस्ती में उनके साथ चल गया था. रईस को मोनू पर भरोसा था. इसलिए उसने नाजिम को छोड़ दिया. जिसके बाद उसने मोनू के साथ मिलकर शानू ओलंगा को मार दिया .

Wednesday, August 20, 2014

Parks of the city captured by government departments

पार्को के नाम पर कानपुराइट्स की जेब पर सरकारी डाका डाला जा रहा है. सरकारी डाका का नाम सुनकर आप चौंक जरुर रहे होंगे. लेकिन ये सच है.पहले पार्क फेसिंग प्लॉट्स के एलॉटमेंट के नाम पर लोगों से लाखों रुपए एक्स्ट्रा चार्ज भी वसूला गया. बाद में पूरे पार्क को घेरकर जोनल पम्पिंग स्टेशन, ओवरहेड टैंक, क्लियर वाटर रिजरवॉयर बना दिया गया है. इससे लोग अपने आपको ठगे महसूस कर रहे हैं. लेकिन करें भी तो क्या करे, पार्क की जमीन पर डाका डालने वाले भी सरकारी विभाग ही है. ऐसे पार्को की संख्या की एक-दो नहीं दर्जनों में है.

पार्क के नाम पर वसूला जाता है एक्स्ट्रा चार्ज

एलॉटमेंट के दौरान केडीए ने पार्क फेसिंग प्लॉट के लिए भ् परसेंट और कार्नर के प्लॉट के क्0 परसेंट एक्स्ट्रा चार्ज लोगों से वसूलता है. पार्क फेसिंग प्लॉट को इस वजह से लोग प्राथमिकता देते हैं, उन्हें स्वच्छ व शुद्ध हवा मिलेगी. सुबह उठते ही ग्रीनरी से सामना होगा, पार्क में मार्निग वॉक कर सकेंगें. बच्चों को पार्क के फेसिंग प्लाट्स के लिए लोगों ने टोटल लाखों रुपए कीमत अदा की. दूसरे शब्दों में कहें तो जिन्हें पार्क फेसिंग प्लाट मिला उन्हें मिल-जुलकर पार्क की जमीन की लगभग पूरी कीमत चुकानी पड़ी.लेकिन जेएनएनयूआरएम के प्रोजेक्ट शुरु होते ही उनके पार्को पर डाका पड़ना शुरु हो गया. करीब 8भ्0 करोड़ के ड्रिकिंग वाटर के प्रोजेक्ट्स के लिए विभिन्न मोहल्ले के तीन दर्जन के लगभग पार्को पर जेडपीएस, ओवरहेड टैंक, क्लियर वाटर रिजरवायर आदि बना दिए गए है. इससेपार्क फेसिंग प्लाट के लिए लाखों रुपए चुकाने वाले अपने आपको ठगा महसूस कर रहे हैं.

पार्को में जेडपीएस, बच्चे सड़क पर

केडीए की किदवई नगर वाई वन हाउस स्कीम के आसपास के दो पार्को में जलनिगम ने जोनल पम्पिंग स्टेशन बना दिए है. पार्क की पूरी जमीन को घेरकर वहां ऑफिस, ट्रांसफॉर्मर आदि लगा दिए. इन दोनों पार्को में इतनी भी जगह नहीं बची है कि बच्चे वहां खेल सके. मजबूरन बच्चे सड़क पर खेलने को मजबूर है. इसी तरह गणेश उद्यान के एक बड़े हिस्से में जोनल पम्पिंग स्टेशन बना दिया. वहीं यू ब्लाक निराला नगर, दीप टाकीज रोड पार्क, रामबाग पार्क, सेंट्रल पार्क शास्त्री नगर, गीता पार्क नेहरु नगर, प्रेम नगर पार्क, ईदगाह कालोनी पार्क आदि में ओवरहेड टैंक बना दिए हैं.

इमोशनल ब्लैकमेलिंग भी..

पब्लिक की प्रॉपर्टी पर डाका डालने

वाले गवर्नमेंट डिपार्टमेंट के होने के कारण लोग विरोध की हिम्मत नहीं जुटा सके. उन्हें एरिया में ड्रिकिंग वाटर क्राइसिस की समस्या की याद दिलाई. साथ ही जोनल पम्पिंग स्टेशन बने बिना इस समस्या का हल न होने और इससे जूझते रहने की चेतावनी दी. इस समस्या के हल के लिए एकमात्र उपाए जोनल पम्पिंग स्टेशन और ओवरहेड टैंक है. जिसके चलते उनकी इमोशनल ब्लैकमेलिंग का शिकार होने को मजबूर हो गए. लोगों की ऑंखों के सामने उनके ही पार्क पर डाका पड़ गया.

-वर्जन-

सिटी में पेयजल समस्या का हल भी जरुरी है. इसके लिए जोनल पम्पिंग स्टेशन, ओवरहेड बनाने भी जरुरी है. जहां कोई जगह नहीं मिली, वहां मजबूरी में पार्क को चुना गया है.

-आरसी वर्मा, चीफ इंजीनियर, जलनिगम

Tuesday, August 19, 2014

Many other rape victims awaiting justice

शहर के बहुचर्चित साक्षी रेपकांड में कोर्ट ने दो साल के अंदर सुनवाई पूरी कर आरोपी अमरजीत शाही को दोषी करार देते हुए सजा सुना दी है. लेकिन जिले की कोर्ट में रेप के फ्00 से ज्यादा मुकदमे चल रहे हैं. जिसमें कई मुकदमे तो सालों पुराने हैं. पीडि़त और उनके परिजन हर तारीख पर न्याय की उम्मीद लेकर कोर्ट की चौखट में पहुंचते हैं, लेकिन आरोपी कानूनी दावपेंच का सहारा लेकर अगली तारीख ले लेते हैं या फिर गैरहाजिर हो जाते हैं. कई पीडि़त इतने गरीब हैं कि उनके पास अच्छा वकील करने के पैसे नहीं है. हर तारीख पर पीडि़ता को आरोपी का सामना करना पड़ता है. जिससे उसके जख्म हरे हो जाते हैं. उसको दोबारा दुष्कर्म की पीड़ा होने लगती है. वहीं, आरोपी पीडि़ता पर फब्तियां भी कसते हैं, ताकि वो शर्म और बेइज्जत होने के डर से आरोपियों से समझौता कर लें. आइए आपको साक्षी रेप कांड के पहले के कुछ रेप केसेज के बारे में बताते हैं. जिसमें पीडि़त परिवार इंसाफ पाने के लिए आज भी कचहरी के चक्कर लगा रहे हैं.

वन्दना गैंगरेप कांड : छह साल से न्याय का इंतजार

मूल रूप से बिहार की रहने वाली सविता कानपुर में सेंट्रल स्टेशन के पास झोपड़ी में रहती थी. क्भ् फरवरी को उसकी क्क् साल की बेटी घर के बाहर खड़ी थी. तभी आरपीएफ का जवान विनय, ठेकेदार अमर सिंह, लम्बू, पप्पू, लल्लू, संतोष और शादाब ने बेटी को अगवा कर लिया. जिसके बाद वे उसको यार्ड में ले गए थे. जहां पर सभी ने उसके साथ रेप किया. जिसके बाद उसकी हत्या कर दी गई. केस के सभी आरोपी जमानत पर जेल से छूट चुके हैं. सविता बेटी को इंसाफ दिलाने के लिए छह साल से कोर्ट के चक्कर लगा रही है. उसने बताया कि वो बेटी को इंसाफ दिलाने के लिए हर मुमकिन कोशिश कर रही है. उसका कहना है कि हर तारीख पर कोई न कोई आरोपी गैरहाजिर हो जाता है. जिससे मुकदमे में अगली तारीख लग जाती है. आरोपियों की पैरवी कई सीनियर वकील कर रहे हैं, लेकिन उसके पास अच्छा वकील की फीस देने के लिए रुपए नहीं हैं. लेकिन उसे अदालत पर पूर भरोसा है.

दिव्या रेपकांड : हर तारीख पर होता है 'रेप'

सिटी के चर्चित दिव्या रेप एंड मर्डर के मुकदमे में भी अभी फैसला नहीं हो सका है. रावतपुर स्थित ज्ञान स्थली स्कूल में ख्7 सितंबर ख्0क्0 को छात्रा दिव्या के साथ स्कूल प्रबंधक चंद्रपाल वर्मा के बेटे पीयूष ने रेप किया था. जिससे छात्रा की हालत बिगड़ गई थी. स्कूल के कर्मचारी गंभीर हालत में उसको घर के बाहर छोड़ गए थे. उस दिन डॉक्टरों की हड़ताल होने से उसका समय से इलाज नहीं हो सका और उसकी मौत हो गई. इसमें पुलिस ने पहले जांच में खेलकर एक निर्दोष को फर्जी फंसा दिया था, लेकिन आई नेक्स्ट की पड़ताल से सच्चाई सामने आ गई थी. जिसे संज्ञान में लेते हुए गर्वमेंट ने सीबीसीआईडी जांच कराई थी. जिसमें आरोपियों के असली चेहरे सामने आ गए. सीआईडी ने स्कूल प्रबंधक चंद्रपाल, उसके बेटे मुकेश और पीयूष और कर्मचारी संतोष को नामजद कर जेल भेजा था. जिसमें स्कूल प्रबंधक, उसके बड़े बेटा और कर्मचारी की जमानत हो गई है. दिव्या के वकील एडवोकेट अजय भदौरिया ने बताया कि मुकदमा गवाही में चल रहा है. इसमें क्फ् गवाहों के बयान हो चुके है, जबकि फ्8 गवाहों के अभी बयान दर्ज होने हैं. वहीं, दिव्या की मां सोनू के मुताबिक हर तारीख पर बेटी के हत्यारों से सामना होता है और बेटी की पीड़ा का एहसास होता है. वो लम्बी तारीखों से परेशान हो चुकी है.

