Showing posts with label Kedarnath Temple. Show all posts
Showing posts with label Kedarnath Temple. Show all posts

Tuesday, January 13, 2015

And better Kedarnath

केदारनाथ में देवदर्शिनी स्थल के पुराने स्वरूप में लौटाने की सरकार की कवायद सुकून देने वाली सूचना है। बशर्ते सरकार की ओर से किया जा रहा यह दावा धरातल पर उतरे। 

केदारनाथ में आई आपदा के तकरीबन डेढ़ वर्ष बाद पुनर्निर्माण कार्यो की रफ्तार देखते हुए यह सवाल उठना लाजिमी भी है। सरकार की ओर से गत वर्ष केदारनाथ यात्रा को सुचारू तो किया गया लेकिन केदारनाथ धाम के हालात बहुत अच्छे नहीं थे। पूरे क्षेत्र में फैला सन्नाटा हकीकत को बयां करने के लिए काफी था। जिन लोगों ने इस दौरान केदारनाथ की यात्रा की उन्हें यहां आकर सुकून तो मिला लेकिन कहीं न कहीं यहां के हालात उनके मन को कचोटते भी रहे। यही कारण भी रहा कि केदारनाथ आने वाले यात्रियों की संख्या बहुत सीमित रही। बावजूद इसके इस यात्रा का होना ही एक सकारात्मक कदम के रूप में देखा गया। इससे उम्मीद जगी कि यदि सरकार सही मायनों में यात्रा के प्रति गंभीर है तो इससे केदारनाथ पुनर्निर्माण के कार्यो को गति मिलेगी। 

Tuesday, January 6, 2015

Chardham way way easier than ever

केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने उत्तराखंड के चारधामों को जोडऩे के लिए नए राष्ट्रीय राजमार्ग बनाने की घोषणा की। इसके लिए उन्होंने 13 हजार करोड़ रुपये स्वीकृत करने की बात करते हुए कहा कि इस नए राष्ट्रीय राजमार्ग पर इसी वर्ष मई-जून में काम शुरू हो जाएगा। केंद्र की भाजपा सरकार की ओर से उत्तराखंड के लिए यह बड़ा तोहफा है। 

सोमवार को पतांजलि योगपीठ के वार्षिकोत्सव कार्यक्रम में पहुंचे केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने बाबा रामदेव के मंच से कहा कि उत्तराखंड में सड़कों की हालत ठीक नहीं है। खासकर उत्तराखंड के बदरीनाथ, केदारनाथ, गंगोत्री, यमुनोत्री को जोडऩे वाले मार्ग यात्रा के समय कई बार बंद हो जाते हैं।

 इसका नुकसान राज्य के व्यवसायियों के साथ यात्रा करने वालों को भी उठाना पड़ता है। इसे देखते हुए उत्तराखंड के चारो धामों को जोडऩे के लिए नए राष्ट्रीय राजमार्ग बनाए जाएंगे। नए राजमार्ग की लंबाई 890 किलोमीटर होगी। इस नए राजमार्ग की लागत करीब 13 हजार करोड़ रुपये होगी। इसके लिए स्वीकृति दी गई है। मई-जून में इस पर काम भी शुरू हो जाएगा। देश की जनता के साथ उत्तराखंड के लोगों को भी इस राजमार्ग का फायदा मिलेगा। 

Monday, December 22, 2014

After three hours of cold in Kedarnath duty security personnel is changed

उत्तराखंड सहित पूरे उत्तर भारत को कड़ाके सर्दी ने अपने चपेट में ले लिया है। घने कोहरे के कारण रविवार की रात से सोमवार सुबह तक वाहनों का परिचालन तथा उड़ाने प्रभावित रहीं वहीं अनेक राज्यों से शीतलहर के कारण लोगों के मरने की खबरें आ रही हैं। उत्तराखंड के केदारनाथ में बर्फ की चादर सी बिछी है।

उत्तराखंड के केदारनाथ में कड़ाके की ठंड के बीच मंदिर की सुरक्षा के लिए तैनात पुलिसकर्मी को विषम हालात के कारण यहां हर तीन घंटे के बाद सुरक्षा कर्मियों की ड्यूटी बदल दी जाती है।

सूर्यदेव बादलों की ओट में छिपे

रहे। उत्तराखंड की चोटियों पर पिघल रही बर्फ और वहां से ठंडक लेकर लौट रही हवाएं प्रदेशभर के लोगों के लिए परेशानियों का सबब बनी हुई हैं। ठंड से सोमवार को हरिद्वार के बहादराबाद में दो और उधमसिंहनगर में एक व्यक्ति की मौत हो गई।

