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Tuesday, January 13, 2015

And better Kedarnath

केदारनाथ में देवदर्शिनी स्थल के पुराने स्वरूप में लौटाने की सरकार की कवायद सुकून देने वाली सूचना है। बशर्ते सरकार की ओर से किया जा रहा यह दावा धरातल पर उतरे। 

केदारनाथ में आई आपदा के तकरीबन डेढ़ वर्ष बाद पुनर्निर्माण कार्यो की रफ्तार देखते हुए यह सवाल उठना लाजिमी भी है। सरकार की ओर से गत वर्ष केदारनाथ यात्रा को सुचारू तो किया गया लेकिन केदारनाथ धाम के हालात बहुत अच्छे नहीं थे। पूरे क्षेत्र में फैला सन्नाटा हकीकत को बयां करने के लिए काफी था। जिन लोगों ने इस दौरान केदारनाथ की यात्रा की उन्हें यहां आकर सुकून तो मिला लेकिन कहीं न कहीं यहां के हालात उनके मन को कचोटते भी रहे। यही कारण भी रहा कि केदारनाथ आने वाले यात्रियों की संख्या बहुत सीमित रही। बावजूद इसके इस यात्रा का होना ही एक सकारात्मक कदम के रूप में देखा गया। इससे उम्मीद जगी कि यदि सरकार सही मायनों में यात्रा के प्रति गंभीर है तो इससे केदारनाथ पुनर्निर्माण के कार्यो को गति मिलेगी। 

Thursday, December 18, 2014

NO ice sheet covered Kedarnath Dham

उत्तराखंड में पिछले दिनों हुई बर्फबारी से लोगों का जीना मुहाल हो गया है। बर्फबारी के कारण केदारनाथ धाम लकदक हो गया है। बर्फ ने सड़को और भवनों को अपने आगोश में ले लिया है। बर्फबारी के बाद पूरा केदारनाथ धाम पर बर्फ की चादर सी ढक गई है।

बर्फ ने सड़को और भवनों को अपने आगोश में ले लिया है। बर्फबारी के बीच केदारनाथ में आवश्यक सामग्री हेलीकाप्टर से भेजा जा रहा है। केदारनाथ में बर्फ हटाने के कार्यों में जुटे हुए हैं नेहरू पर्वतारोहण संस्थान (निम) के मजदूर और कर्मचारी। यहां तक कि केदारनाथ में पुनर्निर्माण कार्यो में जुटे कर्मचारियों के लिए बनाये गए आवासों पर भी बर्फ जम गए हैं। केदारनाथ में बर्फ काटने वाली मशीन व पुनर्निर्माण कार्यों में काम करने के लिए भारी मशीनें एमआई-26 से 15 दिसंबर तक पहुंचाई जानी थी। लेकिन ऐसा संभव नहीं हो सका है।

मौसम खुलने के साथ ही सर्द बयार के बीच गुनगुनी धूप भले ही सुहा रही हो, लेकिन सोमवार तक हुई बर्फबारी के चलते पर्वतीय इलाकों में उत्पन्न दुश्वारियां अभी भी दूर नहीं हो पाई हैं। एक तो कड़ाके की ठंड और उस पर बर्फबारी से दर्जनों मीटर मार्ग बंद। ऐसे में पहाड़ के तमाम इलाकों में जीवन की गाड़ी पटरी पर नहीं लौट पाई है। उधर, मौसम विभाग के मुताबिक उत्तराखंड में गुरुवार को मौसम शुष्क रहेगा, लेकिन न्यूनतम तापमान में गिरावट का क्रम जारी रहेगा।