नीलम रेपकांड: चार साल से चल रही है सुनवाई

रावतपुर में सन् ख्0क्0 में हुए नीलम रेप कांड के भी आरोपी जमानत पर जेल से छूट गए हैं. उसके परिजन आरोपियों को सजा दिलाने के लिए कड़ी पैरवी कर रहे हैं, लेकिन आरोपी मेडिकल, गैरहाजिरी समेत अन्य कानूनी दावपेंच का सहारा लेकर केस को लम्बा खींचने की जुगत भिड़ा रहे हैं. साथ ही वो पीडि़त परिवार पर भी समझौता करने का दबाव डाल रहे हैं. इस केस के सुनवाई भी चार साल से चल रही है.

इन्हें भी है न्याय की आस

बेगमपुरवा में रहने वाली पंद्रह वर्षीय किशोरी को सन् ख्009 में पड़ोसी मो. आफताब मां के एक्सीडेंट होने का झांसा देकर दोस्त के घर ले गया. वहां पर दोनों ने उसके साथ रेप किया. इसके बाद उसको मुंह खोलने पर जान से मारने की धमकी देकर छोड़ दिया. उसने घर जाकर पिता को पूरी बात बताई, तो उनके होश उड़ गए. उन्होंने बेटी को बाबूपुरवा थाने ले जाकर आरोपियों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई. इस मामले के भी आरोपी जमानत पर छूट गए हैं. वहीं, किशोरी की पढ़ाई छूट गई है. वो कहीं जाती है, तो इलाकाई लड़के उस पर फब्तियां कसते हैं. कोर्ट में आरोपियों का सामना होने पर वो सहम जाती है, लेकिन वो आरोपियों को सजा दिलाने के लिए केस लड़ रही है. उसका कहना है कि अगर आरोपियों को सजा नहीं मिलेगी, तो वो आत्महत्या कर लेगी.

बॉक्स

कोर्ट की कमी से बढ़ रही है मुकदमों की पेंडेंसी

सीनियर एडवोकेट कौशल किशोर शर्मा के मुताबिक शहर का क्राइम ग्राफ बढ़ रहा है, लेकिन उसकी अपेक्षा यहां पर कोर्ट कम है. कोर्ट में मुकदमों की पेंडेंसी बढ़ती जा रही है. जिसमें रेप के केस भी हैं. एक कोर्ट में औसतन हर दिन क्भ् से ख्0 मुकदमों की सुनवाई होती है. ऐसे में शेष केस अगले दिन सुने जाते हैं. इसी वजह से कोर्ट की संख्या बढ़नी चाहिए. वहीं, रेप के मामलों की सुनवाई महिला जज करती हैं. यहां पर महिला जज कम हैं. इसलिए महिला जजों की संख्या को बढ़ाना होगा. तभी मुकदमों में जल्द फैसला हो सकेगा.

कानूनी दांवपेंच पर लगाम कसनी चाहिए

एडवोकेट विनय अवस्थी के मुताबिक रेप जैसे संगीन मामलों में गवाहों और आरोपियों की गैरहाजिरी को रोकना होगा. आरोपी बीमारी का मेडिकल बनाकर गैरहाजिर हो जाते हैं. जिसमें मुकदमे की सुनवाई टल जाती है. वहीं, गवाहों का बयान और जिरह भी एक दिन में होनी चाहिए. अभी गवाह के बयान और जिरह कई दिन चलती है. जिससे सुनवाई में देरी होती है. इसके अलावा रेप के केस की चार्जशीट दाखिल होते ही उसी दिन मुकदमे को सेशन कोर्ट में भेज देना चाहिए. अभी चार्जशीट दाखिल होने के कई महीनों बाद मुकदमा सेशन में सुनवाई के लिए भेजा जाता है. इसके अलावा पुलिस को भी जल्द से जल्द चार्जशीट दाखिल करनी चाहिए. 

Tuesday, August 12, 2014

Corruption by junior engineers of kda exposed

अवैध निर्माण कर बनाई बिल्डिंग्स की सील खोलने में केडीए के एनफोर्समेंट टीम के इंजीनियर्स ने जमकर खेल खेला है. अपना फायदा देखकर उन्होंने बिल्डिंग्स की कंडीशनल सील खोल दी, लेकिन सील खोले जाने के बाद अशमनीय हिस्से को नहीं तोड़ा गया है. इससे अच्छी तरफ से वाकिफ होने के बावजूद भी उन्होंने कोई कार्रवाई नहीं की. जांच में ये चौंकाने वाला खुलासा होने पर एडीशनल सेक्रेटरी ने 18 जूनियर इंजीनियर्स से जवाब-तलब किया है. साथ ही 19 अगस्त तक अशमनीय भाग तोड़ने को लेकर प्रमाणपत्र देने का आदेश जारी किया है. इससे एनफोर्समेंट टीम में अफरातफरी मची हुई है.

अपना फायदा देख खोली सील

पिछले दो वर्षो में 400 के लगभग बिल्डिंग सील की गई है. केडीए के एनफोर्समेंट के इंजीनियर्स की मिलीभगत से इनमें से काफी संख्या में बिल्डिंग की सील खोली गई है. केवल जोन-1 में ही लगभग बिल्डिंस की सील खोली गई है. उन्होंने ऐसी बिल्डिंग की भी सील खोल दी जिनकी कम्पाउंडिंग अवैध हिस्से को तोड़े बिना नहीं हो सकती थी. इंजीनियर्स ने अपना फायदे के लिए इसके लिए हलफनामा का रास्ता भी सुझाया. जोन एक में ऐसे कंडीशनल सील खोलने के 9 केस है. जिसमें बिल्डिंग ओनर्स से अशमनीय अवैध हिस्से को तोड़ने का हलफनामा ले लिया है. ये सब इंजीनियर्स ने अपनी गिरेबान बचाने के लिए किया है. इसी के बेस पर उन्होंने बिल्डिंग की खोल दी. लेकिन सील खोलने के बाद अशमनीय हिस्सा नहीं तोड़ा गया ऐसी बिल्डिंग्स की जांच एडीशनल सेक्रेटरी ने कंडीशनल सील खोली गई 20 बिल्डिंग्स की जांच कराई तो मिलीभगत खुलकर सामने आ गई. सील खोलने के बाद भी अशमनीय हिस्सा अभी तक नहीं तोड़ा गया है.

मौके पर जाकर जांच

जिन बिल्डिंग्स की सील खोली गई है, उनकी लिस्ट, कम्पाउंडिंग मैप मिलने के बाद एडीशनल सेक्रेटरी ने मौके पर जाकर जांच कराने की तैयारी कर ली है. इसमें बिल्डिंग सेक्शन की टीम भी होगी. जिससे कि हकीकत की जानकारी हो सके बिल्डिंग में कितना अवैध निर्माण था, तोड़ा गया या नहीं. या फिर केवल दिखावे के लिए अवैध निर्माण तोड़ा गया है. अगर अवैध निर्माण नहीं तोड़ा गया तो एनफोर्समेंट टीम के इंजीनियर के खिलाफ गाज गिरना तय माना जा रहा है. फिलहाल 18 जेई को नोटिस जारी सील खुलने के बाद भी अभी तक अशमनीय हिस्सा न तोड़े जाने पर जवाब तलब किया गया है. जिन बिल्डिंग्स की सील खोली गई है, उनके ओनर्स को नोटिस जारी की गई है. उन्हें 19 अगस्त तक अशमनीय हिस्से को तोड़े जाने का साक्ष्य प्रस्तुत करने की भी नोटिस जारी की है.

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छुटिट्यों के लिए बनेगी टीम (बॉक्स)

KANPUR: एनफोर्समेंट टीम की मिलीभगत से अवकाश के दिनों में अवैध निर्माण होने व स्लैब होने की शिकायत मिली है. आने वाले दिनों में 15 अगस्त, दशहरा, दीपावली सहित कई फेस्टिवल भी है. जिसके चलते अब छुट्टी के दिनों के लिए केडीए की स्पेशल एनफोर्समेंट टीम बनेगी. इस टीम के नम्बर भी केडीए जारी करेगा. जिससे कि लोग अवैध निर्माण की शिकायत कर सके. ये टीम मौके पर जाकर अवैध निर्माण व कब्जे को रुकवा सके.

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(बॉक्स)

केडीए की 1 करोड़ की जमीन पर कब्जा!

