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Tuesday, May 24, 2016

खुले आम तेजाब बेचने वालों पर होगी कार्रवाई

एसिड अटैक के खतरों को देखते हुए प्रशासन के द्वारा एसिड अटैक की खुले आम बिक्री पर रोक लगा रखी है जिसके लिए समय समय पर छापे मारी कर कार्रवाई भी की जाती है। इस प्रतिबंध को प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए अब प्रशासन की ओर से हेल्प लाइन नंबर भी चालू किया जा रहा है। खुले आम तेजाब बेचने पर प्रतिबंध लगने के बाद उसको कठोरता से लागू करवाने को प्रशासन के द्वारा एक जन सुविधा केंद्र पर एक अलग एक हेल्प लाइन नंबर 0522- 2611117,8,9 को चालू किया जायेगा। जिसमें शिकायत मिलने पर नोडल अपर जिलाधिकारी उस जगह को मार्क करके प्रशासन को उसकी रिपोर्ट भेजेगा। जिलाधिकारी राज शेखर ने एक आदेश जारी करते हुए इसकी जानकारी दी। इसके अलावा सोशल मीडिया सेंटर के दो मोबाइल नंबरों को भी चालू किया गया है। 

जिनके वाटस अप नंबर 7572044444 व 7572033333 पर भी अवैध रुप से बिक रहे तेजाब के बारे में बता सकते है। वाटस अप नंबर पर जहां पर बिक्री हो रही है उस जगह की फोटो क्लिक करके व उस दुकान का नाम , दुकान की जगह आदि की भी जानकारी दी जा सकती है जिसपर प्रशासन की ओर से कार्रवाई की जायेगी। जानकारी देने वालों का नाम पता गुप्त रखा जायेगा। शिकायत प्राप्त होने पर संबधित अपर नगर मजिस्ट्रेट को भेजा जायेगा जो तत्परता से अपने पुलिस अधिकारी के साथ जाकर शासन द्वारा जारी दिशा निर्देश क अनुसार कार्रवाई करेगें। Read more http://inextlive.jagran.com/lucknow/

Tuesday, April 12, 2016

यूपी विधानसभा भाजपा की, सिर्फ मतदान बाकी : केशव मौर्य

भारतीय जनता पार्टी के नये प्रदेश अध्यक्ष केशव प्रसाद मौर्य ने सोमवार को पदभार ग्रहण करने के बाद कहा कि यूपी विधानसभा भाजपा की हो चुकी है। सिर्फ मतदान बाकी है। उन्होंने कार्यकर्ताओं से कहा, 'केन्द्रीय नेतृत्व ने मुझे कम से कम 265 सीटें और ज्यादा से ज्यादा 403 सीटें जीतने का लक्ष्य दिया है। यूपी में परिवारवाद, जातिवाद की राजनीति करने वाले दलों को मालूम पड़ चुका है कि जनता क्या चाहती है। अब प्रदेश सरकार के खिलाफ सड़कों पर उतरने का समय आ चुका है क्योंकि गुंडागर्दी में लिप्त सरकार के पास विकास योजनाओं के लिए समय नहीं है.'

कोई भी मुकदमा आपराधिक नहीं

अपने मुकदमों के बारे में उन्होंने कहा कि ये मुकदमे आपराधिक नहीं बल्कि कार्यकर्ताओं के सम्मान की लड़ाई के दौरान हुए। उन्होंने प्रदेश सरकार को आगाह किया कि यदि भाजपा के किसी भी कार्यकर्ता को छेड़ा गया तो वे चुप नहीं बैठेंगे। कहा कि भाजपा को 2014 का इतिहास 2017 में दोहराना है। वहीं, अपना भाषण शुरु करने से पहले उन्होंने हरेक कार्यकर्ता को प्रणाम करते हुए कहा कि मैं उम्र और अनुभव में अभी छोटा हूं लेकिन वरिष्ठ नेताओं के आशीर्वाद से केन्द्रीय नेतृत्व के इरादों को पूरा करूंगा।

