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Thursday, February 20, 2014

SC Orders Stay On The Release Of Rajiv Gandhi Murder Convicts

समाचार एजेंसी पीटीआई के अनुसार सर्वोच्च अदालत ने कहा है कि तमिलनाडु सरकार ने इस मामले में जो प्रक्रिया अपनाई थी उसमें कई गड़बड़ियां हैं.

सुप्रीम कोर्ट ने तमिलनाडु सरकार को नोटिस जारी किया है और इस मामले में अगली सुनवाई छह मार्च को होगी.

तमिलनाडु सरकार के वकील राकेश द्विवेदी ने कहा है कि सुप्रीम कोर्ट ने केवल उन तीन लोगों की रिहाई पर रोक लगाई है जिनकी फांसी की सज़ा को सुप्रीम कोर्ट ने उम्रक़ैद में तब्दील कर दिया था.

बाक़ी चार अभियुक्तों के बारे में राकेश द्विवेदी ने कहा कि राज्य सरकार उनके बारे में फ़ैसला लेने के लिए स्वतंत्र है.

केंद्र सरकार के वकील अशोक भान ने कहा कि उन्हें उम्मीद है कि तमिलनाडु सरकार सभी सात लोगों को रिहा नहीं करेगी जब तक इस बारे में सुप्रीम कोर्ट कोई अंतिम फ़ैसला नहीं करता है.

इस तरह की सिफ़ारिश करने वाले तमिलनाडु सरकार के फ़ैसले को चुनौती देते हुए केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाज़ा खटखटाया था.

गुरूवार सुबह केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट से तमिलनाडु सरकार के फ़ैसले पर रोक लगाने के संबंध में अर्ज़ी दाख़िल की. सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र की अर्ज़ी स्वीकार करते हुए उस पर फ़ौरन सुनवाई करने का फ़ैसला किया था.

ट्वीट

प्रमुख विपक्षी दल भारतीय जनता पार्टी ने भी तमिलनाडु सरकार के फ़ैसले की निंदा की है. पार्टी प्रवक्ता प्रकाश जावड़ेकर और पार्टी के एक पूर्व अध्यक्ष वेंकैया नायडू ने कहा है कि राजीव गांधी की हत्या में शामिल लोगों के साथ किसी तरह की सहानुभूति नहीं दिखाई जानी चाहिए.

प्रधानमंत्री ने कहा है कि राजीव गांधी की हत्या मामले में उठे कुछ बुनियादी क़ानूनी पहलुओं पर विचार करने के लिए केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में पुनर्विचार याचिका दायर किया है.

प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने  तमिलनाडु सरकार के फ़ैसले की भी आलोचना की है.

प्रधानमंत्री ने ट्वीट किया है कि राजीव गांधी के क़ातिलों की रिहाई के लिए तमिलनाडु सरकार की कार्रवाई क़ानूनी तौर पर वैध नहीं है और इस पर अमल नहीं किया जाना चाहिए.

मनमोहन ने ये भी कहा कि राजीव गांधी की हत्या भारत की आत्मा पर हमला था.

प्रधानमंत्री ने कहा, ''भारत के पूर्व प्रधानमंत्री और हमारे महान नेता और दूसरे बेगुनाह भारतीय के क़ातिलों की रिहाई, न्याय के सभी सिद्धांतों के प्रतिकूल होंगे.''

केंद्रीय क़ानून मंत्री  कपिल सिब्बल ने भी तमिलनाडु सरकार के फ़ैसले की कड़ी आलोचना की है. गुरूवार सुबह संसद के बाहर पत्रकारों से बातचीत करते हुए सिब्बल ने प्रमुख विपक्षी दल भारतीय जनता पार्टी का नाम लिए बग़ैर उस पर भी निशाना साधा.

सिब्बल ने कहा कि दुख की बात है कि कुछ ऐसे राजनीतिक दल हैं जिनकी इस मामले में चुप्पी रही है.

सिब्बल ने गुजरात में हुए फ़र्ज़ी मुठभेड़ की तरफ़ इशारा करते हुए कहा, ''कहीं तो आतंकवाद के नाम पर फ़र्ज़ी मुठभेड़ होते हैं और दूसरी जगह आतंकवादी को रिहा किया जाता है. मैं समझता हूं कि सोच में कुछ खोट ज़रूर है.''

मामला

ग़ौरतलब है कि मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट ने एक अहम फ़ैसले में राजीव गांधी की हत्या के मामले में तीन लोगों को दी गई फांसी की सज़ा को उम्रक़ैद में तब्दील कर दिया था.

सुप्रीम कोर्ट ने सज़ायाफ़्ता लोगों की दया याचिका की सुनवाई में हुई देरी को वजह बताकर सज़ा में राहत देने का  फ़ैसला किया था.

सुप्रीम कोर्ट के फ़ैसले के ठीक एक दिन बाद बुधवार को जयललिता मंत्रिमंडल ने एक आपात बैठक में फ़ैसला किया कि राजीव गांधी की हत्या के जुर्म में जेल में बंद सात क़ैदियों की रिहाई के लिए राज्य सरकार, केंद्र सरकार से सिफ़ारिश करेगी.

तमिलनाडु सरकार ने केंद्र सरकार को केवल तीन दिन का समय दिया है, जिसमें केंद्र सरकार यह फ़ैसला कर ले कि इस मामले में उसे क्या करना है.

तभी से ही राजीव गांधी की हत्या के अभियुक्तों की रिहाई की सिफ़ारिश के तमिलनाडु सरकार के फ़ैसले पर कई  सवाल भी उठने लगे हैं.

Source: Hindi News

Wednesday, February 19, 2014

Tamil Nadu Gov To Release Convicts In Rajiv Gandhi Assassination

इन छह लोगों में संथन, मुरुगन तथा पेरारिवलन भी शामिल हैं जिनकी फांसी की सज़ा को सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को उम्रक़ैद में बदलने का फ़ैसला किया था.

इन तीनों के अलावा रिहाई के आदेश पाने वालों में नलिनी श्रीहरन, रॉबर्ट पायस, जयकुमार, रविचंद्रन शामिल हैं.

नलिनी श्रीहरन, मुरुगन की पत्नी हैं.

तमिलनाडु की मुख्यमंत्री जयललिता ने अपने मंत्रिमंडल के साथ बुधवार की सुबह एक आपात बैठक की, जिसमें सातों अभियुक्तों को रिहाई की सिफ़ारिश करने का फ़ैसला किया गया.

नलिनी के मृत्युदंड को पहले ही कांग्रेस प्रमुख तथा भूतपूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की पत्नी सोनिया गांधी के हस्तक्षेप के बाद उम्रक़ैद में तब्दील किया जा चुका था.

सुप्रीम कोर्ट ने मृत्युदंड को उम्रक़ैद में तब्दील करते समय दोषियों की दया याचिका पर निर्णय लेने में केंद्र सरकार की ओर से हुई 11 साल की देरी का ज़िक्र किया था.

सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र की इस दलील को ख़ारिज कर दिया कि दोषी संथन, मुरुगन और पेरारिवलन की दया याचिकाओं पर फ़ैसले में देरी से उन्हें कोई वेदना नहीं सहनी पड़ी.

Source: Hindi News