KANPUR: नौबस्ता के बाद अब जूही में केडीए की जमीन पर कब्जा किया जा रहा है. मंडे को सुनील मिश्रा सहित कई लोगों ने मंडे को केडीए के एडीशनल सेक्रेटरी सीपी त्रिपाठी से मिलकर शिकायत की. उनका कहना है कि एक करोड़ से अधिक कीमत की इस जमीन पर कब्जा करने के लिए छुट्टी का दिन सेकेंड सैटरडे चुना गया है. जिससे दो दिनों की छुट्टी में जमीन पर अवैध कब्जा किया जा सके. इससे इलाके में तनाव है. एडीशनल सेक्रेटरी ने तहसीलदार किशोर गुप्ता को जांच कर आवश्यक कार्रवाई करने का कहा है.

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शिकायत के बाद भी बन गईं दुकानें

KANPUR: अम्बेडकर नगर में एनफोर्समेंट टीम की मिलीभगत से अवैध रुप से बनी मार्केट बन जाने का मामला केडीए में चर्चा है. ये एनफोर्समेंट की टीम मिलीभगत से हो रहे अवैध निर्माण का एक और उदाहारण है. केडीए के एडीशनल सेक्रेटरी सीपी त्रिपाठी ने बताया कि अवैध दुकानें के ध्वस्तीकरण का आदेश कर दिया गया है. इससे पहले एडीशनल सेक्रेटरी के जानकारी देने के बावजूद भी ग्रीन पार्क के सामने अवैध रुप से एक बिल्डिंग बन गई थी. जिसको लेकर केडीए वीसी ने मीटिंग में एनफोर्समेंट टीम के इंजीनियर्स को जमकर फटकार लगाई गई थी. 

 
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Friday, August 8, 2014

Kesco and nagar nigam made this a death park 36944

 शहर की घनी आबादी वाले और अति व्यस्त व्यापारिक इलाके हालसी रोड स्थित एक पार्क को केस्को और नगर निगम ने मिलकर मौत का पार्क बना डाला है. इस पार्क का नाम है गढ़ैया लोहाई पार्क, पार्क में शिवजी का एक मंदिर भी है, जिसमे रोज़ सैकड़ों लोग माथा टेकने आते हैं. लेकिन पार्क में मंदिर के बगल में ही बीचोबीच ज़मीन पर एकदम खुला ट्रांसफार्मर रखा होने से ये मौत का पार्क बन चुका है. इससे लोग अब पार्क से निकलने तक में घबराने लगे हैं. बुधवार की दोपहर अचानक ही बिजली आई तो जोर की आवाज़ और स्पार्किग हुई. लोग चौकन्ने हो गए. देखने पर पता चला की एक सुअर की ट्रांसफार्मर के खुले तारों में चिपक कर मौत हो गयी है. घटना से इलाकाई लोगों के बीच रोष फैल गया. क्योंकि खुले ट्रांसफार्मर में चिपक कर एक महीने में ये क्क्वें जानवर की मौत है.

एक और जानवर की गई जान

इलाके के व्यापारियों विकास अवस्थी, राघवेन्द्र पंडित, राजेश बाजपाई, संतोष, हिमांशु, विजय सोनकर आदि लोगों ने बताया कि इसी महीने दो सूअर और कई गाए-भैंसे, कुत्ते आदि जानवर ट्रांसफार्मर से चिपक कर मर चुके हैं. करंट से मरे इन जानवरों को हटाने के लिए लोगों को चन्दा करना पड़ता है. वहीं हटाने वाले सफाई कर्मी की जान की सलामती के लिए सबस्टेशन से कई बार तो बिजली बंद करवानी पड़ती है.

लापरवाही की हद कर दी

इलाकाई लोगों के अनुसार केस्को की लापरवाही से पार्क में लम्बे समय से ज़मीन पर ही खुला ट्रांसफार्मर रख छोड़ा गया है. दर्जनों बार लिखित शिकायत करने के बावजूद केस्को और नगर निगम खुले ट्रांसफार्मर और तारों के आसपास फेंसिंग या बाउंड्री नहीं बनवा रहे हैं. जिससे ज़मीन को छूते ट्रांसफार्मर के तारों और मशीनरी से लीक होता करंट थोड़ी सी बरसात में ही पूरे पार्क को मौत का पार्क बना देता है. जल भराव में पूरे पार्क में करंट दौड़ जाता है और पार्क में बने शिव मंदिर में आने वाले श्रद्धालुओं और लोहा मंडी के कर्मचारियों के लिया जानलेवा ख़तरा पैदा कर देता है.

पार्षद का प्रयास भी गय बेकार

लोहाई पार्क के आसपास के व्यापारियों और निवासियों का कहना है कि शायद केस्को और नगर निगम को इस पार्क में किसी इंसान की मौत का इंतज़ार है. उसके बाद ही यहां से ट्रांसफार्मर हटेगा. उधर जनप्रतिनिधि भी केस्को और नगर निगम की अनसुनी के आगे लाचार हैं. इलाके के पार्षद सुशील तिवारी का कहना है कि उन्होंने लोगों के कहने पर ट्रांसफार्मर हटवाने या फेंसिंग का प्रयत्न किया, लेकिन नगर निगम अधिकारी या केस्को उनकी भी नहीं सुनते.

 
 

Thursday, August 7, 2014

Jyoti murder case many new facts revealed

बिस्कुट कारोबारी की बहु ज्योति श्यामदसानी पर तीन संडे से मौत मंडरा रही थी. दो बार तो मौत उसके बेहद करीब आकर निकल गई लेकिन उसेजरा सा भी आभास नहीं हुआ. उसका बिगड़ैल पति पीयूष दो संडे पहले से ज्योति का कत्ल कराने की कोशिश कर रहा था. इसलिए वो ज्योति को हर संडे घुमाने के नाम पर कहीं न कहीं ले जाता था. लेकिन हर बार कोई न कोई अड़चन आने से उसका प्लान फेल हो रहा था. लेकिन जुलाई का आखिरी संडे ज्योति की मौत नहीं टल सकी. हत्यारों से टाइम सेट होने से पीयूष आखिर अपनी साजिश में कामयाब हो गया.

रेन डांस पार्टी के बाद होना था ज्योति का कत्ल

हड़बड़ाहट और एक छोटी सी गलती के कारण पीयूष भले पत्नी के कत्ल के गुनाह में सलाखों के पीछे पहुंच गया हो लेकिन उसका दिमाग किसी शातिर अपराधी से कम नहीं है. उसने माशूका मनीषा माखीजा और ड्राइवर अवधेश के साथ ख् जुलाई को ज्योति के कत्ल की साजिश रची थी. जिसके तहत हत्यारों को ज्योति के घर से अकेले निकलने पर उसका कत्ल करना था, लेकिन ज्योति उदास होने की वजह से घर अकेले नहीं निकल रही थी. जिसे देख पीयूष ने गिरगिट की तरह रंग बदलकर ज्योति से मीठी-मीठी बात करनी शुरू कर दी. जिसके बाद पीयूष अपने प्लान के पहले कदम में कामयाब हो गया. पीयूष के बदले व्यवहार से ज्योति उसके साथ क्फ् जुलाई (संडे) को घूमने जाने के लिए राजी हो गई. जिसकी जानकारी पीयूष ने माशूका मनीषा और ड्राइवर अवधेश को दी. वो ज्योति को रनिया स्थित ओरियंट रिसॉर्ट में रेन डांस पार्टी में ले गया. ज्योति पति के बदले व्यवहार से खुश पार्टी में मस्ती कर रही थी. इधर, पीयूष उसके कत्ल की साजिश को हकीकत में बदलने की तैयारी कर रहा था. उसकी प्लानिंग के मुताबिक, ड्राइवर अवधेश साथी रेनू, आशीष और सोनू समेत रिसॉर्ट से कुछ दूरी पर स्थित दीपू चौहान के ढाबे पर पहुंचना था, जबकि पीयूष को देर रात में क्ख् बजे से ज्योति को लेकर रिसार्ट से निकलना था. जिसके बाद रास्ते में सुनसान जगह पर हत्यारों को ज्योति को लूटने के बाद कत्ल करना था, लेकिन रेन डांस पार्टी जल्दी खत्म हो जाने से प्लान फेल हो गया. प्लान फेल होने से पीयूष इतना झल्ला गया था कि उसने एक बार तेज रफ्तार चलती गाड़ी से ही ज्योति को फेंकने का मन बना लिया, लेकिन ज्योति कहीं बच न जाए, इस डर से उसने खुद पर काबू किया. उस दिन मनीषा को छोड़कर सभी हत्यारों की मोबाइल की लोकेशन रनिया में ही मिली है. साथ ही उस दिन पीयूष, उसकी माशूका मनीषा और ड्राइवर अवधेश की करीब ख्भ् बार मोबाइल पर बात भी हुई थी. जिससे पीयूष के इस प्लान की पुष्टि हो रही है.