सपा में कोई कार्यकर्ता नहीं बन सकता मुख्यमंत्री

खुद को प्रदेश अध्यक्ष बनाये जाने पर उन्होंने आश्चर्य व्यक्त करते हुए कहा कि मैंने कभी सपने में भी नहीं सोचा था कि मुझे यह जिम्मेदारी दी जाएगी। भाजपा लोकतांत्रिक मूल्यों में भरोसा रखती है। सपा में कोई भी कार्यकर्ता मुख्यमंत्री नहीं बन सकता। बसपा में कोई भी मायावती के खिलाफ नहीं बोल सकता। दरअसल, सपा और बसपा वनमैन शो पार्टी हैं। सिर्फ भाजपा में संभव है कि मुझ जैसे छोटे कार्यकर्ता को इतना बड़ा सम्मान और जिम्मेदारी दी गई। भाजपा का एक- एक कार्यकर्ता दस- दस मायावती और मुलायम के बराबर है। उन्होंने कार्यकर्ताओं को नारा दिया कि '2017 में जाइये सब कुछ भूल, हर विधानसभा में खिलाइये कमल का फूल'.

प्रदेश सरकार पर साधा निशाना

अपने संबोधन के दौरान मौर्य ने कई बार प्रदेश सरकार पर निशाना साधा। कहा कि यूपी का हर नौजवान सरकारी भर्तियों में चल रहे भ्रष्टाचार से वाफिक है। बुंदेलखंड सूखे की मार झेल रहा है। केन्द्र सरकार ने बुंदेलखंड के लिए जो बजट दिया, उसे खर्च नहीं किया गया। उन्होंने कहा कि भाजपा का चुनाव का मुद्दा केवल विकास है। कोई मुझसे हजार बार भी पूछेगा तो भी मुद्दा विकास ही रहेगा। कहा कि भाजपा यूपी को बेरोजगार मुक्त प्रदेश बनाना चाहती है। इस दौरान उन्होंने कई केन्द्रीय योजनाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि इससे आम आदमी के जीवन में बदलाव आने लगा है।  Read more http://inextlive.jagran.com/lucknow/

Friday, April 8, 2016

अपराधी से दोस्ती बनी एनआईए अफसर की मौत का सबब

अपराधियों से दोस्ती एनआईए अफसर तंजील अहमद की मौत का सबब बन गयी। ज्यादा पैसा कमाने की ललक में उन्होंने अपराधियों को संरक्षण देना शुरू कर दिया था। जांच में जुटी पुलिस टीमों की मानें तो प्रॉपर्टी के अलावा उन्हें पुलिस से बचाने के लिए वे अपने प्रभाव का इस्तेमाल भी करते थे। गांव के ही अपराधी प्रवृत्ति के मुनीर का इस्तेमाल करके उन्होंने कई संपत्तियां हासिल की। बाद में दोनों के बीच कई मामलों को लेकर अनबन शुरू हो गयी। नतीजतन, मुनीर ने तंजील को ठिकाने लगा दिया। पुलिस ने इस मामले में मुनीर के पिता, घटना के दौरान बाइक चला रहे रियान तथा मुखबिरी करने वाले जैनुल उर्फ 'जैनी' को हिरासत में ले लिया है। वहीं, तंजील पर गोलियां बरसाने वाले हिस्ट्रीशीटर मुनीर, घटना में इस्तेमाल असलहों व बाइक की तलाश जारी है.

घटना के बाद घर आया था मुनीर

तंजील अहमद की हत्या की जांच में जुटी एसटीएफ को सुराग मिले हैं कि उनका अपराधी मुनीर से पुराना नाता था। दोनों के बीच कारोबारी रिश्ते भी थे। गांव और आसपास की तमाम विवादित संपत्तियां खरीदने में मुनीर एनआईए अफसर तंजील की मदद करता था। पता चला कि तंजील ने हत्या के एक मामले में नाम हटवाने के लिए मुनीर से बड़ी रकम भी ली थी लेकिन यह काम नहीं हुआ। इस बीच एक संपत्ति को लेकर भी दोनों के बीच विवाद शुरू हो गया। एसटीएफ ने इस दिशा में जांच शुरू की तो मामले की पर्ते उधड़ती चली गयी। इसके बाद एसटीएफ ने मुनीर के पिता को हिरासत में लेकर सख्ती से पूछताछ की तो उसने सच बोलना शुरू कर दिया। उसने बताया कि घटना के बाद मुनीर घर आया था। उसने बताया कि मैंने तंजील को मार दिया है। इसके बाद वह फरार हो गया।

