Wednesday, September 10, 2014

Bed education will be closed in baharagora college

 नेशनल काउंसिल फॉर टीचर एजुकेशन की ईस्टर्न रिजनल कमिटी की मंगलवार को हुई मीटिंग में स्टेट के कई कांस्टीट्यूएंट बीएड कॉलेजेज को ख्0क्भ् से बंद करने का डिसीजन लिया गया है. स्टेट के जिन बीएड कॉलेजेज को बंद करने का डिसीजन एनसीटीई ने लिया है उनमें कोल्हान यूनिवर्सिटी के बहरागोड़ा बीएड कॉलेज और महिला कॉलेज चाईबासा शामिल हैं. कमिटी की मीटिंग में शामिल एनसीटीई के एक मेंबर ने नाम न पब्लिश करने की शर्त पर ये जानकारी दी. आई नेक्स्ट ने एनसीटीई के रिजनल डायरेक्टर सी निलाप से बात करने की कोशिश की पर उनका नंबर अॉफ था.

रांची कॉलेज में भी बीएड बंद

एनसीटीई ने जिन कॉलेजेज में बीएड बंद करने का डिसीजन लिया है उनमें रांची कॉलेज और रांची वीमेंस कॉलेज जैसे बड़े कॉलेजेज भी शामिल हैं. इसके अलावा देवघर स्थित गवर्नमेंट टीचर्स ट्रेनिंग कॉलेज और गुमला स्थित कार्तिक उरांव कॉलेज भी शामिल है. स्टेट के लगभग क्ब्-क्भ् बीएड कॉलेजेज को बंद करने का डिसीजन एनसीटीई ने ि1लया है.

कहीं टीचर्स नहीं, तो कहीं इंफ्रास्ट्रक्चर की कमी

एनसीटीई द्वारा जिन बीएड कॉलेजेज को बंद किए जाने का डिसीजन लिया गया उनमें कई कमियां पाई गई थी. इनमें टीचर्स की कमी, और प्रॉपर इंफ्रास्ट्रक्चर का न होना था. हालांकि एनसीटीई द्वारा यह भी कहा गया था कि अगर गवर्नमेंट रेगुलर टीचर्स के एप्वॉइंटमेंट और दूसरी कमियों को जल्दी दूर कर लेने की बात लिखकर दे तो बीएड कॉलेजेज को बंद नहीं किया जाता. पर स्टेट गवर्नमेंट की तरफ से ऐसा कुछ नहीं किया गया. एचआरडी का कहना था कि एनसीटीई सीधे उन्हें लिखे जबकि एनसीटीई के प्रोविजंस के एकॉर्डिग वह सीधे कॉलेज को लिखता है जिसकी कॉपी यूनिवर्सिटी और एचआरडी को भेजी जाती है.

क्यों लिया गया ऐसा डिसीजन

एनसीटीई द्वारा बीएड कॉलेजेज को बंद करने के पीछे शिवशंकर मुंडा द्वारा दायर की गई याचिका पर हाई कोर्ट द्वारा दिया गया आदेश है. शिवशंकर मुंडा ने अपनी याचिका में कहा था कि कई बीएड कॉलेजेज एनसीटीई के नॉ‌र्म्स को फॉलो नहीं करता पर उसे एनसीटीई चला रहा है. इसके बाद हाई कोर्ट के आदेश पर इंस्पेक्शन टीम बनाई गई थी जिसने बीएड कॉलेजेज का इंस्पेक्शन किया था और अपनी रिपोर्ट एनसीटीई को सौंपी थी. उस रिपोर्ट को आधार बनाकर ही एनसीटीई द्वारा डिसीजन लिए गए हैं. जिन कॉलेजेज में कमियां पाई गई थीं उन्हें एनसीटीई द्वारा फ् से म् महीने का समय दिया गया था ताकि वे कमियों को दूर कर पाएं, पर ऐसा नहीं होने के बाद इस तरह का डिसीजन लिया गया.

 

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