बैराज पर कत्ल कर लाश गंगा में फेंकनी थी

पीयूष ने ज्योति को रास्ते से हटाने का दूसरा प्रयास ख्0 जुलाई (संडे) को गंगा बैराज पर किया. इस बार वो ज्योति को बैराज पर घुमाने के लिए ले गया था. उस पर किसी को शक न हो. इसलिए वो अपने साथ बड़े भाई के बेटे को भी ले गया था. प्लान के मुताबिक, वो बैराज में सुनसान जगह पर बहाने से कार को रोककर खड़ा हो जाएगा. जिसके बाद ड्राइवर अवधेश समेत अन्य हत्यारों को कार को कवर करके उसको पीटकर गाड़ी से फेंकना था. जिसके बाद उनको ज्योति का कत्ल करना था. हालांकि उसने भतीजे को कोई भी चोट न पहुंचाने की हिदायत हत्यारों को दी थी. वो प्लान के मुताबिक ज्योति और भतीजे को कार से बैराज ले गया, लेकिन उस दिन तेज बारिश होने से हत्यारे टाइम से वहां नहीं पहुंच पाए और उसका दूसरा प्लान भी फेल हो गया. इसके लिए गुस्साए पीयूष ने ड्राइवर अवधेश को खूब फटकार लगाई थी. इस दौरान उसने ड्राइवर अवधेश को आधे घंटे में ख्0 कॉल की थीं.

'इस बार मुझे कोई गलती नहीं चाहिए'

पीयूष लगातार दो संडे से ज्योति के मर्डर की प्लानिंग फेल होने से पागल सा हो गया था. इस बार वो प्लान को हर हाल में अंजाम देना चाहता था. जिसके लिए उसने अवधेश को भी वॉर्निग दे दी थी. प्लान में कोई चूक न हो, इसके लिए पीयूष ने ड्राइवर अवधेश को जेड स्क्वॉयर मॉल बुलाया. वहां दोनों ने करीब आधा घंटा बात की. इस बार पीयूष ने अवधेश को कोई भी गलती न करने की हिदायत दी.

.और वो आखिरी रविवार का वार

महीने का आखिरी संडे और ज्योति के कत्ल की प्लानिंग का तीसरा संडे यानि ख्7 जुलाई को पीयूष सुबह से ही माशूका मनीषा और हत्यारे अवधेश से संपर्क बनाए था. उसने हत्यारे अवधेश, रेनू, आशीष और सोनू को शाम को भी घर के पास बुला लिया था. जिसके बाद वो कार से रेनू और सोनू को जेके मंदिर पर छोड़ने गया था. उसने हत्यारों को कहीं भी न जाने की हिदायत भी दी थी. जिसके बाद वो ज्योति को घर से रेस्ट्रां ले गया. जहां से निकलने पर हत्यारों ने ज्योति की चाकुओं से गोदकर हत्या कर दी. इस दिन भी पीयूष और हत्यारे अवधेश के बीच फ्0 से फ्भ् बार मोबाइल पर बात हुई थी, जबकि उसने वारदात होने से पहले तक माशूका से बात की थी.

रावतपुर से दोबारा गाड़ी घुमा कर लाया था पीयूष

रेस्ट्रां से निकलने के बाद पीयूष ज्योति को कार से लेकर कम्पनी बाग के रास्ते से रावतपुर गया था. प्लान के मुताबिक उसको अंधे मोड़ के पास ड्राइवर अवधेश समेत उसके साथी मिलने थे, लेकिन पीयूष जब वहां पहुंचा तो एक कार खड़ी थी. जिसे देख पीयूष कार को रावतपुर चौराहे ले गया. वहां से यू टर्न लेकर वापस कम्पनी बाग और वहां से दोबारा अंधे मोड़ के पास पहुंचा था. जहां पर हत्यारों को देखकर उसने कार को रोक दिया था.

भ्0 हजार तो सिर्फ टोकन था

ज्योति का कत्ल करने वाले हत्यारों ने पीयूष से भ्0 हजार रुपए की सुपारी नहीं ली थी, बल्कि ये रकम सिर्फ टोकन था. पीयूष ने हत्यारों को ज्योति के लाखों की कीमत के जेवर की सुपारी दी थी. पीयूष ने अवधेश को बताया था कि ज्योति लाखों की कीमत के जेवर पहने होगी. हत्यारों को ज्योति का मर्डर करने के बाद उसके जेवर लूटने थे, लेकिन वो ज्योति की प्लेटिनम की ज्वेलरी को नकली समझकर उसे छोड़ गए थे. यह खुलासा अवधेश समेत अन्य हत्यारों ने पुलिस रिमाण्ड में पूछताछ के दौरान किया.

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खबर का दूसरा पार्ट

शादी तय होने से झटपटा रही थी मनीषा

पीयूष की माशूका मनीषा माखीजा की दिल्ली में शादी तय हो गई थी. जिससे वो काफी बैचेन हो गई थी. वो पीयूष से अलग नहीं होना चाहती थी. इसलिए उसने ज्योति को रास्ते से हटाने के लिए पीयूष को उकसाया. उसने दबाव बनाने पर ही पीयूष ने ज्योति के कत्ल की साजिश रची थी. यह खुलासा मनीषा ने पुलिस रिमाण्ड में हुई पूछताछ में किया. उसने बताया कि वो पीयूष को बेहद चाहती थी. दिल्ली में शादी होने पर उसे पीयूष से बिछड़ने का डर था. वो किसी कीमत पर पीयूष को खोना नहीं चाहती थी. हालांकि वो पीयूष के और लड़कियों से संबंध होने की जानकारी होने से पछता रही है. वो रिमाण्ड के दौरान रोती रही. उसने बताया कि पीयूष ने ज्योति के मर्डर से पहले उसको कॉल की थी. पीयूष ने रेस्ट्रां से निकलकर उससे बात की थी. इस दौरान उसको ज्योति का कत्ल कराने का भरोसा दिलाने के लिए अवधेश से बात की थी. उसने मोबाइल के जरिए पीयूष और अवधेश की सारी बाते सुनी थीं.

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हेडिंग: पीयूष की हवस से कोई नहीं बचा

- फ्रेंड्स क्लासमेट, पड़ोसी, रिलेटिव, ऑफिस इम्पलाई, बिजनेस पार्टनर्स यहां तक की घर की नौकरानी को भी नहीं छोड़ा

- पार्टी सर्किल की अरबपति कारोबारियों की बेटियों सहित 9 लड़कियों से फिजिकल रिलेशन सामने आए

- ज्योति ने सास को दी थी पीयूष की अय्याशियों की जानकारी, लेकिन वो शांत रहीं

- रोज नए खुलासों से पुलिस भी हैरान, अफसर बोले पीयूष के संबंधों पर नहीं वारदात पर फोकस है उनकी जांच

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पीयूष को पाने के लिए मनीषा ने भले ही ज्योति के कत्ल से अपने हाथ रंग डाले. लेकिन पीयूष पर हवस इस कदर सवार थी कि उसने अपनी फ्रेंड्स क्लासमेट, पड़ोसी, रिलेटिव, ऑफिस इम्पलाई, बिजनेस पार्टनर्स यहां तक की घर की नौकरानी को भी नहीं छोड़ा. पार्टी सर्किल में आने वाली अरबपति परिवारों की बेटियों समेत अब तक 9 लड़कियों से उसके अवैध संबंध होने की बात सामने आ चुकी है. इससे आजिज पुलिस अधिकारियों ने तो यहां तक कह दिया कि पीयूष के संबंधों पर जांच की जाए तो कभी खत्म ही नहीं होगी. इसलिए वो सिर्फ वारदात पर ही फोकस कर रहे हैं. हालांकि जांच से जुड़े पुलिस अधिकारियों का मानना है कि पीयूष की मां के लाड़ ने उसे बिगाड़ने में कोई कसर नहीं छोड़ी. यहां तक कि जब ज्येाति ने पीयूष की अय्याशियों की शिकायत उसकी मां से की तो भी वह जानबूझ कर शांत रहीं.

.फिर तो जांच तो कभी खत्म नहीं होगी

बुधवार को आईजी जोन ने प्रेस कॉफ्रेंस में पीयूष के दूसरी महिलाओं से संबंधों के बारे में भी जानकारी दी. इस दौरान पता चला कि पीयूष ने अपने घर में काम करने वाली नेपाली नौकरानी से भी बहला फुसला कर शारीरिक संबंध बनाए थे. वहीं शहर के एक नामी साबुन कारोबारी की बेटी से पीयूष के फिजिकल रिलेशन की बात सामने आई है. जिसके बारे में आला ऑफिसर भी ऑफ दि रिकार्ड हामी भर रहे हैं. जांच में यह बात भी सामने आई कि ज्योति ने पीयूष के दूसरी महिलाओं से संबंध होने की शिकायत उसकी मां(सास)से की थी लेकिन उन्होंने कुछ नहीं किया. दरअसल पीयूष को पार्टी और क्लबों में जाने का शौक था. वहीं पर उसके सिटी के कई बड़े कारोबारी परिवारों की लड़कियों से भी संबंध बन गए थे. लेकिन मनीषा को पीयूष के इन संबंधों की जानकारी थी या नहीं यह बड़ा सवाल है.

परिवार ने पीयूष को उसके हाल पर छोड़ा !

दिन पर दिन पीयूष की करतूतों को लेकर हो रहे खुलासों को लेकर पीयूष के परिवार में घमासान मचा हुआ है. पहले बहू की हत्या उसके बाद बेटे के ऐसे कारनामों से हो रही बदनामी की वजह से पीयूष के प्रति उसके परिवार में भी काफी नाराजगी है. सूत्रों की मानें तो जेल में मिलने पहुंचे पीयूष के रिश्तेदारों ने उससे अपने किए की सजा भुगतने के लिए कहा है. लेकिन पीयूष को जेल में जो ट्रीटमेंट मिल रहा है वह उसके परिवार के रसूख और पैसे के बल पर ही है. ऐसे में यह अलगाव सिर्फ दिखावा है या सच्चाई, यह कह पाना मुश्किल है.