जैनुल को दिया था बैग

तंजील को ठिकाने लगाने के लिए मुनीर ने रियान की मदद ली। रियाल को तंजील का रिश्तेदार बताया जा रहा है। वहीं, जैनुल उसे मुनीर की लोकेशन के बारे में सूचनाएं दे रहा था। जैसे ही तंजील अपने परिवार के साथ सहसपुर के लिए निकले, मुनीर ने उनका पीछा करना शुरू कर दिया। सहसपुर के समीप पहुंचने पर रियान ने तंजील की गाड़ी को ओवरटेक किया और मुनीर ने उन पर ताबड़तोड़ गोलियां बरसानी शुरू कर दी। अचानक एक पिस्टल फंसने के बाद मुनीर ने दूसरी पिस्टल निकाल कर फायर किए। इसी आपाधापी में चार गोलियां तंजील की पत्‍‌नी फरजाना को भी लग गयी। मुनीर ने .32 बोर की दो व नाइन एमएम की एक पिस्टल से वारदात को अंजाम दिया। घटना के बाद मुनीर अपने घर आ गया और अपने पिता को घटना की जानकारी दी। इसके बाद जैनुल ने मुनीर को एक बैग दिया और वह फरार हो गया।  Read more http://inextlive.jagran.com/lucknow/

Thursday, March 31, 2016

दूसरे दिन भी बस नाम का मूल्यांकन

यूपी बोर्ड के साल 2016 की हाईस्कूल एवं इंटरमीडिएट कॉपियों के मूल्यांकन की प्रक्रिया दूसरे दिन भी पटरी पर नहीं आ सकी। सेंटर्स पर परीक्षकों का आंकड़ा 50 फीसदी भी नहीं पहुंच सका। यह स्थिति तब है जबकि राजधानी में 15,21,357 कॉपियां मूल्यांकन के लिए आवंटित की गई हैं। ऐसे में परीक्षकों की कमी की वजह से कॉपियों का मूल्यांकन समय से होना मुश्किल दिखाई दे रहा है। दूसरे दिन 42,822 कॉपियों का ही मूल्यांकन हो सका.

केवल 1277 परीक्षक ही पहुंचे केंद्र पर

बता दें कि राजधानी में पांच केंद्रों पर बोर्ड कॉपियों का मूल्यांकन हो रहा है। इसके लिए 3932 परीक्षकों की डयूटी भी लगाई गई है, लेकिन गुरुवार को 1277 परीक्षक ही ड्यूटी करने पहुंचे। अमीनाबाद इंटर कॉलेज केमूल्यांकन केंद्र पर 97 में 61 डीएचई और 348 परीक्षक पहुंच गए। यहां दोपहर डेढ़ बजे तक परीक्षकों का आना जारी रहा, जबकि नियमानुसार परीक्षकों को सुबह 10 बजे मूल्यांकन केंद्र पर उपस्थित होना चाहिए। लापरवाही का आलम यह रहा कि कई गु्रप में डीएचई न होने की वजह से शिक्षिकाएं उनका इंतजार करके चली गई। यहां परीक्षकों ने कई कमरों में पंखे न चलने की शिकायत भी दर्ज कराई।

कहीं बिजली नहीं, कहीं पानी नहीं

राजकीय जुबिली इंटर कॉलेज के मूल्यांकन केंद्र पर कई कमरों में बिजली न होने और पीने के पानी की व्यवस्था न होने से परीक्षक बेहाल हो गए। उन्होंने इसकी शिकायत प्रिंसिपल से की। केंद्र के कमरा नंबर 29 में बिजली न होने से काफी अंधेरा था। यहां पर पीने के पानी की भी कोई व्यवस्था नहीं थी। कॉलेज के भाटिया ब्लॉक में ऊपरी तल पर भी बिजली न होने से परीक्षक गर्मी से बेहाल रहे।  Read more Lucknow http://inextlive.jagran.com/lucknow/

Wednesday, March 30, 2016

जरूरतमंदों को जल्द मिलेगी पेरोल

छोटे- छोटे मामलों में लंबे समय से सलाखों के पीछे सजा काट रहे कैदियों को आने वाले दिनों में और भी आसानी से पेरोल मिल सकेगी। इसके लिए कारागार मंत्री खुद योजना बना रहे हैं। अभी भी पिछले बरसों के मुकाबले कैदियों को पेरोल दिये जाने के मामलों में इजाफा हुआ है। आई नेक्स्ट के साथ अनौपचारिक बातचीत में कारागार मंत्री बलवंत सिंह रामूवालिया ने कहा कि पेरोल किसी भी कैदी का कानूनी अधिकार है। यह सोचना कत्तई उचित नहीं है कि हर पेरोल पर छूटने वाला कैदी बाहर जाकर घटनाओं को ही अंजाम देगा। ऐसा भी संभव है कि कैदी जेल की चहारदीवारी से बाहर आने के बाद सुधर जाए क्योंकि जेल में रहकर मायूसी, उदासीनता, निराशा और नफरत बढ़ती है.