शनिवार से लेकर सोमवार तक पूरे राज्य में मेघों का डेरा रहा और इस दरमियान चोटियां बर्फ से लकदक हो गईं। वहीं, सूबे के सभी इलाकों में ठीक-ठाक बारिश हुई। परिणामस्वरूप राज्यभर में ठिठुरन खासी बढ़ गई है। हालांकि, मंगलवार और फिर बुधवार को राज्यभर में मौसम साफ रहने से लोगों ने राहत की सांस ली, लेकिन कड़ाके की ठंड झेल रहे पर्वतीय इलाकों में दुश्वारियां अभी कम नहीं हुई हैं। बर्फबारी के कारण मोटर मार्ग बंद रहने से आवाजाही तो बाधित हुई है, कई इलाकों में बिजली गुल है। यही नहीं, कुछ क्षेत्रों में खाद्यान्न का संकट भी गहराने लगा है।

आपदा प्रबंधन टीमों को तैयार रहने के निर्देश-

मुख्यमंत्री हरीश रावत ने प्रदेश के पर्वतीय क्षेत्रों में भारी बर्फबारी को देखते हुए सभी जिलाधिकारियों को सर्दी से बचाव के लिए जगह-जगह अलाव की व्यवस्था करने के निर्देश दिए हैं। साथ ही उन्होंने कहा कि पर्वतीय क्षेत्रों में बर्फबारी के कारण बाधित होने वाले सड़क मार्ग को तत्काल खुलवाने के लिए सभी व्यवस्थाएं सुनिश्चित की जाएं। मुख्यमंत्री ने जिलाधिकारियों को निर्देशित किया कि जिलास्तर पर राहत-बचाव एवं आपदा प्रबंधन की टीम को तैयार रखा जाए, ताकि किसी भी प्रकार की स्थिति से निपटा जा सके। मुख्यमंत्री ने मुख्य सचिव एन रविशंकर को जिला उत्तरकाशी तथा अपर मुख्य सचिव राकेश शर्मा को अल्मोड़ा व पिथौरागढ़ क्षेत्र में स्थिति का जायजा लेने के लिए भेजा है। सभी जिलाधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि अपने-अपने जिले में घटित होने वाली किसी भी प्रकार की घटना की जानकारी तत्काल मुख्यमंत्री कार्यालय को भेजी जाए। भारी बर्फबारी के कारण किसी को कोई भी असुविधा नहीं होनी चाहिए। 

Saturday, December 6, 2014

Glimpse of nature in the region.

धार्मिक और नैसर्गिक पर्यटन की अपार संभावनाएं समेटे अछरीखाल पर्यटन मंत्रालय की उपेक्षा का दंश झेलने को विवश है। विकास के प्रस्ताव विभागीय फाइलों में दम तोड़ चुके हैं। ऐसे में ग्रामीणों के अच्छे दिनों की उम्मीद भी दम तोड़ रही है। मुख्यालय से आठ किलोमीटर दूर पौड़ी-देवप्रयाग मार्ग पर समुद्रतल से करीब 1800 मीटर की ऊंचाई पर स्थित पर्यटन स्थल अछरीखाल की नैसर्गिक सुरम्यता देखते ही बनती है।

बांज बुरांस के घने जंगलों में पक्षियों का कलरव। कुदरत के आंचल में होने का अहसास कराती देवदार के पेड़ों से आती भीनी-भीनी महक। मीलों दूर तक फैले कुदरत के नजारे और किसी बड़े हाइवे की तरह दिखता अलकनंदा नदी का प्रवाह। सामने पर्वतराज का विहंगम नजारा। और इस सब के बीच शीर्ष पर विराज कर आर्शीवाद देती मां वैष्णोदवी। कुछ इस तरह से अलौकिक है अछरीखाल का सौंदर्य। लेकिन इस सौंदर्य को संवारने में सरकारी मशीनरी की तंगदिली उपहास उड़ाती प्रतीत होती है। स्थानीय लोगों ने किसी तरह मंदिर जाने वाले मार्ग, मां वैष्णो के दर्शन को जाने वाली सुरंग की मरम्मत कराई लेकिन पर्यटन या अन्य विभागों ने सुविधाएं जुटाने में कोई दिलचस्पी नहीं ली। ऐसे में ग्रामीण भी मायूस हैं।