तो बढ़ जाएंगी पीयूष के परिवार की मुश्किलें

ज्योति के कत्ल की जांच में उसकी डायरियों से जो जानकारियां मिली हैं. उसके आधार पर पीयूष के परिवार पर भी काफी सवाल उठ रहे हैं. पुलिस के मुताबिक ज्योति की डायरी से पता चला है कि उसने पीयूष को लेकर कई बार उसकी मां से शिकायत की. लेकिन कुछ नहीं हुआ. और ऐसा भी संभव नहीं दिखता कि उसके परिवार को पीयूष की अय्याशियों की कोई खबर नहीं थी. ससुराल में ज्योति ने घुटन होने जैसी चीजें भी लिखी हैं. ऐसे में मामला उसके उत्पीड़न का भी बनता है. पुलिस अधिकारियों के मुताबिक इस एंगल पर भी जांच हो सकती है.

बॉक्स

मुझे बाहर जाने दो, सब मैनेज कर लूंगा

जेल में पीयूष का ड्राइवर अवधेश समेत अन्य हत्यारोपियों से सामना हुआ, तो उसने उसको रुपए की ताकत का हवाला देकर समझाया कि तुम लोग सारे गुनाह कबूल कर लो. जिसके बदले में मैं तुम लोगों के घरवालों को मालामाल कर दूंगा. अगर मैं जेल से छूट जाऊंगा, तो तुम लोगों को भी जेल से छुड़ा लूंगा.

जेल में पीयूष-मनीषा मैसेंजर के जरिए कर रहे बातचीत

जेल में पड़े छापे में यह भी पता चला है कि पीयूष और मनीषा में बातचीत भी हो रही थी. जेल अस्पताल के वार्डब्वाय इसमें मनीषा की मदद करते थे. वे पीयूष तक मनीषा का मैसेज पहुंचाते हैं और जो पीयूष कहता था वह मनीषा को बता देते थे.

डॉक्टर से हो सकती है पूछताछ

मनीषा के मेडिकोलीगल को लेकर पुलिस डॉक्टर से पूछताछ कर सकती है. आईजी आशुतोष पांडेय ने बताया कि मनीषा के मेडिकोलीगल का विवाद कोर्ट पहुंचने के बाद पुलिस ने यह कदम उठाया है. आईजी ने कहा कि इस संबंध में मेडिकल करने वाले डॉक्टर से बात करके असलियत जानी जाएगी. 

Friday, August 1, 2014

Megistrate caught illegal mining and punished the guilty

खनन माफियाओं की दबंगई की वजह से कानपुर में अवैध खनन जोरों पर है. शुक्रवार को निरीक्षण के दौरान डीएम ने भी अवैध खनन होते पकड़ा. बड़े पैमाने पर हो रहे अवैध खनन देखकर डीएम ने संबंधित गांवों के लेखपालों के खिलाफ विभागीय कार्यवाही व प्रतिकूल प्रविष्टि देने के साथ ही दोषी लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराने के आदेश जारी किये हैं.

बड़े पैमाने पर

डीएम डॉ. रोशन जैकब को निरीक्षण के दौरान टिकरा व मकसूदाबाद गांव में भारी मात्रा में मिट्टी के अवैध खनन के सुबूत मिले. वहां के लोगों ने बताया कि ग्राम टिकरा निवासी संतोष त्रिवेदी खनन करवा रहा है. इसमें लेखपाल चन्द्रभूषण तिवारी पूरी तरह दोषी है. उन्होंने एडीएम फाइनेंस को सस्पेंड कर विभागीय कार्यवाही के आदेश दिए हैं. साथ ही खनन के दोषी संतोष त्रिवेदी के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने के निर्देश दिए.

बड़े-बड़े गढ्डे मिले

बारासिरोही गांव में निरीक्षण के दौरान डीएम को बड़े-बड़े गढ्डे मिले. पता चला कि गांव के बउवा दुबे समेत ब् अन्य भाइयों द्वारा अवैध खनन करवाया जा रहा है. इस पर लेखपाल अर्जुन को प्रतिकूल प्रविष्टि देने को एसडीएम सदर को आदेश हुए. साथ ही अवैध खनन के दोषी लोगों पर मुकदमा दर्ज करने के निर्देश जारी किये. संबंधित थानाध्यक्ष को भी चेतावनी दी कि खनन की शिकायत पर कार्यवाही करें. वरना कड़ी कार्यवाही के लिए तैयार रहें.

Thursday, July 31, 2014

shyamdasani family once used to be very poor

शहर के सनसनीखेज हत्याकांड के बाद अचानक सुर्खियों में आया श्यामदासानी परिवार महज छह दशक पहले तक फर्श पर था. जन्म के बाद भले ही पीयूष को कभी दौलत की कमी महसूस न हुई हो, मगर उनके पिता और बाबा ने गरीबी के वो दिन भी देखे हैं जब खाने तक के लाले पड़ते थे. कैसे भ्म् गज के मकान से इस परिवार ने अपनी जिंदगी का सफर शुरू किया.? परचून की दुकान से लेकर पंचर बनाने तक का काम किया.? अचानक ऐसा क्या हुआ कि इस परिवार के पास अकूत धन-दौलत आ गई और यह परिवार शहर के अरबपति बिजनेस घरानों में शुमार हो गया.. जानिए इस स्टोरी में..

वो म्0 का दशक..

बात करीब सन म्0 की है.. सोर्सेज के अनुसार बंटवारे के बाद पीयूष के बाबा और ओमप्रकाश के पिता 'कोड़ामल गन्नामल' परिवार समेत कानपुर आ पहुंचे. यहां उन्होंने क्0भ्/7फ्म् प्रेम नगर इलाके में दो कमरों वाला मकान किराए पर लिया. भ्म् गज वाले दो कमरों के मकान में अपनी पत्नी, बेटों राजमोहन, ओमप्रकाश और बेटी के साथ गुजर-बसर शुरू की. बड़ा परिवार, लेकिन पास में ज्यादा पैसे नहीं.. बामुश्किल घर का खर्च निकल पाता. तब उन्होंने 'पैसों की दलाली' का काम शुरू किया. बड़े बिजनेसमैन का पैसा सिंधी व्यापारियों को ब्याज पर दिलवाने का काम.. साथ में प्रॉपर्टी डीलिंग का काम भी शुरू किया. मगर, यह धंधा ज्यादा दिनों तक टिक न सका.

परचून से पंचर की दुकान तक

वक्त बीतने के साथ ही परिवार की जरूरतें भी बढ़ने लगीं. तब उन्होंने घर के नीचे ही परचून की दुकान खोली. मॉर्डन ब्रेड और पराग दूध बेचने का काम शुरू किया. मोहल्ले के ही कुछ बुजुर्ग लोगों ने बताया कि घर का बड़ा बेटा राजमोहन (घर में और दोस्त-यार मोहन कहकर बुलाते थे) खाने-पीने के काफी शौकीन थे. उनके इस शौक की वजह से परिवार की माली हालत काफी खराब हो गई. तब तक कोड़ामल गन्नामल भी काफी बुजुर्ग हो चले थे. जबर्दस्त घाटा हुआ और परचून की दुकान भी बंद हो गई. गुजर-बसर के लिए दोनों भाइयों ने पंचर बनाने की दुकान खोली. फिर भी घरखर्च नहीं चलता तो आसपड़ोस से उधार तक मांगकर काम चलाना पड़ता था.

लोन लेकर लगाया कारखाना

इधर घर की माली हालत बिगड़ती जा रही थी. दूसरी ओर बच्चों की जरूरतें भी बढ़ने लगीं. इसी बीच दोनों भाइयों ने खादी ग्रामोद्योग बोर्ड में कारखाना लगाने के लिए क्0 हजार का लोन लेने की अर्जी लगाई. केस काफी पेचीदा था, इसलिए पहली बार में एप्लीकेशन रिजेक्ट हो गई. सोर्सेज के मुताबिक बोर्ड में ही तिवारी जी हुआ करते थे. उनकी मदद से श्यामदासानी भाइयों का लोन सेंक्शन हुआ. तब संगीत सिनेमा के सामने एक हाते में दोनों भाइयों ने मिलकर होजरी के डिब्बे बनाने का कारखाना डाला. धीरे-धीरे काम बढ़ा तो राजमोहन के बच्चे भी बिजनेस में हाथ बंटाने लगे.