अधिकारियों की राय बिल्कुल जुदा
कारागार मिनिस्टर का कहना है कि वह हर कैदी को उसके अधिकार के मुताबिक पे रोल की व्यवस्था करना चाहते हैं। उन्होंने बिना किसी अधिकारी का नाम लिये कहा कि कैदी के परिवार की ओर से दी जाने वाली पेरोल की अप्लीकेशंस को अधिकारी गुनाह करने की अर्जी समझते हैं, जो बिल्कुल गलत है। दरअसल, अकसर कैदी पेरोल मिलने के बाद फरार हो जाता है। पेरोल मिलने के बाद फरार होने वाले कैदी की जांच होती है तो उसमें पेरोल देने वाले अधिकारी की भी भूमिका जांची जाती है। ऐसे में किसी तरह की जांच से बचने के लिए अधिकारी अक्सर फाइल को रिजेक्ट कर देते हैं.

यह एक तरह की परीक्षा
कारागार मंत्री का कहना है कि पेरोल कैदियों के लिए एक तरह की परीक्षा होती है। खूंखार और हार्डकोर क्रिमिनल को अलग करते हुए कहा कि ऐसे कैदी जिनकी उम्र 60 साल से अधिक हो गयी हो, जिनके घर में कोई फंक्शन है, जिनके परिवार में कोई कैजुअल्टी हो गयी है, उन्हें पे रोल दिये जाने में अधिक रोक- टोक नहीं होनी चाहिए। 

50 हजार रुपये तक की वसूली
सूत्रों की मानें तो पेरोल के लिए पहले कैदियों से 50- 50 हजार रुपये तक की वसूली की जाती थी। इसका खुलासा खुद कारागार मंत्री ने किया। उन्होंने कहा कि पेरोल की एप्लीकेशन आने के बाद उसकी जांच की जाती है जांच के नाम पर ही संबंधित पुलिसकर्मी और कर्मचारी सुविधा शुल्क के चक्कर में पड़ जाते थे। उन्होंने इसे खत्म करने की कोशिश की है। उन्होंने कहा कि इससे पहले जहां पेरोल के पूरे साल में 25 से 30 अप्लीकेशन आती थी और चार से पांच लोगों को ही पेरोल मिल पाती थी वह भी सुविधा शुल्क लेकर। अब अप्लीकेशंस की संख्या में कई गुना बढ़ोत्तरी हो गयी है और उन्हें पे रोल मिलने भी आसानी हो रही है। उनका कहना है कि पिछले पांच छह माह में 100 से अधिक लोगों की पे रोल स्वीकृत की जा चुकी है। 

किन परिस्थितियों में मिलती है पेरोल
सरकार किसी बंदी के दंड आदेश का निलंबन एक माह तक कर सकती है। ऐसा तभी किया जा सकता है जब बंदी के माता पिता, पति या पत्‍‌नी, भाई बहन, पुत्र या पुत्री बीमार हों या किसी की मृत्यु हो गयी हो, पुत्र, पुत्री, भाई या बहन की शादी के लिए, अपनी निजी जमीन पर खेती, बुआई, कटाई के लिए, मकान की मरम्मत के लिए पेरोल सरकार दे सकती है। साथ ही सरकार को विशेष परिस्थितियों में इसे बढ़ाने का भी अधिकार होता है। डीएम किसी बंदी को मां, बाप, पति, पत्‍‌नी, पुत्र, पुत्री, भाई या बहन की मृत्यु या फिर पुत्र, पुत्री, भाई या बहन की शादी के लिए तीन दिन का पेरोल दे सकता है। Read more Lucknow News  http://inextlive.jagran.com/lucknow/

