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Thursday, December 25, 2014

You know, Christmas is the celebration of the triumph of the sun

भले ही क्रिसमस भारत का मूल त्योहार नहीं है, फिर भी यह त्योहार भारतीय संस्कृति के साथ पूरी तरह घुल मिल गया। हमेशा से ही यह पर्व यहां के लोगों में खुशियों के साथ सांप्रदायिक सौहार्द की मिसाल कायम करता रहा है।

दरअसल 16 दिसंबर के बाद दिन बड़े होने लगते हैं और 25 दिसंबर को रात-दिन बराबर। इसीलिए प्राचीन रोम में 25 दिसंबर को 'सूरज की विजयÓ का दिन मनाया जाता था। इसके चलते कुछ समय बाद इस पर्व को 'स्टेट रिलीजनÓ घोषित कर 'क्राइस्ट द सनÓ का रूप प्रदान कर दिया गया। तभी से क्रिसमस को प्रभु यीशु के जन्मदिन के रूप में मनाया जाता है।

बाइबल के मुताबिक ईश्वर ने अपने भक्त याशायाह के माध्यम से 800 ईसा पूर्व ही भविष्यवाणी कर दी थी कि दुनिया में एक राजकुमार किसी पवित्र कुमारी की कोख से जन्म लेगा। उसका नाम इमेनुएल (ईश्वर हमारे साथ) रखा जाएगा। ऐसा ही हुआ भी। यीशु के जन्म की सबसे पहली खबर संसार के उन सबसे निर्धन, गरीब और भोले-भाले लोगों को मिली, जो दिनभर की कड़ी मेहनत एवं परिश्रम से अपनी भेड़ों को चराने के बाद सर्दियों की रात में खुले आसमान के नीचे उनकी रखवाली कर रहे थे। यीशु एक गरीब की गोशाला में घास पर जन्मे। 

Lord come, come with freedom come to the Lord, come along to discharge

प्रेम और करुणा का संदेश देने को प्रभु यीशु का जन्म हो रहा था। चर्चो में भक्त मेरा प्रभु जन्मा, प्यारा प्रभु जन्मा, आया है प्रभु, मुक्ति ले साथ आया है भजनों से वातावरण में भक्ति का रस घोल रहे थे। रात्रि 12 बजे ही चर्चो में घंटे बजने लगे। ईसाई प्रभु के जन्म की खुशी में सराबोर हो गए। एक-दूसरे को केक खिलाकर प्रभु के जन्म की बधाई देने लगे। गुरुवार को क्रिसमस पर सुबह प्रार्थनाएं हुई। सेंट्रल मैथोडिस्ट चर्च, बाढ़पुरा के निकट रात्रि दस बजे से ही लोग एकत्रित होने लगे। रात्रि 11 बजे भजन-कीर्तन शुरू हुए। रात्रि 12 बजे जैसे ही घड़ी की तीनों सुई एक हुईं तो चर्च में घंटे बजने लगे। जिंगल बैल भी बज उठी। प्रार्थना शुरू हो गई। लोग एक-दूसरे को केक खिलाकर बधाई देने लगे और यह दौर देर रात्रि तक चलता रहा। गुरुवार को भी चर्च और घर खुशियों में सराबोर रहे।

वृंदावन में गुरुवार रात्रि करीब 11 बजे क्रिश्चियन परिवार सीएफसी चौराहा के समीप स्थित चर्च के बाहर एकत्रित हुए। कैंप फायर और कैरोल सिंगिंग हुई। ठीक बारह बजे ईसा मसीह अवतरित हुए और घंटा-घडिय़ाल बजने लगे। पादरी अरून मोजिज ने प्रवचन किए। गुरुवार को प्रात: दस बजे चर्च में प्रार्थना सभा होगी। कदीर ने बांटीं खुशियां-जब पूरा देश धर्मातरण की आग में जल रहा है। ऐसे में क्रिसमस पर भार्गव गली निवासी कदीर खान ने एक मिसाल पेश की। वह प्रभु के जन्म की खुशी में दान-पुण्य का हिस्सा बने। कदीर खान ने बताया कि पिछले वर्ष वह इस कार्यक्रम में आए तो देखा लोग नि:स्वार्थ दान कर रहे हैं। वे भी इसमें शामिल हो गए। द बाइबिल फाउंडेशन के रीजनल डायरेक्टर प्रभु दयाल बताते हैं कि प्रभु की कृपा से ही सभी कार्य पूर्ण होते हैं। 

Lord came, brought the message of love

बुधवार को जैसे ही रात के बारह बजे। शहर के सभी गिरजाघरों में घंटा(वेल) बजने लगे। लोग एक दूसरे को यीशु के जन्मदिन की बधाई देने लगे। कोई 'हैप्पी क्रिसमसÓ तो कोई 'मैरी क्रिसमसÓ कहते हुए दिखा। नगर के सभी चर्चो में प्रभु की याद में ईश वंदना, कैरले सांग्स के साथ साथ उपहार भी बांटे गए।