राष्ट्रीय राजधानी में सोमवार को पारे की गिरावट ने विगत पांच साल का रिकार्ड तोड़ दिया। यहां न्यूनतम तापमान 4.2 डिग्र्री सेल्सियस रिकार्ड किया गया। बीती रात तथा सोमवार की सुबह राजधानी घने कोहर की चादर ओढ़े हुए निकली। यह इस मौसम का पहला दिन रहा जब इतनी बड़ी संख्या में उड़ाने प्रभावित हुई हैं। घने कोहरे के कारण राजधानी के इंदिरा गांधी एयरपोर्ट पर सोमवार की

हिमाचल प्रदेश में पश्चिमी हवाएं सक्रिय होने से सोमवार को प्रदेश के अधिक ऊंचाई वाले क्षेत्रों में बर्फबारी का दौर शुरू हो गया। इससे समूचा प्रदेश शीत लहर की चपेट में आ गया। प्रदेश में गर्म जिला माने जाने वाले ऊना का तापमान शिमला से कम रहा। जनजातीय क्षेत्र किन्नौर में सोमवार सुबह को चोटियों, रक्छम, छितकुल, सांगला, कंडा, चाका हाइट व किन्नर कैलाश में ताजा हिमपात हुआ। वहीं जलस्नोत जमने से लोगों को पीने का पानी भी नहीं मिल रहा। कुल्लू जिले में सप्ताहभर पहले हुई बर्फबारी के कारण रोहतांग दर्रा व लाहुल-स्पीति का संपर्क पहले ही कटा हुआ है। राजस्थान के कई शहरों के न्यूनतम तापमान में गिरावट आने से प्रदेश शीतलहर की चपेट में आ गया है।

Wednesday, December 17, 2014

Reconstruction work began again in Kedarnath

मौसम ठीक होने के बाद केदारनाथ में पुनर्निर्माण से संबंधित कार्य फिर शुरू हो गया है। हालांकि बर्फबारी से कार्य में रुकावट पैदा जरूर हुई है।

इधर, देश का सबसे बड़ा मालवाहक हेलीकॉप्टर एमआई-26 केदारनाथ एक बार फिर उड़ान नहीं भर सका है। प्रशासन का दावा था कि 15 दिसंबर तक इस हेलीकॉप्टर से भारी मशीनें केदारनाथ पहुंंचा दी जाएंगी लेकिन बर्फ जमने के कारण

ऐसा संभवन नहीं हो पा रहा। आगामी दिनों में इसका असर पुनर्निर्माण कार्य की रफ्तार पर पड़ सकता है। बुधवार को निम के मजदूर और कर्मचारी केदारनाथ में पूरे जोश के साथ काम में जुटे रहे। सबसे पहले एमआई-26 के लिए बनाए जा रहे हेलीपैड से बर्फ हटाने का काम शुरू किया गया, सभी कर्मचारियों व मजदूरों ने अपने घरों के रास्तों व आंगन से भी बर्फ हटाई। मजदूरों की सुविधा के लिए एक छोटे हेलीकॉप्टर से मिट्टी तेल केदारनाथ पहुंचाया गया।

इस बीच, केदारनाथ में बर्फ काटने वाली मशीन व पुनर्निर्माण कार्यों में काम करने के लिए भारी मशीनें एमआई-26 से 15 दिसंबर तक पहुंचाई जानी थी। लेकिन ऐसा संभव नहीं हो सका। बर्फबारी के बाद हेलीपैड से बर्फ हटाने के साथ ही अधूरा काम किया जाना बाकी है। ऐसे में हाल फिलहाल इस मालवाहक हेलीकॉप्टर की उड़ान संभव नहीं दिख रही है, जिसका असर सीधे पुनर्निर्माण कार्यों पर पड़ेगा। यदि आगे भी बर्फबारी जारी रही तो एमआई-26 की उड़ान में और देरी हो सकती है।

बर्फबारी के बाद एक बार फिर से केदारनाथ में पुनर्निर्माण कार्य शुरू हो गए हैं। हेलीपैड से बर्फ हटाई जा रही है। हेलीकॉप्टर से मिट्टी का तेल मंगवाया गया है। 

Tuesday, December 16, 2014

The challenge of reconstruction works in Kedarnath weather

उम्मीद से पहले ही केदारनाथ में भारी बर्फबारी ने पुनर्निर्माण कार्यों की रफ्तार पर असर डाला है। जबरदस्त हिमपात से पुनर्निर्माण कार्यों की जिम्मेदारी संभाल रहे नेहरू पर्वतारोहण संस्थान (निम) की टीम की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। बिजली लाइन में खराबी आने से रविवार रात से केदारनाथ में विद्युत आपूर्ति ठप है। निम के प्रधानाचार्य कर्नल अजय कोठियाल ने भी स्वीकार किया कि कड़ाके की ठंड में कार्य की रफ्तार पर असर पड़ा है।