Monday, March 21, 2016

हद से बढ़ा दर्द तो बेटे को मारी गोली

कलौते बेटे की बीमारी से एक बैंकर इस कदर परेशान हुआ कि उसने रविवार सुबह पहले बेटे की गोली मारकर हत्या कर दी और उसके बाद खुद को भी गोली से उड़ा लिया। चौक के राजा बाजार में हुई इस घटना को जिसने भी सुना दहल उठा। जानकारी मिलने पर पहुंची पुलिस ने दोनों शवों को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिये भेज दिया। 

कराया था किडनी ट्रांसप्लांट

पेशे से लाइसेंसी बैंकर (ब्याज पर कर्ज देने वाले) मनोज रस्तोगी (48) चौक के राजा बाजार में अपने पैतृक मकान में पत्नी ऋतु और इकलौते बेटे रोहित (25) के साथ रहते थे। रोहित ने लखनऊ यूनिवर्सिटी से तीन साल पहले एमबीए किया था। जिसके बाद से वह अपने पिता के बिजनेस में उनका हाथ बंटाता था। मनोज के भतीजे अंकित ने बताया कि दो साल पहले रोहित की दोनों किडनी फेल हो गई थीं। लंबे इलाज के बाद भी जब कोई फायदा न हुआ तो मनोज ने कोलकाता के एक हॉस्पिटल में रोहित का किडनी ट्रांसप्लांट कराया था। हालांकि, इसके बावजूद रोहित की दिक्कत कम न हुई। 

पत्नी गई थी मॉर्निग वॉक पर

एसपी पश्चिमी सर्वेश मिश्र ने बताया कि बीते छह महीने से रोहित की दिक्कत और भी बढ़ गई थी। लाखों रुपये खर्च करने के बावजूद बेटे को कोई फायदा न होता देख मनोज डिप्रेशन में रहने लगे थे। रविवार सुबह करीब 6.30 बजे ऋतु मॉर्निग वॉक पर गई। जिसके बाद मनोज ने घर का चैनल बंद कर लिया। सुबह करीब 8 बजे ऋतु घर वापस लौटीं। चैनल को हाथ डालकर खोलने के बाद वह भीतर पहुंची। लेकिन, दरवाजा भी भीतर से बंद था। उन्होंने काफी देर तक दरवाजे पर दस्तक दी। पर, भीतर से कोई जवाब नहीं मिला। अनहोनी की आशंका में ऋतु ने भतीजे अंकित को बुलाया और उससे दरवाजे पर लगा शीशा तोड़ने को कहा। See more  http://inextlive.jagran.com/lucknow/

Friday, March 18, 2016

सीबीआई के बाद ईडी के निशाने पर यादव सिंह एंड कंपनी

काली कमाई के इंजीनियर यादव सिंह के खिलाफ सीबीआई ने अदालत में चार्जशीट दाखिल करके प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की राह आसान कर दी है। ईडी को लंबे समय से यादव सिंह के खिलाफ किसी ऐसे केस की दरकार थी जिसमें चार्जशीट दाखिल की जा चुकी हो। अब ईडी सीबीआई की चार्जशीट के आधार पर यादव सिंह के खिलाफ प्रिवेंशन ऑफ मनी लांड्रिंग एक्ट के तहत केस दर्ज करेगी जिसके बाद काली कमाई से जुटाई गयी उसकी संपत्तियों को अटैच करने की कवायद होगी। 

सीबीसीआईडी ने दी थी क्लीन चिट

सीबीआई ने जिस केबिल टेंडर घोटाले में यादव सिंह को दोषी पाते हुए चार्जशीट दाखिल की है, उसमें सीबीसीआईडी ने यादव सिंह को निर्दोष पाया था। यादव सिंह के ठिकानों पर आयकर विभाग के छापे पड़ने के बाद सीबीसीआईडी ने आनन- फानन में इस केस में फाइनल रिपोर्ट बनाकर अदालत में दाखिल कर दी थी। सीबीसीआईडी के इस फैसले को लेकर उस समय तमाम सवाल भी उठे थे। वहीं फाइनल रिपोर्ट लगने की वजह से ईडी इस मामले को टेकअप नहीं कर सकी थी। ईडी के सूत्रों की माने तो अब यादव सिंह पर शिकंजा कसना उनके लिए आसान हो गया है। सीबीआई ने अपनी जांच के दौरान यादव सिंह की जिन संपत्तियों, बैंक खातों और लॉकरों को चिन्हित किया है, उन्हें अब अटैच किया जा सकेगा। Read more Lucknow News http://inextlive.jagran.com/lucknow/