बहन का बेटा लिया गोद

जिस वक्त श्यामदासानी परिवार की आर्थिक स्थिति सुधर रही थी. उसी वक्त राजमोहन के तीन बेटे कमलेश, संजू और ललित हुए. मगर, छोटे भाई ओमप्रकाश के तब तक कोई संतान नहीं हुई थी. तब उन्होंने अपनी बहन का बेटा (पीयूष का बड़ा भाई मुकेश..) गोद लिया. आपसी सहमति के बाद गोद लेने की प्रक्रिया की बाकायदा लिखापढ़ी भी करवाई गई. इसे कुदरत का करिश्मा ही कहेंगे कि अपने बच्चे के लिए जो दम्पति रोज भगवान की चौखट पर माथा टेकते थे. कई सालों के बाद भी कोई संतान नहीं हो रही थी. मुकेश (जिसके घर का नाम मुक्की है..) के घर में आते ही ओमप्रकाश और पूनम की जिंदगी में खुशहाली आ गई. कुछ सालों बाद ही पूनम ने पीयूष को जन्म दिया. इस बीच पार्टनरशिप में मेसर्स हिमांगी फूड्स प्राइवेट लिमिटेड नाम से सचेंडी में फैक्ट्री डाली.

कमलेश की शादी के बाद चमकी किस्मत

श्यामदासानी परिवार का रसूख बढ़ने लगा तो मोहन के बड़े बेटे कमलेश की शादी व्यावसायी लालजी दयाल (शहर के बड़े व्यापारी) की भतीजी के साथ हुई. इसके बाद तो फैमिली ने पीछे मुड़कर ही नहीं देखा. किस्मत कुछ ऐसी चमकी.. कि बस चारों तरफ से पैसा ही पैसा बरसने लगा. पीयूष के पिता और राजमोहन के छोटे भाई ने मुंबई तक दौड़भाग करके पारले-जी की फ्रेंचाइजी कानपुर के लिए अप्रूव करवाई. पनकी में मेसर्स स्वाति बिस्कुट नाम से फैक्ट्री डाली.

पाण्डु नगर हुए शिफ्ट

परिवार में सदस्य बढ़ने लगे तो श्यामदासानी परिवार ने प्रेम नगर एरिया छोड़ने का फैसला कर लिया. इसके बाद मुफीद जगह पाण्डु नगर एरिया दिखा. वहां बंगला बनकर तैयार हुआ तो पूरा परिवार वहीं शिफ्ट हो गया. इस बीच जिस जगह ओमप्रकाश और मोहन पंचर जोड़ा करते थे. वहां उन्होंने छोटा सा ऑफिस बनवा लिया. फैक्ट्री की ऑर्डर बुकिंग से लेकर एकाउंटेंसी का सारा काम इसी ऑफिस से होता था. हालांकि, कुछ समय बाद यहां उठना-बैठना भी बंद हो गया. देखरेख के लिए बस एक नौकर यहां पर आकर साफ-सफाई और पूजापाठ करता है.

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ऊंचे-रसूखदारों से सम्पर्क

पैसा, पॉवर और पॉलिटिक्स.. तीनों ही एक-दूसरे के बिना अधूरे हैं.. इनमें से एक भी कहीं होगा तो बाकी दो खिंचे चले आयेंगे. श्यामदासानी परिवार के साथ भी कुछ ऐसा ही हुआ. बिजनेस में बढ़ोतरी के दौरान ही ओमप्रकाश ने फ्लोर मिल में भी हाथ आजमाया. किस्मत के धनी श्यामदासानी भाइयों को यहां भी जमकर मुनाफा हुआ. पैसा आया तो पॉलिटिक्स और पॉवर का भी चस्खा लगा. इंडस्ट्रियलिस्ट्स और बिजनेसमैन तो सम्पर्क में थे ही.. कुछ ही समय में नेताओं से लेकर पुलिस-प्रशासनिक लॉबी में भी उठना-बैठना शुरू हो गया. ऊंचे और रसूखदारों से सम्पर्क का फायदा भी इन उद्योगपतियों ने खूब उठाया. और देखते ही देखते इस परिवार की गिनती शहर के अरबपति कैटेगरी में शुमार हो गया.

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'प' से शुरू, 'प' पर खत्म..

श्यामदासानी परिवार की फर्श से अर्श तक पहुंचने की भ्भ् साल की कहानी में 'प' शब्द का रोल काफी अहम है. पाकिस्तान से आकर प्रेम नगर में परिवार का बसना.. फिर यहां से पनकी एरिया में पारले-जी की फैक्ट्री सेटअप करना.. व्यापार बढ़ने के बाद पाण्डु नगर शिफ्ट होना.. पैसों के दम पर पॉवर-फुल ढंग से पॉलिटिक्स तक पहुंचना.. परिवार के ही छोटे बेटे पीयूष का प्यार में अंधा होकर पत्नी का कत्ल करना.. फिर पुलिस लॉकअप तक पहुंचने की कहानी किसी को भी हैरान कर देने के लिए काफी है. 

Wednesday, July 30, 2014

husband piyush telling lie in jyoti murder case

बिस्कुट कारोबारी की बहु ज्योति के अन्तिम संस्कार के अगले दिन उसके पिता शंकर लाल नागदेव मीडिया के सामने आए. उन्होंने खुलकर दामाद पीयूष के ज्योति से अनबन रहने के बारे में बताया. उन्होंने ज्योति के अन्तिम संस्कार के बाद पीयूष से बात की थी. जिसमें पीयूष उनके सवालों का जवाब नहीं दे पाया. जिससे उनका शक और बढ़ गया. उन्होंने बताया कि पीयूष किसी लड़की के चक्कर में था. वो ज्योति के साथ अच्छा बर्ताव नहीं करता था. पीयूष के पिता दोनों के बीच पड़ी दरार को खत्म करने की कोशिश कर रहे थे, लेकिन वो कामयाब नहीं हुए. ज्योति ने उन्हें खुद बताया था कि पापा पीयूष को समझाते है, लेकिन उन्होंने लड़की से बात करना बन्द नहीं किया. आईजी से बातचीत के बाद उन्होंने पुलिस की जांच पर भरोसा जताया. साथ ही पीयूष के बचाव में सियासी रसूख से दबाव बनाने पर सीबीआई जांच कराने तक की बात भी कही. उन्होंने यह दावा भी किया कि अगर जरूरत पड़ी तो मेरे पास भी पीयूष के खिलाफ काफी सबूत हैं जिन्हें पुलिस को सौंप सकता हूं.

परिजनों को भी पीयूष की करतूत के बारे में पता था.

ज्योति के पिता ने पीयूष के पापा ओम प्रकाश को उसकी हरकतों के बारे में बताया था. जिसके बाद से सभी लोग उसकी गलत हरकत के बारे में जान गए थे. हालांकि ओम प्रकाश ने इससे साफ इन्कार कर दिया है. उन्होंने अपने बेटे के किसी लड़की से संबंध होने की बात से इन्कार किया है.

दर्जा प्राप्त मंत्री जांच को प्रभावित कर रहे

ज्योति के पिता शंकरलाल नागदेव ने पीयूष पक्ष की ओर से घटना के बाद से अंतिम संस्कार तक साथ रहे दर्जा प्राप्त राज्य मंत्री सुखराम सिंह यादव को भी कटघरे में खड़ा किया. उन्होंने जांच में पुलिस पर दबाव बनाने का आरोप भी लगाया. साथ ही यह भी कहा कि पीयूष के पिता के पार्टनर के बेटे की शादी मैनपुरी में हुई है. वह मुख्यमंत्री के परिवार के सदस्य की तरह है.

रेस्टोरेंट से कुछ ही दूरी पर हुआ था कत्ल

बिस्कुट कारोबारी की बहु ज्योति का कत्ल पनकी में नहीं हुआ था, बल्कि रेस्टोरेंट के बाहर निकलने के छोड़ी देर बाद कार में उसका कत्ल कर दिया गया था. रेस्टोरेंट के आगे कुछ दूरी पर कातिल ने उसको बहाने से कार की बैक सीट पर बैठाया. जिसके बाद उसने चाकू से उस पर ताबड़तोड़ वार किए. ज्योति के बचने की कोशिश की, लेकिन कातिल ने उसको काबू में करने के लिए लगातार चेहरे पर वार किए. पोस्टमार्टम रिपोर्ट के मुताबिक कत्ल भले ही एक व्यक्ति ने किया हो लेकिन वहां और भी लोग मौजूद थे. जिन्होंने लाश और कार दोनों को पनकी पहुंचाया.

आखिरी दम तक पीयूष को बचाने की कोशिश

ज्योति के पिता ने पहले ही एक दर्जा प्राप्त राज्य मंत्री पर पुलिस पर दबाव बनाने का आरोप लगाया था. इसके अलावा कई रसूखदार व्यापारियों से लेकर नेता भी बंगले पहुंचे थे. वहीं मंगलवार को भी जब पुलिस पीयूष को हिरासत में लेने बंगले पर पहुंची तो शहर के रसूखदार व्यापारी मलिक विजय कपूर भी वहां पहुंच गए. वो पीयूष के बंगले से निकलते समय से लेकर वह स्वरुप नगर थाने में भी काफी समय तक रहे. एक बार तो उन्होंने पीयूष से पूछताछ के दौरान अंदर जाने की भी कोशिश की लेकिन उन्हें रोक दिया गया.

प्रेमिका कर रही थी कोऑर्डिनेट

आईजी आशुतोष पांडेय ने बताया कि पीयूष और उसकी प्रेमिका के बीच लगातार रेस्ट्ररां में हत्या के पहले और बाद में मैसेजिंग व बातचीत हुई. अगर वारदात में कई लोग शामिल थे. तो क्या प्रेमिका उन लोगों से कोआर्डिनेट कर रही थी. आईजी ने इस ओर इशारा करते हुए कहा कि पीयूष के इन लोगों से बातचीत का रिकार्ड नहीं मिला है इससे संभावना बनती है कि प्रेमिका ने वारदात में शामिल दूसरे लोगों के साथ कोआर्डिनेट किया हो.