हालांकि उन्होंने उम्मीद जताई इसके बावजूद काम समय पर पूरे हो जाएंगे। दरअसल, इन दिनों केदारनाथ में दिन का तापमान शून्य से पांच डिग्री, जबकि रात को पारा शून्य से दस डिग्री नीचे आ रहा है। ऐसे में निर्माण कार्यों में जुटी टीम को दिक्कतें आ रही हैं। अप्रैल तक टीम को रोपवे, प्री फैब्रिकेटेड हट के साथ ही मंदिर के पीछे सुरक्षा दीवार का निर्माण किया जाना है। इसके अलावा जर्जर भवनों को गिराने का काम भी इसी दौरान किया जाना है।

बिजली आपूर्ति को लेकर ऊर्जा निगम के अधिशाासी अभियंता वीरेन्द्र पंवार ने बताया कि लाइन पर फाल्ट को खोजा जा रहा है। उन्होंने बताया कि बर्फबारी के कारण काम में दिक्कतें आ रही हैं। 

Monday, December 8, 2014

Stock of reconstruction work in Kedarnath

उत्तराखंड सरकार के महालेखाकार ऑडिट सौरभ नारायण, आपदा प्रबंधन के सचिव भाष्करानंद व जिलाधिकारी डॉ राघव लंगर ने केदारनाथ में पुनर्निर्माण से जुड़े कार्यो का निरीक्षण किया। हेलीकाप्टर से यह टीम केदारनाथ पहुंची। यहां चल रहे पुनर्निर्माण कार्यो का निरीक्षण किया।

हेलीपैड निर्माण, प्रीफेब्रिकेट हट निर्माण, सुरक्षा दीवार समेत व एमआई-26 के लिए बनाए जा रहे हेलीपैड का भी निरीक्षण किया। इस मौके पर निम के प्रधानाचार्य कर्नल अजय कोठियाल ने केदारनाथ में चल रहे सभी निर्माण कार्यो की जानकारी टीम के सदस्यों को दी। केदारनाथ में मंदिर के पीछे सुरक्षा दीवार, मंदाकिनी व सरस्वती नदी के कटाव को रोकने के लिए बनाई जा रही सुरक्षा दीवार, प्रीफेब्रिकेट हटों का निर्माण के बारे में बताया। केदारनाथ में शून्य डिग्री से भी नीचे के तापमान में सभी निर्माण कार्य निम कर रहा है। यहां पर तीन सौ से अधिक मजदूर कार्य कर रहे हैं। आगामी 10 से 15 दिसंबर के बीच एमआई-26 की लैंडिग केदारनाथ में होनी है, इसको लेकर भी प्रदेश सरकार संजीदा है। इस हेलीकाप्टर से भारी मशीनें व सामान भेजा जाना है। इससे उम्मीद जताई जा रही है कि केदारनाथ में पुनर्निर्माण कार्य को गति मिल सकेगी।

Source: Horoscope 2015

Saturday, December 6, 2014

Glimpse of nature in the region.

धार्मिक और नैसर्गिक पर्यटन की अपार संभावनाएं समेटे अछरीखाल पर्यटन मंत्रालय की उपेक्षा का दंश झेलने को विवश है। विकास के प्रस्ताव विभागीय फाइलों में दम तोड़ चुके हैं। ऐसे में ग्रामीणों के अच्छे दिनों की उम्मीद भी दम तोड़ रही है। मुख्यालय से आठ किलोमीटर दूर पौड़ी-देवप्रयाग मार्ग पर समुद्रतल से करीब 1800 मीटर की ऊंचाई पर स्थित पर्यटन स्थल अछरीखाल की नैसर्गिक सुरम्यता देखते ही बनती है।

बांज बुरांस के घने जंगलों में पक्षियों का कलरव। कुदरत के आंचल में होने का अहसास कराती देवदार के पेड़ों से आती भीनी-भीनी महक। मीलों दूर तक फैले कुदरत के नजारे और किसी बड़े हाइवे की तरह दिखता अलकनंदा नदी का प्रवाह। सामने पर्वतराज का विहंगम नजारा। और इस सब के बीच शीर्ष पर विराज कर आर्शीवाद देती मां वैष्णोदवी। कुछ इस तरह से अलौकिक है अछरीखाल का सौंदर्य। लेकिन इस सौंदर्य को संवारने में सरकारी मशीनरी की तंगदिली उपहास उड़ाती प्रतीत होती है। स्थानीय लोगों ने किसी तरह मंदिर जाने वाले मार्ग, मां वैष्णो के दर्शन को जाने वाली सुरंग की मरम्मत कराई लेकिन पर्यटन या अन्य विभागों ने सुविधाएं जुटाने में कोई दिलचस्पी नहीं ली। ऐसे में ग्रामीण भी मायूस हैं।