पत्थर गिरजाघर, सेंट जोसेफ चर्च, मेथोडिस्ट चर्च, सेंट पॉल चर्च,म्योराबाद स्थित सेंट पीटर्स चर्च, चौक स्थित 'चौक चर्चÓ की तो बात ही अलग नजर आ रही थी। रंग-बिरंगे झालर,दर्शनीय डेकोरेशन और नवीन परिधानों में प्रभु की पूजा में लीन लोगों का उत्साह देखते ही बन रहा था। सुर्ख लाल जोड़े में सेंटा क्लाज तो हमेशा की भांति बच्चों के आकर्षण का केंद्र बने हुए थे। इनके द्वारा देय उपहार बच्चों के साथ -साथ बड़ों को भी लुभा रहे थे।

आशा का संदेश लेकर आता है यीशु का जन्म: फादर डिसूजा

नाजरेथ अस्पताल, सिविल लाइंस के निदेशक फादर रेजिनाल्ड डिसूजा ने बताया कि आज का दिन समाज के लिए नया सवेरा लेकर आया था। प्रभु यीशु के जन्म से संसार में खुशियां ही खुशियां छा गई थी। फादर डिसूजा ने कहा कि प्रभु इस धरा पर गरीब बनकर आए। उन्होंने गरीबों को अपनाकर उनकी भरपूर सेवा की तथा अनेक तकलीफों से उन्हें निजात भी दिलाई। इस अवसर पर कैथोलिक डायोसिस के साधना सदन के फादर लियो सिक्वेरा ने कहा कि क्रिसमस मानव जाति के प्रति ईश्वर के असीम प्रेम की जीवंत घटना है। प्रभु ने अपने जीवन, वचन, आचरण व कार्य से उच्च मानदंड स्थापित किए थे। वे सदैव ही हमारे साथ रहते हैं। उन्होंने कहा था, ' मैं सदा तुम्हारे साथ हूं, हां संसार के नश्वर होने तक।Ó

प्रेम व शांति से ही खुलता है समृद्धि का द्वार-

'विकास व समृद्धि के लिए आपसी प्रेम व सद्भावना अपरिहार्य है। शांति से ही विकास का रास्ता प्रशस्त होता है। प्रभु यीशु ने जीवन के अंतिम समय तक केवल और केवल परस्पर प्रेम का पाठ पढ़ाया। क्रिसमस के शुभ अवसर पर हमें उनके द्वारा बताए गए राह पर चलने का संकल्प लेना चाहिए।Ó क्रिसमस के पावन दिवस पर यह उद्गार कैथोलिक डायोसिस इलाहाबाद के बिशप राफी मंजिल का है। उन्होंने कहा कि प्रभु यीशु ही दैविक अनुकम्पा के सर्वोच्च रूप हैं। इन्होंने गरीबों, पीडि़तों, शोषितों और अन्याय सहने वालों की पीड़ा को महसूस किया। ऊंच-नीच, जाति भेद व लिंग भेद से उत्पन्न सभी प्रकार के अत्याचारों के खिलाफ ईशा ने हमेशा ही आवाज उठाई। आज के दिन हमें उनके नेक विचारों को आत्मसात करने का बीड़ा उठाना चाहिए।

Tuesday, December 23, 2014

Christmas dying Christian society

ईसाई समाज क्रिसमस की खुमारी में डूबा है। घर-घर में जश्न का माहौल है। घर जगमग कर रहे हैं। चर्च से लेकर घरों तक केवल क्रिसमस की तैयारियां चल रही हैं। घर-घर कैरोल सिंगिंग हो रही है।

प्रभु यीशु के जन्म की खुशी में मनाए जाने वाला पर्व ईसाई समाज का प्रमुख त्योहार है। इस त्योहार के लिए लोग दिल खोलकर खरीदारी कर रहे हैं। बच्चे, बुजुर्ग और जवान सभी नये-नये कपड़े खरीद रहे हैं। बच्चे सेंटा क्लोज की डेस में दिखाई रहे हैं। क्रिसमस सेलीब्रेशन के लिए केक के ऑर्डर दिए जा चुके हैं। चर्चो को आकर्षक सजाया जा रहा है। 24 दिसंबर की रात्रि में रंग-बिरंगी रोशनी से जगमग करते चर्च ऐसे लगेंगे कि तारे जमीन पर उतर आए हैं। द बाइबिल फाउंडेशन के रीजनल डायरेक्टर प्रभु दयाल बताते हैं कि इस पर्व को मनाने में कोई कमी नहीं छोड़ी जाती है।