दूसरे दिन की टाइम लाइन

सुबह क्0.क्भ् बजे - ज्योति के पिता शंकर लाल ने पीयूष पर आरोप लगाया.

क्ख्.फ्0 बजे- पीयूष और उसके परिवार वाले अपने बचाव में आते हुए मीडिया से मुखातिब हुए

क्.ब्भ् बजे- सीओ स्वरुप नगर और एसओ ज्योति के मां-बाप के बयान लेने पहुंचे

ख् बजे- पीयूष के परिजन भी ज्योति के मां- बाप से मिलने पहुंच गए

ख्.भ्भ् बजे- ज्योति के मां- बाप के बयान के बाद पुलिस अधिकारी पीयूष को हिरासत में लेने के लिए बढ़े लेकिन वापस लौट गए

फ्.क्0 बजे- सीओ और एसओ दोनों अपने सरकारी वाहनों से पीयूष के बंगले हिरासत में लेने पहुंचे

फ्.ब्भ् बजे- पीयूष को हिरासत में लेकर स्वरुपनगर सीओ के ऑफिस में पूछताछ शुरु

म् बजे- पीयूष की प्रेमिका को पुलिस ने हिरासत में लिया

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वेलडन, आईजी साहब..

ऑफिसर के जिगर में दम हो और दिमाग में धार तो फिर न तो कोई कातिल बच सकता है और न ही सत्ता का दबाव सच्चाई को छिपवा सकता है. कानपुर जोन के आईजी आशुतोष पाण्डेय ने ज्योति मर्डर केस का खुलासा करके शहर की पुलिस को ही आईना दिखा दिया है. पिछले कई केस में किरकिरी करा चुकी पुलिस को आईजी ने दिखाया कि केस सॉल्व कैसे किया जाता है.

चाहे लालित्यम साड़ीज के ओनर के मर्डर का मामला हो या फिर सपा नेता की पत्नी की हत्या का मामला हो. इन दोनों केसेज में शहर पुलिस की अपराधी को पकड़ने के बजाए उसे बचाते हुए कमजोर मोहरे को आरोपी बनाते हुए नजर आई. पर ज्योति मर्डर केस में ऐसा नहीं हुआ क्योंकि कमान खुड आईजी ने संभाल ली थी. ज्योति के पिता ने बताया कि उनके कानपुर पहुंचने से पहले इलाहाबाद में ही उनके पास आईजी का फोन पहुंच गया था और वो तब से लगातार उनके सम्पर्क में थे. आरोपी पीयूष के परिवार के शहर के रसूखदार लोगों से सम्बन्ध हैं और सत्ता का पूरा दबाव को पीयूष बचाने के लिए लगा दिया गया. लेकिन आईजी नहीं झुके .वेलडन, आईजी साहब.

Tuesday, July 29, 2014

Fifty thousand stolen from state bank account

कल्याणपुर स्थित एसबीआई बैंक की शाखा से एक कस्टमर के एकाउंट से पचास हजार रुपए निकल गए. जिसकी शिकायत करने पर भी बैंक ऑफिसर ने कोई कार्रवाई नहीं की.

 जिसके चलते पीडि़त ने थाने में एफआईआर दर्ज कराई. आईआईटी नानकारी में रहने वाले मोहन लाल शुक्ला मसाला कम्पनी में जॉब करते है. उनका एसबीआई की आईआईटी शाखा में एकाउन्ट है. 

आरोप है कि उनके एकाउंट से ब्9भ्00 रुपए निकाल लिए गए. उनकी शिकायत में थाने में एफआईआर दर्ज की गई. साइबर एक्सपर्ट के मुताबिक इंटरनेट बैंकिग के थ्रू पैसे निकाल लिए गए हैं.

Thursday, July 24, 2014

Police telling clear lies

अ‌र्द्धनग्न युवती का जुलूस निकालने के बाद बुधवार को कानपुर पुलिस ने एक और जुलूस निकाला. झूठ का जुलूस.
लड़की की गिरफ्तारी की ऐसी कहानी बनाई जो इस बात का सबूत है कि पुलिस होश में नहीं है. वो झूठ तक ठीक से नहीं बोल पा रही. हम ये नहीं कह रहे कि लड़की को आरोपी बनाना गलत है या वो निर्दोष है. हमारी आपत्ति एक लड़की के साथ हुए अशोभनीय व्यवहार और पुलिस के काम करने के तरीके पर है. लड़की आरोपी हो या बाद में दोषी भी साबित हो जाए पर पुलिस को नारी की गरिमा के साथ खिलवाड़ का कोई अधिकार नहीं. हमारा विरोध पुलिस की असंवेदनशीलता से है. हमारा विरोध उसकी अराजक कार्यशैली से है. अगर लड़की दोषी होगी तो अदालत सजा देगी पर इस देश में तालिबानी तौर तरीकों को बर्दाश्त नहीं किया जा सकता.

मुखबिर की सूचना पर बुधवार को दिखाई गिरफ्तारी
पुलिस ने जिस अर्धनग्न लड़की का जुलूस मंगलवार को निकाला था उसे वो बुधवार को गिरफ्तार दिखा रही है. पुलिस के मुताबिक बुधवार दोपहर एक मुखबिर ने सूचना ही कि दीपेन्द्र की हत्या के सम्बन्ध में जिस लड़की की तलाश पुलिस कर रही है वो लाल इमली चौराहे के पास देखी गई है. पुलिस कहती है कि तत्काल कार्रवाई करते हुए उसने लड़की को गिरफ्तार कर लिया और शाम तक जेल भेज दिया. इससे बड़ा झूठ और क्या हो सकता है कि बुधवार के आईनेक्स्ट में खबर छपी है कि मंगलवार सुबह लड़की को उसके घर से पकड़ कर पुलिस ले गई. आईनेक्स्ट लाइव पर मंगलवार रात से वो वीडिओ पड़ा है जिसमें पुलिस लड़की को अर्धनग्न अवस्था में थाने लेकर जा रही है. पर पुलिस है कि वो बताती है कि उसने मुखबिर की सूचना पर बुधवार को लड़की को पकड़ा. कभी देखा है ऐसा सफेद झूठ.

आई नेक्स्ट के पास युवती की गिरफ्तारी की फुटेज और फोटोग्राफ्स मौजूद हैं, मंगलवार दिन में की गई कर्नलगंज पुलिस की शर्मनाक हरकत को तमाम नेशनल टेलीविजन चैनलों ने आई नेक्स्ट के सौजन्य से बताकर बुधवार को जमकर फ्लैश किया. पर पुलिस सबको अंधा समझ रही है.

क्यों बोला सफेद झूठ
बुधवार को आईनेक्स्ट में अर्धनग्न लड़की के जुलूस की खबर छपने के बाद पुलिस के हाथ-पांव फूल गए. उसके लिए मर्डर का केस पीछे हो गया और लड़की के साथ अमानवीय व्यवहार से पीछा छुड़ाना पहली प्राथमिकता हो गया.

सुप्रीम कोर्ट के आदेशों का उल्लंघन
आई नेक्स्ट की टीम ने मृतक दीपेंद्र की प्रेमिका कविता(बदला हुआ नाम) के घर पर जाकर तफ्तीश की, तो इलाकाई लोगों ने भी तस्दीक किया कि युवती को रात में छोड़ा नहीं गया. पुलिस ने सारे नियम को ताक पर रखकर बिना गिरफ्तारी के उसको पूरी रात थाने में रखा और पूछताछ की. इसमें पुलिस ने सुप्रीम कोर्ट के तीन आदेशों का उल्लंघन किया.
पहला उल्लंघन ..ख्ब् घंटे से ज्यादा समय तक किसी को थाने में नहीं रखा जा सकता. उसे जेल भेजना पड़ता है. पुलिस मंगलवार सुबह कविता को थाने लेकर आई और बुधवार शाम को जेल ले गई. ऐसे में उसकी मजबूरी थी कि कागज पर गिरफ्तारी बुधवार की ि1दखाई जाए.

दूसरा उल्लंघन.. दूसरा गुनाह जो पुलिस ने किया वो ये था कि लड़की को महिला थाने में नहीं रखा गया. आईनेक्स्ट ने महिला थाने से कन्फर्म किया तो पता चला कि लड़की को वहां लाया ही नहीं गया था. यानि एक लड़की पूरी रात पुलिस वालों के बीच थाने में रही. ये सुप्रीम कोर्ट के आदेश का खुला उल्लंघन है.

तीसरा उल्लंघन.. सुप्रीम के जिस तीसरे आदेश का उल्लंघन हुआ है वो ये है कि किसी लड़की से सूर्यास्त के बाद पूछताछ नहीं हो सकती.

क्या था मामला
मंगलवार को कर्नलगंज में तीन दिन से लापता दीपेंद्र की लाश मिलने के बाद गुस्साए लोगों ने मृतक की कथित प्रेमिका को पुलिस के सामने बुरी तरह पीटा था लेकिन पुलिस मूदर्शक बनी रही. इसके बाद पुलिस लड़की को फटे कपड़ों में तकरीबन अ‌र्द्धनग्न हालत में उसके घर से थाने तक एक किलोमीटर नंगे पैर लेकर गई . बगल में चल रही जीप में युवती को नहीं बैठाया गया, न ही तन ढकने का ही मौका दिया गया. तब से लड़की पुलिस की हिरासत में थी.

आरोपी बनाकर केस खोल दिया
हड़बड़ाई पुलिस ने आनन फानन में बुधवार को केस खोल दिया. पुलिस के मुताबिक दीपेंद्र जिस दिन घर से गया था. वो प्रेमिका कविता से मोबाइल पर बात कर रहा था जिसके बाद उसका मोबाइल ऑफ हो गया. पुलिस ने सर्विलांस और कॉल डिटेल से पता लगाया कि दीपेंद्र से बात करने के बाद प्रेमिका ने मंगेतर विशाल से बात की थी. इसके बाद मंगेतर विशाल ने ही दीपेंद्र का गला रेतकर हत्या की और शव को कुएं में फेक दिया. हत्या के बाद विशाल ने लड़की को मर्डर के बारे में बता भी दिया था. इसलिए पुलिस ने युवती हत्या की साजिश में शामिल मानकर गिरफ्तार किया और जेल भेज दिया है. दीपेन्द्र के कातिल विशाल को पुलिस फरार बता रही है. पुलिस का कहना है कि उसकी गिरफ्तारी के लिए तीन टीमें दबिश दे रही हैं.

दबाव बनाने को पिता हिरासत में
पुलिस ने कविता पर दबाव बनाने के लिए उसके पिता को भी हिरासत में ले लिया था, लेकिन उसकी गिरफ्तारी नहीं दिखायी. उसको भी पुलिस ने चौबीस घंटे से ज्यादा थाने की हवालात में बैठाए रखा. पुलिस ने लड़की को जेल भेजने के बाद उसके पिता को थाने से छोड़ दिया.

'चोरी' से जेल क्यों भेजा?
पुलिस लालित्यम साड़ी के मालिक के कत्ल की तरह दीपेंद्र मर्डर का गुपचुप तरीके से खुलासा कर दिया, उसी तरह इस मामले में भी किरकिरी से बचने के लिए कविता को मीडिया के सामने पेश नहीं किया. पुलिस ने आनन फानन में केस खोल दिया, जबकि अभी मुख्य आरोपी पकड़ा नहीं जा सका है. इस बाबत एसओ का कहना है कि युवती ने गुनाह कबूल लिया है. इसलिए उसे जेल भेज दिया है.

'थानाध्यक्ष पर एफआईआर दर्ज हो'
सीनियर एडवोकेट कौशल किशोर शर्मा के मुताबिक इस केस में पुलिस ने महिला की लज्जा भंग कर अमानवीय कृत्य किया है. उन्होंने बिना गिरफ्तारी के युवती को थाने में बैठा कर सुप्रीम कोर्ट की अवमानना की है. साथ ही महिला की स्वतंत्रता का हनन कर मानवाधिकार का उल्लंघन किया है. पिता को बिना दोष के घंटों हवालात में डालकर मानसिक रूप से प्रताडि़त भी किया गया. इसलिए थानाध्यक्ष के खिलाफ एफआईआर दर्ज करके कार्रवाई करनी चाहिए.

आईजी ने बैठायी जांच, होगी कार्रवाई
आईजी आशुतोष पाण्डेय ने दीपेंद्र मर्डर केस में युवती कविता की इज्जत तार-तार होने के मामले को गंभीरता से लिया है. साथ ही उन्होंने युवती की गिरफ्तारी की झूठी कहानी पर भी जांच कर कार्यवाई का भरोसा दिलाया है. आई जी ने आई नेक्स्ट से कहा कि इस मामले में पुलिस की भूमिका संदिग्ध दिख रही है. मामले की जांच कराई जाएगी. अगर युवती को पीटने और कपड़े फाड़ने में लड़के पक्ष या अन्य कोई दोषी होगा, तो उस पर कार्रवाई की जाएगी. अगर इसमें कोई भी पुलिस ऑफिसर दोषी होगा, तो उसे भी बख्शा नहीं जाएगा.

दीपेंद्र के परिजनों के पर भी एफआईआर हुई
आई नेक्स्ट ने दीपेंद्र मर्डर में उसकी प्रेमिका को पीटे जाने और कपड़े फाड़े जाने के मामले को प्रमुखता से छापा है. जिससे हरकत में आई पुलिस ने युवती के पिता के तहरीर पर मृतक दीपेंद्र के परिजनों के खिलाफ और अज्ञात लोगों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कर ली है. सीओ पीके चावला ने बताया कि इसमें पुलिस जांच कर रही है. युवती को पीटने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी.
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मानवाधिकार आयोग ने जारी किया नोटिस
-पंद्रह दिन में जिला प्रशासन और पुलिस को देनी आख्या देनी होगी
रुष्टयहृह्रङ्ख (23 छ्वह्वद्यब्): कानपुर में कर्नलगंज पुलिस की इस शर्मनाक हरकत पर मानवाधिकार आयोग ने कड़ी नाराजगी जाहिर की है. आई नेक्स्ट में पुलिस की ये करतूत उजागर होने के बाद यूपी पुलिस के आलाअधिकारियों की नींद तो नहीं टूटी पर, यूपी मानवाधिकार आयोग की सदस्य आशा तिवारी ने प्रकाशित खबर का संज्ञान लेते हुए प्रदेश के डीजीपी, कानपुर के डीएम और एसएसपी को नोटिस भेजकर सख्त कार्रवाई की अपेक्षा की है. साथ ही पूरे घटनाक्रम पर क्भ् दिन में आख्या मांगी है.
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कोट:
आई नेक्स्ट की जो जानकारी थी, वह सही थी. इसके बारे में डीआईजी कानपुर ने हमें बताया कि महिला को बचाने के चक्कर में उसके कपड़े फट गए थे. डीआईजी कानपुर से विस्तृत रिपोर्ट मांगी गई है और दोषियों पर कार्रवाई करने को कहा गया है.
- मुकुल गोयल,
एडीजी, लॉ एण्ड ऑर्डर
.......
कोट:
घटना के बारे में जैसे मुझे जानकारी मिली, मैंने तुरंत आईजी को फोन कर जांच कराने के लिए कहा. डीआईजी इसकी जांच कर रहे हैं.
- राकेश बहादुर,
प्रमुख सचिव गृह


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Wednesday, July 23, 2014

Trans ganga city proposal also accepted by up government

गंगा किनारे1151 एकड़ में यूपीएसआईडीसी बसाएगा ट्रांसगंगा सिटी

गंगा के पार क्क्भ्क् एकड़ में यूपीएसआईडीसी ट्रांस गंगा हाईटेक सिटी बसाएगा. इस प्रोजेक्ट में ख्भ् मंजिला इमारतें होंगी. इसमें स्पेशल इकोनॉमिक जोन भी होगा. आईटी, टेलीकॉम सेक्टर की कई कंपनीज के अलावा सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल, यूनिवर्सिटी भी होगी. इसका खाका पहले ही यूपीएसआईडीसी खींच चुका है. कैबिनेट की मंजूरी से ट्रांस गंगा हाईटेक सिटी का सपना एकबार फिर साकार होता नजर आने लगा है. इस सिटी के बसने से रोजगार के अवसर तो बढ़ेंगे, साथ ही साथ रहने के लिए लोगों को घर भी मिलेंगे. यानि की घर और वर्क स्टेशन सब आसपास ही होगा.

जमीन अधिग्रहण का था विवाद

ट्रांसगंगा हाईटेक सिटी के लिए यूपीएसआईडीसी गंगा बैराज के पार मनभावना, कन्वापुर और शंकरपुर की क्क्भ्क् जमीन अधिग्रहण की कार्रवाई कर रहा है. लेकिन भ्.भ्0 लाख रुपए प्रति बीघा मुआवजा दिए जाने से किसानों में नाराजगी थी. वे मुआवजा बढ़ाए जाने की मांग कर रही थी. अब 7 लाख रुपए प्रति बीघा मुआवजा और बढ़ा दिया गया है. इसके साथ भूमिहीन हो जाने वाले किसानों को भ्0 से लेकर ख्00 स्क्वॉयर मीटर तक जमीन और रोजगार दिए जाने पर सहमति बन गई है. यूपीएसआईडीसी ऑफिसर्स के मुताबिक इस हाईटेक सिटी में फोर्टिस ग्रुप का ख्भ्0 बेड का सुपर स्पेशयलिटी हॉस्पिटल, एमिटी यूनिवर्सिटी, फाइव स्टार होटल के अलावा कई सेक्टर की कम्पनीज के ऑफिस भी होने का दावा यूपीएसआईडीसी के ऑफिसर कर रहे हैं. यूपीएसआईडीसी के ऑफिसर मनोज सिंह ने बताया कि इस हाईटेक सिटी का खाका पहले ही खींच लिया गया है. इसका मॉडल भी लांच किया जा चुका है. इस सिटी में कई बड़े औद्योगिक समूह निवेश करने के लिए आएंगें. उनसे सहमति भी मिल चुकी है.