क्रिश्चियन दिल खोलकर खरीदारी करते हैं और इसे सेलीब्रेट करते हैं। रोशनी पड़ते ही जल उठती है कैंडल- क्रिसमस के लिए बाजार में एक से बढ़कर एक शानदार गिफ्ट उपलब्ध हैं। एक नजर पड़ते ही लोग इन्हें खरीदने को मजबूर हो जाते हैं। जरा सी रोशनी पड़ते ही कैंडल जगमग करने लगती है। यह आकर्षक कैंडल भी मुंबई से आयी हैं। इनकी डिजायन देख हर कोई आकर्षित होता है। इसके अलावा सेंटा क्लोज, क्रिसमस फादर, कार्ड, कप आदि गिफ्ट लोगों की पंसद बने हैं।

We made all the Christmas festival

ईसाईयों का पर्व क्रिसमस अब भारत में जनसामान्य का त्योहार बन चुका है। भारत में सभी वर्गो के लोग इसे उतनी ही सौहार्दपूर्ण तरीके से मनाते हैं, जितना होली व दिवाली। यही कारण है कि हर वर्ग में क्रिसमस को लेकर खासा क्रेज है।

विभिन्न स्कूलों में क्रिसमस के आगमन की खुशी में कई तरह के कार्यक्रम आयोजित हो रहे हैं। इनमें छात्र-छात्रओं का उत्साह देखते ही बन रहा है। विभिन्न संगठन भी क्रिसमस मिलन समारोह का आयोजन कर सद्भावना को बढ़ा रहे हैं। हर दिन महोत्सव, हर दिन त्योहार मनाने वाली भारतीय सभ्यता में आज क्रिसमस पर्व पूरी तरह घुल-मिल गया है। ईसाई समुदाय के साथ सभी वर्गो के लोग इस त्योहार का बड़ी शिद्दत से इंतजार करते हैं। 25 दिसंबर का क्रिसमस के अलावा एक और महत्व है। भारत में 25 दिसंबर क्रिसमस के साथ-साथ बड़े दिन के रूप में भी मनाया जाता है। इस तारीख से दिन बढऩे लगता है और रात सिमटने। क्रिसमस के उल्लास में द्रोणनगरी में सांप्रदायिक सद्भाव की तस्वीरें उभरने लगी हैं। वर्तमान में स्कूलों में आयोजित हो रहे क्रिसमस कार्यक्रमों में बच्चों में खासा उत्साह है। कोई सांता क्लॉज बन रहा है तो कोई प्रभु यीशू बनकर प्रेम और भाईचारे का संदेश दे रहा है। मित्रों और परिवार के लोगों को क्रिसमस की बधाई और गिफ्ट देने का सिलसिला तो कई दिनों से चल रहा है। 

Monday, December 22, 2014

Glee Christmas festival

परमात्मा के पुत्र प्रभु यीशु के जन्मदिन यानी क्रिसमस की तैयारियां शुरू हो गई हैं। चर्चो को भव्य तरीके सजाया-संवारा जा रहा है। कैरल का संगीत वातावरण में गूंजने लगा है और त्योहार की खुशियां बांटने घर-घर दस्तक देने का सिलसिला चल पड़ा है।

क्रिसमस है ही प्रेम और खुशियां बांटने का त्योहार, जिसका उत्साह लोगों के चेहरों पर साफ झलक रहा है। सेंट जॉन्स चर्च, सेंट फ्रांसिस चर्च, मॉरीसन मेमोरियल चर्च, सेंट थॉमस चर्च आदि में सजावट शुरू हो गई है। लाइटिंग के साथ फूलों की खुशबू से भी चर्च महकेंगे।

क्रिसमस को लेकर एक पौराणिक कथा है। कहते हंै कि परमात्मा ने मैरी नामक लड़की के पास गैब्रियल नामक दूत भेजा। गैब्रियल ने कहा कि वह प्रभु के पुत्र को जन्म देगी। इसके बाद प्रभु यीशु का जन्म हुआ। सेंट जॉन्स चर्च के पादरी जेपी सिंह बताते हैं कि क्रिसमस के दौरान प्रभु की प्रशंसा में लोग कैरल गाते हैं और घर-घर जाकर प्यार, भाईचारे और सेवा का संदेश देते हैं। लोग प्रभु यीशु के जन्म की खुशी में घरों को क्रिसमस ट्री से सजाते हैं।

परमात्मा ने जनकल्याण के लिए अपने इकलौते पुत्र प्रभु यीशु को हमारे बीच भेजा था। वह दया, प्रेम, क्षमा और धैर्य के अवतार थे। उनका यही संदेश था कि मनुष्य एक-दूसरे से ऐसे ही प्रेम करे, जैसे परमात्मा ने किया है। परमेश्वर एक है और वह कभी भेदभाव नहीं करता।

मॉरीसन मेमोरियल चर्च के पादरी पीजे सिंह बताते हैं कि इन दिनों कैरल के संगीत से वातावरण आलोकित है। 24 दिसंबर की रात प्रभु के आगमन को प्रार्थना होगी और 25 दिसंबर यानी क्रिसमस के दिन प्रभु का संदेश दिया जाएगा।